08/08/2026
परंपरा, हुनर और पर्यावरण संरक्षण की ओर एक कदम
ग्राम – भैसासुर, पंचायत – पदुमा, प्रखंड – मनातू, जिला – पलामू, झारखंड
सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीण महिलाओं के पास पारंपरिक ज्ञान, कौशल और रचनात्मकता की समृद्ध विरासत है। ग्राम भैसासुर में महिलाएँ स्थानीय रूप से उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए अपने हाथों से पत्तल, दोना, कटोरी, थाली एवं अन्य उपयोगी वस्तुएँ तैयार करती हैं। बिना बड़ी मशीनों और आधुनिक उपकरणों के, केवल हाथों के हुनर, अनुभव और सामूहिक प्रयास से तैयार होने वाले ये उत्पाद न केवल स्थानीय परंपरा और कौशल को जीवित रखते हैं, बल्कि महिलाओं के लिए आजीविका और आत्मनिर्भरता के अवसर भी पैदा करते हैं। इसके साथ ही, प्राकृतिक पत्तों से बने ये उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल विकल्प भी प्रस्तुत करते हैं। प्लास्टिक और कुछ अन्य डिस्पोजेबल सामग्री लंबे समय तक आसानी से विघटित नहीं होती, जिससे कचरा बढ़ता है और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत, प्राकृतिक पत्तों से बने पत्तल और दोना उपयोग के बाद अपेक्षाकृत आसानी से जैविक रूप से विघटित हो सकते हैं। इस पहल में PVTG सहित ST, SC और OBC समुदायों की महिलाएँ सक्रिय रूप से भागीदारी कर रही हैं। उनका यह सामूहिक प्रयास पारंपरिक कौशल के संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय आजीविका और पर्यावरण संरक्षण—इन सभी को एक साथ आगे बढ़ा रहा है।
“हाथों का हुनर, प्रकृति का साथ और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम।”
DC Palamu Mahila Samagra Utthan Samiti