Dr J.M.Tripathi

Dr  J.M.Tripathi homoeopathic doctor

17/04/2026
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30/03/2026

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19/03/2026

जब आपको किसी के साथ बुरा करके बुरा न लगे तो समझ लीजिए कि आपके चरित्र मे बुराई आ गई है।

10/03/2026

एक गाँव की एक बहू सफाई कर रही थी मुँह में सुपारी थी पीक आया तो उसने गलती से यज्ञवेदी में थूक दिया। उसे आश्चर्य तब हुआ जब उसका थूक स्वर्ण में बदल गया। अब तो वह प्रतिदिन जान बूझकर वेदी में थूकने लगी और उसके पास धीरे-धीरे स्वर्ण बढ़ने लगा।

महिलाओं में बात तेजी से फैलती है इसलिऐ कई और महिलाएं भी अपने-अपने घर में बनी यज्ञवेदी में थूक-थूक कर सोना उत्पादन करने लगीं।

धीरे-धीरे पूरे गाँव में यह सामान्य चलन हो गया। सिवाय एक महिला के, उस महिला को भी अनेक दूसरी महिलाओं ने उकसाया, समझाया- “अरी ! तू क्यों नहीं थूकती ?” “जी, बात यह है कि मैं अपने पति की अनुमति बिना यह कार्य हर्गिज नहीं करूँगी और जहाँ तक मुझे ज्ञात है वह अनुमति नहीं देंगे।”

किन्तु ग्रामीण महिलाओं ने ऐसा वातावरण बनाया कि आखिर उसने एक रात डरते-डरते अपने पति को पूछ ही लिया। ‘

“खबरदार जो ऐसा किया तो, यज्ञवेदी क्या थूकने की चीज़ है ?” पति की गरजदार चेतावनी के आगे बेबस वह महिला चुप हो गई

पर जैसा वातावरण था और जो चर्चाएँ होती थी, उनसे वह साध्वी स्त्री बहुत व्यथित रहने लगी। खास कर उसके सूने गले को लक्ष्य कर अन्य स्त्रियाँ अपने नए-नए कण्ठ-हार दिखाती तो वह अन्तर्द्वन्द में घुलने लगी।

पति की व्यस्तता और स्त्रियों के उलाहने उसे धर्मसंकट में डाल देते। “यह शायद मेरा दुर्भाग्य है, अथवा कोई पूर्वजन्म का पाप कि एक सती स्त्री होते हुए भी मुझे एक रत्ती सोने के लिए भी तरसना पड़ रहा है, शायद यह मेरे पति का कोई गलत निर्णय है, ओह ! इस धर्माचरण ने मुझे दिया ही क्या है ?

जिस नियम के पालन से दिल कष्ट पाता रहे उसका पालन क्यों करूँ ?” और हुआ यह कि वह बीमार रहने लगी। पतिदेव इस रोग को ताड़ गए और उन्होंने एक दिन ब्रह्म मुहूर्त में ही सपरिवार ग्राम त्यागने का निश्चय किया। गाड़ी में सारा सामान डालकर वे रवाना हो गए

सूर्योदय से पहले-पहले ही वे बहुत दूर निकल जाना चाहते थे। किन्तु ! अरे ! यह क्या ? ज्यों ही वे गाँव की कांकड़ (सीमा) से बाहर निकले ! पीछे भयानक विस्फोट हुआ। पूरा गांव धू-धू कर जल रहा था। सज्जन दम्पत्ति अवाक् रह गए। अब उस स्त्री को अपने पति का महत्त्व समझ आ गया।

वास्तव में, इतने दिन गाँव बचा रहा, तो केवल इस कारण, कि उसका परिवार गाँव की परिधि में था।

fascination & love
28/02/2026

fascination & love

18/02/2026

एक सम्मानित स्कूल मास्टर ने अभी-अभी रिटायरमेंट लिया था।
वे और उनकी पत्नी भोपाल के एक फ्लैट में रहते थे।

दशहरा आने पर उन्होंने अपने गृहनगर जाने का निश्चय किया।

रवाना होने से पहले मास्टर ने सोचा —
“हमारे रहने पर तो कोई डर नहीं,
पर अगर हमारी गैरमौजूदगी में कोई चोर घर में घुस गया तो?
वह अलमारी तोड़ देगा, सब सामान इधर-उधर फैला देगा,
जबकि घर में पैसे वैसे कुछ हैं ही नहीं!”

तो घर को नुकसान से बचाने के लिए,
उन्होंने मेज पर ₹1000 रखे
और साथ में एक पर्ची भी रखी।

“प्रिय अज्ञात चोर,”

आपको मेरे घर में घुसने के लिए की गई मेहनत पर हार्दिक बधाई!
पर दुर्भाग्यवश मैं एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति हूँ,
जो केवल अपनी पेंशन पर गुजर-बसर करता है।
इसलिए घर में कोई कीमती सामान नहीं है।

मुझे अफसोस है कि आपकी मेहनत और कीमती समय व्यर्थ जाएगा।
इसलिए आपकी मेहनत के सम्मान में
यह ₹1000 स्वीकार करें।

साथ ही, आपके “पेशे” (चोरी ) में
अधिक सफलता पाने के लिए कुछ सुझाव नीचे दिए गए हैं
मास्टर साहब की “सलाह” इस प्रकार थी:

8वीं मंज़िल पर – एक भ्रष्ट मंत्री रहता है
7वीं मंज़िल पर – एक धूर्त प्रॉपर्टी डीलर
6वीं मंज़िल पर – एक सहकारी बैंक का चेयरमैन
5वीं मंज़िल पर – एक बड़ा उद्योगपति
4वीं मंज़िल पर – एक प्रसिद्ध वकील
3वीं मंज़िल पर – एक भ्रष्ट नेता

“इन सबके पास सोने और पैसे के ढेर हैं।
आपकी ‘व्यावसायिक सफलता’ से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा!
क्योंकि ये पुलिस में शिकायत भी नहीं करेंगे!”
दशहरा खत्म होने के बाद जब मास्टर घर लौटे,
तो उन्होंने मेज़ पर एक बड़ा बैग देखा।
अंदर ₹10 लाख नकद रखे थे!
और साथ में एक पत्र —

“आदरणीय गुरुजी,

आपके मार्गदर्शन और शिक्षण के लिए हार्दिक धन्यवाद!
मैंने आपकी सलाह मानकर काम किया और मिशन सफल हुआ!
आभार स्वरूप यह छोटी-सी भेंट स्वीकार करें।

आपका आशीर्वाद और ज्ञान
आगे भी यूँ ही मिलता रहे...

आपका शिष्य – चोर

मास्टर ने पत्र पढ़ा और हँसते हुए बोले —

मैंने सोचा था मैं रिटायर हो गया हूँ,
पर लगता है मेरी शिक्षा सेवा अभी भी जारी है!”

*Teachers Never Retire

18/02/2026

घर-बार,जमीन-जायदाद बच्चों के नाम लिखकर मत दीजिए..???

अपने घर में आप स्वयं रहिए।

ज़रूरत पड़े तो बेटे-बेटियाँ घर बनाकर ‘यौवनाश्रम’ में रहें।

परिपक्व उम्र में आकर हममें से कई लोगों के लिए यह कहानी शायद काम आ सकती है…

दीनानाथ शर्मा साहब पिछले कुछ महीनों से कुछ-कुछ भाँप रहे थे।

उन्हें रिटायर हुए तीन साल हो चुके थे। वे सरकारी उच्च पद पर कार्यरत थे। अच्छी-खासी पेंशन पाते हैं। पत्नी का देहांत बहुत पहले हो चुका था।

दोनों बेटों को उन्होंने बड़े जतन से पाला-पोसा। पिता और माता—दोनों का स्नेह देकर अच्छी तरह पढ़ाया-लिखाया और वे दोनों स्थापित हो गए। फिर बड़े बेटे की शादी कर दी। एक पोता हुआ। उनकी खुशी का ठिकाना न रहा।

इसके बाद छोटे बेटे ने अपनी पसंद की लड़की खोजकर पिता को बताया, तो उन्होंने सहर्ष उस लड़की को घर में बहू बनाकर ले आए। रिटायर होने से पहले ही बड़े बेटे की शादी हो चुकी थी, अब छोटी बहू भी आ गई।

दीनानाथ जी अब पोते के साथ काफी समय बिताते हैं। घर-खर्च का बड़ा हिस्सा भी वे ही उठाते हैं।

एक दिन सुबह ईज़ी चेयर पर बैठकर अख़बार पढ़ रहे थे। तभी बड़ी बहू की आवाज़ सुनाई दी—

“आज सामान कम है, रात में खाना नहीं बनेगा।

वह नौकरी करती है और जेठानी से कह रही थी।

इस घर में बेटों के जन्म से पहले से ही काम करने वाली सरिता जी है। वह उनके बेटों से उम्र में काफ़ी बड़ी है। सरिता जी ने मातृहीन दोनों बेटों को माँ की तरह स्नेह देकर पाला था।

सरिता जी बोली—“ सामान कोई ओर ले आएगा।

बड़ी बहू ने कहा—“क्यों? पापा तो बैठे ही रहते हैं, रोज़ बाज़ार कर ही सकते हैं।

दीनानाथ जी के कानों में यह बात गूँज गई। समझ गए—घर में उनकी ज़रूरत अब खत्म हो गई है।

अपने मन से बोले—“मन, तू तैयार रह।

इसके बाद बहुओं के व्यवहार में उनके प्रति धीरे-धीरे विरोध झलकने लगा।

एक दिन सुबह बड़े बेटे को गुस्से में बहू से कहते सुना—

“मेरी शर्ट लॉन्ड्री से लाई नहीं?

बड़ी बहू बोली—“नहीं, जाने का समय नहीं मिला।

बड़ा बेटा बोला—“पापा थोड़ा ला नहीं सकते थे? दिन भर तो बैठे ही रहते हैं।

यह बात जब दीनानाथ जी के कानों तक पहुँची, तो उन्होंने सोचा—

“युगधर्म!”

फिर एक दिन छुट्टी के दिन सुबह नाश्ते की मेज़ पर आए, देखा—सब पहले से ही मौजूद हैं।

सरिता जी प्लेट में गरम-गरम लुचियाँ, आलू भाजी और संदेश परोस रही है।

बड़ा बेटा बोला—“बाबा, एक बात थी।

दीनानाथ जी समझ गए कि सबने मिलकर कुछ योजना बनाई है। बोले—“कहो।

बड़ा बेटा बोला—

“बाबा, कल ऑफिस के काम से गाज़ीपुर गया था। काम के बीच समय निकालकर वहाँ की दर्शनीय जगहें देखने गया। नदी के किनारे, स्वास्थ्यकर माहौल में एक बहुत अच्छा वृद्धाश्रम देखा। देखकर सोचा—आप वहाँ सुंदर वातावरण में अपना अंतिम जीवन बिता सकते हैं। हम आते-जाते रहेंगे। क्यों रे भाई, क्या कहता है?”

छोटा बेटा बोला—“हाँ, बहुत अच्छा होगा।

दीनानाथ जी मुस्कुराकर बोले...

“सब सुन लिया। लेकिन बेटा, जैसे तुम मेरे बारे में सोचते हो, वैसे ही मैं भी तुम्हारे बारे में सोचता हूँ। इसलिए तुम्हारे लिए भी मेरा एक प्रस्ताव है। तुम लोग ही क्यों न किसी उपयुक्त और मनोहर वातावरण वाले ‘यौवनाश्रम’ की तलाश करके वहाँ जाकर रहो? घर तो मेरा ही है, पेंशन भी अच्छी मिलती है। सरिता माँ को साथ लेकर हम बाप-बेटी अच्छे से रह लेंगे। तुम लोग आते-जाते रहना।”

इस तरह उन्होंने एक ही चाल में बाज़ी पलट दी।

सरिता मां से बोले...

“सरिता माँ, पुड़िया ठंडी हो रही हैं। ज़रा गरम-गरम ले आओ।

बेटे और बहुएँ सबके सब स्तब्ध रह गए, अवाक होकर बैठे रह गए…

समय बदल रहा है।

इसलिए उचित जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए…

नहीं तो भविष्य में बड़े संकट में पड़ना पड़ सकता है।

आपकी क्या प्रतिक्रिया है..???
अपने अनमोल विचार कमेंट्स में जरूर दीजियेगा।

17/02/2026

“डॉक्टरसाहब आपको जो ठीक लगे कीजिए , आप पर हमे भरोसा है ।”
इससे ज़्यादा ताक़तवर शब्द कोई हैं ही नहीं डाक्टरी की दुनिया में ।
आप भले ही डॉक्टर के रिश्तेदार हों , दोस्त हों , जानपहचान निकाल के गए हों । ताक़तवर व्यक्ति हों , जुगाड़ वाले व्यक्ति हों , पहुँच वाले हों, VIP हों ।

लेकिन डाक्टर सबसे ज़्यादा अपनी जान लड़ाता है जिसने ये वाक्य कहे हों की डॉक्टर साहब आपको जो ठीक लगे करिए , आप पर भरोसा है।
डाक्टर के मन में डर या दबाव का माहौल नहीं होता !
ऐसे में परिणाम हमेशा बेहतर आता है ।

अब आप लोग ज्ञान देंगे की डॉक्टर को तो सबके लिए बराबर होना चाहिए । पर आप जो एक्स्ट्रा चाहते हैं की मेरे फ़ोन कराने से , जुगाड़ लगाने से या अपनी पॉवर दिखाने से आयेगा । जो ज़्यादातर लोग कोशिश करते ही हैं ।
मैं ये बताना चाहता हूँ की इस सब से बड़ा असर डॉक्टर को ये वाक्य बोलने से आता है की आप पर भरोसा है ।
भिन्न भिन्न तरीक़े से जुगाड़ लगाने वाले तो बहुत हैं । जिसकी आदत पड़ चूकी है डॉक्टरों को । एक कान से सुनो , दूसरे से निकालो ।
पर ये बोलने वाले ना के बराबर । जो दिल को छू जाती है बात ।

जलने वाले जब पानी में बदल जाते हैं...👇👇👇हाइड्रोजन खुद जलने वाली गैस है और ऑक्सीजन आग को तेज करती है, लेकिन जब दोनों आपस ...
13/02/2026

जलने वाले जब पानी में बदल जाते हैं...👇👇👇

हाइड्रोजन खुद जलने वाली गैस है और ऑक्सीजन आग को तेज करती है, लेकिन जब दोनों आपस में मिलते हैं तो पानी बन जाता है।

🧪 तथ्य (Fact):
💧 पानी (H₂O) आग बुझाता है, जबकि यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना है — दोनों ही आग को भड़काने वाले होते हैं!

😲 हैरानी की बात है ना?

👉 रसायन विज्ञान (Chemistry) का कमाल यही है:

🔥 हाइड्रोजन बहुत जल्दी जलता है

🌬️ ऑक्सीजन आग को तेज़ करता है

💦 लेकिन जब दोनों मिलकर पानी बनाते हैं, तो वही पानी आग बुझाने लगता है!

📌 अलग-अलग तत्व मिलकर बिल्कुल नए गुण बना सकते हैं।

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