12/01/2023
*ओ३म् क्या है?*
ओ३म् अनहद नाद है। यह शाश्वत है और ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति इसी से हुई है। यह ध्वनि सृष्टि के कण-कण में, मनुष्य के भीतर और समस्त ब्रह्माण्ड में ध्वनित हो रही है, गूंज रही है। इसमें तीन अक्षर हैं- अ, उ और म्। अ ब्रह्मा यानी सृष्टि, उ विष्णु यानी स्थिति और म् शिव यानी लय का प्रतीक है। 'अ' का मतलब है उत्पन्न होना, 'उ' मतलब उठना यानी विकास और म का मतलब है मौन यानी ब्रह्मलीन हो जाना। ओ३म् की vibrational frequancy 432Hz है। अर्थात् जब हम ओ३म् का उच्चारण करते हैं तो शरीर के अलग-अलग हिस्से में जो कंपन होती है उसकी आवृत्ति 432 Hz होती है। *अ* से शरीर के निचले हिस्से में (पेट के निकट), *उ* से शरीर के मध्य भाग (छाती के पास), *म्* से शरीर के ऊपरी भाग (मस्तिक) में कंपन होती है।
*उच्चारण की प्रक्रिया*- नाभि से एक क्रम में श्वास प्रारंभ करके होंठों तक आठ सेकंड 'ओ' का उच्चारण। फिर सिर तक 'उ' और 'म्' का उच्चारण क्रमश: 4, 3 सेकंड तक। पूरी प्रक्रिया 15 सेकंड की होती है।
*ओ३म् जाप के कुछ लाभ*
- शारीरिक, मानसिक, और आत्मिक लाभ मिलते हैं|
- शरीर में और आसपास सकारात्मक उर्जा का संचार होता है।
- थायरायड ग्रंथि में कंपन से इससे संबंधित बीमारी में आराम मिलता है।
- घबराहट दूर करता है।
- मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है।
- आसपास के वातावरण में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है।
- तनाव और अनिद्रा की समस्या नहीं होती है।
- पेट और ब्लडप्रेशर (रक्तचाप) से संबंधित समस्याओं में लाभदायक है।