Divine Omens

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*ओ३म् क्‍या है?* ओ३म् अनहद नाद है। यह शाश्‍वत है और ब्रह्माण्‍ड की उत्‍पत्ति इसी से हुई है। यह ध्‍वनि सृष्टि के कण-कण मे...
12/01/2023

*ओ३म् क्‍या है?*
ओ३म् अनहद नाद है। यह शाश्‍वत है और ब्रह्माण्‍ड की उत्‍पत्ति इसी से हुई है। यह ध्‍वनि सृष्टि के कण-कण में, मनुष्य के भीतर और समस्‍त ब्रह्माण्‍ड में ध्‍वनित हो रही है, गूंज रही है। इसमें तीन अक्षर हैं- अ, उ और म्। अ ब्रह्मा यानी सृष्टि, उ विष्‍णु यानी स्थिति और म् शिव यानी लय का प्रतीक है। 'अ' का मतलब है उत्पन्न होना, 'उ' मतलब उठना यानी विकास और म का मतलब है मौन यानी ब्रह्मलीन हो जाना। ओ३म् की vibrational frequancy 432Hz है। अर्थात् जब हम ओ३म् का उच्चारण करते हैं तो शरीर के अलग-अलग हिस्‍से में जो कंपन होती है उसकी आवृत्ति 432 Hz होती है। *अ* से शरीर के निचले हिस्से में (पेट के निकट), *उ* से शरीर के मध्य भाग (छाती के पास), *म्* से शरीर के ऊपरी भाग (मस्तिक) में कंपन होती है।

*उच्‍चारण की प्रक्रिया*- नाभि से एक क्रम में श्वास प्रारंभ करके होंठों तक आठ सेकंड 'ओ' का उच्‍चारण। फिर सिर तक 'उ' और 'म्' का उच्चारण क्रमश: 4, 3 सेकंड तक। पूरी प्रक्रिया 15 सेकंड की होती है।

*ओ३म् जाप के कुछ लाभ*
- शारीरिक, मानसिक, और आत्मिक लाभ मिलते हैं|
- शरीर में और आसपास सकारात्मक उर्जा का संचार होता है।
- थायरायड ग्रंथि में कंपन से इससे संबंधित बीमारी में आराम मिलता है।
- घबराहट दूर करता है।
- मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है।
- आसपास के वातावरण में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है।
- तनाव और अनिद्रा की समस्‍या नहीं होती है।
- पेट और ब्‍लडप्रेशर (रक्तचाप) से संबंधित समस्याओं में लाभदायक है।

27/12/2022

ऐसा क्‍यों होता है?

आपने शायद कभी इस पर ध्‍यान दिया हो कि आप सोने से पहले जिस विषय पर सोच रहे थे, सुबह आंख खुलने पर सबसे पहले वही विचार मस्तिष्‍क में आया। कभी सोचा है, ऐसा क्‍यों होता है?

दरअसल, हमारे मन मे 24 घण्टे में लगभग 60 हज़ार विचार आते हैं, लेकिन हमें कभी इसका आभास नहीं होता है। क्‍योंकि विचारों की यह बाढ़ जिस प्रकार आती है, उसी प्रकार चली भी जाती है। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। लेकिन उन हजारों विचारों में से कुछ ही हमें याद रहते हैं। वह भी तब जब उन अच्‍छे विचारों को आप कहीं नोट कर लेते हैं या उस पर चिंतन-मंथन करते हैं। जाहिर है, काम की बात ही नोट करेंगे।

हज़ारों की संख्या वाले ये विचार सकारात्मक और नकारात्मक होते हैं। नकारात्मक विचारों की गति सकारात्मक विचारों से कई गुना अधिक होती है। यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह कौन सा पक्ष चुनता है। जो अधिक सोचते हैं, चिंता करते है या अवसाद में होते हैं, उन्‍हें दिमाग की दही बनाने के लिए एक ही नकारात्मक विचार पर्याप्त होता है। इसी एक विचार से वे विचारों की श्रृंखला बनाते हैं। लेकिन यदि व्यक्ति सकारात्मक है तो वह विचारों का सृजन करता है यानी चिंतन करता है, चिंता नहीं।

जब व्‍यक्ति लगातार किसी एक ही विषय पर सोचता रहता है और सोचते-सोचते सो जाता है, तो अगले दिन सुबह आंख खुलने पर वही विचार उसके मन में सबसे पहले आता है। कभी-कभी तो वह सपने में भी वही सब देखने लगता है। ऐसा इसलिए होता है कि जब आप सो रहे होते हैं तब आपके शरीर और मस्तिष्‍क की गतिविधियां रुकती नहीं हैं। ये गतिविधियांं चलती रहती हैं। इसलिए विचारों का क्रम टूटता नहीं है। यानी आप जिस विचार को गुनते-बुनते हुए सोते हैं, सुबह सबसे पहले वही आपके मन-मस्तिष्‍क में आता है।
इसलिए यह आवश्यक है कि आप अच्छा सोचें, क्योंकि अच्छी सोच आपको स्वस्थ और जागरूक बनाये रखती है। नकारात्मक सोच आपको बीमार बनाती है।

हम थकान क्‍यों महसूस करते हैं?दिनभर हम जो सोचते हैं, देखते हैं, काम करते हैं, बोलते हैं या चलते-फिरते हैं, उसमें ऊर्जा ल...
25/12/2022

हम थकान क्‍यों महसूस करते हैं?

दिनभर हम जो सोचते हैं, देखते हैं, काम करते हैं, बोलते हैं या चलते-फिरते हैं, उसमें ऊर्जा लगती है। चूंकि सामान्‍य व्‍यक्ति के पास ऊर्जा उतनी ही होती है, जिससे उसका काम चल सके। कभी-कभी तो ऐसा भी होता होगा कि दिन में ही थकान होने लगती होगी। यानी आपके पास जितनी ऊर्जा थी, वह खत्‍म हो गई, इसलिए आपको थकान महसूस होने लगी और आपको लगने लगा कि आराम की आवश्‍यकता है। ऐसा उन लोगों के साथ होता है, जो ध्‍यान नहीं करते। दरअसल, रात को जब हम सोते हैं, तो एक तरह से ध्‍यान की अवस्‍था में होते हैं। इस स्थिति में उतनी ही ऊर्जा मिलती है, जितने से आपका काम चल जाए।
मान लीजिए एक दिन नहीं सोते हैं, तो क्‍या होता है? मन अनमना सा रहता है। शरीर में स्‍फूर्ति नहीं रहती है। शरीर को थोड़ा भी आराम मिला तो नींद आने लगती है। यदि दो दिन नहीं सोए तो क्‍या होगा? शरीर आराम की अवस्‍था में आ जाएगा। दिमाग में सुस्‍ती रहेगी। आलस्‍य बढ़ जाएगा। इसी तरह, कोई 3-4 दिन तक न सोए तो क्‍या होगा? उस स्थिति में दिमाग भी काम करना बंद कर देगा। कहने का मतलब यह है कि जब हम ध्‍यान करते हैं तो हमारे पास भरपूर ऊर्जा होती है। थकान महसूस नहीं होता। इस तरह, ध्‍यान नियमित के नियमित अभ्‍यास से आपकी ऊर्जा का दायरा बढ़ता है। आप हर समय तरोताजा महसूस करते हैं। दूर की यात्रा से आने के बाद भी आप थकान महसूस नहीं करते।
जो नियमित ध्‍यान करते हैं, उनके चेहरे पर अलग ही चमक होती है। उनका व्‍यक्तित्‍व ही आकर्षक होता है। यही नहीं, नियमित ध्‍यान करने से वाइब्रेशन लेवल भी बढ़ता है। बीमारियां खत्‍म होती हैं।

17/12/2022

ऐसा क्‍यों होता है?

अक्‍सर आपने महसूस किया होगा कि आपके घर कोई आया और आपसे बातचीत करने के बाद वह चला गया। या आपने किसी व्‍यक्ति से बात की या उसके संपर्क में आए और इसके बाद मूड बदल गया। अचानक ऐसा महसूस होने लगा जैसे कि शरीर में ऊर्जा ही नहीं है। ऐसा क्‍यों होता है? आइये हम बताते हैं-

वैसे तो हमारे शरीर में कई चक्र होते हैं, लेकिन इनमें प्रमुख सात ही हैं। ये चक्र एनर्जी फील्‍ड की श्रृंखला या चेतना केंद्र कहलाते हैं। शाक्‍य में इसे कुण्‍डलिनी कहा गया है। हर चक्र शारीरिक, मानसिक, भावनात्‍मक और आध्‍यात्मिक स्‍तर पर जुड़ा होता है। शारीरिक स्‍तर पर हर चक्र शरीर के मुख्‍य अंग या ग्रंथि (ग्‍लैंड) का संचालन करता है जो शरीर के अन्‍य अंगों से सम्‍बद्ध होते हैं और समान रूप से विद्युत या यांत्रिक (Electrical/Mechanical) तरंग उत्‍पन्‍न करते हैं। इन चक्रों से ही हमारा जीवन चलता है। यदि इनमें से कोई एक चक्र भी ठीक से काम नहीं कर रहा है, बंद है या खराब है तो जीवन में संतुलन नहीं रहता। कहने का मतलब यह कि चक्र की ख़राबी के कारण व्‍यक्ति को संबंधित अंग या ग्रंथि की बीमारी होती है। ये चक्र किसी चक्रवात की तरह वृत्‍तीय गति से घूमते हैं। इस घूर्णन के कारण चक्र के केंद्र में निर्वात (वैक्‍यूम) बनता है। ठीक उसी तरह, जैसे आधा बाल्‍टी पानी को हाथ से घुमाने पर पानी तेजी से घूमता है और इसके केंद्र में भँवर बन जाता है। इसी तरह, चक्र के केंद्र में भी भँवर बनता है। इस भँवर के कारण जो कुछ भी कंपायमान स्‍तर (वाइब्रेटरी लेवल) के करीब आता है, वह उसी में समा जाता है। ये चक्र आसपास के वातावरण से सांकेतिक सूचनाएं भी खींचते हैं। यह कुछ भी हो सकता है, कलर वाइब्रेशन से लेकर पराबैंगनी किरणें, रेडियो, माइक्रोवेव से लेकर दूसरे व्‍यक्ति का औरा तक। कहने का मतलब यह है कि ये चक्र आसपास के माहौल का स्‍वास्‍थ्‍य हासिल करते हैं। साथ ही, ये चक्र एनर्जी ऑफ वाइब्रेशन भी उत्‍पन्‍न करते हैं। इसीलिए किसी व्‍यक्ति के सम्‍पर्क में आने पर हम उसके मूड से प्रभावित हो जाते हैं। यदि वह खुश है तो खुश और अगर उदास या परेशान है तो वैसा ही महसूस करने लगते हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि हम अचानक शिथिल हो जाते हैं, जैसे शरीर में कोई जान ही न हो। जब ऐसा हो तो समझ जाइये कि आपकी एनर्जी ड्रेन हुई है।

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