03/04/2020
*रामायण*
१) हर रात्रि के बाद प्रभात अवश्य आता है। - माँ कौशल्या.
२) भरतजी प्रेम की अपार सीमा हैं तो रामजी धर्म-कर्म की मर्यादा। - महाराजा जनक.
३) कर्तव्य और प्रेम का संतुलन रखकर ही समस्या का मार्ग निकालना होगा। - महाराजा जनक.
४) अच्छी लगना एक बात है और न्यायसंगत होना दूसरी बात है। - माँ कौशल्या.
५) माँ स्वार्थी नहीं होती। वह अपने मोह को रामजी के कर्तव्य की बाधा नहीं बना सकती। - माँ कौशल्या.
६) प्रेम की असली शक्ति उसके निस्वार्थ होने में है। - महाराजा जनक.
७) प्राण देना सरल है किंतु प्रेम के लिए जीना कठिन कार्य है।
८) भावना के आवेश में मनुष्य की बुद्धि काम नहीं करती। - कुमार भरत.
९) पति और पत्नी के अधिकार के लिए कोई आज्ञा की ज़रूरत नहीं होती।- भरतजी माधवीजी को कहते हुए.
१०) धन, सम्पत्ति और साम्राज्य से मन की शांति नहीं मिलती है।- भरतजी.
११) माँ की शिक्षा बच्चों को अच्छा या बुरा बना सकती है।
१२) किसी मंथरा जैसी घर-फोड़ी की चिकनी चुपड़ी बातों में आकर अपने घर की एकता ना तोड़े। - महारानी सुनयना.
१३) पति से बड़ा हितकारी बंधु और कोई नहीं होता।
१४) मित्र व नारी की सही परीक्षा आपातकाल में ही होती है।- गुरुमाता अनुसूया.
१५) मानव जब पूर्ण धर्म-योगी एवं स्वार्थरहित हो जाये तो उसका स्थान देवताओं से भी ऊपर हो जाता है। - रामजी व श्रर्वंग ऋषि वार्तालाप.
१६) जैसे धूप में बैठने से शरीर में गरमी मिलती है वैसे ही संत महात्माओं के पास बैठने मात्र से ज्ञान की प्राप्ति हो जाती है।
१७) अपने कर्म की अच्छाई और बुराई को हर क्षण परखते रहना चाहिए।
१८) अपनी हर भूल को आज ही सुधार लेना चाहिए, कल पर नहीं टालना।
*महाभारत*
१) रोना किसी समस्या का समाधान नहीं होता। - वासुदेवजी.
२) पूतना का उद्धार किये, क़ालिया नाग पर नृत्य किए नटखट नंद लल्ला... बोलो *जय कृष्ण कन्हैयालाल की.*