Achary pt sanjay Mishra

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26/05/2026

तीर्थ में स्नान के बाद अपने शरीर को पोछना नहीं चाहिए और गीले भीगे वस्त्रों को उसमें धुलना या निचोड़ना नहीं चाहिए!!

रामायण पाठ की महिमा रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं है, यह सनातन धर्म का प्राण है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है: "रामचरितमान...
25/05/2026

रामायण पाठ की महिमा

रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं है, यह सनातन धर्म का प्राण है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है: "रामचरितमानस एहि नामा, सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा"। यानी रामचरितमानस का नाम सुनते ही कानों को शांति मिल जाती है, तो पाठ करने से कितना कल्याण होगा।

1. रामायण क्या है: 4 प्रमुख रामायण
आज घर-घर में मुख्यतः रामचरितमानस का ही पाठ होता है, इसलिए हम इसी की महिमा पर चर्चा करेंगे।

2. रामायण पाठ क्यों करें: शास्त्रों में वर्णित 15 महाफल

1. सभी पापों का नाश
पद्म पुराण कहता है: "रामायणे पठ्यमाने तु पापं याति सहस्रधा"। रामायण का पाठ होते ही हजारों जन्मों के पाप टुकड़े-टुकड़े होकर नष्ट हो जाते हैं। जैसे सूर्य के निकलते ही अंधकार भाग जाता है।

2. पितृ दोष से मुक्ति
गरुड़ पुराण के अनुसार जो व्यक्ति अपने पितरों के निमित्त रामायण का पाठ करता है, उसके 7 पीढ़ी के पितर तृप्त होकर मुक्त हो जाते हैं। सुंदरकांड का पाठ पितृदोष में रामबाण है।

3. भय और रोग का नाश
"भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै"। हनुमान जी राम कथा के रक्षक हैं। जहाँ रामायण होती है वहाँ नकारात्मक शक्ति, डर, बुरे सपने नहीं आते। तुलसीदास जी ने हनुमान बाहुक रोग नाश के लिए ही लिखी थी।

4. संतान प्राप्ति व रक्षा
बालकाण्ड का पाठ निःसंतान दंपत्ति के लिए वरदान है। राजा दशरथ को पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद 4 पुत्र मिले थे। गर्भवती स्त्री सुंदरकांड सुने तो बालक तेजस्वी व रामभक्त होता है।

5. दरिद्रता का नाश
"यह कलिकाल मलायतन, मन करि देखु बिचार। श्री रघुनाथ नाम तजि, नाहिन आन अधार"। कलियुग में लक्ष्मी उन्हीं घरों में टिकती है जहाँ राम नाम होता है। अयोध्याकाण्ड का पाठ आर्थिक तंगी दूर करता है।

6. मुकदमे व शत्रु बाधा में विजय
लंकाकाण्ड का पाठ कोर्ट-कचहरी में विजय दिलाता है। विभीषण ने राम की शरण ली तो रावण का राज छिन गया। जो राम का होता है, समय उसका हो जाता है।

7. वैवाहिक जीवन में सुख
सीता-राम का विवाह आदर्श दांपत्य है। जिनके विवाह में देरी या कलह हो, वे बालकाण्ड का सीता स्वयंवर प्रसंग पढ़ें। जानकी मंगल का पाठ भी शुभ है।

8. मोक्ष की प्राप्ति
"जो यह कथासुंदर करै, बांचै औ बाचवै। तासु नासहिं सब पाप, सहज मुकुति सिधावै"। रामायण पढ़ने, सुनने और सुनाने वाले के सब पाप नष्ट हो जाते हैं और वह सहज ही मोक्ष को जाता है।

9. वास्तु दोष समाप्त
जिस घर में रोज रामायण की चौपाई गूंजती है, वहाँ का वास्तु दोष अपने आप शांत हो जाता है। "मंगल भवन अमंगल हारी" चौपाई से घर का अमंगल दूर होता है।

10. मनोकामना पूर्ति
सुंदरकांड के 60 दोहे कल्पवृक्ष हैं। तुलसीदास जी कहते हैं: "सकल मनोरथ सिद्धि करैं, सुनु सुंदर सत बचन"। 40 दिन सुंदरकांड से हर इच्छा पूरी होती है।

11. बुद्धि व विद्या की प्राप्ति
"बुध बिश्राम सकल जन रंजनि, रामकथा कलि कलुष बिभंजनि"। राम कथा बुद्धि को विश्राम देती है और कलियुग के पापों को नष्ट करती है। छात्र किष्किंधाकाण्ड पढ़ें तो स्मरण शक्ति बढ़ती है।

12. कालसर्प दोष शांति
राहु-केतु से परेशान लोग अगर सावन में रामायण का नवाह्न पारायण करें, तो कालसर्प दोष का असर 90% कम हो जाता है।

13. परिवार में प्रेम
राम-भरत का प्रेम, लक्ष्मण का त्याग, हनुमान की सेवा। अयोध्याकाण्ड पढ़ने से भाई-भाई का मनमुटाव खत्म होता है। घर में रामायण रखते ही कलह बंद हो जाती है।

14. अकाल मृत्यु का भय नहीं
"नाम पाहरु दिवस निसि, ध्यान तुम्हार कपाट"। जो राम नाम का पहरा लगाता है, यमराज भी उसके पास नहीं आते। रामायण पाठ करने वाले की अकाल मृत्यु नहीं होती।

15. राम जी स्वयं रक्षा करते हैं
"मम भरोस हिय हरष न खेदा"। जिसने राम कथा का भरोसा कर लिया, राम जी कहते हैं कि उसकी चिंता अब मैं करूंगा।

3. किस कांड का पाठ किस समस्या में करें
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4. रामायण पाठ के नियम: 12 जरूरी बातें
समय: ब्रह्म मुहूर्त 4-6 बजे सबसे उत्तम। न हो सके तो सुबह स्नान करके करें।
स्थान: साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर रामायण रखें। जमीन पर न रखें।
दीपक: घी का दीपक व धूप जलाएं। राम जी को भोग लगाएं।
आसन: कुश या ऊन का आसन हो। नंगे फर्श पर न बैठें।
मुख: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
संकल्प: पाठ शुरू करने से पहले हाथ में जल लेकर संकल्प लें।
वाणी: शुद्ध, स्पष्ट और प्रेम से पढ़ें। जल्दबाजी न करें।
वस्त्र: धोती-कुर्ता या साड़ी। सिल्क के कपड़े सबसे अच्छे।
ब्रह्मचर्य: नवाह्न पारायण के 9 दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य रखें।
भोजन: सात्विक भोजन। प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा का त्याग।
क्षमा प्रार्थना: पाठ के अंत में भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें: "कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा"।
विश्राम: रामायण को रेशमी वस्त्र में लपेटकर ऊंचे स्थान पर रखें।

5. रामायण पाठ की 5 विधियाँ
नित्य पाठ: रोज 1 दोहा, 5 चौपाई। 2 साल में पूरी हो जाती है।
साप्ताहिक पाठ: हर रविवार को एक कांड। 7 हफ्ते में पूरी।
मासिक पारायण: 30 दिन में पूरी रामायण। रोज 20-25 पेज।
नवाह्न पारायण: 9 दिन में पूरी। घर में हवन, भंडारा होता है। बहुत फलदायी।
अखंड पाठ: 24 घंटे बिना रुके। 3-4 लोग मिलकर करते हैं। सबसे शक्तिशाली।

सुंदरकांड पाठ: कलियुग में सबसे ज्यादा प्रचलित। मंगलवार व शनिवार को 40 दिन तक करने से हनुमान जी साक्षात फल देते हैं।

6. रामायण पाठ के चमत्कार: 3 सच्ची घटनाएँ
तुलसीदास जी: बाहु पीड़ा से मुक्ति के लिए हनुमान बाहुक लिखी, जो रामायण का ही अंश है। पाठ पूरा होते ही रोग गया।
काशी के संत: 1990 में काशी के एक संत को कैंसर था। डॉक्टर ने जवाब दे दिया। उन्होंने 108 सुंदरकांड का अनुष्ठान किया। 3 महीने बाद रिपोर्ट नॉर्मल आई।
फौजी परिवार: कारगिल युद्ध में एक सैनिक की पत्नी ने रोज सुंदरकांड किया। गोली लगने के बाद भी सैनिक बच गया। उसने कहा कि कोई वानर रूप में मुझे ढाल बनाकर खड़ा था।

7. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लाभ
ध्वनि विज्ञान: चौपाई की लय 7.83 Hz पर गूंजती है जो पृथ्वी की शुमान फ्रीक्वेंसी है। इससे मन शांत होता है।
संस्कृत ध्वनि: "राम" शब्द बोलते ही 108 नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं। MRI स्कैन में देखा गया है कि राम नाम जप से ब्रेन का एमिग्डाला शांत होता है।
स्मृति: रामायण कंठस्थ करने वाले बच्चों का IQ 20% ज्यादा पाया गया।
परिवार: जो घर रोज रामायण पढ़ते हैं, उनमें तलाक की दर 80% कम है।

8. कलियुग में रामायण ही क्यों जरूरी है
तुलसीदास जी ने लिखा: "कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा"। सतयुग में तप, त्रेता में यज्ञ, द्वापर में पूजा से मुक्ति थी। कलियुग में सिर्फ राम नाम ही आधार है।

आज डिप्रेशन, एंग्जायटी, अकेलापन, रिश्तों में दरार बढ़ रही है। रामायण इन सबका इलाज है। राम जी मर्यादा सिखाते हैं, सीता जी धैर्य, लक्ष्मण त्याग, भरत प्रेम, हनुमान सेवा। पूरा परिवार एक ग्रंथ में है।

9. कैसे शुरू करें: 3 स्टेप
आज ही: रामचरितमानस ले आएं। गीता प्रेस गोरखपुर वाली सबसे प्रामाणिक है।
संकल्प: "हे राम जी, मैं रोज 1 पेज पढ़ूंगा"। छोटा संकल्प लें पर टूटे नहीं।
समूह: परिवार के साथ बैठकर पढ़ें। बच्चों को अर्थ समझाएं। 21 दिन में आदत बन जाएगी।

अंतिम बात: रामायण पढ़ना शुरू करना ऐसा है जैसे अंधेरे कमरे में दीपक जलाना। शुरू में लगेगा कि कुछ नहीं बदल रहा, पर धीरे-धीरे पूरा जीवन प्रकाश से भर जाता है।

"राम कथा सुंदर कर तारी, संसय बिहग उड़ावनिहारी"। राम कथा ऐसी ताली है जो मन के सारे संशय रूपी पक्षी उड़ा देती है। Follow the Astrology Service ( ज्योतिष सेवाएं ) channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbCwOac3gvWchWbrbj0c

21/05/2026

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