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 #नवरात्रि_विशेष ( 2023)इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का पावन त्यौहार 22 मार्च, 2023 से 30 मार्च, 2023 तक रहेगा।  ्थापना_मुहूर्...
21/03/2023

#नवरात्रि_विशेष ( 2023)

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का पावन त्यौहार 22 मार्च, 2023 से 30 मार्च, 2023 तक रहेगा।

्थापना_मुहूर्त

घट स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 22 मार्च ( बुधवार ) सुबह 06 बजकर 29 मिनट से 07 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।

घट स्थापना के लिए मिट्टी के बर्तन में सात प्रकार के अनाज रखें। फिर कलश में स्वच्छ जल भरकर उसे मिट्टी के पात्र के ऊपर रख दें। अब कलश के ऊपर पत्ते रखें और लाल वस्त्र में नारियल बांध कर रखें। अब भगवान गणेश व कलश की पूजा कर देवी का आह्वान करें।

*शारदीय नवरात्रि की तिथियां :

पहला दिन 22 मार्च 2023 : मां शैलपुत्री की पूजा

दूसरा दिन 23 मार्च, 2023: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

तीसरा दिन 24 मार्च, 2023: मां चंद्रघंटा की पूजा

चौथा दिन 25 मार्च, 2023 : मां कुष्मांडा की पूजा

पांचवां दिन 26 मार्च 2023 : मां स्कंदमाता की पूजा

छठवां दिन 27 मार्च, 2023 : मां कात्यायनी की पूजा

सातवां दिन 28 मार्च : मां कालरात्रि की पूजा

आठवां दिन 29 मार्च, 2023 : मां महागौरी की पूजा

नौवां दिन 30 मार्च : मां सिद्धिदात्री की पूजा

🙏
श्री महाकाली वैदिक ज्योतिष केन्द्र ( न‌ई दिल्ली )
कुण्डली विश्लेषण, कुण्डली मिलान, राशि रत्न, रूद्राक्ष, अभिमंत्रित यंत्र, पूजा-पाठ, वैदिक अनुष्ठान एवं वैदिक ज्योतिष उपाय
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🙏 ॐ नमः शिवाय पं‌‌. जितेन्द्र रतन शर्मा ( ज्योतिषाचार्य )संस्थापक एवं संचालक : श्री महाकाली वैदिक ज्योतिष अनुसंधान केन्द...
07/11/2022

🙏 ॐ नमः शिवाय

पं‌‌. जितेन्द्र रतन शर्मा ( ज्योतिषाचार्य )
संस्थापक एवं संचालक : श्री महाकाली वैदिक ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र ( न‌ई दिल्ली )
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 #सूर्यग्रहण_विशेष25 अक्टूबर, 2022 कार्तिक कृष्ण अमावस्या मंगलवार  को खण्डग्रास सूर्य ग्रहण, भारतीय स्टैंडर्ड टाइम के अन...
24/10/2022

#सूर्यग्रहण_विशेष

25 अक्टूबर, 2022

कार्तिक कृष्ण अमावस्या मंगलवार को खण्डग्रास सूर्य ग्रहण, भारतीय स्टैंडर्ड टाइम के अनुसार दोपहर 2 बजकर 29 मिनट पर आइसलैंड में शुरू होगा, जो शाम 6 बजकर 20 मिनट पर अरब सागर में खत्म होगा. भारत में यह सूर्य ग्रहण शाम लगभग 4 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 9 मिनट पर खत्म होगा.

दिल्ली में ग्रहण का स्पर्श, मध्य व मोक्ष काल :

स्पर्श - 16:29 बजे
मध्य - 17:30 बजे
सूर्यास्त - 17:38 बजे
मोक्ष - 18:26 बजे

#सूतक :
25 अक्टूबर प्रातः 04:29 बजे से।

( सूर्यग्रहण में लगने वाला सूतक ग्रहण के आरम्भ होने से 12 घण्टे पहले लगता है )

* ग्रहण में क्या करें ? क्या न करें ?

- सूतक के समय पूजा-पाठ न करें मानसिक रूप से मंत्रों का जाप कर सकते हैं। आप चाहे तो अपने इष्टदेव का ध्यान भी कर सकते हैं।
- ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। क्योंकि, ऐसे समय में सूर्य से हानिकारक तरंगे निकलती हैं जो कि मां और बच्चे की सेहत के लिए हानिकारक होती हैं।
- खाने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल देना चाहिए, जिससे कि पका हुआ खाना ग्रहण के कारण अशुद्ध होने से बच जाए।
- ग्रहण खत्म होने के बाद घर की सफाई करनी चाहिए।
- घर में स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्नान करना चाहिए। पूजा-पाठ करना चाहिए।

* ग्रहण काल में किए जाने वाले उपाय ;

मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से वातावरण अशांत और दूषित होता है। जिसका मनुष्यों, जीव जंतुओ और प्रकृति पर नकारात्मक असर दिखाई पड़ता है।
ग्रहण के समय पवित्र नदियों, सरोवरों में स्नान करना से बहुत पुण्य मिलता है लेकिन ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए।

* शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के समय गायों को हरा चारा या घास, चींटियों को पंजीरी या चीनी मिला हुआ आटा, पक्षियों को अनाज एवं निर्धन, असहायों को वस्त्रदान से बहुत ज्यादा पुण्य प्राप्त होता है।

* सूर्यग्रहण के सूतक और ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, तप, मन्त्र, तीर्थ स्नान, ध्यान, हवनादि शुभ कार्यो का करना बहुत लाभकारी रहता है। ज्ञानी लोग इस समय का अवश्य ही लाभ उठाते है ।

* वेदव्यास जी ने कहा है कि - सामान्य दिन से सूर्यग्रहण में किया गया जप , तप, ध्यान, दान आदि दस लाख गुना फलदायी होता है। और यदि यह गंगा नदी के किनारे किया जाय तो दस करोड़ गुना फलदायी होता है।

* सूर्य ग्रहण के दिन जलाशयों, नदियों व मन्दिरों में राहू, केतु व सुर्य के मंत्र का जप करने से सिद्धि प्राप्त होती है और ग्रहों का दुष्प्रभाव भी खत्म हो जाता है ।

* ग्रहण के समय सूर्य देव का मन्त्र "ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ "॥ और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मन्त्र का जाप अवश्य ही करना चाहिए ।

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आप सभी को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं । #दीपावली_विशेष  #शुभ_दीपावली 24 अक्टूबर ( सोमवार ), 2022* लक्ष्मी...
23/10/2022

आप सभी को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ।

#दीपावली_विशेष

#शुभ_दीपावली 24 अक्टूबर ( सोमवार ), 2022

* लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- 18:53 से 20:16 बजे तक।
प्रदोष काल- 17:43 से 20:16
वृषभ काल- 18:53 से 20:48

* निशीथ काल - 23:39 से 24:31 बजे तक ।
* सिंह लग्न - 24:39 से 26:56 बजे तक।

* चौघड़िया मुहूर्त

सांयकाल मुहुर्त ( अमृत, चर ) - 17:29 से 19:18 बजे तक ।
रात्रि मुहुर्त ( लाभ ) - 22:29 से 24:05 बजे तक ।

* दिवाली पर दीपक जलाते समय ' ॐ शुभम करोतु कल्याणम‌् आरोग्यम सुख संपदा, मन बुद्धि प्रकाशाय दीप ज्योति नमोस्तुते'... मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और समृद्धि की प्राप्ति होती है ।
* घर में सुख-समृद्धि बनी रहे और मां लक्ष्मी स्थिर रहें इसके लिए दिनभर मां लक्ष्मी का उपवास रखकर सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न (वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है) में मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। लग्न व मुहूर्त का समक्षय स्थान के अनुसार ही देखना चाहिए।

🙏

पं‌‌. जितेन्द्र रतन शर्मा ( ज्योतिषाचार्य )
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 #चार_मुखी_रुद्राक्ष* यह लोगों को शर्मीले और कमजोर स्वभाव से उबरने में मदद करता है ।* यह पहनने वाले को मनोरोग, मस्तिष्क ...
17/10/2022

#चार_मुखी_रुद्राक्ष

* यह लोगों को शर्मीले और कमजोर स्वभाव से उबरने में मदद करता है ।

* यह पहनने वाले को मनोरोग, मस्तिष्क विकार, लकवा, त्वचा रोग, नासिका रोग और दमा रोगों से बचाता है ।

* यह पहनने वाले को आत्मविश्वास और रचनात्मकता प्राप्त करने में मदद करता है।

* यह बुद्धि के साथ-साथ मेमोरी, मुखर प्रदर्शन का विस्तार करता है।

* इस रुद्राक्ष को धारण करने से धारक को जीव हत्या के पाप से मुक्ति भी मिल जाती है ।

* यह पहनने वाले को आध्यात्मिक विश्वास और अंतर्दृष्टि विकसित करने में मदद करता है ।

* लेखकों, छात्रों, विद्वानों, शोधकर्ताओं और पत्रकारों के लिए धारण करना लाभकारी है।

* यह गले संबंधी बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है ।

* यह सांस से संबंधित समस्याओं के इलाज के लिए मदद करता है ।

* यह उन लोगों की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाता है जो बौद्धिक रूप से सुस्त होते हैं ।

🙏 ॐ नमः शिवाय

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 #नवरात्रि_विशेषइस बार शारदीय नवरात्र 26 सितम्बर, 2022 से प्रारम्भ होकर 05 अक्टूबर, 2022  तक रहेंगे। ्थापना_का_शुभ_मुहूर...
25/09/2022

#नवरात्रि_विशेष

इस बार शारदीय नवरात्र 26 सितम्बर, 2022 से प्रारम्भ होकर 05 अक्टूबर, 2022 तक रहेंगे।

्थापना_का_शुभ_मुहूर्त :

वैदिक पंचांग गणना के अनुसार 26 सितंबर को देवी आराधना की पूजा और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर सुबह 07 बजकर 51 मिनट तक ही रहेगा। वहीं अगर आप इस मुहूर्त में किसी कारण से कलश स्थापना न कर पाएं तो दूसरा शुभ मुहूर्त अभिजीत होगा जो सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा।

#शारदीय_नवरात्रि_तिथि

प्रतिपदा (मां शैलपुत्री): 26 सितम्बर 2022
द्वितीया (मां ब्रह्मचारिणी): 27 सितम्बर 2022
तृतीया (मां चंद्रघंटा): 28 सितम्बर 2022
चतुर्थी (मां कुष्मांडा): 29 सितम्बर 2022
पंचमी (मां स्कंदमाता): 30 सितम्बर 2022
षष्ठी (मां कात्यायनी): 01 अक्टूबर 2022
सप्तमी (मां कालरात्रि): 02 अक्टूबर 2022
अष्टमी (मां महागौरी): 03 अक्टूबर 2022
नवमी (मां सिद्धिदात्री): 04 अक्टूबर 2022
दशमी (मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन): 5 अक्टूबर 2022

🙏 जय माता दी

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#शारदीय_नवरात्रि

#भविष्यवाणी






 #पितृपक्ष_विशेष #श्राद्ध_करने_का_उचित_समय  हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार पितरो का श्राद करना जरुरी है ऐसा कहा गया ...
10/09/2022

#पितृपक्ष_विशेष

#श्राद्ध_करने_का_उचित_समय

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार पितरो का श्राद करना जरुरी है ऐसा कहा गया है की जो मनुष्य अपने पितरो का श्राद नहीं करता तथा पिंडदान नहीं करता उन्हें उनके पितरो द्वारा श्राप मिलता है. उनके पितरो की आत्मा इसी संसार में भटकती रहती है. श्राद्ध करने के लिए मनुस्मृति और ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि दिवंगत पितरों के परिवार में या तो सबसे बड़ा पुत्र या सबसे छोटा पुत्र और अगर पुत्र न हो तो नाती, भतीजा, भांजा या शिष्य ही तिलांजलि और पिंडदान दे सकते है.

पिंडदान करते समय पूरे विधिविधान से पिंडदान करना चाहिए नहीं तो पिंडदान करते समय ज़रा सी भी गलती हमें संकट में डाल सकती है. इसलिए ऐसे पितरों को आदर पूर्वक अगर उनके भाई भतीजे, भांजे या अन्य चाचा ताउ के परिवार के पुरूष सदस्य पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर पिंडदान, अन्नदान और वस्त्रदान करके ब्राह्मणों से विधिपूर्वक श्राद्ध कराते है तो पितर की आत्मा को शान्ति मिलता है.

श्राद्ध पक्ष के सोलह दिनों में सदैव कुतप बेला में ही श्राद्ध संपन्न करना चाहिए। दिन का आठवां मुहूर्त कुतप काल कहलाता है। दिन के अपरान्ह 11:36 मिनिट से 12:24 मिनिट तक का समय श्राद्ध कर्म के विशेष शुभ होता है। इस समय को कुतप काल कहते हैं। इसी समय पितृगणों के निमित्त धूप डालकर, तर्पण, दान व ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए।

श्राद्ध के दिन लहसुन, प्याज रहित सात्विक भोजन ही घर की रसोई में बनना चाहिए। जिसमें उड़द की दालए बडे, चावल, दूध, घी से बने पकवान, खीर, मौसमी सब्जी जैसे तोरई, लौकी, सीतफल, भिण्डी कच्चे केले की सब्जी ही भोजन में मान्य है, आलू, मूली, बैंगन, अरबी तथा जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियां पितरों को नहीं चढ़ती है.

🙏

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 #तीन_मुखी_रुद्राक्ष * तीन मुखी रुद्राक्ष पहनने से मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है ।* यह तनाव से मुक्ति और सफलता पाने म...
22/08/2022

#तीन_मुखी_रुद्राक्ष

* तीन मुखी रुद्राक्ष पहनने से मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है ।
* यह तनाव से मुक्ति और सफलता पाने में मदद करता है ।
* यह उन सभी नकारात्मक यादों को मिटाने में मदद करता है जो आपको शर्म और गुस्से से भर देती हैं ।
* यह पेट की सभी प्रकार की समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है ।
* यह चेचक, पीलिया जैसी बीमारियों का इलाज करने में मदद करता है ।
* यह अतीत और वर्तमान जीवन में सभी प्रकार के पापों को दूर करता है ।
* यह रक्तचाप, मधुमेह और रक्त संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद करता है ।
* यह महिलाओं के मासिक धर्म की समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है ।
* यह आलस त्यागने और अधिक सक्रिय और सतर्क बनने में मदद करता है ।
* यह जीवन पर मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव को कम करने में मदद करता है ।
* यह भूमि विवाद, दुर्घटना और भय जैसी समस्याओं को दूर करने में आपकी मदद करता है ।
* यह पहनने वाले को सफलता प्राप्त करने के लिए ऊर्जा और उत्साह से भरपूर करता है ।

🙏 ॐ नमः शिवाय

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 #दो_मुखी_रुद्राक्ष * दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से दांपत्य जीवन सुखी रहता है।* यह पहनने वाले के अन्तर्मन को ठीक करता ह...
20/08/2022

#दो_मुखी_रुद्राक्ष

* दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से दांपत्य जीवन सुखी रहता है।
* यह पहनने वाले के अन्तर्मन को ठीक करता है और सदैव पित्त को शांत रखता है ।
* जिन लोगों को अनिद्रा की शिकायत है उन्हे दो मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए ।
* राहु के दुष्प्रभाव से बचने हेतु इस रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए ।
* यह पहनने वाले को समाज में मान-सम्मान दिलाता है ।
* यह रुद्राक्षधारी के सौंदर्य में वृद्धि के साथ ही उसकी वाकशक्ति को बढ़ाता है ।
* दो मुखी रुद्राक्ष स्मृति हानि, हृदय की समस्याओं, यकृत और श्वास समस्या जैसी बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है ।
* गर्भवती महिलाओं को इस रुद्राक्ष की आराधना करनी चाहिए। इससे काफी लाभ मिलता है।
* कुण्डली में यदि चन्द्रमा प्रतिकूल स्थिति में है तो यह चंद्रमा के दुष्प्रभाव को दूर करता है ।
* यह धारक को भावनात्मक स्थिरता में प्रदान करता है ।
* यह धारक के जीवन के सभी पहलुओं में सकारात्मकता प्रदान करता है ।
* यह उन जोड़ों के लिए उपयुक्त है जो बच्चे पैदा करने की योजना बना रहे हैं ।
* यह पहनने वाले को आंतरिक आनंद और रचनात्मकता प्रदान करता है ।
* यह यौन समस्याओं को ठीक करने या जीवन से बेवफाई को दूर करने में मदद करता है ।
* यह आपकी मांसपेशियों को मजबूत करता है ।
* यह जीवन से तनाव और पीड़ा को दूर करता है ।
* यह निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करता है ।

🙏 ॐ नमः शिवाय

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 ुखी_रुद्राक्ष * एक मुखी रुद्राक्ष की माला को धारण करने वाले व्यक्ति की आध्यात्मिक इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और मन को शांति...
18/08/2022

ुखी_रुद्राक्ष

* एक मुखी रुद्राक्ष की माला को धारण करने वाले व्यक्ति की आध्यात्मिक इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और मन को शांति मिलती है ।
* इस रुद्राक्ष के प्रभाव से जीवन में समृद्धि आती है ।
* जो व्यक्ति एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करता है उसके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि तथा व्यक्तित्व का विकास होता है ।
* एक मुखी रुद्राक्ष करियर तथा व्यवसाय में सफलता दिलाने में सहायक होता है ।
* एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने वाले व्यक्ति को आर्थिक लाभ और समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है ।
* यदि कोई व्यक्ति यह रुद्राक्ष धारण करता है तो वह अपने क्रोध पर नियंत्रण पा सकता है ।
* यदि कोई व्यक्ति रक्त, हृदय, आँख और सिर आदि से संबंधित विकार से पीड़ित है तो उसके लिए यह रुद्राक्ष चमत्कारिक उपाय है ।
* यह रुद्राक्ष बुरी आदतों (नशीले पदार्थ का सेवन आदि) को छुड़वाने में सहायक है ।

ॐ नमः शिवाय 🙏
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08/08/2022

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