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…एक असिस्टेंट से एनोरेक्टल सर्जन तक — डॉ. सुनील गुप्ता की संघर्षगाथा“हर सफल इंसान की कहानी के पीछे एक ऐसा दौर जरूर होता ...
31/08/2026

…एक असिस्टेंट से एनोरेक्टल सर्जन तक — डॉ. सुनील गुप्ता की संघर्षगाथा

“हर सफल इंसान की कहानी के पीछे एक ऐसा दौर जरूर होता है,
जिसके बारे में दुनिया बहुत कम जानती है।”

यह कहानी है एक ऐसे व्यक्ति की,
जिसने सफलता विरासत में नहीं पाई…

उसे अपने संघर्ष से बनाया।

एक समय था जब डॉ. सुनील गुप्ता की पहचान सिर्फ़ एक मेडिकल असिस्टेंट के रूप में थी।

काम छोटा था या बड़ा—
उनके लिए मायने सिर्फ़ इतना रखता था कि
हर दिन कुछ नया सीखना है।

उन्होंने शायद उस समय कल्पना भी नहीं की होगी
कि जिन हाथों से वे दूसरों के काम में सहायता कर रहे हैं,
एक दिन उन्हीं हाथों पर मरीज अपना भरोसा रखेंगे।

रास्ते में मुश्किलें कम नहीं थीं।

कभी परिस्थितियाँ परीक्षा लेती थीं,
कभी संसाधनों की कमी,
कभी असफलता,
और कभी लोगों की बातें।

लेकिन एक चीज़ लगातार बढ़ती रही—

सीखने की भूख।

उन्होंने हर मरीज को एक किताब की तरह पढ़ा,
हर केस को एक अनुभव की तरह लिया
और हर चुनौती को अपने ज्ञान को बढ़ाने का अवसर बनाया।

फिर आया वह मोड़
जब एक असिस्टेंट की पहचान बदलकर
मेडिकल शिक्षक की पहचान बन गई।

अब वे सिर्फ़ खुद नहीं सीख रहे थे—
दूसरों को भी सिखा रहे थे।

उनके सामने बैठे विद्यार्थी शायद सिर्फ़ चिकित्सा पढ़ रहे थे,
लेकिन डॉ. गुप्ता उन्हें अपने अनुभव से
एक और चीज़ सिखा रहे थे—

“चिकित्सा सिर्फ़ विज्ञान नहीं, इंसानियत भी है।”

लेकिन उनकी मंज़िल अभी दूर थी।

उनके भीतर एक सपना था—
एनोरेक्टल रोगों के उपचार और सर्जरी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने का।

और फिर शुरू हुआ संघर्ष का सबसे कठिन अध्याय।

नई तकनीकें सीखना,
लगातार अध्ययन करना,
मरीजों की समस्याओं को समझना,
हर केस को गंभीरता से लेना
और अपने कौशल को लगातार निखारना।

जब दूसरे लोग आराम कर रहे होते,
तब एक डॉक्टर अपने ज्ञान को और गहरा कर रहा था।

क्योंकि उनका मानना था—

“मरीज के लिए डॉक्टर सिर्फ़ डॉक्टर नहीं होता,
वह उसकी आखिरी उम्मीद भी हो सकता है।”

धीरे-धीरे वर्षों की मेहनत ने आकार लेना शुरू किया।

जिस व्यक्ति ने कभी किसी के साथ खड़े होकर काम सीखा था,
आज वही अपने अनुभव के साथ
मरीजों के सामने खड़ा था।

और फिर लोगों ने उन्हें एक नए नाम से पहचानना शुरू किया—

एनोरेक्टल सर्जन — डॉ. सुनील गुप्ता।

लेकिन इस नाम के पीछे सिर्फ़ एक डिग्री नहीं थी।

इसके पीछे था—

संघर्ष।

इसके पीछे थीं वे रातें
जब थकान के बावजूद पढ़ाई जारी रही।

इसके पीछे थे वे दिन
जब परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आए,
लेकिन कोशिश बंद नहीं हुई।

इसके पीछे थे वे मरीज
जिनके दर्द ने उन्हें और बेहतर डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया।

और इसके पीछे था
एक ऐसा इंसान जिसने अपनी शुरुआत को कभी अपनी कमजोरी नहीं माना।

आज जब वे पीछे मुड़कर देखते हैं,
तो शायद सबसे खूबसूरत बात यह नहीं कि
वे कहाँ पहुँच गए…

बल्कि यह है कि—

उन्होंने शुरुआत कहाँ से की थी।

एक असिस्टेंट…

फिर—

एक मेडिकल शिक्षक…

और आज—

एक अनुभवी एनोरेक्टल सर्जन।

यह सिर्फ़ करियर की कहानी नहीं है।

यह उस विश्वास की कहानी है
कि अगर इंसान सीखने की ललक, मेहनत और धैर्य को अपना साथी बना ले,
तो रास्ते की कठिनाइयाँ भी एक दिन
उसकी सफलता की कहानी लिखती हैं।

क्योंकि—

“मंज़िल तक पहुँचने वाले कदमों की गिनती कोई नहीं करता,
लोग सिर्फ़ मंज़िल देखते हैं।
लेकिन उस मंज़िल तक पहुँचने में
कितनी बार गिरकर उठना पड़ा—
वही असली कहानी होती है।”

आज डॉ. सुनील गुप्ता के नाम के साथ
जो पहचान जुड़ी है,
वह किसी एक दिन की देन नहीं।

वह वर्षों की मेहनत का परिणाम है।

एक असिस्टेंट से शुरुआत हुई थी…
मेडिकल शिक्षक तक सफ़र पहुँचा…
और संघर्ष ने अंततः एक एनोरेक्टल सर्जन को जन्म दिया।

**कहानी अभी खत्म नहीं हुई है…

क्योंकि जो इंसान संघर्ष से बना हो,
उसकी अगली मंज़िल हमेशा पिछली मंज़िल से बड़ी होती है।**

31/12/2025

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🪷 डायबिटिक वाउंड एवं बर्न – आयुर्वेदिक कारण व उपचार✍️ प्रस्तुतकर्ता – डॉ. सुनील गुप्ताआयुर्वेदिक कारण (Hetu)डायबिटिक रोग...
21/08/2025

🪷 डायबिटिक वाउंड एवं बर्न – आयुर्वेदिक कारण व उपचार

✍️ प्रस्तुतकर्ता – डॉ. सुनील गुप्ता

आयुर्वेदिक कारण (Hetu)

डायबिटिक रोगी में घाव (wound) या जलन (burn) जल्दी क्यों बिगड़ जाते हैं?
आयुर्वेद के अनुसार कारण हैं –
1. मधुमेह (Prameha) में दोष imbalance –
• कफ और मेद दोष की वृद्धि → शरीर में रक्त व रस धारा को बाधित करती है।
• पित्त असंतुलन → त्वचा व मांस धातु को कमजोर करता है।
2. रक्त धातु दूषित होना –
• रक्त में शर्करा अधिक होने से रक्तसंचार मंद हो जाता है।
• इससे घाव भरने की शक्ति (Ropan Shakti) कम हो जाती है।
3. अग्नि मंद्यता (Digestive Fire weak) –
• जठराग्नि मंद होने से पोषण रस धातुओं तक नहीं पहुँचता।
• त्वचा (Twak), मांस (Mamsa) और अस्थि (Asthi) धातु दुर्बल हो जाते हैं।
4. Ojas क्षीणता –
• मधुमेह में ओज (प्रतिरोधक शक्ति) कम हो जाती है।
• परिणाम: घाव जल्दी संक्रमित होते हैं और धीरे भरते हैं।



आयुर्वेदिक उपचार

1. शोधन (Cleansing & Detox)
• त्रिफला क्वाथ या नीम-पानी से घाव धोना।
• पंचवल्कल क्वाथ से स्नान करना।

2. लेप एवं बाह्य प्रयोग
• जैवंत्यादि घृत / शतधौत घृत से लेप।
• हल्दी, नीम, घृतकुमारी (Aloe vera) का मिश्रण लेप।
• मधु (शहद) का उपयोग – रक्तशोधन व जीवाणुनाशक।

3. आंतरिक औषधि (Oral Medicines)
• निशामलकी चूर्ण (हल्दी + आंवला) – 3–6 gm सुबह-शाम।
• गुडमार (Meshshringi), जामुन बीज चूर्ण – शुगर नियंत्रण हेतु।
• मंजिष्ठा, नीम, हरिद्रा – रक्त शुद्धि व wound healing हेतु।

4. रसायन (Rejuvenation)
• अमलकी रसायन
• शिलाजीत
• अश्वगंधा

5. पथ्य (Do’s)
• जौ, कोदो, कूटू, करेला, मेथी, लहसुन का प्रयोग।
• हरी सब्जियाँ, नीम की पत्तियाँ, गिलोय रस।

6. अपथ्य (Don’ts)
• मिठाई, मैदा, चावल, आलू, तैलीय व गरिष्ठ भोजन।
• मानसिक तनाव व देर रात जागना।

आयुर्वेद के अनुसार डायबिटिक वाउंड और बर्न का मूल कारण है –
दोष असंतुलन (विशेषकर कफ–पित्त), रक्तदूष्यता और ओज क्षीणता।
यदि आंतरिक औषधि + बाह्य लेप + शोधन सही ढंग से किया जाए, तो घाव शीघ्र भर सकते हैं और रोगी जटिलताओं से बच सकता है।


डॉ. सुनील गुप्ता
094520 25732

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14/08/2025

🌧️ बारिश और फिशर क्षारसूत्र के साथ – Dr. Sunil Gupta 🌿 🌧️ 🌿

बरसात का मौसम आते ही ठंडी हवाएँ और बूंदों की टप-टप मन को सुकून देती हैं, लेकिन इसी मौसम में बवासीर, फिशर और फिस्टुला की तकलीफ़ें भी अक्सर बढ़ जाती हैं।
ऐसे में फिशर के लिए क्षारसूत्र एक प्राकृतिक, सुरक्षित और बिना ऑपरेशन का बेहतरीन इलाज है — जो बारिश में भी आराम और राहत देता है।

बरसात में फायदा क्यों?
• 🌱 हर्बल (औषधीय) धागे से उपचार, कोई टांका नहीं
• 💨 तेज़ी से घाव भरने में मदद
• 🩺 दर्द और तकलीफ़ में तुरंत राहत
• 🌿 सर्जरी का डर और अस्पताल में भर्ती की ज़रूरत नहीं

बारिश का मौसम हो,
या दर्द का बादल —
क्षारसूत्र है आपके साथ। 🌧️🌿

बरसात का मौसम है… ठंडी हवाएँ, भीगी मिट्टी की खुशबू और हरियाली चारों ओर।
लेकिन इस मौसम में स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी ज़रूरी है, खासकर अगर आपको फिशर जैसी परेशानी है।

डॉ. सुनील गुप्ता द्वारा किया जाने वाला क्षारसूत्र उपचार
☘️ बिना ऑपरेशन
☘️ कम दर्द
☘️ जल्दी आराम
☘️ प्राकृतिक और सुरक्षित

बारिश हो या धूप, आपका स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता है।
“आराम पाना है तो सही इलाज चुनना है।”

📍 Yash Polyclinic – Dr. Sunil Gupta
📞 9452025732

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Sultanpur Road Pure Husain
Faizabad
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