20/06/2026
श्री मद्भगवत गीता के अनुसार योग---------
YOGA ACCORDING TO SHREE MADBHAGWAT GEETA
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गंत्यक्त्वा धनञ्जय | सिद्धयसिद्धयोः समो भूत्वासमत्वं योग उच्यते ||2.48||
अर्थ : धनञ्जय ! तू आसक्ति का त्याग करके सिद्धि-असिद्धि (लाभ- हानि, शत्रु- मित्र, सर्दी- गर्मी ) में सम होकर योगमें स्थित हुआ कर्मों को कर; क्योंकि समत्व भाव रखना ही योग है।
बुद्धियुक्तो जहातिहा उभे सुकृतदुष्कृते | तस्माद् योगया युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम् ||2.50||
अर्थ : बुद्धि से युक्त मनुष्य यहाँ जीवित अवस्था में ही पुण्य और पाप दोनोंका त्याग कर देता है। अतः तू योग में लग जा, क्योंकि योग ही कर्मोंमें कुशलता है।
तं विद्याद् दुःखसंयोगवियोगं योगसंज्ञितम्।स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा ।।6.23।।
अर्थ : जिसमें दुःखों के संयोग का ही वियोग है, उसी को 'योग' नामसे जानना चाहिये। उस ध्यानयोग का अभ्यास न उकताये हुए चित्तसे निश्चयपूर्वक करना चाहिये।
पतंजलि के अनुसार--- योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः।
अर्थ : चित्तवृत्तियों का निरोध योग है।
विष्णु पुराण के अनुसार योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने
अर्थ : जीवात्मा और परमात्मा का मिलन योग है
योग जीवन जीने का श्रेष्ठ कला है जो व्यवहारिक रूप से शरीर, मन और भावना को संतुलित रखता है और आध्यत्मिक स्तर पर व्यक्तिगत चेतना को सारभौमिक चेतना से जोड़ता है |
आयुर्प्रयोगम प्राकृतिक चिकित्सा & योग का उद्देश्य:
निरोगी मानव को जीवनपर्यंत शारीरिक, बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से ऊर्जावान रखना और रोगी मानव के जीवनी शक्ति को बढ़ाकर निरोगी बनाना |
योग में आसन की स्थिति
शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः। नात्युच्छृतं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तम ।।6.11।।
तत्रैकाग्रं मन: कृत्वा यत्चित्तेन्द्रियक्रिय: | उपविषयासने युञ्ज्यौद्योगमात्मविशुद्धये ।।6.12।।
समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिर: | सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोक्यन् ।।6.13।।
अर्थ : शुद्ध भूमि में कुशा, मृगछाल और कोमल बस्त्र (चटाई) आसन लगाएं जो न तो अति ऊँचा हो और न अति नीचा हो. ।।6.11।।
अर्थ : उस आसन पर स्थिरता से बैठकर और मन को एकाग्र करके चित्त व इन्द्रियों को वश में करके अंतःकरण की शुद्धि के लिए योग का अभ्यास करें ।।6.12।।
अर्थ : योगाभ्यास की विधि इस प्रकार है की शरीर, सर और गर्दन को एक सीध में रखकर अचल और दृढ़ होकर केवल अपनी नासिका के अग्रभाग को देखें ।।6.13।।
योग का मूल सिद्धांत (Basic Principle of Yogasan):
शांत, स्वच्छ, हवादार, हराभरा और सूर्य प्रकाश से युक्त स्थान
योग का सर्वोत्तम समय: प्रातः काल (6 से 8 बजे तक)
योग हमेश खाली पेट करें. विषम परिस्थिति में भोजन करने के 4 घंटे बाद, हल्का नाश्ता लेने के 1 घंटे बाद, रस, छाछ, अर्ध तरल आदि पीने के 30 मिनट बाद और पानी पीने के 10-15 मिनट बाद किया जा सकता है.
पहनावा: ढीला ढाला और हलके रंग का पोशाक
योग के समय मन को एकाग्रचित और शांत रखना चाहिए
योग का चादर या चटाई या आसन समतल भूमि पर बिछाएं
योग अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करें
योग के दौरान सर, गर्दन और कमर को एक सीध में रखना चाहिए ताकि रीढ़ की हड्डी में मुड़ाव न आये
प्रत्येक योगासन/ प्राणायाम से पूर्व फेफड़ों में मौजूद हवा को पूर्णतः निकल देना चाहिए
योग/ प्राणायाम करते समय हमेशा नाक से श्वास लें और छोड़ें
योगासन /प्राणायाम में श्वास छोड़ना (रेचक), श्वास लेना (पूरक) और श्वास रोकने (कुम्भक) का नियमित अभ्यास करना चाहिए
योगाभ्यास में ठहराव का समय धीरे -धीरे बढ़ाना चाहिए अर्थात आसन की स्थिति, गति, समयावधि क्रमशः बढ़ाना चाहिए. योगासन जल्दी करना दिल के लिए उत्तम होता है और धीरे करना मांसपेशियों के लिए उत्तम होता है
प्रत्येक योगासन के बाद शारीरिक विश्राम देने के लिए शवासन जरुर करें. इससे शरीर तरोताजा रहता है. .
जब योगासन के दौरान शरीर को फैलाएं या पीछे की ओर जाए, श्वास लें और जब शरीर को सिकोड़ें या आगे की ओर झुकाएं, श्वास छोड़ते हुए झुकें.
आसनों के क्रम पर विशेष ध्यान दें. एक आसन के बाद उसका पूरक आसन अवश्य करें. प्राणायाम हमेशा योगासन के बाद करना चाहिए
योगाभ्यास का शुभारंभ और समापन शवासन से करें.
योग क्रिया समाप्त करने के बाद 1/2 घंटे का बिस्तर पर विश्राम करना उत्तम माना जाता है.
योग क्रिया के समापन के बाद पेशाब करना लाभदायक है. ऐसा करने से घुटनों में दर्द कभी नहीं होगा और किडनी हमेशा सक्रिय रहेगा
योग समाप्ति के 30 मिनट बाद ही खाएं/ पिएँ वो भी फलों के रस या फल. योग करने के 1 घंटे बाद कुछ ठोस या अर्द्ध ठोस आहार लेना चाहिए
योग करने के 30 मिनट तक स्नान नहीं करना चाहिए
शारीरिक विकार होने पर योगासन हमेशा योगाचार्य के सलाह से काना चाहिए
महिलाओं को मयुरासन या सिद्धासन नहीं करना चाहिए. महिलाएं मासिक धर्म की स्थिति में केवल शवासन करें. महिलाऐं मासिक धर्म खत्म होने के 3 दिन बाद, प्रसवोपरांत 3 महीने बाद व सिजेरियन ऑपरेशन के 6 महीने बाद ही योगासन करें