Arogyam Health care center

Arogyam Health care center In our center we diagnose and treat patients by using Modern and Ayurvedic methods. We are expert in

03/05/2026

#मधुमेह (Diabetes) को नियंत्रित रखने के लिए केवल दवाएँ ही काफी नहीं होतीं, बल्कि यह आपसे आपकी #जीवनशैली में कुछ महत्वपूर्ण और #अनुशासित बदलावों की मांग करता है। यदि आप इन सावधानियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेते हैं, तो आप एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
​यहाँ कुछ प्रमुख सावधानियाँ दी गई हैं:
​1. खान-पान में अनुशासन
​चीनी और रिफाइंड कार्ब्स से दूरी: चीनी, मिठाई, मैदा, सफेद चावल और मीठे ड्रिंक्स का सेवन न्यूनतम करें। ये रक्त में ग्लूकोज के स्तर को तेजी से बढ़ाते हैं।
​फाइबर युक्त भोजन: अपने आहार में हरी सब्जियां, साबुत अनाज (जैसे ओट्स, बाजरा, चोकर युक्त आटा) और दालें शामिल करें। फाइबर शुगर के अवशोषण को धीमा करता है।
​नियमित अंतराल पर भोजन: एक बार में बहुत अधिक खाने के बजाय, दिन भर में छोटे-छोटे अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाएं। इससे शुगर लेवल स्थिर रहता है।
​2. #शारीरिक सक्रियता
​पैदल चलना प्रतिदिन कम से कम 30-45 मिनट तेज चलें। यह मांसपेशियों को ग्लूकोज का उपयोग करने में मदद करता है।
#योग और #व्यायाम: नियमित व्यायाम वजन को नियंत्रित रखता है और इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाता है।
​3. नियमित निगरानी
​ग्लूकोज चेकअप: घर पर ग्लूकोमीटर रखें और समय-समय पर फास्टिंग (खाली पेट) और भोजन के बाद की शुगर चेक करते रहें।
​HbA1c टेस्ट: हर 3 से 6 महीने में यह टेस्ट कराएं ताकि पिछले तीन महीनों के औसत शुगर लेवल का पता चल सके।
​4. पैरों की देखभाल
#​मधुमेह में पैरों की नसें कमजोर हो सकती हैं और घाव भरने में समय लगता है।
​पैरों को रोज साफ करें और चेक करें कि कहीं कोई कट, छाला या सूजन तो नहीं है।
​हमेशा आरामदायक और सही फिटिंग के जूते पहनें।
​5. तनाव और नींद
​तनाव प्रबंधन: मानसिक तनाव शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ाता है, जो शुगर लेवल को बिगाड़ सकता है। इसके लिए ध्यान या शौक के काम करें।
​पर्याप्त नींद: शरीर की मरम्मत और हार्मोनल संतुलन के लिए 6से8 घंटे की गहरी नींद अनिवार्य है।
​ #अन्य महत्वपूर्ण बातें-
​पानी का भरपूर सेवन: शरीर को हाइड्रेटेड रखें, जिससे अतिरिक्त शुगर मूत्र के जरिए बाहर निकल सके।
​नियमित डॉक्टरी सलाह: अपनी मर्जी से दवा न बदलें और समय-समय पर आंखों, किडनी और दिल की जांच करवाते रहें।
​एक छोटा सुझाव: मधुमेह कोई बीमारी नहीं बल्कि एक 'कंडीशन' है जिसे सही जानकारी और अनुशासन से पूरी तरह वश में रखा जा सकता है। आप अपनी पसंदीदा चीजों का आनंद भी ले सकते हैं, बस मात्रा और समय का ध्यान रखना जरूरी ll

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26/04/2026

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13/04/2026
02/02/2026

Kuch time der se panhuchne per parksha na dene dena ek atyachar hai ..
Khud bhrastachar me lipt rahenge ..bacchon ke imandari ka dhong karenge ..

Please share Holistic approach..for best results..
31/01/2026

Please share
Holistic approach..for best results..

17/12/2025

Fibroscan of Liver..

👉 ये CAP Score और LSM स्कोर क्या है ? क्यो कराते हैं इसको, यह सब जानना जरूरी हैं आप सभी के लिए।
आजकल फैटी लिवर में एक जांच जरूर कराई जाती हैं और वो है फाइब्रो स्कैन (Fibroscan)

🔍 FibroScan क्या बताता है?
FibroScan एक modern, painless जांच है, जिसमें:
• सुई नहीं लगती
• खून नहीं निकलता
• 10–15 मिनट में report मिल जाती है
FibroScan दो बहुत अहम चीज़ें बताता है👇

📊 CAP Score= Controlled Attenuation Parameter
CAP Score यह बताता है कि Liver में fat कितना जमा है।
• Low CAP Score → कम fat
• High CAP Score → ज्यादा fat
👉 CAP Score = इससे पता चलता है कि Liver में कितना fat जमा हुआ है?

📒 CAP Score (dB/m) Range
< 238 = Normal
238 – 259 = Mild Steatosis (Grade 1)
260 – 289 = Moderate Steatosis (Grade 2)
≥ 290 = Severe Steatosis (Grade 3)

📈 kPa / LSM : Liver Stiffness Measurement
kPa / LSM यह बताता है कि Liver कितना stiff (सख्त) हो गया है।
यह stiffness आती है:
• लंबे समय तक fat रहने से
• लगातार inflammation से
इसे medical language में Fibrosis कहते हैं।
👉 kPa / LSM = इससे पता चलता है कि लिवर कितना damage हुआ है?

Fibrosis Score Ranges (kPa)
• F0 (No Fibrosis): Below 7 kPa.
• F1 (Mild Fibrosis): Around 7.1 - 10 kPa.
• F2 (Moderate Fibrosis): Around 10.1 - 13 kPa.
• F3 (Severe Fibrosis): Around 13.1 - 18 kPa.
• F4 (Cirrhosis): 19 kPa and above (often >25 kPa).

⚠️ सबसे ज़रूरी बात
• CAP Score बताता है → कितना fat है
• kPa / LSM बताता है → कितना नुकसान हो चुका है

🌱 क्या Fatty Liver ठीक हो सकता है?
हाँ — बिल्कुल हो सकता है।
अगर:
• Weight 7–10% कम किया जाए
• Sugar, junk, fried food कम किया जाए
• Alcohol पूरी तरह बंद हो
• Daily walking / exercise हो
• Diabetes, BP control में हों
तो Liver खुद को repair करने लगता है।






Aise doctor se bachiye ....
15/11/2025

Aise doctor se bachiye ....

15/11/2025

चिंता (Anxiety) से मुक्ति पाना एक दिन का काम नहीं है, लेकिन इसे पूरी तरह नियंत्रित और बहुत हद तक खत्म किया जा सकता है।
यहाँ बहुत ही व्यावहारिक, वैज्ञानिक और भारतीय परिवेश में आज़माए हुए तरीके विस्तार से दिए जा रहे हैं। इन्हें क्रम से अपनाएँ तो 30-90 दिनों में आपको बहुत बड़ा अंतर महसूस होगा।
१. सबसे पहले चिंता को समझें (ज्ञान से मुक्ति शुरू होती है)
चिंता कोई “बीमारी” नहीं, यह दिमाग का एक प्रोटेक्शन मैकेनिज़्म है जो खतरे को भाँपकर “Fight/Flight/Freeze” मोड में चला जाता है।
90% चिंता भविष्य की कल्पना (What if…) से आती है, जो वास्तव में कभी होती ही नहीं।
सूत्र: “चिंता उस ब्याज की तरह है जो आप उस कर्ज़ पर देते हो जो तुमने लिया ही नहीं।” ~ मार्क ट्वेन
२. तुरंत राहत के 7 तरीके (जब चिंता का अटैक आए)
4-7-8 ब्रीदिंग (डॉ. एंड्रू वेल की तकनीक)
→ 4 सेकंड नाक से साँस लें → 7 सेकंड रोकें → 8 सेकंड मुँह से छोड़ें
→ 4-5 बार करें = 2 मिनट में नर्वस सिस्टम शांत
5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक
→ 5 चीजें देखो, 4 चीजें छूओ, 3 आवाज़ें सुनो, 2 गंध सूँघो, 1 स्वाद लो
→ दिमाग “यहाँ-और-अब” में आ जाता है
ठंडा पानी: मुँह-कान-गर्दन पर ठंडा पानी डालें या बर्फ का टुकड़ा हाथ में रखें
“तो क्या?” वाला खेल खेलें
→ सबसे बुरा क्या हो सकता है? → फिर उसका भी सबसे बुरा? → अंत में आप पाएँगे कि 99% डर बेकार हैं
शरीर हिलाएँ: 20 जंपिंग जैक्स या 30 सेकंड तेज़ दौड़ लगाएँ (एड्रिनलिन निकल जाता है)
हनुमान चालीसा या कोई मंत्र 3 बार तेज़ आवाज़ में पढ़ें (वाइब्रेशन थेरेपी)
किसी अपने को फोन करके सिर्फ़ 2 मिनट बात करें (सामाजिक कनेक्शन सबसे तेज़ एंटी-एंग्ज़ाइटी है)
३. लंबे समय तक चिंता मुक्त रहने के 10 रोज़ाना के अभ्यास
सुबह 10 मिनट ध्यान (विपश्यना/अनापान या सिर्फ़ साँस देखना)
रोज़ 30-45 मिनट तेज़ चलना या व्यायाम (चिंता का सबसे बड़ा इलाज)
सोने से 2 घंटे पहले स्क्रीन बंद (नीली रोशनी कोर्टिसोल बढ़ाती है)
“चिंता का समय” निर्धारित करें
→ रोज़ शाम 6:00-6:15 सिर्फ़ 15 मिनट चिंता करने का समय। बाकी समय चिंता आए तो बोलें – “शाम 6 बजे मिलते हैं”
जर्नलिंग (रोज़ 3 पेज लिखें)
→ पेज-1: आज क्या गलत हो सकता है?
→ पेज-2: उसके होने की संभावना कितनी %?
→ पेज-3: मैं उसके लिए क्या कर सकता हूँ?
→ फिर पेज फाड़ कर फेंक दें (यह मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत काम करता है)
आहार: चीनी, कैफीन, प्रोसेस्ड फ़ूड कम करें। बादाम, केला, दही, हल्दी-दूध बढ़ाएँ
नींद: रोज़ एक ही समय पर सोना-उठना (7-8 घंटे)
कृतज्ञता अभ्यास: रोज़ सोते समय 5 चीजें जिनके लिए शुक्रगुज़ार हैं, ज़ोर से बोलें
“लेबलिंग” तकनीक: जब चिंता आए तो खुद से बोलें –
“ये सिर्फ़ एक विचार है, मैं ये विचार नहीं हूँ”
दूसरों की मदद करें: किसी का दुख सुनें या छोटी मदद करें – चिंता अपने आप कम हो जाती है
४. भारतीय/आध्यात्मिक तरीके (जो सदियों से काम कर रहे हैं)
गायत्री मंत्र या ॐ का 11-27 बार जप (वैज्ञानिक रूप से गामा वेव्स बढ़ाता है)
रोज़ सुबह सूर्य को जल चढ़ाएँ + 2 मिनट सूर्य की ओर देखें (विटामिन D + सेरोटोनिन)
तुलसी के 5-7 पत्ते चबाएँ या चाय पिएँ (प्राकृतिक एंटी-एंग्ज़ाइटी)
रामचरितमानस का दोहा:
“भय बिनु होइ न प्रीति” → जब तक थोड़ा भय रहेगा तब तक प्रभु से प्रीति नहीं होगी। अर्थात भय छोड़कर पूरी तरह समर्पण करें।
५. कब डॉक्टर/थेरेपिस्ट से मिलें?
अगर चिंता के साथ दिल की धड़कन तेज़ रहना, हाथ-पाँव सुन्न पड़ना, नींद बिल्कुल न आना, आत्महत्या के विचार आएँ → तुरंत मनोचिकित्सक से मिलें (कोई शर्म नहीं, जैसे शुगर में डॉक्टर जाते हैं वैसे ही)
अंतिम सूत्र
“चिंता उसी चीज़ की होती है जो आपके नियंत्रण में नहीं है।
जो आपके नियंत्रण में है – उस पर काम करो,
जो नियंत्रण में नहीं – उसे ईश्वर/वक़्त पर छोड़ दो।”
इसे रोज़ सुबह आईने के सामने बोलें:
“मैं सुरक्षित हूँ, मैं पर्याप्त हूँ, सब ठीक हो जाएगा।”
धीरे-धीरे चिंता आपका गुलाम बन जाएगी, आप नहीं।
Dr Dixit ji

09/11/2025

दुनिया भर की सरकारें अब कह रही हैं कि अपने स्वास्थ्य की रक्षा स्वयं कीजिये!आपका स्वास्थ्य आपके जिम्मे है! पड़ोसी या सरकार क्या करेगी!

सर्वमन्यत्_परित्यज्य_शरीरमनुपालयेत्।
तदभावे_हि_भावानां_सर्वाभावः_शरीरिणाम्।।
सब छोड़-छाड़ के शरीर की रक्षा कीजिये। शरीर रहने पर ही सब रहेगा। - च. नि. 6.7

इस विषय पर एक सूत्र सदैव ध्यान रखने योग्य है (च.सू.5.103) --

नगरी_नगरस्येव_रथस्येव_रथी_यथा|
स्वशरीरस्य_मेधावी_कृत्येष्ववहितो_भवेत्||

जिस प्रकार नगर-प्रमुख अपने नगर और एक ड्राईवर अपनी गाड़ी का ध्यानपूर्वक प्रबंधन करता है, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति को अपने शरीर की देखभाल में हमेशा सतर्क रहना चाहिये।

असल में अपने सुख दुःख के लिये हम स्वयं उत्तरदायी हैं, कोई और नहीं|
We ourselves are responsible for our happiness and sorrow, no one else.

Address

Near Mangalam Marriage Hall
Gonda Oudh
BALRAMPURROAD,GONDA

Opening Hours

Monday 10am - 2pm
5pm - 7pm
Wednesday 10am - 2pm
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9044203226

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