05/07/2026
" मोह व शोक से मुक्ति "
इस जीवन रुपी सफर में मोह व शोक से मुक्ति पाना परम आवश्यक है,क्यूंकि मोह व शोक से मुक्त हुए बिना हमारी जीवन रुपी यात्रा का सफर कभी भी सुगम व सन्तोषजनक नहीं हो सकता है। इस सन्दर्भ में मोह व शोक से त्राण केवल आत्मा का ज्ञान होने पर ही हो सकता है। आत्मा का ज्ञान तभी हो सकता है जब हम आत्मा को.............अव्यक्त जानें।
आत्मा को अचिन्त्य माने।
आत्मा को अविकारी जाने।
आत्मा को नित्य व सरवगत जाने।
ऐसा सव कुछ जानने व मानने पर जब साधक मनन कर्ता है,तव उसे आत्म बोध होता है। केवल मात्र ऐसा होने पर ही साधक मोह व शोक से मुक्ति पा सकता है।यह सव सदगुरुदेव के आशीर्वाद से ही मुमंकिन है।
"जय श्री सदगुरुदेव जी की जी"