31/12/2025
PCOS युवतियों और प्रजनन आयु की महिलाओं में बहुत आम समस्या:-
आइये सरल और समान्य रूप से समझते है पीसीओएस (PCOS) यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम एक हार्मोनल समस्या है, जिसमें अंडाशय ज़्यादा पुरुष हार्मोन बनाते हैं और अंडे सही तरह परिपक्व व रिलीज़ नहीं हो पाते। यह आजकल युवतियों और प्रजनन आयु की महिलाओं में बहुत आम हो गया है।
पीसीओएस क्या होता है?
यह एक हार्मोनल विकार है जो अंडाशय (ovaries) और ओव्यूलेशन को प्रभावित करता है।अंडाशय में कई छोटी-छोटी पानी भरी सिस्ट (थैलियाँ) बन सकती हैं, जिनसे अंडा निकलने की प्रक्रिया बाधित होती है।शरीर में एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) और अक्सर इंसुलिन का स्तर बढ़ा रहता है, जिससे कई तरह के लक्षण दिखते हैं।
पीसीओएस क्यों होता है?
1-हार्मोनल असंतुलन:
एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और एण्ड्रोजन के स्तर में गड़बड़ी, जिससे मासिक धर्म और ओव्यूलेशन बिगड़ जाते हैं।
2-इंसुलिन रेज़िस्टेन्स: शरीर की कोशिकाएँ इंसुलिन पर सही तरह प्रतिक्रिया नहीं देतीं, इंसुलिन बढ़ने से अंडाशय ज़्यादा एण्ड्रोजन बनाने लगते हैं।
3-आनुवंशिक कारण: परिवार (माँ, बहन आदि) में पीसीओएस या टाइप–2 डायबिटीज़ का इतिहास होने पर जोखिम बढ़ जाता है।
4-जीवनशैली: मोटापा, शारीरिक निष्क्रिया, जंक फूड, ज़्यादा शक्कर व रिफाइंड कार्ब्स लेने से स्थिति और खराब हो सकती है।
पीसीओएस के प्रमुख लक्षण पीरियड्स का अनियमित होना, बहुत देर से आना या कई‑कई महीने तक बिल्कुल न आना।चेहरा, ठोड़ी, छाती, पेट, पीठ आदि पर अनचाहे बालों का बढ़ जाना (हिरसुटिज़्म) और सिर के बालों का झड़ना या पतले होना। दाने/मुंहासे, तैलीय त्वचा और वजन बढ़ना, खासकर पेट के आसपास। गर्भधारण में कठिनाई, बार‑बार गर्भपात की प्रवृत्ति हो सकती है। मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, चिंता और अवसाद की प्रवृत्ति भी देखी जाती है।
पीसीओएस के नुकसान /जटिलताएँबांझपन:- ओव्यूलेशन गड़बड़ होने से गर्भधारण में दिक्कत आती है।
टाइप–2 डायबिटीज़ और मेटाबॉलिक सिंड्रोम: इंसुलिन रेज़िस्टेन्स के कारण आगे चलकर डायबिटीज़, हाई BP और कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ना।एंडोमेट्रियल (गर्भाशय की परत) कैंसर का खतरा, क्योंकि लंबे समय तक अनियमित या अनुपस्थित पीरियड्स से एंडोमेट्रियम मोटा होता रहता है।स्लीप एपनिया, मोटापा और लम्बे समय की त्वचा व मनोवैज्ञानिक समस्याएँ (चिंता, अवसाद)।
बचाव और ध्यान रखने योग्य बातें
वजन संतुलित रखना, नियमित व्यायाम (जैसे तेज़ चलना, योग, हल्का जॉगिंग) करना। आहार में सब्ज़ियाँ, फल, सलाद, फुल ग्रेन, प्रोटीन (दालें, पनीर, अंकुरित अनाज) अधिक पर्याप्त मात्रा मे लेना और शक्कर, मैदा, जंक फूड, मीठे पेय कम करना। तनाव घटाने के लिए प्राणायाम, ध्यान, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या अपनाना। पीरियड्स लंबे समय तक गड़बड़ रहने से चेहरे‑शरीर पर बाल असामान्य रूप से बढ़ें या प्रेग्नेंसी में समस्या हो तो स्त्रीरोग विशेषज्ञ से जाँच कराना ज़रूरी है।
यदि चाहें तो अगले कदम के रूप में होम्योपैथिक प्रबंधन या डाइट‑प्लान पर विशेष रूप से चर्चा की जा सकती है।