31/05/2026
#सिंह #लग्न की कुंडली में शनि को छठा (रोग/शत्रु) और सातवां (विवाह/साझेदारी) भाव प्राप्त होता है。यह लग्नेश सूर्य के नैसर्गिक शत्रु हैं, इसलिए इन्हें इस लग्न में अति मारक और अशुभ माना जाता है。सामान्यतः इनकी दशा-अंतर्दर्शा में संघर्ष, स्वास्थ्य समस्याएं और जीवनसाथी से मतभेद की संभावना रहती है
🚩 #चतुर्थ #भाव ( #वृश्चिक): माता के स्वास्थ्य में परेशानी और घरेलू अशांति का कारण बनता है। भूमि-मकान के सुख में बाधा आती है।
सिंह लग्न में शनि देव कुंडली में छठे और सातवें भाव के स्वामी हैं। इसलिए, लग्नेश सूर्य के शत्रु होने के कारण शनि देव की यश स्थिति सिंह लग्न में अति मारक मानी गई है। इस लग्न में, कुंडली के सभी भावों में शनि देव के प्रभाव लगभग अशुभ ही होंगे। इसलिए सिंह लग्न के जातकों को, शनि की अशुभ रूप से दशा-अंतर्दशा में सही उपाय, मंत्र जाप और दान करके उनकी अशुभता को दूर करने की सलाह दी गई है। साथ ही, कुंडली के छठे, आठवें, और बारहवें भाव में शनि देव विपरीत राजयोग की स्थिति में आकर शुभ फल देने में सक्षम है। लेकिन, इसमें भी सूर्य देव का बलि होना बहुत जरूरी है।
ग्रहों के शुभ प्रभाव जातक के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। सिंह लग्न में शनि को एक क्रूर और मारक ग्रह की स्थिति में देखा गया है। क्योंकि यह छठे (रोग और शत्रु) और सातवें (विवाह और साझेदारी) के भाव के स्वामी है। शनि और लग्नेश सूर्य के बीच शत्रुता का संबंध होता है। जिसके कारण यह स्थिति अक्सर जातक को अशुभ प्रभाव ही देती है। हालांकि, शनि के प्रभाव कुंडली में उसकी स्थिति और अन्य ग्रहों से युति के आधार पर भी मिलते हैं। जिससे जातक को शुभ और अशुभ दोनों तरह के परिणाम प्राप्त होते हैं।
🌱 आइये जानें, सिंह लग्न में शनि के अशुभ प्रभाव-
सिंह लग्न में अशुभ शनि के प्रभाव होने पर जातक को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं अक्सर परेशान कर सकती हैं।
लग्नेश शनि से प्रभावित जातक को शत्रुओं से अधिक भय, पराजय और समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
अशुभ प्रभाव में शनि जातक को कानूनी विवादों और कोर्ट-कचहरी के मामलों में उलझने की संभावना देते हैं।
अशुभ शनि जातक के वैवाहिक जीवन में तनाव, दूरियाँ या उतार-चढ़ाव की समस्या देते हैं। यदि शनि छठे, सातवें या आठवें भाव में हो तो तलाक की स्थिति भी आ सकती है।
कुंडली में, शनि से पीड़ित जातक को करियर में सफलता पाने के लिए बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। साथ ही ऐसे जातक को जीवन के कई क्षेत्रों में अनावश्यक देरी और रुकावटों का भी सामना करना पड़ता है।
शनि की कमजोर अवस्था में जातक को बहुत अधिक मानसिक मानसिक तनाव और संघर्ष का सामना करना पड़ता है।