23/08/2026
# भारत की सॉफ्ट पावर बन सकती है अर्धनारीश्वर चिकित्सा वेलनेस न्यूरोथेरेपी : बांसुरी स्वराज
# # आरोग्य पीठ के रजत जयंती वर्ष, 15वें दीक्षांत समारोह एवं वेलनेस न्यूरोथेरेपी दिवस में देशभर से जुटे साधक; ‘श्रवणन निदान’ प्रशिक्षण कार्यशाला का भी हुआ समापन
**नई दिल्ली।** आरोग्य पीठ के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में पटेल नगर स्थित आरोग्य पीठ परिसर में **अर्धनारीश्वर चिकित्सा वेलनेस न्यूरोथेरेपी दिवस, 15वाँ दीक्षांत समारोह तथा तीन दिवसीय ‘श्रवणन निदान’ प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन समारोह** भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्यार्थियों, चिकित्सकों, प्रशिक्षकों एवं गणमान्य नागरिकों सहित लगभग **165 लोगों** ने भाग लिया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सांसद **सुश्री बांसुरी स्वराज** ने कहा कि आरोग्य पीठ ने अर्धनारीश्वर चिकित्सा वेलनेस न्यूरोथेरेपी को जिस मुकाम तक पहुँचाया है, वह भारत की पारंपरिक ज्ञान-विज्ञान परंपरा को वैश्विक प्रतिष्ठा दिलाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा लालकिले से राष्ट्र की प्रगति के लिए प्रतिपादित ‘सप्तधारा’ में सातवीं धारा के रूप में उल्लिखित **‘सॉफ्ट पावर’** का आशय भारत के ज्ञान, विज्ञान, संस्कृति और प्राचीन चिकित्सा परंपराओं को विश्व के सामने प्रभावी रूप में प्रस्तुत करना है। अर्धनारीश्वर चिकित्सा वेलनेस न्यूरोथेरेपी इस संकल्प को साकार करने का एक सशक्त माध्यम बन सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत के पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान को प्रमाणिकता, प्रशिक्षण और कौशल विकास के साथ जन-जन तक पहुँचाया जाए तो इससे एक ओर बीमार लोगों को सरल एवं सुलभ स्वास्थ्य सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए सम्मानजनक स्वरोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। गाँव-गाँव में स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार की आवश्यकता को देखते हुए यह विधा देश के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
अपनी माता एवं पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय **श्रीमती सुषमा स्वराज** को भावपूर्ण स्मरण करते हुए बांसुरी स्वराज ने कहा, “आज से ठीक 20 वर्ष पूर्व, वर्ष 2006 में आरोग्य पीठ के प्रथम वार्षिकोत्सव की अध्यक्षता मेरी माता ने की थी। उस समय उन्होंने इस भारतीय ज्ञान-विज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया था। आज आरोग्य पीठ के रजत जयंती वर्ष में यहाँ उपस्थित होकर मैं देख रही हूँ कि वह छोटा-सा प्रयास एक व्यापक अभियान बन चुका है। जिस समर्पण के साथ इस कार्य का विस्तार हुआ है, वह निस्संदेह देश और दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने भारतीय चिकित्सा एवं आरोग्य परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए आयुष मंत्रालय को विशेष महत्व दिया है। अर्धनारीश्वर चिकित्सा भी भारत की ऐसी ही मौलिक ज्ञान परंपरा है, जिसे वैज्ञानिक अध्ययन, व्यवस्थित प्रशिक्षण और प्रमाणिक शोध के माध्यम से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
सुश्री स्वराज ने आरोग्य पीठ के संस्थापक **गुरुदेव आचार्य डॉ. रामगोपाल दीक्षित** को शुभकामनाएँ देते हुए कहा, “आज दुनिया भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है। आरोग्य पीठ के सभी विद्यार्थी पूरी निष्ठा, परिश्रम और लगन से कार्य करें। एक उज्ज्वल भविष्य आपकी प्रतीक्षा कर रहा है।” उन्होंने सभी साधकों और प्रशिक्षुओं को वेलनेस न्यूरोथेरेपी दिवस की शुभकामनाएँ भी प्रदान कीं।
# # डॉ. लाजपत राय मेहरा की विरासत के सच्चे संवाहक हैं आचार्य दीक्षित : आचार्य लोकेश मुनि
समारोह के विशिष्ट अतिथि, **अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक तथा ‘विश्व शांति दूत’ पूज्य आचार्य डॉ. लोकेश मुनि** ने कहा कि स्वर्गीय सुषमा स्वराज अत्यंत सरल, संवेदनशील और भारतीय ज्ञान परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ व्यक्तित्व थीं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उन्होंने भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए। आज उनकी पुत्री बांसुरी स्वराज ने आरोग्य पीठ के कार्यक्रम में उपस्थित होकर उसी विचार और परंपरा को आगे बढ़ाया है।
आचार्य लोकेश मुनि ने कहा, “जब मैं डॉ. लाजपत राय मेहरा की विरासत को देखता हूँ तो उनके प्रतिबिंब के रूप में आचार्य डॉ. रामगोपाल दीक्षित दिखाई देते हैं। दोनों में मुझे एक ही संकल्प, एक ही दिशा और मानवता की सेवा का समान भाव दिखाई देता है। यदि इस विज्ञान का कोई सच्चा उत्तराधिकारी है, जिसने इसे सरकारी मान्यता दिलाने, पाठ्यक्रमों में स्थापित करने तथा देश-दुनिया में हजारों लोगों तक पहुँचाने का कार्य किया है, तो वह आचार्य डॉ. रामगोपाल दीक्षित हैं।”
उन्होंने कहा कि वे आचार्य दीक्षित को पिछले लगभग 22 वर्षों से जानते हैं और उनके कार्य, त्याग, तपस्या तथा निरंतर संघर्ष के साक्षी रहे हैं। अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को न्यूरोथेरेपी के विकास एवं विस्तार के लिए समर्पित किया है। इस विज्ञान को देश-दुनिया में स्थापित करना वर्तमान समय की एक बड़ी उपलब्धि है।
# # 28 राज्यों के 226 जिलों में स्वरोजगार और स्वास्थ्य सेवा का माध्यम बनी न्यूरोथेरेपी
आरोग्य पीठ के संस्थापक **गुरुदेव आचार्य डॉ. रामगोपाल दीक्षित** ने संस्था की 25 वर्षों की यात्रा और उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज भारत के **28 राज्यों के 226 जिलों** में प्रशिक्षित छात्र-छात्राएँ एवं युवा वेलनेस न्यूरोथेरेपी के माध्यम से सम्मानजनक स्वरोजगार प्राप्त करने के साथ समाज को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि डॉ. लाजपत राय मेहरा से न्यूरोथेरेपी के मूल सूत्र सीखने के बाद उन्होंने एसिड-अल्कलाइन संतुलन की अवधारणा का गहराई से अध्ययन किया। उन्हें इसमें भारतीय दर्शन के अर्धनारीश्वर स्वरूप—शिव और शक्ति, संरचना और रसायन तथा शरीर की परस्पर पूरक शक्तियों के संतुलन—का वैज्ञानिक आधार दिखाई दिया। इसके बाद वेदों, शास्त्रों और भारतीय ज्ञान परंपरा में इसके सूत्रों की खोज करते हुए इसे **‘अर्धनारीश्वर चिकित्सा वेलनेस न्यूरोथेरेपी’** के रूप में व्यवस्थित करने तथा भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर मान्यता दिलाने के अभियान में जुट गए।
आचार्य दीक्षित ने बताया कि आरोग्य पीठ ने उपचार के साथ-साथ रोग-निदान के क्षेत्र में भी पाँच महत्वपूर्ण विधियों को व्यवस्थित किया है। इस **‘पंचविध निदान’** में दर्शन, स्पर्शन, श्रवणन, घ्राणन और अनुमानन निदान सम्मिलित हैं। पिछले तीन दिनों से विद्यार्थियों को ‘श्रवणन निदान’ का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें स्वर, ताल, लय, गति, उच्चारण, श्वास तथा शरीर से उत्पन्न विभिन्न ध्वनियों के माध्यम से स्वास्थ्य-संकेतों को समझने का अभ्यास कराया गया।
उन्होंने कहा कि अर्धनारीश्वर चिकित्सा वेलनेस न्यूरोथेरेपी एक सरल, साधनरहित एवं व्यवहारिक स्वास्थ्य-विधा है। इसमें न दवा की आवश्यकता होती है और न ही महँगी मशीनों की। इसे सीखना और सामान्य जन तक पहुँचाना अपेक्षाकृत सरल है। उन्होंने इसे भगवान शिव से जुड़ी भारतीय आरोग्य परंपरा बताते हुए कहा कि योग विद्या, अर्धनारीश्वर विद्या और आयुर्वेद विद्या—ये तीनों मानव जीवन में संतुलन, स्वास्थ्य और आरोग्य की दिशा प्रदान करती हैं। इनमें अर्धनारीश्वर विद्या शरीर की परस्पर पूरक शक्तियों के संतुलन का अद्भुत विज्ञान है।
# # रजत जयंती वर्ष में एक लाख लोगों को प्रशिक्षण देने का संकल्प
भावी योजनाओं की जानकारी देते हुए आचार्य दीक्षित ने कहा कि आरोग्य पीठ ने अपने रजत जयंती वर्ष में **एक लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य** निर्धारित किया है। अर्धनारीश्वर चिकित्सा वेलनेस न्यूरोथेरेपी के तीन जॉब रोल कौशल विकास व्यवस्था में स्वीकृत हो चुके हैं और विश्वविद्यालय स्तर पर इसके पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इस विधा से संबंधित स्वास्थ्य-शिक्षा सामग्री राष्ट्रीय मंचों तक भी पहुँची है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रमाणिक दस्तावेजीकरण तथा परिणाम आधारित कार्यों के माध्यम से यह विधा भविष्य में आयुष व्यवस्था का अंग बनेगी और भारत सहित विश्वभर में प्राथमिक स्वास्थ्य सहयोग की प्रभावी पद्धति के रूप में स्थापित होगी।
आचार्य दीक्षित ने अपने सभी शिष्यों और विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा, “हमारी जिम्मेदारी केवल एक अच्छा थेरेपिस्ट बनने तक सीमित नहीं है। हमें एक समर्पित कार्यकर्ता बनकर इस ज्ञान को घर-घर तक पहुँचाना है। हम सभी संगठित होकर कार्य करेंगे तो लोगों को आरोग्य मिलेगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा और भारत अपनी ज्ञान-शक्ति के बल पर विश्व की अग्रणी शक्ति बनेगा।”
# # भगवान शिव की प्रत्यक्ष कृपा का परिणाम है यह अभियान : महंत महादेव दास
केदारनाथ से पधारे पूज्य **महंत महादेव दास जी महाराज** ने कहा कि अर्धनारीश्वर विद्या भगवान शिव की दिव्य आरोग्य विद्या है। आचार्य डॉ. रामगोपाल दीक्षित जिस निष्ठा के साथ इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं, वह भगवान महादेव की प्रत्यक्ष कृपा और आशीर्वाद का परिणाम है।
उन्होंने कहा, “आचार्य दीक्षित देश की महत्वपूर्ण धरोहर हैं और मानवता के आरोग्य के लिए अद्भुत कार्य कर रहे हैं। मैं भगवान शिव से प्रार्थना करता हूँ कि वे इस अभियान को और अधिक शक्ति, व्यापकता तथा सफलता प्रदान करें।” उन्होंने स्वर्गीय सुषमा स्वराज से जुड़े अपने पुराने संस्मरण भी साझा किए और आरोग्य पीठ परिवार को शुभाशीष प्रदान किया।
# # डॉ. लाजपत राय मेहरा को अर्पित किए श्रद्धासुमन
कार्यक्रम में न्यूरोथेरेपी के जनक **डॉ. लाजपत राय मेहरा** का भावपूर्ण स्मरण किया गया। अतिथियों, आचार्यों, विद्यार्थियों एवं आरोग्य पीठ परिवार के सदस्यों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके द्वारा प्रारंभ किए गए मानव-सेवा के अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
समारोह का प्रभावी मंच संचालन प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं आरोग्य पीठ के विद्या विकास एवं अनुसंधान विभाग के निदेशक **श्री राजेंद्र गोयल** ने किया। प्रसिद्ध उद्योगपति **श्री श्यामलाल मित्तल** विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त अनेक सामाजिक, आध्यात्मिक, शैक्षणिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम का समापन भारत की प्राचीन आरोग्य परंपरा को वैज्ञानिक स्वरूप में विश्वभर तक पहुँचाने, प्रशिक्षित एवं संस्कारित थेरेपिस्ट तैयार करने तथा **“स्वस्थ व्यक्ति–समर्थ समाज–सशक्त भारत”** के संकल्प के साथ हुआ।