Nature's Miracle with Modern Medicine & Immuno-therapy. Aiims,Pgi Return Pt

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Nature's Miracle with Modern Medicine & Immuno-therapy. Aiims,Pgi Return Pt TOTAL SOLUTIONS FOR TIRED PATIENT. RELIABLE FOR ALL.
(264)

एलोपैथ,होम्योपैथ,आयुर्वेदिक,यूनानी सबकरके देख लिया?
ऐम्स,पीजीआई,फोर्टिस,मैक्स हॉस्पिटल से निराश रोगी भी मिलें
हमारा लक्ष्य रोग को जड़ से दूर करना है,याद रखें रोगका जड़से निदान न होना घातक हो सकता है,हमेशा परेशानी बनी रहती है
पहले 30 दिन की दवा दी जाती है

पता नहीं किसका बच्चा है,7 में से किसी एक का होगा कामुकता लड़का हो या लड़की सभी के अन्दर आज कूट कूट के भरी है, आज के समय ...
27/01/2026

पता नहीं किसका बच्चा है,7 में से किसी एक का होगा कामुकता लड़का हो या लड़की सभी के अन्दर आज कूट कूट के भरी है, आज के समय 15 वर्ष की लड़किया प्रेग्नेंट हो रही हैं पर उन्हें ये नहीं पता होता है कि वो किससे प्रेग्नेंट होती है

एक बार मेरे पास एक लड़की आती है जिसे पेट में हल्के दर्द की समय था वो अभी क्लास 11 में पढ़ती थी, और और महज 15 16 साल की थी..

मैने शुरुवाती जांच की तो मुझे शक हुआ कि हो सकता है ये प्रेग्नेंट है, लेकिन जब रिपोर्ट आई तो वो सच में प्रेग्नेंट थी,

मुझे लगा कि उसके साथ किसी ने कुछ गलत तो नहीं किया इस लिए मैने कम से कम 1 से 2 घंटा उसका समय लिया और काउंसलिंग की जिसमें इस बात की पुष्टि हुई कि किसी ने गलत नहीं किया है

मैने कुछ दावा देके उसका भरोसा जीता और बोला 2 दिन बाद फिर आओ

आज दूसरा दिन था
वो आई

मैने बोला और कैसी हो दर्द कैसा है

उसने बोला मम दर्द ठीक है लेकिन पेट में भारी पान लगता है

मैने बोला " बेटा किसी के साथ कोई रिलेशनशिप में हो ? "

उसने बोला नहीं मम मै तो बस स्कूल जाती हूं

फिर मैने बिना समय गवाए बोला
" देखो तुम 2 3 वीक की प्रेग्नेंट हो तुम्हारा बच्चा स्वास्थ्य लेकिन डरने की बात नहीं ये बात पूरी तरह से गोपनीय है
अब तुम बताओ इस बच्चे को जन्म देना चाहती हो या दवा देके इसे साफ करना चाहती हो"

उसने बिना कुछ सोचे बोला डॉक्टर मेरी उम्र नहीं की मै बच्चे को पैदा करु इस लिए आप इसे साफ कर दीजिए

मैने बोला कि अच्छा ठीक है तो जरा उसे बुलाओ जिसका ये बच्चा है, क्यों की मुझे जरूरी काम है बिना ये जाने मै आगे नहीं बढ़ सकती

बोली मुझे नहीं पता कि किसका बच्चा है ये

मैने बोला क्यों ऐसा कैसे हो सकता है,

इसे उसने बोला उसके 7 से ज्यादा लड़कों के साथ संबंध है

जिसे सुनकर मैं हैरान थी मैने उससे पूछा उसने ऐसा क्यों किया

उसने जवाब दिया पहली बार तो बस ये जानने के लिए किया था कि कैसा लगता है धीरे धीरे आदत बन गई
उसके बाद अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए अलग लग लड़के कुछ भी करने को तैयार रहते थे अगर मैं अपना शरीर उन्हें सौंप दूं तो

मैने पूछा तुम्हारी ऐसी कौनसी जरूरत है जिसे पूरा करने की जरूरत है
जवाब था

I phone लेना उसका रिचार्ज महंगे रेस्टुरेंट में जाना पार्टी करना ट्रिप पर जाना ये सब कैसे होगा

मैने उसे समझाया बेटा जिंदगी में मित्र रखो लेकिन जिसके साथ सहवास करना है वो एक इंसान रहे उसपे उसका जवाब अजीब था

मैम आज फ्रेंड विद बेनिफिट का जमाना है मतलब ऐसे दोस्त जिनके साथ हम सब कुछ कर सकते हैं
यानी शारीरिक जरूरत भी पूरी कर सकते हैं
किसी से कोई कमिटमेंट नहीं और एंजॉय पूरा

खैर मेरे पास जवाब में कुछ नहीं था मैने उसे सलाह दी कि ये सब मत करो और बार बार नाचे साफ करना जानलेवा है

वो वहां से गई लेकिन साल भर में ना जाने कितनी ऐसी लड़कियों आगई जो सिर्फ ये चाहती थी कि उनके बारे में किसी को पता ना चले और ये उनकी प्रेग्नेंसी भी खत्म हो जाए

मेरा सवाल बच्चों से नहीं उनके मां बाप से क्या आप पैसे कमाने में इतना बिजी है कि बच्चे क्या कर रहे कहां जा रहे आप को नहीं पता ??
और मा से भी आजकल की मां मोबाइल में इतना बिजी है कि। उन्हें होश नहीं की उनकी बेटियां और बेटे कहां जा रहे हैं क्या कर रहे हैं
क्या कभी अपने जानने की कोशिश की आप की बेटी जो मोबाइल इस्तेमाल कर रही है उसकी कीमत क्या है
??

अब मैं इसे पढ़ने वालो से पूछती हूं समाज में फैल रहे इस नासूर का जिम्मेदार कौन है ??
आज कल की फिल्म या सोशल मीडिया पे फैली गंदगी ?? अपना जवाब दीजिए

""

19/01/2026

With International Naturopathy Organisation (INO) – I'm on a streak! I've been a top fan for 8 months in a row. 🎉

जरा सोचो,हम अक्सर यह सुनते हैं कि खाना पीना तो बहुत अच्छा खाते हैं, खूब खाते हैं फिर भी स्वस्थ नहीं हैं या फिर, यदि आप य...
17/01/2026

जरा सोचो,हम अक्सर यह सुनते हैं कि खाना पीना तो बहुत अच्छा खाते हैं, खूब खाते हैं फिर भी स्वस्थ नहीं हैं

या फिर,

यदि आप यह सोचते हैं कि हमारे पुरखे हमसे अच्छा खाते थे इसलिए अधिक स्वस्थ थे,
कोई पुरखों को वैज्ञानिक, कोई डॉक्टर बोलते हैं

सत्यता यह है कि हम ज़्यादा खाते हैं
इसलिए बीमार हैं दिन में तीन बार खाना मानव इतिहास के सबसे बड़े धोखों में से एक है।

कोई डॉक्टर यह साफ़-साफ़ नहीं कहेगा।
कोई मेडिकल पाठ्य-पुस्तक इसे स्वीकार नहीं करेगी क्योंकि यह झूठ अनेक उद्योगों को ज़िंदा रखता है।

इस भ्रम को समझने के लिए
अंग्रेज़ों से पहले जाना होगा।
घड़ी के शासन से पहले।
उस समय से पहले
जब भोजन आज्ञाकारिता बना दिया गया।

भारत समय से नहीं — सूर्य से खाता था

भारत ने कभी घड़ी देखकर खाना नहीं खाया।
यहाँ भोजन होता था—
सूर्य के अनुसार,
ऋतु के अनुसार,
श्रम के अनुसार,
और सबसे महत्वपूर्ण—भूख के अनुसार।

अधिकांश भारतीय
एक ही मुख्य भोजन करते थे।
कभी-कभी दो।
तीन कभी नहीं।

भोजन प्रायः
देर सुबह या दोपहर में होता था।
सूर्यास्त के बाद
भारी भोजन लगभग नहीं होता था।

उपवास कोई दंड नहीं था

उपवास
सज़ा नहीं था।
वह संस्कृति था।
वह जैविक बुद्धि था।
वह आध्यात्मिक अनुशासन था।

एकादशी।
प्रदोष।
नवरात्रि।
चातुर्मास।
ऋतु-आधारित व्रत।

भूख से डर नहीं था।
भूख का सम्मान था।

भोजन स्थानीय था — जीवन से जुड़ा था

खाद्य पदार्थ
ताज़ा थे।
स्थानीय थे।
ऋतु के अनुरूप थे।

मोटे अनाज—
ज्वार, बाजरा, रागी।
कंद-मूल।
दालें।
देशी घी, दूध।
वन-आधारित भोजन।
अब कितने लोगों की दिनचर्या में है ??

चावल और गेहूँ
देवता नहीं थे।

रोग थे।
लेकिन मेटाबोलिक रोग नहीं थे।

मोटापा दुर्लभ था।
मधुमेह लगभग अदृश्य था।
हृदय रोग जीवन-शैली नहीं बने थे।

शरीर दुबले थे।
मांसपेशियाँ कार्यशील थीं।
किसानों के शरीर
जिम के बिना सिक्स-पैक थे।

फिर अंग्रेज़ आए

और उन्होंने
सिर्फ़ भूमि पर क़ब्ज़ा नहीं किया।

उन्होंने
समय को उपनिवेश बनाया।
भोजन को उपनिवेश बनाया।
चयापचय (Metabolism) को उपनिवेश बनाया।

उन्हें चाहिए थे
अनुमानित मजदूर।
अनुमानित घंटे।
अनुमानित उत्पादकता।

इसलिए उपवास हटाना पड़ा।
नियमित भोजन हटाना पड़ा।
भोजन की स्वायत्तता खत्म करनी पड़ी।

धीरे-धीरे, चुपचाप
एक नया ढाँचा खड़ा किया गया—

सुबह = नाश्ता
दोपहर = भोजन
रात = रात का खाना

यह स्वास्थ्य मॉडल नहीं था।
यह कर वसूली का मॉडल था।

अगला वार खाद्य संप्रभुता की हत्या

हर भारतीय घर
कभी एक खाद्य इकाई था।

स्व-संरक्षित।
स्व-निर्भर।
स्व-पोषित।

इसे नष्ट करना ज़रूरी था।

विविध अनाज हटाए गए।
चावल और गेहूँ थोपे गए।

क्यों?

आसान भंडारण।
आसान परिवहन।
आसान कर।
आसान नियंत्रण।

रसोई बाज़ार बन गई।
खेती नक़दी फसल बनी।
खाना निर्भरता बन गया।

1947 आया — आज़ादी आई, पर व्यवस्था नहीं बदली

सरकार ने
अंग्रेज़ी मॉडल को देखा
और मुस्कुराई—

“कितनी शानदार कर मशीन है!”

फिर आई
हरित क्रांति।

1950–60 का दशक।

गेहूँ और चावल
सीमेंट की तरह जम गए।

MSP का नशा दिया गया।
DAP, Urea और न जाने क्या क्या
मोटे अनाज ग़ायब हो गए।
विविधता मर गई।

किसान संप्रभु नहीं रहे।
वे आपूर्तिकर्ता बन गए।

फिर दूसरा उद्योग फूटा — बीमारी

कार्बोहाइड्रेट-भारी आहार आए।
और साथ आए—

मधुमेह।
उच्च रक्तचाप।
हृदय रोग।
मोटापा।

बीमारियाँ अनुमानित थीं।
मरीज़ स्थायी थे।

बीमा फला-फूला।
अस्पताल बढ़े।
दवाइयाँ फूटीं।

सरकार फिर मुस्कुराई—

भोजन कर।
दवा कर।
अस्पताल कर।
बीमा कर।

नागरिक बैटरियाँ बन गए।

खाओ।
काम करो।
दवा लो।
कर दो।
दोहराओ।

काग़ज़ों में उम्र बढ़ी — जीवन नहीं
लोग अधिक नहीं जी रहे।
वे केवल
ज़्यादा समय तक ज़िंदा रखे जा रहे हैं।
गोलियों पर।
इंजेक्शन पर।
रिपोर्ट्स पर।
स्वस्थ रहने के लिए नहीं—
कर देने के लिए ज़िंदा।
यह स्वास्थ्य नहीं है।
यह सभ्यतागत पतन है।
और हम अब भी
इस मैट्रिक्स में फँसे हैं।

असल प्रश्न यह नहीं है…

“आप बीमार क्यों हैं?”

सबसे बड़ा प्रश्न है कि —

जब आप दिन में तीन बार खाते हैं,
तो लाभ किसे होता है ??
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Great Deal with Slovenia
04/12/2025

Great Deal with Slovenia

वैसे तो हम आज भी ब्रिटेन, इजरायल, यूरोप के गुलाम हैं अब यूरोप बिरटेन इजरायल हमें जिन्दा क्यों देखना पसंद नहीं करेगा अब व...
06/11/2025

वैसे तो हम आज भी ब्रिटेन, इजरायल, यूरोप के गुलाम हैं अब यूरोप बिरटेन इजरायल हमें जिन्दा क्यों देखना पसंद नहीं करेगा अब वो हथियार नहीं चलातें हमारे ऊपर अब वो हमें धीमें ज़हर से मारना पसंद करते हैं कभी कभी कैमटरेल कैमिकल कभी पोलियो की दवाई का कैमिकल कभी सब्जियों का कैमिकल कभी पानी में फ्लोराइड का कैमिकल कभी दवाईयों का जहर ह खानें पीने की चीजों में कैमिकल साबून सर्फ में कैमिकल शैम्पू में कैमिकल आपके सुबह से शाम तक कैमिकल इस्तेमाल अब आप समझ सकते हैं कि वार लडाई युद्ध के तरिके बदल चूके है बिरटेन युरोप अमेरिका इजरायल सार गन्दे घिनौने हमें मोत देने के पीछे इनका ही काला चेहरा है
#ब्रिटेन #इजराइल #अमरीका #भारत #रूस

मात्र 24 साल में गर्भाशय का ये हाल हो गया, कई डॉक्टरों की दवाई ले चुकी है, पर पूरा आराम नहीं मिल रहा
28/10/2025

मात्र 24 साल में गर्भाशय का ये हाल हो गया, कई डॉक्टरों की दवाई ले चुकी है, पर पूरा आराम नहीं मिल रहा

क्या आप जानते हैं तीन औषधियों का ये मिश्रण इन 18 असाध्य रोगों का काल है., बुढ़ापे में भी रहेगी जवानी ...अगर किसी को ये भ...
28/06/2025

क्या आप जानते हैं
तीन औषधियों का ये मिश्रण इन 18 असाध्य रोगों का काल है., बुढ़ापे में भी रहेगी जवानी ...
अगर किसी को ये भी सेट न करे तो संपर्क कर सकते हैं 🙏

बार बार रोगी उपचार हेतु एलोपैथिक चिकित्सक के पास जाता है. एलोपैथिक उपचार करवाने पर भी जब उसे स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं दिखता, वह आयुर्वेदिक उपचार की ओर मुडता है।आयुर्वेदिक उपचार करवाने के उपरांत रोगी को रोग ठीक होने का भान होता है।

तब वह यह विचार करने लगता है, कि अच्छा होता यदि मैं आरंभ से ही आयुर्वेदिक उपचार करवाता।

इसलिए ऐसा ना हो तथा हानिकारक दुष्प्रभावों (side effects)से बचने के लिए, रोग के आरंभ में ही आयुर्वेदिक उपचार करवाना आवश्यक है।

🌿🌱☘️🍀🍃🪴🌵🌾

इन 3 औषधियों की बहुत उपयोगी दवा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री :

250 ग्राम मैथीदाना

100 ग्राम अजवाईन

50 ग्राम काली जीरी (ज्यादा जानकारी के लिए नीचे देखे)

तैयार करने का तरीका :

उपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-हल्का सेंकना(ज्यादा सेंकना नहीं) तीनों को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पावडर बनाकर कांच की शीशी या बरनी में भर लेवें।

🌿🌱☘️🍀🍃🪴🌵🌾

औषधि को सेवन करने का तरीका,,,,,

रात्रि को सोते समय एक चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी (हल्का गर्म) के साथ लेना है। गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।

चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी (कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी । पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा। चमड़ी की झुर्रियाॅ अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा ।

इन 18 रोगों में फायदेमंद है,,,,

गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा।

हड्डियाँ मजबूत होगी।

आँखों रौशनी बढ़ेगी।

बालों का विकास होगा।

पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।

शरीर में खुन दौड़ने लगेगा।

कफ से मुक्ति।

हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी।

थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें।

स्मरण शक्ति बढ़ेगी।

स्त्री का शरीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा।

कान का बहरापन दूर होगा।

भूतकाल में जो एलाॅपेथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें।

खून में सफाई और शुद्धता बढ़ेगी।

शरीर की सभी खून की नलिकाएं शुद्ध हो जाएगी।

दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा।

शारीरिक कमजोरी दूर तो मर्दाना ताक़त बढ़ेगी।

डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा।

जिंदगी निरोग,आनंददायक, चिंता रहित स्फूर्ति दायक और आयुष्यवर्धक बनेगी। जीवन जीने योग्य बनेगा।

कृपया ध्यान दे :

कुछ लोग कलौंजी को काली जीरी समझ रहे है जो कि गलत है काली जीरी अलग होती है जो आपको पंसारी या आयुर्वेद की दुकान से मिल जाएगी, यह स्वाद में हल्की कड़वी होती है, नीचे जो फोटो है वो कालीजीरी (Purple Fleabane) का है, जिसका नाम अलग-अलग भाषाओं में कुछ इस तरह से है।

हिन्दी कालीजीरी, करजीरा।

संस्कृत अरण्यजीरक, कटुजीरक, बृहस्पाती।

मराठी कडूकारेलें, कडूजीरें।

गुजराती कडबुंजीरू, कालीजीरी।

बंगाली बनजीरा।

अंग्रेजी पर्पल फ्लीबेन

कालीजीरी -

कालीजीरी को आयुर्वेद में सोमराजि, सोमराज, वनजीरक, तिक्तजीरक, अरण्यजीरक, कृष्णफल आदि नाम से जानते हैं। हिंदी भाषा में इसे कालीजीरी, बाकची और बंगाल में सोमराजी कहते हैं।

कालीजीरी किसी भी तरह के जीरे से अलग है। इंग्लिश में इसे पर्पल फ़्लीबेन कहते हैं पर यह कलोंजी Nigella sativa से बिल्कुल भिन्न है। कलोंजी को भी इंग्लिश में ब्लैक क्यूमिन ही कहते है। इसी प्रकार बाकची, या सोमराजी एक और पौधे के बीज को, सोरेला कोरीलिफ़ोलिया (Psoralea corylifolia) को कहते है।

आयुर्वेद के बहुत से विशेषज्ञ सोरेला कोरीलिफ़ोलिया को ही बावची या सोमराजी मानते हैं पर बंगाल में कालीजीरी को सोमराजी नाम से जानते और प्रयोग करते हैं।

कालीजीरी स्वाद में कड़वा और तेज गंद्ध वाला होता है, इसलिए इसे किसी भी तरह के भोजन बनाने में प्रयोग नहीं किया जाता। इसको केवल एक दवा की तरह ही प्रयोग किया जाता है। लैटिन में इसका नाम, सेंट्राथरम ऐनथेलमिंटिकम या वरनोनिया ऐनथेलमिंटिकम है।

इसके वैज्ञानिक नाम में 'ऐनथेलमिंटिकम' इसके प्रमुख आयुर्वेदिक प्रयोग को बताता है। ऐनथेलमिंटिकम का मतलब है, शरीर से परजीवियों को नष्ट करने वाला। आयुर्वेद में इसे कृमिनाशक की तरह प्रयोग किया जाता है।

इसका सेवन और बाह्य प्रयोग चर्म रोगों के इलाज, जैसे की श्वित्र (leukoderma) सफ़ेद दाग, खुजली, एक्जिमा, आदि। इसे सांप या बिच्छु के काटे पर भी लगाते हैं। कालीजीरी का क्षुप, पूरे देश में परती जमीन पर पाया जाता है। इसके पत्ते शल्याकृति किनारेदार होते हैं। बारिश के मौसम के बाद इसमें मंजरी निकलती है। जिसमे काले बीज आते है।

काली जीरी आकार में छोटी और स्वाद में तेज, तीखी होती है। इसका फल कडुवा होता है। यह पौष्टिक एवं उष्ण वीर्य होता है। यह कफ, वात को नष्ट करती है और मन व मस्तिष्क को उत्तेजित करती है। इसके प्रयोग से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं और खून साफ होता है। त्वचा की खुजली और उल्टी में भी इसका प्रयोग लाभप्रद होता है।

यह त्वचा के रोगों को दूर करता है, पेशाब को लाता है एवं गर्भाशय को साफ व स्वस्थ बनाता है। यह सफेद दाग (कुष्ठ) को दूर करने वाली, घाव और बुखार को नष्ट करने वाली होती है। सांप या अन्य विषैले जीव के डंक लगने पर भी इसका प्रयोग लाभकारी होता है।

कालीजीरी के 13 फायदे :

यह कृमिनाशक और विरेचक है।

यह गर्म तासीर के कारण श्वास, कफ रोगों को दूर करती है।

मूत्रल होने के कारण यह मूत्राशय, की दिक्कतों और ब्लड प्रेशर को कम करती है।

यह हिचकी को दूर करती है।

यह एंटीसेप्टिक है चमड़ी की बिमारियों जैसे की खुजली, सूजन, घाव, सफ़ेद रोग, आदि सभी में बाह्य रूप से लगाई जाती है।

जंतुघ्न होने के कारण शरीर के सभी प्रकार के परजीवियों को दूर करती है।

काली जीरी को चमड़ी के रोगों में नीम के काढ़े के साथ मालिश या खादिर के काढ़े के आंतरिक प्रयोग के साथ करना चाहिए।

भयंकर चमड़ी रोगों में, काली जीरी + काले तिल बराबर की मात्रा में लेकर, पीस कर 4 ग्राम की मात्रा में सुबह, एक्सरसाइज की बाद पसीना आना पर लेना चाहिए। ऐसा साल भर करना चाहिए।

श्वेत कुष्ठ जिसे सफ़ेद दागभी कहते है, उसमे चार भाग काले जीरी और एक भाग हरताल को गोमूत्र में पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाना चाहिए। इसी को काले तिलों के साथ खाने को भी कहा गया है। (भैषज्य रत्नावली)

पाइल्स या बवासीर में, 5 ग्राम कालाजीरालेकर उसमे से आधा भून कर और आधा कच्चा पीसकर, पाउडर बनाकर तीन हस्से कर के दिन में तीन बार खाने से दोनों तरह की बवासीर खूनी और बादी में लाभ होता है।

पेट के कीड़ों में इसके तीन ग्राम पाउडर को अरंडी के तेल के साथ लेना चाहिए।

खुजली में, सोमराजी + कासमर्द + पंवाड़ के बीज + हल्दी + दारुहल्दी + सेंधा नमक को बराबर मात्रा में मिलकर, कांजी में पीसकर लेप लगाने से कंडू, कच्छु (खुजली) आदि दूर होते हैं।

कुष्ठ में, कालीजीरी + वायविडंग + सेंधानमक + सरसों + करंज + हल्दी को गोमूत्र में पीस कर लगना चाहिए।

कालीजीरी के सेवन की मात्रा :

इसको 1-3 ग्राम की मात्रा में लें। इससे अधिक मात्रा प्रयोग न करें।

आवश्यक सावधानियाँ :

कृमिनाशक की तरह प्रयोग करते समय किसी विरेचक का प्रयोग करना चाहिए।

कालीजीरी के प्रयोग में सावधानियां

यह बहुत उष्ण-उग्र दवा है।

गर्भावस्था में इसे प्रयोग न करें।

यह वमनकारक है।

अधिक मात्रा में इसका सेवन आँतों को नुकसान पहुंचाता है।

यदि इसके प्रयोग के बाद साइड इफ़ेक्ट हों तो गाय का दूध / ताजे आंवले का रस / आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए।

🌿🌱☘️🍀🍃🪴🌵🌾

दुनिया में पहली बार अनोखा चमत्कार।एक चीनी सर्जन ने 8,000 किलोमीटर दूर मौजूद एक मरीज़ का ऑपरेशन किया — और वो भी 100% सफल ...
15/06/2025

दुनिया में पहली बार अनोखा चमत्कार।
एक चीनी सर्जन ने 8,000 किलोमीटर दूर मौजूद एक मरीज़ का ऑपरेशन किया — और वो भी 100% सफल रहा।

दुनिया में पहली बार ऐसा कुछ हुआ है। चीनी सर्जन डॉ. झांग ज़ु (Zhang Xu) ने इटली के रोम में बैठकर एक कैंसर पीड़ित मरीज़ का ऑपरेशन किया, जबकि वह मरीज़ उस समय चीन की राजधानी बीजिंग में था।

डॉक्टर और मरीज़ के बीच एक 5G-पावर्ड सर्जिकल रोबोट के ज़रिए कनेक्शन स्थापित किया गया। यह लगभग रीयल-टाइम में काम कर रहा था। इसमें सिर्फ 135 मिलीसेकंड की देरी थी — जो पलक झपकने से भी तेज़ है।

इस टेली-सर्जरी को एक ग्लोबल मेडिकल कॉन्फ्रेंस में लाइव दिखाया गया। एक पूरे महाद्वीप की दूरी होने के बावजूद, रोबोट ने डॉ. झांग की हर एक हरकत को हूबहू दोहराया। यह दृश्य सभी को चकित कर देने वाला था।

बता दें कि चीन की रोबोट टेक्नोलॉजी आज इतनी विकसित हो चुकी है कि फैक्ट्री में उत्पादन से लेकर आम जिंदगी के कई कामों में भी इसका इस्तेमाल एक क्रांति ला चुका है।

डॉ. झांग और उनकी टीम ने इस ऑपरेशन के जरिए इतिहास रच दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इंसानी कौशल के साथ सही तकनीक और संचार को जोड़ा जाए, तो चमत्कार मुमकिन हैं।

यह टेली-सर्जरी हमें उम्मीद देती है — शायद भविष्य में इलाज के लिए सरहदें कभी बाधा नहीं बनेंगी।
देखते हैं, वक़्त हमें और किन चमत्कारों की ओर ले जाता है!




डॉक्टर बोले- ब्लड  #कैंसर है..बचना मुश्किल,,,जब मौत सामने थी और दवा ने जवाब दे दिया, तब इस आदमी ने जंगल और बर्फीली नदी स...
28/05/2025

डॉक्टर बोले- ब्लड #कैंसर है..बचना मुश्किल,,,जब मौत सामने थी और दवा ने जवाब दे दिया, तब इस आदमी ने जंगल और बर्फीली नदी से जिंदगी की नई कहानी लिखी..,
न ही रेडिएशन कराया और न ही कीमो ओर रच दिया इतिहास।

52 वर्षीय एक व्यक्ति की कहानी इस सोच को नई ऊर्जा देती है। उन्हें ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) और लिंफोमा (लसीका ग्रंथि का कैंसर) हुआ। डॉक्टरों ने तुरंत कीमोथेरेपी और रेडिएशन की सलाह दी। लेकिन उन्होंने conventional treatment को ठुकराकर Natural Cancer Healing का मार्ग अपनाया।

इस व्यक्ति ने खुद को एक ‘प्राकृतिक ट्रायल’ में झोंक दिया। उन्होंने 4°C के बर्फीले पानी में 187 मील तैरने का संकल्प लिया। यह किसी भी औसत व्यक्ति के लिए असंभव लगता है, लेकिन उनके लिए यह प्रकृति से जुड़ने का एक जरिया था। Natural Cancer Healing के तहत ठंडे पानी में तैरना न सिर्फ शरीर को झटका देता है, बल्कि इम्यून सिस्टम को भी जाग्रत करता है।

187 मील (करीब 300 किलोमीटर) तैराकी 4°C के बर्फीले पानी में की हर हफ्ते एक रात जंगल में बिताई कैंसर से लड़ने की बजाय जीवन से प्यार करने का नजरिया अपनाया

हर हफ्ते एक रात वह जंगल में अकेले बिताते थे। कोई गैजेट नहीं, कोई इंसानी संपर्क नहीं – सिर्फ पेड़, चांदनी और उनके विचार। यह प्रकृति से गहन संपर्क Natural Cancer Healing का एक अनिवार्य हिस्सा है, जहां शरीर को नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है।

पहली तैराकी के बाद जब ब्लड टेस्ट हुआ तो ल्यूकेमिया गायब हो चुका था। उनके कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर ने यहां तक कहा, "अगर मैंने खुद उनका टेस्ट नहीं किया होता, तो यकीन नहीं करता कि उन्हें कभी कैंसर था!"

इस तरह के प्राकृतिक तरीकों को आज विज्ञान भी समर्थन देता है:

जापान में हुए एक शोध में पाया गया कि जंगल में 72 घंटे बिताने पर नैचुरल किलर सेल्स (NK Cells) की संख्या 50 से 200 गुना तक बढ़ जाती है। ये वही कोशिकाएं हैं जो कैंसर से लड़ती हैं।

Natural_Cancer_Healing में प्रयोग होने वाले शारीरिक और मानसिक व्यायाम, जैसे तैराकी और मेडिटेशन, इम्यून सिस्टम को पुनर्जीवित करने में सहायक हैं।

ColdWater में डुबकी लगाने से एंटी-इंफ्लेमेटरी हार्मोन्स सक्रिय होते हैं, जिससे शरीर खुद को मरम्मत करता है।

सच है कि दवाएं आखिरी विकल्प होनी चाहिए, पहली नहीं। हर दवा के साइड इफेक्ट होते हैं, लेकिन प्रकृति के सिर्फ फायदे होते हैं।

आज वह 64 वर्ष के हैं, पूरी तरह स्वस्थ और दो वर्ल्ड रिकॉर्ड उनके नाम हैं – एक लंबी दूरी की बर्फीली तैराकी और दूसरा जंगल में सबसे लंबा एकल ध्यान (solo meditation retreat)।
उनका मानना है कि जीवन में उद्देश्य और आत्मबल से बड़ा कोई इलाज नहीं।
वे अब लोगों को बिना दवा, कीमो और रेडिएशन के अपनी प्राकृतिक हीलिंग पावर को जगाना सिखा रहे हैं।
एक सच्ची कहानी किसी भारतीय की मदद कर सकती है,,,
अगर प्रेरणादायक लगे तो शेयर जरूर करें 🙏

#कैंसरसेबचाव #कैंसर #हेल्थी #ऐम्स #सिस्ट

बिना ऑपरेशन पित्त की पथरी निकल सकती है क्या ?पथरी क्या है?, पथरी कितने प्रकार की होती है?, पथरी होने के लक्षण क्या है?, ...
25/05/2025

बिना ऑपरेशन पित्त की पथरी निकल सकती है क्या ?
पथरी क्या है?, पथरी कितने प्रकार की होती है?, पथरी होने के लक्षण क्या है?, पथरी से होने वाली समस्याएं क्या है?, और पथरी का इलाज क्या है?,

पथरी : पथरी (Kidney Stone) एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें किडनी, मूत्राशय या मूत्रमार्ग में छोटे-छोटे कठोर खनिज और लवण के कण जमा हो जाते हैं। यह स्थिति दर्दनाक हो सकती है और समय पर इलाज न करने पर गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती है। यहां पथरी से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें दी गई है।

पथरी के प्रकार : पथरी मुख्यतः 4 प्रकार की होती हैं।

1. कैल्शियम पथरी :

यह पथरी सबसे आम प्रकार की है जो कैल्शियम ऑक्सलेट से बनी होती है।ऑक्सलेट गाजर, पालक, नट्स, चाय और चॉकलेट जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।

2. यूरिक एसिड पथरी :

यह पथरी अधिक प्रोटीन युक्त भोजन, जैसे मांस और मछली खाने से बनती है।यह अधिकतर उन लोगों में होती है जो गाउट (gout) या चयापचय संबंधी विकारों से पीड़ित होते हैं।

3. स्ट्रुवाइट पथरी :

ये पथरी मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) के कारण बनती है। ज़्यादातर यह महिलाओं में पाई जाती है।

4. सिस्टीन पथरी :

यह पथरी एक दुर्लभ प्रकार, जो अनुवांशिक विकारों के कारण होती है।

लक्षण :
1. पेट या कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द।
2. पेशाब में खून आना।
3. पेशाब करते समय जलन या दर्द।
4. मतली और उल्टी।
5. बार-बार पेशाब आने की आवश्यकता महसूस होना।
6. बुखार और ठंड लगना (यदि संक्रमण हो)।
कारण :
1. पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना।
2. कैल्शियम, ऑक्सलेट, या यूरिक एसिड का अधिक सेवन।
3. मोटापा।
4. जेनेटिक फैक्टर्स।
5. पाचन तंत्र की समस्याएं।
6. मूत्र संक्रमण।
उपचार :

प्राकृतिक रूप से बाहर निकालना:
1.अधिक मात्रा में पानी पीना।
2.हमारी तीन महीने की दवाई से 18mm तक की पित्त की पथरी (GB Stone)निकल जाती है

मेडिकल ट्रीटमेंट : (Only Kidney, not for GB stone)
1.दवाइयों द्वारा पथरी का घुलना।
2 .लिथोट्रिप्सी (Shock wave therapy)।
3 .सर्जरी (यदि पथरी बहुत बड़ी हो)।
रोकथाम :
1. रोजाना 8-10 गिलास पानी पिएं।
2. ऑक्सलेट, नमक और प्रोटीन के अधिक सेवन से बचें।
3. संतुलित आहार का सेवन करें।
4. नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराएं।
घरेलू उपचार :
1. नींबू और पानी: नींबू का रस पथरी को घोलने में मदद कर सकता है।
2. तुलसी का रस: तुलसी का सेवन किडनी के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
3. सेब का सिरका: इसमें एसिडिक गुण होते हैं जो पथरी को घोलने में मदद कर सकते हैं।
4. ज्वार और मूली का रस: इनका नियमित सेवन फायदेमंद हो सकता है।
स्वस्थ रहे, स्वस्थ रखे, सुखी रहें
आयुर्वेद अपनाए निरोग जीवन जिए।🙋‍♂

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21/05/2025

सरकार ने हाई अलर्ट जारी किया है

29 मई से 2 जून तक सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक कोई भी व्यक्ति बाहर (खुले आसमान के नीचे) नही निकलेगा क्योंकि मौसम विभाग ने यह बताया है कि तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से 55 डिग्री सेल्सियस तक जायेगा,जिससे अगर किसी भी व्यक्ति को घुटन महसूस हो या अचानक तबियत खराब हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं रूम के अंदर दरवाजा खोल कर रखे ताकि विंटीलेशन ना रहे,मोबाइल का प्रयोग कम करे, मोबाइल फटने की संभावना जताई जा रही है,कृपया सावधान रहें और लोगो को सूचित करें,दही , मट्ठा, बेल का जूस आदि ठंडे पेय पदार्थ का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें।

*अत्यधिक महत्वपूर्ण सूचना *

नागरिक सुरक्षा महानिदेशालय नागरिकों और निवासियों को निम्नलिखित के प्रति सचेत करता है।

आने वाले दिनों में 47 से 55 डिग्री सेल्सियस के बीच बढ़ते तापमान और क्यूम्यलस बादलों की उपस्थिति के कारण अधिकांश क्षेत्रों में दमघोंटू माहौल होने के कारण, यहां कुछ चेतावनियां और सावधानियां दी गई हैं।

कारों में से इन्हें हटा दिया जाना चाहिए

1. गैस सामग्री, 2 लाइटर, 3. कार्बोनेटेड पेय पदार्थ
4. सामान्यतः इत्र और उपकरण बैटरियाँ
5. कार की खिड़कियाँ थोड़ी खुली (वेंटिलेशन) होनी चाहिए
6. कार के फ्यूल टैंक को पूरा न भरें
7.शाम के समय कार में ईंधन भरें
8.सुबह के समय कार से यात्रा करने से बचें
9. कार के टायरों को ज़्यादा न भरें, ख़ासकर यात्रा के दौरान।

बिच्छुओं और सांपों से सावधान रहें क्योंकि वे अपने बिलों से बाहर निकलेंगे और ठंडी जगहों की तलाश में पार्क और घरों में प्रवेश कर सकते हैं।

खूब पानी और तरल पदार्थ पियें,सुनिश्चित करें कि गैस सिलेंडर को धूप में न रखें, सुनिश्चित करें कि बिजली मीटरों पर अधिक भार न डालें और एयर कंडीशनर का उपयोग केवल घर के व्यस्त क्षेत्रों में करें, विशेषकर अत्यधिक गर्मी के समय में। और दो तीन घंटे के बाद 30 मनिट्स का रेस्ट ज़रूर दे। बाहर 45-47° घर पे AC 24-25° पर ही चेलाएँ,सेहत और तबियत ठीक रहेगी सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में आने से बचें, खासकर सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच।

अंत में: कृपया इस जानकारी को जरूर साझा करें क्योंकि सब लोग नहीं जानते होंगे और हो सकता है कि वे इसे पहली बार पढ़ रहे हों।

सादर, नागरिक सुरक्षा महानिदेशालय

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Wednesday 9am - 5pm
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