30/01/2026
बक्सर ,शास्त्रार्थ और एक चिकित्सक का धर्म
अक्सर सोशल मीडिया पर एक नसीहत दी जाती है "आप डॉक्टर हैं, केवल अपनी ओपीडी और ओटी (OT) तक सीमित रहें। धर्म, राजनीति और समाज पर बोलने का काम आपका नहीं है।"
यह सोच न केवल संकीर्ण है, बल्कि खतरनाक भी है।
बक्सर का स्वभाव: हमलोग उस बक्सर में रहते हैं जिसके कण -कण में राम हैं जो सदियों से 'शास्त्रार्थ' और संवाद की पवित्र भूमि रही है। यहाँ मौन रहना या तटस्थ (Neutral) बने रहना इस भूमि के स्वभाव के विरुद्ध है। यहाँ का कण कण भगवान् राम और महर्षि विश्वामित्र का है और यहाँ हर जागरूक नागरिक को अपनी बात तर्क के साथ रखने का अधिकार है।
चिकित्सक, मैकेनिक नहीं है: एक डॉक्टर केवल शरीर का मैकेनिक नहीं होता। हमारे प्राचीन ऋषि, चरक और सुश्रुत केवल शल्य चिकित्सक नहीं थे, वे दार्शनिक और समाज-चिंतक भी थे। चिकित्सा विज्ञान हमें 'डायग्नोसिस' (निदान) करना सिखाता है, चाहे वह बीमारी शरीर में हो या समाज की व्यवस्था में। समस्या की जड़ तक पहुँचना हमारा प्रशिक्षण है।
बौद्धिक मौन का खतरा: यदि समाज का सबसे शिक्षित और प्रबुद्ध वर्ग 'विवाद से बचने' के लिए चुप रहेगा, तो समाज की दिशा कौन तय करेगा? जब पढ़े-लिखे लोग मूकदर्शक बन जाते हैं, तो कोलाहल करने वाले और भ्रामक तत्व हावी हो जाते हैं। राष्ट्र और संस्कृति पर विमर्श करना केवल राजनेताओं का ठेका नहीं है।
दृष्टि और दृष्टिकोण: एक नेत्र विशेषज्ञ के रूप में, मेरा काम लोगों की 'दृष्टि' को साफ करना है ताकि वे दुनिया को स्पष्ट देख सकें। लेकिन समाज को देखने के लिए एक साफ 'दृष्टिकोण' की भी उतनी ही आवश्यकता है।
मैं आँखों का इलाज करता हूँ, यह मेरी वृत्ति (Profession) है।
मैं राष्ट्र और धर्म पर चिंतन करता हूँ, यह मेरी प्रकृति (Nature) है।
नज़रिया साफ रखिए, दृश्य अपने आप साफ हो जाएगा।
Vishwamitra sri Ram