Ch. Brahm Prakash Ayurved Charak Sansthan

Ch. Brahm Prakash Ayurved Charak Sansthan University

Important !!!
06/11/2020

Important !!!

23/06/2020

बाबा रामदेव कुछ भी बनाएं हम तो जब "क्लोरोफ्लोरो लसडभसड़" जैसे नाम की कोई अंग्रेज़ी दवाई आएगी तभी मानेंगे कि कोरोना की दवाई बन गई है

14/06/2020

सीरीयल्ज़ का हीरो, फ़िल्मों का हीरो, क्रिकेट के सबसे बड़े हीरो धोनी का किरदार निभाने वाला हीरो, अपनी आख़िरी फ़िल्म में सुसाइड न करने और ज़िंदगी को गले लगाने के संदेश देने वाली फ़िल्म का हीरो आत्महत्या कर लेता है, क्यूँकि उसे डिप्रेशन हो गया था...वो असल में हीरो था ही नहीं...
सुबह से शाम तक वर्क प्लेस में खटने वाले,घर में बीवी और ऑफ़िस में बॉस की डाँट खाने वाले, बच्चे की पढ़ाई के लिए पैसे जोड़ने के लिए अपनी कई ख़ुशियाँ क़ुर्बान करने वाले, अपने माता पिता का ध्यान रखने वाले आम इंसान होते हैं असली हीरो...
Choose Your Heroes Wisely !!!

12/06/2020
12/06/2020

आज मैं एक बड़े मेडिकल स्टोर से अपने लिए मास्क ख़रीदने गया ।
मैं मेडिकल जाते समय मास्क कार में रखना भूल गया था तो सोचा ख़रीद लूं ।।
मैंने जब 5 मास्क मांगे तो तुरंत उन्होंने एक पैकेट में हाथ डालकर खुले मास्क निकाल कर मुझे दे दिए ।
मुझे मास्क देने के पहले उन्होंने एक अन्य मरीज़ से नोट लेकर गिने थे और दराज़ खोल कर दराज़ में नोट रखे थे ।
स्टोर के अन्य लड़के भी इस तरह दवा पैकेट में रखना , दवा देना मास्क देना, पैसे लेना जैसे कार्य कर रहे थे ।
लेकिन हर नए स्पर्श के बाद वे सैनिटाइजर इस्तमाल करते नहीं दिखे ।
इस तरह मुझे जो खुले मास्क, हाथ से निकाल कर एक अन्य पैकेट में रख कर उन्होंने दिए, वे मास्क यदि संक्रमित हों तो भी, मैं उन्हें सीधे मुँह और नाक में पहन लूंगा और , मुझे
संक्रमित होने का खतरा रहेगा।
साथ ही समझना होगा कि, मेडिकल स्टोर क्योंकि मरीजों से लेन देन कर रहे होते हैं तो संक्रमण का खतरा अधिक होता है ।
इस तरह की गलती अस्पतालों में इंचार्ज सिस्टर भी मास्क डॉक्टर्स और अन्य स्टाफ को देते समय अनभिज्ञता में करती हैं ।
क्या करना चाहिए :
1 .आदर्श स्थिति यह है कि बिना खुले पैकेट को खरीदा जाए
भले उसमें 10 या 100 मास्क हों ।
और उस पैकेट को कुछ घंटों बाद ही खोला जाए सावधानीपूर्वक । पैकेट खोलने के बाद हाथ धोएं या सैनिटाइजर का उपयोग करें तभी मास्क पहनें ।
महंगे मास्क सिंगल भी पैक्ड ही मिलते हैं । लेकिन वे आमजन के लिए आवश्यक नहीं
2. यदि फुटकर , खुले मास्क लेना ही पड़े तो मास्क देने वाले को चाहिए कि वह अपने हाथ sanitizer से पहले साफ करे । मास्क लेने वाला उस खरीदे मास्क को 2 घंटे धूप में रख दे तो बेहतर ।
3. इस तरह के मास्क खरीदने और पहनने से कहीं बेहतर साफ कपड़े से मुँह नाक ढंकना या घर में कपड़े से बने मास्क का उपयोग करना होगा ।
4. N 95 मास्क को अधिकतम छः घंटे के उपयोग के बाद
एक पैकेट में रखा जा सकता है । फिर इस मास्क को पांचवे दिन के बाद आप फ़िर से उपयोग कर सकते हैं।
इस तरह से पुनः उपयोग आप एक मास्क का 5 बार कर सकते हैं।
यदि आपके पास 5 मास्क हैं तो यह 25 बार के लिए उपयोग हो जाएगा । हालांकि आम लोगों के लिए N95 की आवश्यकता नहीं है ।
इस तरह का उपयोग डॉक्टर, नर्स को करना है ।
मास्क के पांचवें सायकल के बाद उसे सही ढंग से डिस्पोज़ कर देना होगा ।
5. मास्क हमेशा नाक तक ढंक कर पहनें और बात करते समय नीचे न करें ।
बहुत से लोग नाक पर मास्क नहीं लगाते जो कि ग़लत है ।
साथ ही मास्क पहनने का अर्थ यह नहीं कि दूरी का ध्यान न रखें ।
मास्क के बावजूद दूर से बात करें ।
मेरे ओपीडी पर आने वाले कुछ लोग मास्क पहन कर अंदर आते हैं और मुझे सम्मान देने मास्क नीचे कर बात करने लगते हैं । ऐसे में वे सम्मान के साथ कोरोना भी भेंट कर सकते हैं या ग्रहण भी ।
कभी कोई पास आ ही जाए तो बात न करें , दूसरी ओर चेहरा कर लें ।
यह वायरस बात करने , हंसने से भी फैलता है ।
इस तरह की सामान्य किंतु अहम जानकारियां अपने परिवारजन , बच्चों इत्यादि तक पंहुचाईये ।
मास्क हमारे जीवन का हिस्सा अब लंबे समय रहेंगे , जब हम
शर्ट इन करना , साड़ी पहनना , टाई पहनना जैसी चीजें
कभी न कभी सीखते हैं तो ज़रा सा प्रयास और जानकारी मास्क सही ढंग से पहनने पर भी ।
आख़िरकार यह हमारे एवं औरों के लिए एवं देश के लिए जीवन रक्षक है ।

10/06/2020

*कोरोना का उपचार*
सामान्य जुकाम का मुख्य कारण वायरस इन्फेक्शन ही है । उसके अनेक प्रकार के वायरस होते हैं,जिनमें सबसे अधिक जुकाम वाले वायरस कोरोना−परिवार के ही हैं । हाल वाला कोविड−१९ सबसे नये प्रकार का कोरोना वायरस है । इस नये कोरोना का रोना यह है कि इसकी वैक्सीन नहीं है । किन्तु जिन पुराने कोरोना वायरसों के वैक्सीन हैं वे वैक्सीन कितने लोगों ने लिये,और नहीं लिये तो क्या जुकाम से मर गये?
अगर एलोपैथी की बात करे तो लगभग २०० प्रकार के जुखाम के वायरस होते है , पहले आप अपने कफ की पैथोलॉजी लैब में जांच कराए उसके पश्चात जिस प्रकार का वायरस मिले उसका उपचार कराएं; किन्तु जबतक पैथोलॉजिकल जाँच की रिपोर्ट आयेगी तबतक वायरस की आयु ही पूरी हो जायगी और जुकाम स्वतः छूट जायगा । बहुत कम मामले ऐसे होते हैं जिनमें एक सप्ताह से अधिक काल तक जुकाम रहता है,कुछ कोरोना वायरसों की आयु दो सप्ताह तक की होती है । कोविड−१९ कोरोना वायरस की आयु भी दो सप्ताह की है । कोविड−१९ से कोई व्यक्ति संक्रमित हो जाय तो दो सप्ताह तक अपने घर में आयसोलेशन में रहे और रहन−सहन एवं खान−पान में सावधानी बरतें,९४⋅३% मामलों में कोरोना स्वतः छूट जायगा और शेष ५⋅७% लोग मरेंगे यह अभी तक के आँकड़े बताते हैं — किन्तु उन ५⋅७% में से ४⋅७५% लोग पहले से ही किसी न किसी जानलेवा रोग से पीड़ित हैं और केवल ०⋅९५% लोग ही किसी गम्भीर रोग से पीड़ित नहीं हैं । किन्तु ०⋅९५% तो प्राकृतिक मृत्यु दर है,रोग हो या न हो हर मनुष्य को मरना तो है ही ।
किन्तु यह तो औसत है,कुछ भूभाग ऐसे हैं जहाँ कोरोना का प्रकोप अधिक है । उसका कारण उन क्षेत्रों पर तात्कालिक ज्योतिषीय दुष्प्रभाव है । परन्तु कैसा भी दुष्प्रभाव हो,उन क्षेत्रों में भी बिना गम्भीर रोग वाले कोविड−१९ रोगियों की मृत्यु दर लगभग ०⋅९५% ही है । दुष्प्रभाव इस बात का है कि संक्रमित लोगों की संख्या उन क्षेत्रों में अधिक है ।
कोविड−१९ से संक्रमण हो जाने पर रोग के लक्षणों की गलत सूची के कारण जो लोग रोगी नहीं है उनको भी संक्रमित बताया जाता है । जैसे कि थर्मल जाँच गलत तरीके से करना । थर्मल जाँच सही तरीके से भी हो तो उसे कोविड−१९ कहना गलत है,वह तो साधारण बुखार है । जुकाम के साथ भी कई बार साधारण बुखार होता है और उसके अधिकांश कारण भी कोरोना के अनेक पुराने वायरस हैं । थर्मल जाँच उन सबको कोरोना से संक्रमित बता देता है । तब कोविड−१९ के क्वारण्टीन केन्द्र में उस व्यक्ति को डाल देते हैं जहाँ पहले से हवा में भी कोविड−१९ के वायरस तैरते रहते हैं और बिचारा वहाँ कोविड−१९ से संक्रमित हो जाता है । क्वारण्टीन केन्द्र में भेजना गलती नहीं है,केवल थर्मल जाँच पर भरोसा करना गलत है । ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनपर बहस करना इस लेख का उद्देश्य नहीं है ।
इस लेख का उद्देश्य है सामान्य जुकाम वाला कोरोना हो या नये प्रकार का कोरोना,ऐसा उपचार बता रहा हूँ जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है और अन्य कोई गम्भीर रोग न हो तो कोरोना वायरसों के भागने की गारण्टी है ।
सबसे कारगर उपचार है वाष्प−स्नान । बड़े तौलिये या चादर से पूरे शरीर को ढाँपकर भाप सूँघे ।
कोविड−१९ के वायरस का पसन्दीदा स्थान फेफड़ा ही है,अतः उपरोक्त वाष्प−स्नान नियमित रूप से करें । सामान्य जुकाम का भी यही उपचार है । चर्मरोगों में भी लाभ होगा,पसीने के रन्ध्र स्वच्छ हो जायेंगे,अनेक रोगों में लाभ होगा,और मन प्रसन्न रहेगा । वाष्प−स्नान से तुरन्त पहले या तुरन्त बाद ठण्डे पानी से स्नान न करें । वाष्प−स्नान करने पर पसीना खूब बहेगा जो रक्त का मैल भी निकालेगा — जल खूब पीयें वरना पसीना बहने पर रक्त में जल घट जायगा ।
साथ ही खानपान की सावधानी बरतें । चावल बन्द । केवल रोटी,दाल और सब्जी । देसी गाय का दूध मिले तो सर्वोत्तम । देसी गाय की घी सीने पर मलें और एक चम्मच घी में पके केले का छोटा टुकड़ा तलकर खायें — सीने के भीतर वह घी लस्से की तरह चिपक जायगा । अदरख, काली मिर्च, च्यवनप्राश, तुलसी, विटामिन−सी और डी, आदि का सेवन करें । गला सदैव ढाँपकर रखें, रात में सोते समय भी । रात में पाँव के तलवे में ठण्ड न लगने दें । मच्छरों से बचें क्योंकि मलेरिया आदि के अनेक लक्षण भी कोरोना के कई लक्षणों से मेल खाते हैं ।
सबसे अधिक लाभकारी है प्राणायाम । कठोर प्राणायाम संसार के सारे रोगों की दवा है- आधिभौतिक से लेकर आधिदैविक और आध्यात्मिक रोगों की, और कठोर प्राणायाम के साथ योगमार्ग पर आगे बढ़ते रहेंगे तो “संसार” नाम के सबसें खतरनाक रोग से भी सदा के लिये पिण्ड छूट जायगा ।
उचित आहार, उचित विहार, समय पर सोना−जागना, कुत्सङ्ग से दूरी, ग्रहशान्ति और पूजापाठ आदि भी प्राणायाम के साथ चलते रहने चाहिये, और साथ ही यह आत्मविश्वास कि मैं सारे रोगों को निकाल रहा हूँ । ग्रहशान्ति भी अनिवार्य है क्योंकि पिछले कर्मों के फल या तो भोगने ही पड़ेंगे या ग्रहशान्ति करनी पड़ेगी । वरना उपरोक्त सारे उपचार क्षणिक लाभ ही देंगे । केवल ग्रहशान्ति ही पर्याप्त नहीं है, उपरोक्त समस्त उपचार भी ग्रहशान्ति के अङ्ग ही हैं ।
ज्योतिष के अनुसार १४ अप्रैल २०२० से जो सौरवर्ष आरम्भ हुआ है उसका वर्षफल अत्यधिक अशुभ है । देश के लिये शुक्रशान्ति आवश्यक है । भारत शुक्र की वृषराशि में है जो इस वर्ष मृत्युभाव में है । कुछ अच्छे योग भी हैं ।

CBPACS Has Lost a Corona Warrior😢Shri Jag Pravesh Dagar JiLab Technician, CBPACSOur Deepest Condolences are with your fa...
08/06/2020

CBPACS Has Lost a Corona Warrior😢
Shri Jag Pravesh Dagar Ji
Lab Technician, CBPACS
Our Deepest Condolences are with your family. May God give strength to your family to bear this loss. Om Shanti 🕉️

भारत में अब तक लॉकडाउन बड़े देशों की तुलना में सफल रहा है और तमाम विशेषज्ञ जो कह रहे थे कि जून के अंत तक भारत में 30 से 5...
06/06/2020

भारत में अब तक लॉकडाउन बड़े देशों की तुलना में सफल रहा है और तमाम विशेषज्ञ जो कह रहे थे कि जून के अंत तक भारत में 30 से 50 लाख मरीज होंगे उस आंकड़े से भारत काफी दूर है जो राहत की बात है.

लेकिन हम और आप सब ये बात भी जानते हैं कि भारत में लॉकडाउन का पालन उस तरह नहीं किया गया, जैसे किया जाना चाहिए था और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने में लापरवाहियां बरती गयीं.

हर चरण में कुछ ऐसी घटनाएं रहीं जिन्न्होंने सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक बना दिया..

१. मार्च 2020 में दिल्ली में तबलीगी जमात की बैठक
२. प्रवासी मजदूरों का सड़कों पर उतरा रेला
३. लॉकडाउन में अस्थायी ढील के बाद शराब की दुकानों के बाहर भारी भीड़

सबसे बड़ी ट्रेजेडी इसमें प्रवासी मजदूरों के साथ हुई..जिन जिन राज्यों में वो कार्यरत थे उन राज्यों में अधिकारी वेतन, आश्रय और भोजन के रूप में कोई प्रोत्साहन नहीं दे सके, जिसके कारण उन्हें भारी तादाद में सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। और जब राज्य प्रवासी मजदूरों का इंतजाम करने में असफल साबित हो रहे थे तभी उन्हें घर तक पहुंचाने के लिए सुचारु इंतजाम किए जाने चाहिए थे जैसे अभी किए गए हैं।

इस बीच सरकार ने एक काम जो अच्छा किया वो ये कि विदेश में बसे लगभग 10 लाख लोगों को लाने में पूरी मुस्तैदी बरती गयी..ये संख्या कुवैत पर इराक के आक्रमण के बाद लाए गए भारतीयों के मुकाबले बहुत अधिक संख्या है और भारत-पाक बंटवारे 1947-48 में भारत आए 70 लाख लोगों के बाद दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।

लॉकडाउन के चरणों ने भले ही महामारी को कण्ट्रोल में रखा, लेकिन देश को/समाज को इसकी भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ी है। देश में इकोनॉमिक एक्टिविटी लगभग बंद सी ही हैं....सभी कारोबारी चोट झेल रहे हैं, लाखों दिहाड़ी कामगार गरीबी में फंस गए हैं और बेरोजगारी अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है।

कोविड-19 से निपटने आत्मनिर्भर भारत की रणनीति बनाते समय ये बातें मुख्य रूप से याद रखी जानी चाहिए :

* कोरोना कम से कम 2020 तक रहेगा ही.. जब तक इसकी दवाई नहीं बन जाती तब तक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन तो करना ही होगा.

* हमें जिंदगी और आजीविका दोनों बचाने पर जोर देना होगा। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना प्राथमिकता होनी चाहिए..और समय-समय पर जरूरत के मुताबिक लॉकडाउन दोबारा लागू होने के लिए तैयार रहना होगा..

* भारत में कोरोना का विस्तार uneven है....मामले महानगरों में अधिक रहे हैं और करीब आधा देश और अधिकतर ग्रामीण भारत इससे बचा हुआ है..

* अधिकतर मामलों में बीमारी के हल्के लक्षण रहे हैं और अस्पताल में भर्ती होने वाले बहुत कम लोगों को आईसीयू में भर्ती किया गया था..

* चीन और अमेरिका के बीच अविश्वास इस महामारी के कारण चरम पर है और वैश्वीकरण के बजाय स्थानीयकरण की मुहिम भी जोरों पर है। अमेरिका तथा जापान जैसे देशों के कारोबार को नया ठिकाना मुहैया कराने का मौका मिल रहा है। मगर हमें ध्यान रखना चाहिए कि आने वाले हफ्तों में चीन बाकी दुनिया के साथ ज्यादा अड़ियल रुख दिखाएगा..

* आर्थिक मंदी के कारण तेल की कीमतें भी गिर गई हैं। भारत के लिए यह एक लिमिट तक वरदान है क्योंकि भारत को भारी मात्रा में तेल आयात करना पड़ता है। मगर एक लिमिट के बाद इसका यह नुकसान है कि खाड़ी से हमारे प्रवासियों द्वारा घर भेजी जा रही बेहद महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा आनी खत्म हो जाएगी क्योंकि उन लोगों की नौकरियों पर संकट खड़ा हो जाएगा। साथ ही उन्हें बड़ी तादाद में भारत लौटना भी होगा, जिससे रोजगार पर बोझ बढ़ जाएगा, जो पहले ही बोझ तले दबा है..

* भारत इस बात से संतुष्ट हो सकता है कि उसके पास खाद्यान्न का बड़ा भंडार और भारी विदेशी मुद्रा भंडार तो है ही. आने वाले महीनों में मुफ्त खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम के बावजूद अनाज की कमी नहीं आएगी। अधिकतर ग्रामीण भारत समेत करीब आधा देश वायरस से प्रभावित नहीं हुआ है..

* देश इस बात से भी संतोष महसूस कर सकता है कि उसके मेडिकल सेक्टर और मेडिकल/पैरामेडिकल स्टाफ ने महामारी के दौरान शानदार काम किया है। साथ ही अक्सर रेलवे, बैंक, विमान और डाक सेवा जैसी जिन सेवाओं का आम दिनों में खास जिक्र नहीं किया जाता, संकट के दिनों में उन्होंने जीवनरक्षक सेवाओं का काम किया है और सशस्त्र बल हमेशा की तरह मुस्तैद रहे हैं.

* लॉकडाउन के चलते प्रदूषण के स्तरों में नाटकीय गिरावट आई, जिससे हमें एक बार फिर ताजी हवा, साफ नदियों और नीले आसमान का लाभ और आनंद मिला है। इसने हमें बिना सोचे-विचारे अंधाधुंध खपत में लिप्त रहने के बजाय जरूरतें भर पूरी करने के पारंपरिक भारतीय मूल्यों की याद भी दिलाई है.

आगे की लड़ाई के लिए एक बात बिलकुल साफ़ है कि कोरोना से निपटने के साथ ही भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को फौरन पटरी पर लाने पर भी ध्यान देना होगा...एक को नजरअंदाज कर केवल दूसरे पर ध्यान देना आत्मघाती होगा.

One of the most beautiful created picture you see.If God didnt make all  humans ,races ,colors ,castes as one than no bl...
06/06/2020

One of the most beautiful created picture you see.
If God didnt make all humans ,races ,colors ,castes as one than no blood transfusion of different races,No organ transplantation ,no skin graft would ever be possible

We are all one ❤

Medical Lab Tech Katie corley coughed on two petri dishes One with mask and one without a mask .The Conclusion and impor...
06/06/2020

Medical Lab Tech Katie corley coughed on two petri dishes
One with mask and one without a mask .
The Conclusion and importance of Wearing mask is clear here .

06/06/2020

Ek patient ne bheja hai

Dear Doctor,

I am taking the following for COVID prevention.

Yoga + Walk + Lemon Water + Turmeric powder in water + chayvanprash + Kachha Garlic + Kachha Ginger + Almond Kabuli + Anzeer Kabuli + Khurmani + Kali mirch + Laung in the mouth + Gargles of hot water and salt + Drinking hot water only full day + Tulsi Batti ( Patanjali( + Giloi batti ( Patanjali ) + Neem Batti ( Patanjali ) + Arsenic Albs Homeopethic Medicine 5 drops in two spoons of water 5 days a month + Camphor 1M tablets as suggested by owner of Bajaj plus hcqs plus azithral plus ivermectin.
Please suggest if I should take anything more to become immortal

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