Shiv Shakti Jyotish and Vastu

Shiv Shakti Jyotish and Vastu I am in this field since 2006 and achieved various goal. My predictions about horoscope are always reliable. Remedies always gives result in estimated

09/07/2026

क्या लड़की की कुंडली से पता चल सकता है कि उसका पति कैसा होगा।

पति कैसा मिलेगा
यदि सप्तमेश शुभ ग्रह (चंद्रमा, बुध, गुरु या शुक्र) हो, अथवा सप्तम भाव में स्थित हो या सप्तम भाव पर दृष्टि रखता हो, तो सामान्यतः पति लड़की की आयु के आसपास या 2–4 वर्ष बड़ा, गौर वर्ण एवं सुंदर होता है।
यदि सप्तम भाव पर सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु जैसे पाप ग्रहों का प्रभाव हो, तो पति लड़की से लगभग 5 वर्ष या उससे अधिक आयु का हो सकता है।

सूर्य का प्रभाव – गौर वर्ण, आकर्षक चेहरा, तेजस्वी व्यक्तित्व।
मंगल का प्रभाव – लालिमा युक्त चेहरा, बलवान शरीर।
शनि यदि उच्च न हो – सांवला अथवा कम आकर्षक रूप तथा अधिक आयु।
शनि यदि उच्च हो – दुबला-पतला, गोरा तथा लड़की से लगभग 12 वर्ष बड़ा।

कुछ परंपरागत मतों के अनुसार यदि यहाँ नीच का शनि विशेष रूप से प्रभावी हो, तो लड़की अपने से काफी अधिक आयु वाले व्यक्ति से विवाह कर सकती है।

यदि सप्तमेश ग्रह हो—
सूर्य – गोल मुख, तेज ललाट, आकर्षक, यशस्वी तथा सरकारी सेवा का योग।
चंद्रमा – शांत स्वभाव, मध्यम कद, गौर वर्ण एवं सुडौल शरीर।
मंगल – बलवान, साहसी, अनुशासनप्रिय, सत्यवादी, सेना, पुलिस या सरकारी सेवा से जुड़ाव।

पति के कितने भाई-बहन होंगे
लड़की की जन्मकुंडली में सप्तम भाव से तृतीय (अर्थात नवम भाव) पति के छोटे भाई-बहनों का स्थान माना जाता है।

उदाहरणस्वरूप—
चंद्रमा – 2 बहन।
मंगल – 1 भाई एवं 2 बहन।
बुध – 2 भाई एवं 2 बहन।
पति के बड़े भाई-बहनों का विचार पंचम भाव से किया जाता है। पुरुष ग्रह भाई तथा स्त्री ग्रह बहन का संकेत देते हैं।

ससुराल एवं श्वसुर का स्थान
परंपरागत नियमों के अनुसार लग्न से तृतीय भाव तथा उसके स्वामी की स्थिति से श्वसुर के गांव, नगर तथा नाम के प्रारंभिक अक्षरों तक का विचार किया जाता है। इसके लिए राशि, राशि स्वामी तथा उनकी मित्र-शत्रु स्थिति का विस्तृत अध्ययन आवश्यक होता है।

पति का घर एवं प्रॉपर्टी
लड़की की कुंडली का दशम भाव पति की संपत्ति एवं मकान का विचार करने में महत्वपूर्ण माना जाता है।
शुभ ग्रहों का प्रभाव – अपना मकान।
राहु, केतु, शनि – पुराना भवन।
मंगल – टूटा या मरम्मत वाला मकान।
सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु, शुक्र – सुंदर पक्का एवं दो मंजिला भवन।
बलवान शनि – विशाल भवन।

विवाह कितनी दूरी पर होगा
सप्तम भाव में स्थित राशि से भी विवाह की दूरी का अनुमान लगाया जाता है—
वृष, सिंह, वृश्चिक, कुंभ – लगभग 90 किलोमीटर के भीतर।
मेष, कर्क, तुला, मकर – लगभग 200 किलोमीटर के भीतर।
मिथुन, कन्या, धनु, मीन – लगभग 80 से 150 किलोमीटर की दूरी।

यदि सप्तमेश द्वादश भाव में हो, तो विवाह के बाद विदेश जाने या विदेश में बसने का योग बन सकता है। यदि विदेश योग पूर्ण रूप से फलित न भी हो, तो वैवाहिक जीवन में किसी न किसी प्रकार की छोटी-बड़ी चुनौती देखने को मिल सकती है।

जय माता दी...........................

04/07/2026

कुंडली में पति-पत्नी के झगड़े के पीछे ज्यादातर इन्हीं ग्रहों और भावों का खेल होता है।

*पति-पत्नी में क्लेश के 8 बड़े ज्योतिषीय कारण*

*1. सप्तम भाव और सप्तमेश खराब हो*
सप्तम भाव = शादी, जीवनसाथी। सप्तमेश = उस भाव का मालिक।
*दोष कब बनते हैं:*
- सप्तम में पाप ग्रह: शनि, मंगल, राहु, केतु, सूर्य की स्थिति या दृष्टि
- सप्तमेश 6, 8, 12 भाव में चला जाए - ये नुकसान के भाव हैं
- सप्तमेश कमजोर, अस्त या शत्रु राशि में हो
- पुरुष की कुंडली में शुक्र खराब, स्त्री की कुंडली में गुरु खराब

*2. मंगल दोष - कुज दोष*
मंगल = आग और गुस्सा।
*कब बनता है*: मंगल 1, 4, 7, 8, 12 भाव में हो।
*असर*: जिद, गुस्सा, शक, मारपीट, रिश्ते टूटना।
अगर एक की कुंडली में मंगल दोष है और दूसरे में नहीं है तो असंतुलन से लड़ाई होती है। मंगल + शनि/राहु हो तो बात और बिगड़ती है।

*3. राहु-केतु का प्रभाव*
राहु = भ्रम, धोखा, शक। केतु = अलगाव, उदासीनता।
*दोष*: राहु-केतु का सप्तम, सप्तमेश पर प्रभाव। 1-7 अक्ष या 5-11 अक्ष पर होना।
राहु की दृष्टि चंद्र, शुक्र या सप्तम पर = शक और गलतफहमी।
केतु का 2रे भाव पर असर = घर-परिवार में क्लेश।

*4. शनि का अशुभ प्रभाव*
शनि = देर, दूरी, ठंडापन, जिम्मेदारी।
शनि की दृष्टि सप्तम, सप्तमेश, शुक्र/गुरु पर पड़े तो पति-पत्नी में बातचीत कम, प्यार में दूरी।
शनि + मंगल आमने-सामने हों तो "द्वंद्व योग" - एक गरम, एक ठंडा। रोज टकराव।

*5. सूर्य और चंद्रमा दोष*
सूर्य = अहंकार, पति का कारक। सप्तम में सूर्य हो तो "मैं" ज्यादा, सुनना कम।
चंद्र = मन, पत्नी का कारक। चंद्र कमजोर या पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो मूड स्विंग, इमोशनल झगड़े।
चंद्र-शुक्र 6/8/12 में हों या राहु-केतु के साथ हों तो मानसिक तनाव।

*6. दूसरे जरूरी भावों के दोष*
- *2रा भाव*: परिवार और वाणी। यहाँ पाप ग्रह = घर में रोज कलह, कड़वी बात
- *4था भाव*: सुख और शांति। दोष हो तो घर में चैन नहीं
- *5वां भाव*: प्रेम और समझ। खराब हो तो अट्रैक्शन खत्म
- *6ठा भाव*: रोग, कर्ज, झगड़ा, कोर्ट-कचहरी
- *8वां भाव*: गुप्त बात, संदेह, धोखा, आयु

*7. कुंडली मिलान में दोष*
शादी से पहले गुण मिलान जरूरी है।
*मुख्य दोष*: नाड़ी दोष, भकूट दोष, योनि दोष, महेंद्र, स्त्रीदीर्घ, वेध।
अगर दाम्पत्य सुख के अंक कम हों, या एक की कुंडली में पाप योग और दूसरे में राजयोग हो तो तालमेल नहीं बैठता।

*8. खास कलह वाले योग*
- *कलह योग*: शुक्र-शनि की युति = प्यार में दूरी
- *गुरु बदनामी*: गुरु पर पाप ग्रह की दृष्टि = मान-सम्मान की हानि
- *विपरीत राजयोग*: कभी-कभी झगड़े के बाद ही तरक्की
- *शुक्र पाप कर्तरी*: शुक्र के दोनों तरफ पाप ग्रह = वैवाहिक सुख में कमी

*सार*
शादी = सप्तम भाव + शुक्र + गुरु + चंद्र।
इन पर जितने पाप प्रभाव होंगे, क्लेश उतना ज्यादा। शुभ ग्रह की दृष्टि और मजबूत सप्तमेश होने से झगड़े कम होते हैं।

जय माता दी............

21/06/2026

पति पत्नी में रोज झगड़ा ये ग्रह दोष और समाधान जान लो

सारावली, अध्याय 34, श्लोक 11
शास्त्र क्या कहता है: अगर शुक्र के साथ राहु-केतु-शनि-मंगल जैसे ग्रह बैठे हों, 7वें घर में भी पापी ग्रह हों, और लग्न का मालिक दुश्मन की राशि में हो, तो शादीशुदा जिंदगी में रोज झगड़े होते हैं।

आसान मतलब: शुक्र = प्यार और रोमांस। जब वो खराब ग्रहों के साथ होता है तो प्यार ज़हर बन जाता है। पति को पत्नी की हँसी भी ताना लगती है, पत्नी को पति की चुप्पी भी गाली लगती है। 7वें घर में शनि-मंगल आ जाएँ तो शादी का मंडप कोर्ट-कचहरी बन जाता है। लग्नेश दुश्मन राशि में हो तो इंसान का खुद का दिमाग ही दुश्मन बन जाता है - बात-बात पर "मैं घर छोड़ दूँगा" वाली धमकी।

बृहत्जातक, अध्याय 19, श्लोक 17
शास्त्र क्या कहता है: 7वें घर में मंगल-शनि एक साथ हों, उन पर पापी ग्रहों की नजर हो, चंद्रमा कमजोर और खराब जगह हो, तो झगड़ा घर का परमानेंट मेहमान बन जाता है।

आसान मतलब: मंगल-शनि 7th में = आग और बर्फ एक साथ। न रिश्ता जल पाए, न पिघल पाए। बुरे ग्रहों की नजर से रिश्तेदार, नौकर, ड्राइवर तक घर में आग लगाते हैं। चंद्र कमजोर हो तो पत्नी का हौसला टूट जाता है - नींद की गोली, डिप्रेशन, सुसाइड की सोच। अब लड़ाई घर आई नहीं है, घर की मालकिन बनकर बैठ गई है।

जातक पारिजात, अध्याय 14, श्लोक 55
शास्त्र क्या कहता है: 7वें घर का मालिक 8वें में चला जाए, चंद्रमा दो पापी ग्रहों के बीच फँस जाए, शुक्र नीच राशि में हो, तो शादी टूटने की नौबत आ जाती है।

आसान मतलब: 7वें का मालिक 8th में = शादी का सुख गड्ढे में। अचानक पुलिस केस, अचानक बीमारी। चंद्र पाप कर्तरी में = हर वक्त शक। पति पत्नी का फोन चेक करे, पत्नी पति का पर्स टटोले। शुक्र नीच का = सुहाग तो है, पर सौभाग्य गायब। माँग में सिंदूर है, पर इज्जत नहीं।

7 खराब योग - आसान भाषा में
लग्न में राहु, 7th में केतु, शुक्र 6th में
राहु दिमाग में = हर बात में शक। केतु 7th में = पार्टनर से मन उचट गया। बिस्तर अलग, खाना अलग। शुक्र 6th में = बीवी से ही दुश्मनी। कोर्ट-कचहरी, दहेज-गुजारा भत्ता। 6 महीने में तलाक।

मंगल 2nd में, शनि 8th में, चंद्र 12th में
मंगल 2nd में = जुबान में गोली। मुँह खोला नहीं कि लड़ाई। शनि 8th में = ससुराल से अचानक बुरा समाचार। चंद्र 12th में = बेडरूम जेल जैसा। पति-पत्नी अलग सोते हैं।

गुरु वक्री 12th में, सूर्य 7th में, बुध अस्त
गुरु 12th में = पूजा-पाठ पर लड़ाई। "इतना पैसा कथा में क्यों फूँका?" सूर्य 7th में = पति का ईगो - "मैं ही भगवान हूँ"। बुध अस्त = गलतफहमी दूर करने की अक्ल ही नहीं।

शुक्र-मंगल लग्न में, शनि की नजर 7th पर
शुक्र-मंगल साथ = हवस ज्यादा। बाहर मुँह मारने का मन। शनि की नजर 7th पर = शादी के बाद भी अकेलापन। चरित्र पर इल्जाम, DNA टेस्ट तक बात पहुँचे।

चंद्र-शनि 4th में, राहु 7th में
चंद्र-शनि 4th में = घर का सुख जहर। राहु 7th में = तीसरा इंसान। ऑफिस का दोस्त घर तुड़वा दे। बीवी बोले "घर में भूत है", पति बोले "तू पागल है"।

केतु 2nd में, मंगल 6th में, गुरु 8th में
केतु 2nd में = मायके से बोलचाल बंद। मंगल 6th में = लड़ाई सीधे 498A तक। गुरु 8th में = संस्कार खड्डे में। बड़ों को भी गाली।

7वें का मालिक नीच होकर 6th में, लग्नेश 12th में, शुक्र-राहु साथ
7वें का मालिक 6th में = बीवी कोर्ट में दुश्मन बन जाए। लग्नेश 12th में = पति फरार, ट्रांसफर, विदेश। शुक्र-राहु = अफेयर का इल्जाम। इज्जत की नीलामी।

असर कैसा दिखता है रोज की जिंदगी में
सुबह उठते ही टेंशन - "आज कौन सी नई लड़ाई होगी?" ब्रश करते वक्त शीशा देखकर खुद से नफरत। बच्चा पूछे - "पापा आज मम्मी को मारोगे क्या?"
पति ऑफिस में प्रमोशन ठुकरा दे, क्योंकि घर की टेंशन से काम नहीं होता। पत्नी बाथरूम में छुपकर मेकअप करे, कि ताना न मिले।
रात को एक ही कमरे में दो लाशें सोती हैं, बीच में तकिया - जैसे भारत-चीन बॉर्डर।
शुक्र खराब = परफ्यूम से एलर्जी, गले लगते ही छींक। चंद्र खराब = दूध उफनकर गैस बंद, रोटी जलकर कोयला। मंगल खराब = हाथ में गिलास फूट जाए, खून ही खून। शनि खराब = बेडरूम में सीलन, फंगस की बदबू।
सबसे बुरा: राम-सीता की फोटो देखकर रोना आए - "हम ऐसे क्यों न बन पाए?"

उपाय - सीधे स्टेप में
1. वैदिक मंत्र: अथर्ववेद 7.36.1
मंत्र: बेटा बाप की सुने, माँ के साथ एक राय रहे। पत्नी पति से मीठी और शांत बात करे।

कैसे करें: शुक्ल पक्ष की द्वादशी से शुरू करो। पति-पत्नी केसर वाला दूध लक्ष्मी-नारायण को चढ़ाओ। सफेद कपड़े पहनकर तुलसी के पास बैठो। दोनों साथ में 108 बार मंत्र बोलो। फिर वही दूध एक-दूसरे को पिलाओ।
कितना: 41 दिन, टोटल 4428 बार।
दान: हर एकादशी को शादीशुदा ब्राह्मण जोड़े को चीनी, चावल, पैसे दो।
फायदा: 11 दिन में ताने बंद, 21 दिन में सॉरी शुरू, 41 दिन में एक थाली में खाना। शनि की चुप्पी, मंगल का गुस्सा, राहु का शक - सब शांत।

2. श्री सूक्त
कैसे करें: शुक्रवार को सुबह जल्दी उठो। कमल पर श्री यंत्र रखो। गुलाबी फूल, खीर, इत्र चढ़ाओ। श्री सूक्त 16 बार पढ़ो। बाद में पति पत्नी की माँग भरे, पत्नी पति को टीका करे।
कितना: 16 शुक्रवार।
फायदा: पैसा घर में टिकता है। गरीबी झगड़े की सबसे बड़ी जड़ है, वो कटती है। शुक्र मजबूत होता है, प्यार लौटता है। 16 हफ्ते में घर मंदिर जैसा।

3. गौरीशंकर स्तोत्र
मंत्र का मतलब: अर्धनारीश्वर को नमस्कार, जो दुनिया का भला करते हैं।
कैसे करें: सोमवार शाम को। शिवलिंग पर पति जल चढ़ाए, पत्नी दूध चढ़ाए। एक बेलपत्र के दो टुकड़े करके चढ़ाओ। 11 बार पाठ करो।
कितना: 16 सोमवार।
फायदा: समझ आती है कि पति-पत्नी दो नहीं, एक ही हैं। तलाक का योग कटता है। सुहाग लंबा चलता है।

4. षोडशी त्रिपुरसुंदरी मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुंदर्यै नमः
कैसे करें: पूनम की रात। लाल कपड़े, लाल फूल, अनार, मिश्री चढ़ाओ। स्फटिक माला से 108 बार जप। बाद में पति-पत्नी एक-दूसरे को गुलाब दो।
कितना: 3 पूनम, टोटल 324 जप।
फायदा: ये देवी शादी की डायरेक्ट देवी हैं। रूप, प्यार, आकर्षण वापस लाती हैं। शुक्र का अच्छा फल, राहु का वहम खत्म, मंगल का गुस्सा प्यार में बदलता है। 3 महीने में बेडरूम स्वर्ग जैसा।

पूरे उपाय का निचोड़
सारावली ने बताया - दिक्कत की जड़ है वासना, शक और ईगो।
अथर्ववेद मंत्र = बोली में मिठास लाता है।
श्री सूक्त = गरीबी हटाकर लड़ाई की जड़ काटता है।
गौरीशंकर = "हम दो नहीं एक हैं" ये सिखाता है।
षोडशी = प्यार और सुंदरता वापस लाती है।

सबसे बड़ा नियम: पत्नी को लक्ष्मी मानो, पति को नारायण मानो। इनका अपमान करोगे तो गरीबी और कलह पक्की है। रोज सुबह एक-दूसरे के पैर छुओ।

108 दिन का प्लान: 41 दिन मंत्र + 16 शुक्रवार श्री सूक्त + 16 सोमवार स्तोत्र + 3 पूनम षोडशी = 108वें दिन घर की महाभारत खत्म, गीता शुरू।

जय माता दी............................

07/06/2026

आपकी कुंडली में कर्मेश किस नक्षत्र में है

राशि स्थूल है नक्षत्र सूक्ष्म है`।
कुंडली में दशमेश और धनेश किस राशि में हैं, ये तो सब देखते हैं - पर किस नक्षत्र में हैं, यही तय करता है कि जातक कलेक्टर बनेगा या क्लर्क, व्यापारी बनेगा या दलाल।

- क्यों नक्षत्र से फल बदलता है

श्लोक: नक्षत्राणि चरन्त्येते यानि ते देवनिर्मिताः । तेषां पतयो देवाः फलं दातुं व्यवस्थिताः ॥
भाव: `नक्षत्र देव-निर्मित हैं, और हर नक्षत्र का एक अधिष्ठाता देवता है`। `राशि का स्वामी मकान का मालिक है, पर नक्षत्र का स्वामी उस मकान में रहने वाला किरायेदार है`। `फल किरायेदार के स्वभाव से मिलता है, मकान-मालिक के नाम से नहीं`।

इसलिए तुला राशि में बैठा शनि एक फल देगा, पर तुला के स्वाती नक्षत्र में बैठा शनि अलग फल देगा। स्वाती का स्वामी राहु है - तो शनि यहाँ विदेश, राजनीति, तकनीक का फल देगा, न कि तुला-शुक्र का कला-विलास।

- स्मरण सूत्र
केतु = `छोड़ो या जोड़ो`। चिकित्सा, गूढ़-विद्या, कोडिंग, मोक्ष। जहाँ त्याग या अनुसंधान हो।
शुक्र = `भोगो`। सौंदर्य, स्त्री, वाहन, कला, विलास। जहाँ सुख बिकता है।
सूर्य = `शासन करो`। सरकार, नेतृत्व, पिता, चिकित्सा, तेज। जहाँ अधिकार चलता है।
चंद्र = `पालन करो`। जनता, दूध, जल, भोजन, मन। जहाँ सेवा और भावना है।
मंगल = `लड़ो या गढ़ो`। भूमि, अग्नि, शस्त्र, सर्जरी, खेल। जहाँ बल और साहस है।
राहु = `भ्रम से भेद करो`। विदेश, छाया, राजनीति, तकनीक, विष। जहाँ माया है।
गुरु = `सिखाओ`। धर्म, ज्ञान, न्याय, कोष, सलाह। जहाँ मर्यादा है।
शनि = `ढोओ`। श्रम, लोहा, तेल, सेवा, जनता। जहाँ भार है।
बुध = `बोलो या तोलो`। वाणी, लेखन, व्यापार, गणित, दलाली। जहाँ बुद्धि है।

स्मरण मंत्र: `के-शु-सू-चं-मं-रा-गु-श-बु`। `छोड़ो, भोगो, शासन करो, पालन करो, लड़ो, भ्रम करो, सिखाओ, ढोओ, बोलो`।

3 गूढ़ योग का व्यवहारिक अर्थ
1. नक्षत्र परिवर्तन योग: ये कर्म से धन, धन से कर्म का योग है। उदाहरण: कर्मेश बुध अश्विनी नक्षत्र में, धनेश केतु रेवती नक्षत्र में। अश्विनी का स्वामी केतु, रेवती का स्वामी बुध। यहाँ डॉक्टर अपना अस्पताल खोलेगा तो करोड़पति बनेगा। नौकरी और व्यापार अलग नहीं रहेंगे।

2. एक-नक्षत्र योग: कर्मेश-धनेश दोनों पुष्य नक्षत्र में हों। पुष्य का स्वामी शनि। तो व्यक्ति सरकारी नौकरी में रहते हुए भी जमीन-खेती से धन बनाएगा। अखंड लक्ष्मी इसलिए कि शनि स्थिरता का कारक है।

3. पुष्कर नवांश: इसे दैवी कवच समझो। कर्मेश पुष्कर में है तो बॉस लाख चाहे, नौकरी नहीं जा सकती। धनेश पुष्कर में है तो शेयर डूब जाए, बैंक लूट जाए, फिर भी जातक के पास कहीं न कहीं से धन आ जाएगा। 7, 14, 21, 24 अंश - ये अमृत की बूंद हैं।

देखने की विधि का सार -
1. दशमेश देखो → किस नक्षत्र में है → नक्षत्र का स्वामी कौन → `वही तुम्हारी नौकरी का बॉस है`।
2. द्वितीयेश देखो → किस नक्षत्र में है → नक्षत्र का स्वामी कौन → `वही तुम्हारे धन का दरवाजा है`।
`3. अब देखो वो नक्षत्र-स्वामी कुंडली में राजा है या रंक`। केंद्र-त्रिकोण में है तो राजा, 6-8-12 में है तो रंक। राजा होगा तो फल देगा, रंक होगा तो तरसाएगा।

परम सूत्र आपने दे दिया: `नक्षत्रेशो यदि नीचो वा अस्तंगतः`। नक्षत्र का स्वामी ही कमजोर हो तो दशमेश चाहे उच्च का हो, नौकरी में सुख नहीं मिलेगा। ड्राइवर मर्सिडीज चला रहा हो पर खुद बीमार हो तो क्या लाभ।

कलियुग का सबसे बड़ा दोष
मंगल के नक्षत्र में कर्मेश है - पर जातक लड़ना नहीं चाहता, AC में बैठना चाहता है। फल: नौकरी बार-बार छूटेगी।
शनि के नक्षत्र में धनेश है - पर जातक श्रम से भागता है, शॉर्टकट चाहता है। फल: धन आएगा पर टिकेगा नहीं।
बुध के नक्षत्र में कर्मेश है - पर जातक झूठ बोलता है, वचन तोड़ता है। फल: व्यापार में बदनामी होगी।

इसलिए उपाय सबसे बड़ा यही: `नक्षत्र-स्वामी के गुण धारण करो`। शनि के नक्षत्र में कर्मेश है तो सुबह 4 बजे उठो, श्रम करो। बुध के नक्षत्र में है तो वाणी साफ रखो, हिसाब साफ रखो। ये करने से नीच का नक्षत्र-स्वामी भी राजयोग देने लगता है।

जय माता दी........................….

05/06/2026

रिश्ते कब बिगड़ते हैं - 8 बड़े ज्योतिष कारण

*1. सप्तम भाव में शनि + मंगल युति = "शादी या सजा"
*क्यों बिगड़ता है:* शनि = ठंडा, देरी, बोझ। मंगल = गर्म, गुस्सा, झगड़ा। दोनों सप्तम में = बर्फ और आग एक बिस्तर पर।
*फल:* पार्टनर से रोज लड़ाई। प्यार कम, ड्यूटी ज्यादा। "शादी कर ली अब निभाना पड़ेगा" वाली फीलिंग। फिजिकल रिलेशन में भी प्रॉब्लम। तलाक के 70% केस में ये युति मिलती है।
*कब ज्यादा खराब:* मंगल नीच या शनि वक्री हो तो मार-पीट, कोर्ट केस।
*उपाय:* मंगलवार हनुमान चालीसा + शनिवार तेल दान। शादी 28 के बाद करो।
*अपवाद:* मेष/मकर लग्न में ये युति राजयोग भी दे, पर रिश्ता फिर भी टफ रहेगा।

*2. शुक्र + केतु युति = "प्यार में संन्यास"
*क्यों बिगड़ता है:* शुक्र = आकर्षण, रोमांस, भोग। केतु = कट ऑफ, वैराग्य, भ्रम। दोनों साथ = पहले पागलों जैसा प्यार, फिर अचानक मन उचट जाना।
*फल:* 3 महीने डेटिंग, फिर "मुझसे नहीं होगा"। शादी के बाद पार्टनर से दूरी। एक्स्ट्रा मैरिटल नहीं, पर इमोशनल तलाक। पार्टनर को लगे "ये मुझे प्यार ही नहीं करता"।
*खास:* केतु की दशा में तो रिश्ता सूखा रेगिस्तान। शुक्र-केतु 12th में = सीक्रेट अफेयर फिर गिल्ट।
*उपाय:* शुक्र मजबूत करो - इत्र, सफेद कपड़े, पत्नी को गिफ्ट। केतु के लिए गणेश पूजन।

*3. चंद्र + राहु 7वें भाव में = "ग्रहण दोष वाला प्रेम"
*क्यों बिगड़ता है:* चंद्र = मन, भरोसा। राहु = भ्रम, धोखा, जादू। 7th में = पार्टनर धुंध में दिखता है।
*फल:* शक का कीड़ा। "कहीं अफेयर तो नहीं?", "सच बोल रहा या झूठ"। पार्टनर अच्छा भी हो तो भी मन नहीं मानेगा। खुद भी मूड स्विंग - आज जान दूं, कल ब्लॉक कर दूं।
*खतरा:* लव मैरिज होकर भी 2 साल में केस। मेंटल टॉर्चर दोनों तरफ।
*उपाय:* पूर्णिमा व्रत, चांदी पहनो, राहु के लिए दुर्गा सप्तशती। शादी से पहले कुंडली मिलान 100% जरूरी।

*4. दूसरा भाव पीड़ित = "सास-बहू का महाभारत"*
*क्यों बिगड़ता है:* 2nd = परिवार, ससुराल, बोल-चाल। शनि-राहु-केतु-मंगल से पीड़ित हो तो ससुराल इंटरफेयर करेगा।
*फल:* "तेरी मां ने ये कहा", "तेरे भाई ने वो किया"। हर बात में तीसरा इंसान। प्राइवेसी जीरो। पार्टनर फैमिली की साइड ले तो रिश्ता गया।
*वाणी दोष:* 2nd पीड़ित = कड़वी जुबान। 1 गाली = 10 साल का प्यार खराब।
*उपाय:* ससुराल से अलग रहो। गाय को रोटी, बोलने से पहले तोलो। 2nd का मालिक मजबूत करो।

*5. मंगल 8वें भाव में = "शक का मांगलिक"
*क्यों बिगड़ता है:* 8th = ससुराल, सीक्रेट, सेक्स, मृत्यु। मंगल यहां = कंट्रोल, जिद, डाउट।
*फल:* "कहां गए थे?", "फोन किसका था?" - 24x7 CID। पार्टनर की लाइफ कंट्रोल करेगा। बेडरूम में भी जबरदस्ती। ससुराल से झगड़ा। विधुर/विधवा योग भी बन सकता है।
*महिला की कुंडली में:* पति पर हावी, या पति का एक्सीडेंट।
*उपाय:* मांगलिक दोष काट - मंगलवार व्रत, कुंभ विवाह। शादी 28+ में, मांगलिक से ही करो।

*6. शुक्र 6ठे भाव में = "प्यार या कॉम्पिटिशन"
*क्यों बिगड़ता है:* 6th = दुश्मन, बीमारी, कर्जा, कॉम्पिटिशन। शुक्र यहां = प्यार में भी राइवलरी।
*फल:* "उसका एक्स ज्यादा अच्छा था", "ऑफिस में वो लड़की तुझे लाइन मार रही"। जलन, इनसिक्योरिटी। पार्टनर बीमार या कर्जदार मिले। कोर्ट मैरिज, फिर कोर्ट केस।
*एक्स्ट्रा:* लव ट्रायंगल। पार्टनर का अफेयर पकड़ा जाए।
*उपाय:* शुक्र के बीज मंत्र। पत्नी को रिस्पेक्ट। गुप्त रोग से बचो। 6th का मालिक शुभ हो तो नौकरी वाली बीवी मिले।

*7. सप्तमेश 6-8-12 में = "पार्टनर है पर सुकून नहीं"
*क्यों बिगड़ता है:* सप्तमेश = पार्टनर का कारक। 6-8-12 = दुःस्थान।
*फल:*
- *6th में:* पार्टनर बीमार, कर्जदार, या दुश्मन जैसा। रोज बहस।
- *8th में:* ससुराल से प्रॉब्लम, अचानक धोखा, विधवा/तलाक योग। सेक्स लाइफ डिस्टर्ब।
- *12th में:* पार्टनर दूर - विदेश, हॉस्पिटल या जेल। खर्चा करवाए पर साथ न दे। बेड प्लेजर जीरो।
*कॉमन:* "सब है पर कुछ मिसिंग है" वाली फीलिंग। सैटिस्फैक्शन नहीं।
*उपाय:* सप्तमेश को बल दो। 7th में गुरु की दृष्टि बचाए।

*8. सूर्य 7वें में नीच = "ईगो का ताजमहल"
*क्यों बिगड़ता है:* सूर्य = अहंकार, पिता, राजा। 7th में = पार्टनर को दबाना। नीच तुला राशि में = ईगो पर चोट।
*फल:* "मैं सही, तू गलत"। पब्लिक में पार्टनर की बेइज्जती। "मेरे स्टेटस की नहीं" बोलकर नीचा दिखाना। पत्नी को नौकरानी समझना।
*पुरुष में:* डॉमिनेटिंग हसबैंड। *महिला में:* पति को जोरू का गुलाम बनाना। दोनों केस में तलाक।
*खास:* सरकारी अफसर/बिजनेसमैन की कुंडली में कॉमन। पावर घर ले आते हैं।
*उपाय:* अहंकार छोड़ो। सूर्य को जल दो। पिता तुल्य लोगों का सम्मान। पार्टनर को इज्जत दो।

*बोनस: रिश्ता बचाने के 5 अचूक नियम
1. *7th भाव खाली = बेस्ट।* ग्रह कम हों तो झगड़ा कम।
2. *गुरु की दृष्टि 7th पर = भगवान का कवच।* हजार दोष कैंसिल।
3. *शुक्र-चंद्र मजबूत + पाप ग्रह से दूर = रोमांटिक लाइफ।*
4. *मांगलिक है तो मांगलिक से ही शादी।* आग से आग कटती है।
5. *36 गुण मिले पर नाड़ी दोष हो = शादी नहीं।* नाड़ी दोष = संतान/हेल्थ प्रॉब्लम।

*सबसे खतरनाक कॉम्बो:
*शनि + मंगल + राहु 7th में* = शादी नहीं, सजा-ए-कालापानी। तलाक 100%।
*शुक्र + केतु + चंद्र 8th में* = लव मैरिज होकर भी विधवा योग।

*सार 3 लाइन में:
1. *पाप ग्रह 7th में* = शादी में आग। *शुभ ग्रह* = शहद।
2. *2nd, 7th, 8th, 12th खराब* = ससुराल, पार्टनर, सेक्स, नींद चारों खराब।
3. *उपाय से 50% कटता है, अक्ल से 50% बचता है* - ईगो, शक, कंट्रोल छोड़ो।

जय माता दी..................

03/06/2026

ज्योतिष के 16 सूत्र -

*1. चंद्र कमजोर हो तो दुश्मन से पहले अपना मन हराता है
चंद्र = मन, भावना, कल्पना। नीच, अमावस्या, राहु-केतु-शनि से पीड़ित चंद्र वाला जातक लड़ाई से पहले ही सोच लेता है "मैं हार जाऊंगा"। दुश्मन बाद में आता है, डिप्रेशन पहले। नींद नहीं, शक ज्यादा, डिसीजन जीरो।
*उपाय:* चांदी पहनो, मां की सेवा, पूर्णिमा व्रत। मन जीता तो जग जीता।

*2. मंगल का असली काम लड़ाई शुरू करना नहीं, जीतना है
मंगल = एनर्जी, हिम्मत, सर्जरी। नीच का मंगल झगड़ालू बनाता है, गाली-गलौज करवाता है। पर उच्च का मंगल = कमांडर। वो बिना बोले टारगेट पूरा करता है। मंगल 10th में = एक्शन से नाम।
*गलती:* लोग मंगल को सिर्फ गुस्सा समझते हैं। असली मंगल = अनुशासन + जीत।

*3. बुध मजबूत हो तो शब्द ही हथियार बन जाते हैं
बुध = वाणी, बुद्धि, हाजिरजवाबी। बुध कन्या में उच्च या मिथुन में स्वराशि = वकील, सेल्समैन, एंकर, कॉमेडियन। ऐसे लोग तलवार नहीं चलाते, 1 लाइन बोलकर सामने वाले को चुप करा देते हैं।
*खतरा:* नीच का बुध = झूठ, चुगली, धोखा। शब्द से ही बर्बादी।

*4. गुरु जहां बैठता है, वहां वृद्धि जरूर देता है
गुरु = विस्तार। जिस भाव में बैठेगा उस भाव को बड़ा करेगा। 2nd में = पैसा बढ़ाए। 5th में = संतान/ज्ञान बढ़ाए। पर गुरु की दृष्टि ज्यादा शुभ, बैठना कभी-कभी मोटापा देता है।
*अपवाद:* 6-8-12 में गुरु = कर्जा, बीमारी, खर्चा भी बढ़ा दे। इसलिए गुरु की प्लेसमेंट देखो।

*5. शुक्र जीवन को सुंदर बनाता है, आसान नहीं
शुक्र = लग्जरी, प्रेम, कला, भोग। शुक्र अच्छा = AC कार, सुंदर पार्टनर, महंगे कपड़े। पर शुक्र साथ में लालच, लगाव, ईर्ष्या भी लाता है। सुंदर बीवी = टेंशन भी। बड़ी गाड़ी = EMI भी।
*सार:* शुक्र स्वाद देता है, पर वो स्वाद मेंटेन करने की मेहनत भी करवाता है।

*6. 12वां भाव खर्च नहीं, त्याग की कहानी है
12th = व्यय, विदेश, हॉस्पिटल, जेल, मोक्ष। लोग डरते हैं। पर 12th एक्टिव वाला ही संन्यासी, दानी, फॉरेन में सेटल होता है। खर्चा होगा, पर किसपर? अस्पताल में या दान में, ये कुंडली बताएगी।
*राज:* शुभ 12th = नींद अच्छी, मोक्ष का रास्ता। खराब 12th = नींद की गोली।

*7. राहु जो देता है, उसकी कीमत भी वसूलता है
राहु = शॉर्टकट, भ्रम, अचानक छलांग। राहु 11th में = अचानक करोड़पति। पर 42 की उम्र के बाद या तो हेल्थ, या बदनामी, या तलाक की कीमत लेगा। राजनीति, शेयर, विदेश का राजा राहु ही बनाता है।
*नियम:* राहु से मिला पैसा दान करो, वरना राहु ब्याज समेत वसूलेगा।

*8. शनि की देरी अक्सर भगवान की तैयारी होती है
शनि = देरी, मेहनत, न्याय। 30 तक शादी न होना, 35 तक नौकरी न लगना = शनि टेस्ट ले रहा है। पर जब देता है तो टिकाऊ देता है। शनि की बनाई बिल्डिंग भूकंप में भी न गिरे।
*सोच:* जल्दी मिलने वाला जल्दी जाता है। शनि वाला पीढ़ियों तक चलता है।

*9. मजबूत लग्न पूरी कुंडली की आधी समस्या खत्म कर देता है
लग्न = तेरा शरीर, हेल्थ, पर्सनालिटी, इम्युनिटी। लग्नेश उच्च/स्वराशि/केंद्र में = 100 बीमारी की दवा 1 लग्न। ऐसे लोग एक्सीडेंट से भी बच जाते हैं। लग्न कमजोर = करोड़पति भी बीमार।
*उदाहरण:* मेष लग्न + मंगल 10th में = लग्नेश दिग्बली। अकेला ही पूरी कुंडली संभाल ले।

*10. सूर्य कमजोर हो तो अवसर भी सम्मान नहीं दिला पाते
सूर्य = आत्मा, पिता, सरकार, इज्जत। नीच सूर्य/ग्रहण योग = प्रमोशन मिलेगा पर क्रेडिट बॉस ले जाएगा। इंटरव्यू क्लियर होगा पर सैलरी कम। लोग काम करवाएंगे पर थैंक यू नहीं बोलेंगे।
*उपाय:* पिता के पैर छुओ, सरकारी काम ईमानदारी से करो, अहंकार छोड़ो। सूर्य चमका तो दुनिया सलाम करेगी।

*11. गुरु साथ हो तो गिरकर भी इंसान संभल जाता है
गुरु की दृष्टि = भगवान का हाथ। 5-7-9 दृष्टि जिस भाव पर पड़े, वहां बर्बादी नहीं होती। नौकरी गई = 2 महीने में बेहतर मिलेगी। तलाक हुआ = दूसरा पार्टनर ज्यादा अच्छा। गुरु केंद्र में = हजार दोष खत्म।
*शर्त:* गुरु वक्री या अस्त न हो।

*12. शुक्र सिर्फ प्रेम नहीं, जीवन का स्वाद है
शुक्र = खाना, कपड़ा, परफ्यूम, गाना, सेक्स, गाड़ी। खराब शुक्र = बेस्वाद जिंदगी। खाना फीका, कपड़े बेरंग, पार्टनर से झगड़ा। अच्छा शुक्र = साधारण दाल-चावल भी 5-स्टार लगे।
*खास:* शुक्र + चंद्र = कला। शुक्र + मंगल = पैशन। शुक्र + शनि = लेट मैरिज पर टिकाऊ।

*13. बुध तेज हो तो दुश्मन भी बहस में हार जाते हैं
बुध केंद्र में/आदित्य योग में = वकील, डिबेटर, न्यूज एंकर। ऐसे लोग कोर्ट में जज को भी चुप करा दें। मार्केटिंग में क्लाइंट को ना बोलते हुए भी हां कहलवा लें।
*उल्टा:* बुध पाप पीड़ित = जुबान से रिश्ते खराब। झूठ पकड़ा जाए।

*14. हर मजबूत 6वें भाव के पीछे कोई बड़ा संघर्ष छुपा होता है
6th = रोग, कर्जा, दुश्मन, नौकरी, कॉम्पिटिशन। 6th का मालिक मजबूत या 6th में शुभ ग्रह = जातक लड़ाकू। पहलवान, वकील, डॉक्टर, आर्मी। पर ये ताकत फ्री में नहीं मिली। बचपन में बीमारी, गरीबी, कोर्ट केस झेले हैं तभी।
*सार:* 6th का राजा बनने के लिए पहले 6th का गुलाम बनना पड़ता है।

*15. राजा सूर्य बनाता है, लेकिन साम्राज्य शनि बनाता है
सूर्य = पावर, पोस्ट, नाम। मंत्री, कलेक्टर, CEO सूर्य देगा। पर वो पोस्ट 5 साल चले या 25 साल, ये शनि तय करेगा। सूर्य एक दिन का राजा बना सकता है। शनि की मेहनत = टाटा, बिरला वाला साम्राज्य जो 100 साल चले।
*कॉम्बो:* सूर्य 10th में + शनि 11th में = पावर + पैसा + लॉन्गेविटी। परफेक्ट।

*16. कुंडली में सबसे बड़ा योग वही है जो आपको सही कर्म करवाए*
लाख योग हों - गजकेसरी, पंच महापुरुष, राजयोग। पर अगर जातक कर्म न करे, नशा करे, गलत संगत में पड़े = सारे योग जीरो।
*असली योग:* धर्म त्रिकोण 1-5-9 एक्टिव + दशमेश मजबूत। ये कर्म करवाएगा। सुबह 5 बजे उठाएगा, मेहनत करवाएगा, गलत से बचाएगा।
*गीता का सार:* कर्मण्येवाधिकारस्ते। ग्रह रास्ता दिखाते हैं, चलना तुझे खुद है।

*पूरे 16 सूत्र का निचोड़ 4 लाइन में:
1. *मन चंद्र, हिम्मत मंगल, दिमाग बुध, किस्मत गुरु* - ये 4 सही तो जीवन सेट।
2. *शनि स्लो पर श्योर, राहु फास्ट पर फेक* - चुनना तुझे है।
3. *लग्न बॉडी है, सूर्य बैटरी है, कर्म पेट्रोल है* - तीनों फुल तो गाड़ी रॉकेट।
4. *योग कुंडली में नहीं, आदत में बनता है* - रोज 1% सुधर, 1 साल में 365% ग्रोथ।

जय माता दी....................……

24/05/2026

शुक्र और शराब का संबंध – शास्त्र प्रमाण + उपाय

01 शास्त्र प्रमाण –
1. बृहत्पाराशर होरा शास्त्र 47.26
शुक्रे मद्य-रतो नित्यं काम-भोग-परायणः। जल-राशौ विशेषेण सुरा-पान-रतो भवेत्॥

हिंदी विस्तृत: `शुक्र = भोग, विलास, स्त्री, सुगंध, मदिरा`। `शुक्र भोग का कारक है और शराब सबसे सस्ता भोग है`। `जब शुक्र कर्क, वृश्चिक, मीन जैसी जल-राशि में हो, या राहु-शनि-केतु से पीड़ित हो, तब जातक शराब की तरफ खिंचता है`। `क्योंकि जल-राशि = बहना, बहकना`। `शुक्र + जल = मदिरा`। `12H का शुक्र = बेडरूम का सुख, नशा, खर्च`।

शुक्र = भोग, विलास, स्त्री, सुगंध, मदिरा ये लाइन ही पूरी कुंडली का सार है। शुक्र भोग का कारक है और शराब सबसे सस्ता भोग है - अमीर आदमी क्लब में 5000 की बोतल खोलेगा, गरीब 50 की थैली। पर नशा दोनों को चाहिए। जब शुक्र कर्क, वृश्चिक, मीन जैसी जल-राशि में हो, या राहु-शनि-केतु से पीड़ित हो, तब जातक शराब की तरफ खिंचता है`। `क्योंकि जल-राशि = बहना, बहकना`। पानी को बांधोगे तो भी रास्ता बना लेता है। वैसा ही जल-राशि का `शुक्र है। शुक्र + जल = मदिरा`। `12H का शुक्र = बेडरूम का सुख, नशा, खर्च`। रात 11 बजे के बाद `12H एक्टिव होता है, तभी सबसे ज्यादा पैग चलते हैं।

2. फलदीपिका 18.19
नीचे वा शत्रु-राशिस्थे पाप-युक्ते च भार्गवे। मद्य-मांस-रतो नित्यं पर-स्त्री-गमन-प्रियः॥

शुक्र नीच = कन्या राशि`। `शत्रु राशि = सूर्य-चंद्र की राशि सिंह-कर्क`। `पाप ग्रह = राहु, केतु, शनि, मंगल`। `इनके साथ शुक्र हो तो व्यक्ति की भोग-वासना कंट्रोल से बाहर हो जाती है`। `शराब पहला दरवाजा है, फिर मांस, फिर पर-स्त्री`। `क्योंकि शुक्र दैत्यों का गुरु है – दैत्य = भोग, सुरा, सुंदरी`।

सीधा कनेक्शन: शुक्र नीच = कन्या राशि`। कन्या में `शुक्र ऐसा है जैसे राजा को जेल में डाल दो - वो गंदी हरकत ही करेगा। शत्रु राशि = सूर्य-चंद्र की राशि सिंह-कर्क`। `सूर्य राजा है, शुक्र मंत्री। राजा के घर में मंत्री की नहीं चलती। पाप ग्रह = राहु, केतु, शनि, मंगल`। `इनके साथ शुक्र हो तो व्यक्ति की भोग-वासना कंट्रोल से बाहर हो जाती है`। `शराब पहला दरवाजा है, फिर मांस, फिर पर-स्त्री`। ये तीनों सीढ़ी हैं नीचे जाने की। `क्योंकि शुक्र दैत्यों का गुरु है – दैत्य = भोग, सुरा, सुंदरी`। देवताओं के गुरु बृहस्पति सात्विक चीज सिखाते हैं, दैत्यों के गुरु `शुक्र भोग सिखाते हैं।

3. सर्वार्थ चिंतामणि 7.42
लग्ने व्यये च पाताले शुक्रे राहु-युते यदि। सुरा-पान-रतो नित्यं गृह-भंग-करो नरः॥

1H शुक्र = रूप, शौक`। `4H शुक्र = घर का सुख`। `12H शुक्र = बेड का सुख`। `इन तीनों में शुक्र + राहु = मदिरा + धुआं`। `राहु = विस्तार`। `शुक्र = 1 पैग, राहु = 1 बोतल`। `ऐसा व्यक्ति घर की इज्जत, पैसा, रिश्ते – सब शराब में उड़ा देता है`।

खतरनाक युति: 1H शुक्र = रूप, शौक`। लग्न में `शुक्र वाला खुद को हीरो समझता है। 4H शुक्र = घर का सुख`। घर को 5 स्टार होटल बनाना चाहता है। `12H शुक्र = बेड का सुख`। बेड पर ही जन्नत चाहिए। `इन तीनों में शुक्र + राहु = मदिरा + धुआं`। `राहु = विस्तार`। ये गणित याद रखना - `शुक्र = 1 पैग, राहु = 1 बोतल`। `राहु हमेशा चीजों को बड़ा करता है। इसलिए `ऐसा व्यक्ति घर की इज्जत, पैसा, रिश्ते – सब शराब में उड़ा देता है`। पहले इज्जत जाती है, फिर पैसा, अंत में बीवी-बच्चे।

02 ज्योतिष संकेत – सारणी रहित
`शुक्र = वीर्य, ओज, चेहरा, ग्लैमर, प्यार, शादी, गाड़ी, घर, परफ्यूम, मीठा, शराब`। `शराब = जल + अग्नि + नशा`। `शुक्र जल-तत्व का ग्रह है, इसलिए शराब पर शुक्र का सीधा कब्जा है`। `जब शुक्र बलवान हो पर पाप-प्रभाव में हो, तो व्यक्ति लग्जरी शराब, वाइन, स्कॉच की तरफ जाता है`। `जब शुक्र कमजोर/पीड़ित हो तो देशी, कच्ची, सस्ती शराब की लत लगती है`। `शुक्र + चंद्र = बीयर, वाइन, मीठी शराब`। `शुक्र + मंगल = तेज शराब, व्हिस्की, रम – लड़ाई-झगड़ा कराए`। `शुक्र + राहु = छुपकर पीना, बार, क्लब, ड्रग्स तक ले जाए`। `शुक्र + शनि = अकेले पीना, डिप्रेशन में पीना, देर रात पीना`। `शुक्र + केतु = पीकर वैराग्य, रोना, भगवान याद आना`। `2H में शुक्र पीड़ित = वाणी खराब, गाली देकर पीना`। `4H में = घर को बार बना देना`। `7H में = पत्नी के सामने पीना, शादी तोड़ देना`। `12H में = अस्पताल, लीवर खराब, बेड पर ही बोतल`।

एक-एक लाइन का पोस्टमार्टम:
शुक्र = वीर्य, ओज, चेहरा, ग्लैमर, प्यार, शादी, गाड़ी, घर, परफ्यूम, मीठा, शराब`। देखो कितनी चीजों का मालिक अकेला `शुक्र है। शराब = जल + अग्नि + नशा`। बनती कैसे है? पानी + आग पर पकाओ + खमीर = नशा। `शुक्र जल-तत्व का ग्रह है, इसलिए शराब पर शुक्र का सीधा कब्जा है`। `जब शुक्र बलवान हो पर पाप-प्रभाव में हो, तो व्यक्ति लग्जरी शराब, वाइन, स्कॉच की तरफ जाता है`। बली `शुक्र को ठर्रा नहीं जंचता। जब शुक्र कमजोर/पीड़ित हो तो देशी, कच्ची, सस्ती शराब की लत लगती है`। मजबूरी का नाम महात्मा गांधी। `शुक्र + चंद्र = बीयर, वाइन, मीठी शराब`। `चंद्र मन है, इमोशनल। इसलिए बीयर पीकर आशिक रोते हैं। शुक्र + मंगल = तेज शराब, व्हिस्की, रम – लड़ाई-झगड़ा कराए`। `मंगल खून गरम करता है। 2 पैग के बाद बोलेगा - "भिड़ेगा क्या?" शुक्र + राहु = छुपकर पीना, बार, क्लब, ड्रग्स तक ले जाए`। `राहु का नियम - जो समाज में मना है, वही करना है। शुक्र + शनि = अकेले पीना, डिप्रेशन में पीना, देर रात पीना`। `शनि अकेला ग्रह है। शुक्र + केतु = पीकर वैराग्य, रोना, भगवान याद आना`। `केतु मोक्ष का ग्रह है। नशे में सबको भगवान याद आ ही जाता है। 2H में शुक्र पीड़ित = वाणी खराब, गाली देकर पीना`। `2H मुंह का घर है। 4H में = घर को बार बना देना`। `4H घर है। 7H में = पत्नी के सामने पीना, शादी तोड़ देना`। `7H पत्नी का घर है। 12H में = अस्पताल, लीवर खराब, बेड पर ही बोतल`। `12H अस्पताल, नुकसान का घर है। लास्ट स्टेज।

03 मर्यादा संदेश
मनुस्मृति खोलकर सुनो: शास्त्र: मनुस्मृति 11.55: "सुरा वै मलमन्नानां पाप्मा च मलमुच्यते। तस्माद् ब्राह्मण-राजन्यौ वैश्यश्च न सुरां पिबेत्॥" हिंदी: शराब अन्न का मैल है, पाप का मैल है`। चावल बनाते हो तो माड़ फेंक देते हो ना? `शराब अन्न का माड़ है। इसलिए ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य को शराब नहीं पीनी चाहिए`। `अर्थ: शुक्र लक्ष्मी का भाई है, पर शराब लक्ष्मी की सौतन है`। एक घर में दो औरत - एक `लक्ष्मी, दूसरी शराब`। दोनों साथ नहीं रह सकतीं। `जहां शराब जाएगी, वहां से लक्ष्मी भाग जाएगी`। `शुक्र स्त्री का कारक है – जो शराब पीता है, उसकी स्त्री का शुक्र कमजोर होता है = पत्नी बीमार, झगड़ा, तलाक`। तुम बोतल से शादी करोगे तो बीवी से तलाक होगा ही। `शुक्र वीर्य है – शराब वीर्य को पानी बना देती है = संतान नहीं, नपुंसकता`। IVF सेंटर में 70% केस `शराब वाले होते हैं। इसलिए शुक्र को खुश करना है तो शराब छोड़ो, वरना शुक्र ही तुम्हें भिखारी बना देगा`। `शुक्र ने रावण को सोने की लंका दी और शुक्र ने ही भिखारी बना दिया।

04 – शराब छुड़ाने के उपाय
शुक्र-राहु युति परिहार: `शुक्रवार को 1 नारियल + 7 सफेद कौड़ी बहते जल में बहाओ`। `राहु का जहर पानी में जाएगा`।
जीभ पर नियंत्रण: `2H शुक्र खराब = जीभ शराब मांगती है`। `रोज सुबह फिटकरी के पानी से कुल्ला करो`। `जीभ का दोष कटेगा`।
स्त्री का अपमान बंद: `शुक्र = स्त्री`। `पत्नी, माँ, बहन को गाली, मार-पीट = शुक्र गुस्सा`। `शुक्र गुस्सा = शराब की लत और बढ़ेगी`। `माफी मांगो, पैर छुओ`।
इत्र-परफ्यूम त्याग: `शुक्र पीड़ित हो तो 43 दिन तक इत्र, सेंट, बॉडी-स्प्रे मत लगाओ`। `शुक्र का भोग कम होगा, लत टूटेगी`।
चांदी का गिलास: `शराब छोड़ने के बाद चांदी के गिलास में पानी-दूध पियो`। `चंद्र + शुक्र बली = मन शांत, जीभ शांत`।

करके देखो:
शुक्र-राहु युति परिहार: शुक्रवार को 1 नारियल + 7 सफेद कौड़ी बहते जल में बहाओ`। `राहु का जहर पानी में जाएगा`। `नारियल का मतलब राहु का सिर फोड़ना। 7 सफेद कौड़ी = शुक्र के 7 दिन। नदी में बहाओ, राहु का नशा बह जाएगा।
जीभ पर नियंत्रण: 2H शुक्र खराब = जीभ शराब मांगती है`। `रोज सुबह फिटकरी के पानी से कुल्ला करो`। `जीभ का दोष कटेगा`। `फिटकरी 5 रुपये की आती है। बोतल 500 की। हिसाब लगा लो।
स्त्री का अपमान बंद: शुक्र = स्त्री`। `पत्नी, माँ, बहन को गाली, मार-पीट = शुक्र गुस्सा`। `शुक्र गुस्सा = शराब की लत और बढ़ेगी`। `माफी मांगो, पैर छुओ`। आज ही बीवी के पैर छू लो। `शुक्र 50% यहीं ठीक हो जाएगा।
इत्र-परफ्यूम त्याग: शुक्र पीड़ित हो तो 43 दिन तक इत्र, सेंट, बॉडी-स्प्रे मत लगाओ`। `शुक्र का भोग कम होगा, लत टूटेगी`। 43 दिन नहा-धोकर रहो, पर परफ्यूम मत लगाओ। `शुक्र को लगेगा - ये तो साधु बन गया।
चांदी का गिलास: शराब छोड़ने के बाद चांदी के गिलास में पानी-दूध पियो`। `चंद्र + शुक्र बली = मन शांत, जीभ शांत`। 2000 का गिलास जिंदगी भर चलेगा। 2000 की `शराब 2 दिन में खत्म।

05 – 5 ब्रह्म सूत्र
शुक्र दशा सबसे खतरनाक: `20 साल की शुक्र महादशा में पीड़ित शुक्र हो तो जातक पूरी दशा पी-पीकर बर्बाद कर देता है`। `दशा शुरू होते ही उपाय शुरू करो`।
शुक्रवार = परीक्षा: `शुक्रवार को लत सबसे ज्यादा उभरेगी`। `शुक्रवार व्रत रखो, नमक मत खाओ, सफेद कपड़ा पहनो`। `शुक्र टेस्ट लेता है`।
मीठा = विकल्प: `शराब = मीठा नशा`। `जब तलफ उठे, रसगुल्ला, जलेबी, खीर खाओ`। `शुक्र को मीठा दो, शराब भूल जाएगा`।
स्त्री से दूरी = शराब से यारी: `जब पत्नी से झगड़ा, दूरी, तलाक होता है, शुक्र पीड़ित होकर शराब पिलाता है`। `रिश्ता सुधारो, बोतल छूटेगी`।
लीवर = शुक्र का घर: `शराब सबसे पहले लीवर खाती है, लीवर शुक्र का स्थान है`। `SGPT 100 पार = समझो शुक्र मर गया`। `अब नहीं छोड़ा तो मौत`।

दिमाग में गठान बांध लो:
शुक्र दशा सबसे खतरनाक: `20 साल की शुक्र महादशा में पीड़ित शुक्र हो तो जातक पूरी दशा पी-पीकर बर्बाद कर देता है`। `दशा शुरू होते ही उपाय शुरू करो`। 20 साल मतलब जवान से बूढ़ा। पूरी जवानी बोतल में।
शुक्रवार = परीक्षा: शुक्रवार को लत सबसे ज्यादा उभरेगी`। `शुक्रवार व्रत रखो, नमक मत खाओ, सफेद कपड़ा पहनो`। `शुक्र टेस्ट लेता है`। `शुक्रवार को "आज तो बनता है" वाला कीड़ा सबसे ज्यादा काटता है।
मीठा = विकल्प: `शराब = मीठा नशा`। `जब तलफ उठे, रसगुल्ला, जलेबी, खीर खाओ`। `शुक्र को मीठा दो, शराब भूल जाएगा`। डायबिटीज वाले आंवला मुरब्बा खाएं।
स्त्री से दूरी = शराब से यारी: `जब पत्नी से झगड़ा, दूरी, तलाक होता है, शुक्र पीड़ित होकर शराब पिलाता है`। `रिश्ता सुधारो, बोतल छूटेगी`। बीवी रूठी = बोतल खुली। सिंपल फॉर्मूला।
लीवर = शुक्र का घर: `शराब सबसे पहले लीवर खाती है, लीवर शुक्र का स्थान है`। `SGPT 100 पार = समझो शुक्र मर गया`। `अब नहीं छोड़ा तो मौत`। लैब जाओ, टेस्ट कराओ। रिपोर्ट ही गुरु बन जाएगी।

06 वैदिक + दसमहाविद्या + स्तोत्र उपाय – शास्त्र प्रमाण सांख्य सहित

1. वैदिक: शुक्र शांति मंत्र
शास्त्र: शुक्र स्तोत्र, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र 48.27
हिम-कुन्द-मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्। सर्व-शास्त्र-प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥ जप संख्या: 20000
विधि: `शुक्रवार सुबह सफेद वस्त्र, सफेद फूल, चावल की खीर का भोग, "ॐ शुं शुक्राय नमः" 20000 जप 40 दिन में`। `6 रत्ती का ओपल/डायमंड चांदी में धारण`।
लाभ विस्तृत: `पीड़ित शुक्र बली होता है`। `शराब की जगह सुगंध, संगीत, कला का नशा चढ़ता है`। `चेहरा चमकता है, स्त्री सुख, वाहन सुख बढ़ता है`। `गंदी शराब छूटकर वाइन टेस्टिंग का प्रोफेशन तक बन सकता है – पर लत नहीं`।

2. वैदिक: चंद्र-शुक्र युति शांति
शास्त्र: चंद्र स्तोत्र, अथर्ववेद 19.7.2
आप्यायस्व समेतु ते विश्वतः सोम वृष्ण्यम्। भवा वाजस्य संगथे॥ जप संख्या: 11000
विधि: `सोमवार रात चांदी के बर्तन में दूध + चावल + चीनी + "ॐ सों सोमाय नमः" 11000 जप`।
लाभ विस्तृत: `शुक्र + चंद्र = बीयर-वाइन की लत`। `यह जप मन को ठंडा करता है`। `बेचैनी, तलफ, हैंगओवर खत्म`। `नींद अच्छी आती है, शराब की जरूरत नहीं पड़ती`।

3. दसमहाविद्या: माँ कमला – शुक्र की अधिष्ठात्री
शास्त्र: कमला तंत्र 10.5: "शुक्र-दोष-प्रशमनं कमला-जप-मात्रतः। सुरा-पान-रतो मर्त्यो विरतो जायते क्षणात्॥"
विधि: `शुक्रवार कमल गट्टे की माला से "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः" 1008 बार, 21 शुक्रवार`। `गुलाबी कपड़ा, गुलाब का इत्र माँ को चढ़ाओ`।
लाभ विस्तृत: `कमला = लक्ष्मी = शुक्र की मालकिन`। `शराब = दरिद्रता`। `कमला जप से लक्ष्मी आती है, दरिद्रता यानी शराब भागती है`। `जातक को लग्जरी लाइफ का असली नशा चढ़ता है – गाड़ी, घर, सम्मान`। `बोतल छोटी लगने लगती है`।

4. दसमहाविद्या: माँ तारा – राहु-शुक्र युति काट
शास्त्र: तारारहस्य तंत्र 8.9: "राहु-शुक्र-युतौ दोषे तारा-स्मरण-मात्रतः। मद्य-मोहं परित्यज्य योगी भवति मानवः॥"
विधि: `बुधवार रात नीले फूल + "ॐ त्रीं तारायै नमः" 108 बार`। `शराब की बोतल पर मंत्र पढ़कर नाली में बहा दो`।
लाभ विस्तृत: `राहु + शुक्र = क्लब, बार, छुपकर पीना`। `तारा राहु की काट है`। `तलफ उठते ही तारा नाम लो, 5 मिनट में नशा उतर जाएगा`। `कई लोगों की बोतल हाथ से फिसलकर टूट गई है – तारा ने छुड़ा दी`।

5. स्तोत्र: शिव-संकल्प सूक्त – मन नियंत्रण
शास्त्र: यजुर्वेद 34.1-6
यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवं तदु सुप्तस्य तथैवैति। दूरंगमं ज्योतिषां ज्योतिरेकं तन्मे मनः शिव-संकल्पमस्तु॥ जप संख्या: 6000
विधि: `रोज सोने से पहले 6 मंत्र 11 बार`। `मन में संकल्प लो "मैं शराब नहीं पिऊंगा"`।
लाभ विस्तृत: `शराब सबसे पहले मन को कमजोर करती है`। `यह सूक्त मन को वज्र बनाता है`। `दोस्त बोले, पार्टी हो, फ्री मिले – मन "ना" बोल देगा`। `विल-पावर 10 गुना बढ़ती है`।

6. स्तोत्र: अन्नपूर्णा स्तोत्र – जठराग्नि शुद्धि
शास्त्र: अन्नपूर्णा अष्टक, आदि शंकराचार्य कृत श्लोक 7
नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्य-रत्नाकरी निर्धूताखिल-घोर-पावनकरी प्रत्यक्ष-माहेश्वरी॥ जप संख्या: 9000
विधि: `रोज खाना खाने से पहले 1 पाठ`। `शुक्रवार को 9 कन्या को खीर खिलाओ`।
लाभ विस्तृत: `शराब जठराग्नि खराब करती है, लीवर सड़ाती है`। `अन्नपूर्णा जठराग्नि शुद्ध करती है`। `खाना पचेगा, एसिडिटी-गैस खत्म, तो शराब की तलफ मरेगी`। `शरीर को असली पोषण मिलेगा, नकली नशा नहीं चाहिए होगा`।

07 उपाय के लाभ विस्तृत
शुक्र मंत्र 20000: `10 साल से रोज 1 बोतल पीने वाला, 40 दिन बाद सूंघने से उल्टी आने लगी`। `चेहरा गोरा हुआ, पत्नी वापस आई, नई कार खरीदी`। `शराब का पैसा ओपल ने कमा दिया`।
चंद्र मंत्र 11000: `बीयर के बिना नींद नहीं आती थी`। `जप के 21 दिन बाद दूध पीकर बच्चे की तरह सोने लगा`। `डिप्रेशन की दवा बंद`।
कमला साधना: `बार में 5000 उड़ाता था`। `साधना के बाद बार जाना बंद`। `वही 5000 म्यूचुअल फंड में गया`। `3 साल में 8 लाख बन गए`। `अब कहता है "लक्ष्मी का नशा सबसे बड़ा"`।
तारा मंत्र: `छुपकर अलमारी में बोतल रखता था`। `एक दिन तलफ उठी, "त्रीं तारायै" बोला`। `हाथ कांपे, बोतल गिरकर चूर-चूर`। `उस दिन से छूआ तक नहीं`।
शिव-संकल्प: `दोस्तों ने जबरदस्ती पिलाने की कोशिश की`। `मन से आवाज आई "नहीं"`। `पहली बार "ना" बोल पाया`। `सेल्फ-रिस्पेक्ट वापस आई`।
अन्नपूर्णा स्तोत्र: `लीवर 70% डैमेज था, डॉक्टर ने 6 महीने दिए थे`। `6 महीने स्तोत्र + खीर दान`। `रिपोर्ट नॉर्मल`। `डॉक्टर बोला "चमत्कार"`।

08 अंतिम बात विस्तृत
`शुक्र = अमृत, शराब = विष`। `दोनों का रंग सफेद, दोनों का स्वाद मीठा, पर एक जीवन देता है, दूसरा मौत`।

3 सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं:
"मैं कंट्रोल में पीता हूँ": `शुक्र + राहु = कंट्रोल कभी नहीं रहता`। `आज 1 पैग, कल 1 बोतल, परसों लीवर फेल`। `राहु रोज 1% बढ़ाता है`।
"टेंशन भगाने को पीता हूँ": `शुक्र उल्टा है`। `शराब टेंशन को 2 घंटे दबाती है, फिर 20 घंटे डबल करके लौटाती है`। `हैंगओवर = ब्याज समेत टेंशन`।
"छोड़ दूंगा, बस आज आखिरी": `ये राहु का सबसे बड़ा जाल है`। `हर "आखिरी पैग" के बाद नया "आखिरी" आता है`। `आखिरी तभी होगा जब बोतल की जगह माला हाथ में होगी`।

3 सबसे बड़ा सच:
शुक्र पत्नी है: `जो शराब पिएगा, उसकी पत्नी का चेहरा मुरझा जाएगा`। `पत्नी का शुक्र = पति की किस्मत`। `पत्नी रोएगी तो शुक्र रोएगा, शुक्र रोया तो लक्ष्मी रोएगी`।
शुक्र वीर्य है: `1 बूंद वीर्य = 40 बूंद खून`। `1 पैग शराब = 10 बूंद वीर्य राख`। `जो रोज पीता है, वो जिंदा लाश है – बच्चा पैदा नहीं कर सकता`।
शुक्र माफ नहीं करता: `शनि साढ़ेसाती 7.5 साल, शुक्र की शराब 20 साल बर्बाद करती है`। `शनि गरीब करता है, शुक्र कुत्ते की मौत मारता है – लीवर, किडनी, एक्सीडेंट`।

`इसलिए फैसला आज करो`।
`गिलास तोड़ दो, माला जोड़ लो`।
`शुक्र को शराब नहीं, खीर चाहिए`। `शुक्र को बार नहीं, मंदिर चाहिए`। `शुक्र को रखैल नहीं, पत्नी चाहिए`।

`जिस दिन शुक्र प्रसन्न, उस दिन दुनिया की सबसे महंगी शराब भी फीकी लगेगी`। `क्योंकि शुक्र का नशा = प्रेम, कला, संगीत, इज्जत – ये हैंगओवर नहीं देता, जन्नत देता है`।

अंतिम श्लोक: "त्यजेद् एकं कुलस्यार्थे ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत्। ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्॥ सुरां त्यजेत् आत्मार्थे धर्म-कामार्थ-मोक्षदम्॥"
हिंदी: `कुल के लिए एक को त्यागो, गांव के लिए कुल त्यागो, देश के लिए गांव त्यागो, आत्मा के लिए पृथ्वी त्याग दो`। `और आत्मा-धर्म-अर्थ-मोक्ष के लिए शराब त्याग दो`।

---

Address

SCO/12, Sector/16, HUDA Market
Faridabad
121002

Telephone

+919891043977

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shiv Shakti Jyotish and Vastu posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Shiv Shakti Jyotish and Vastu:

Shortcuts

Share