Astrology Consultation & Matrimonial Services

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26/11/2021

How does astrology help reduce my struggle?

I don’t know what others have a say on it but I would say nothing can reduce anyone’s struggle and pain. Long ago, I asked the same question to an astrologer from my known in the call and he explained to me the role of astrology in one’s life for reducing struggle. He was a very knowledgeable astrologer who was so honest despite being an astrologer. I was so impressed with his honest and logical reply that I knew even if I asked him to give me future predictions, he wouldn’t be manipulative. When I raised this question, he briefly explained to me how astrological predictions prepare you for every situation.

Expectation leads to disappointment and disappointment leads to depression. So, this is the cycle we all are trapped into. But if you have an idea about what is going to happen in your life, then you are mentally prepared to accept it. This won’t come like a shock that will make your life upside down. He asked me a small question which seemed very simple but it had depth indeed.



Astrologer: He asked me when you were in school, has it ever happened to you that your teacher comes to the classroom and reveals that today is your surprise test?

Me: I said- Yes, many times. But why?

Astrologer: He said, so was that difficult to give or the one your teacher informed you in advance?

Me: I said, obviously, the one I had been informed of in advance.

He said, now you must have understood the importance of a piece of information that is shared in advance and how a brain is prepared to deal with it. Likewise, astrology is a medium through which you can get information about your future.

What is going to happen?

When will it take place?

How will it come to you?

These are some things that astrology helps you with and if you are already prepared for an event, you would not feel weak, rather you will know how to deal with it.

As soon as he was done with this explanation, I requested him to read my chart and give me love

09/09/2021

KNOW THE MOST SUITABLE GEMSTONES

Our “Gemstone Consultation” given only after in-depth analysis of your birth chart- based on time & place of your birth.

Just provide your birth details and know the most suitable gemstone for your health, career, education, and love/marriage. Or know which gemstones you must not wear? Gemstone predictions depend on placement & power of a planet in your horoscope and their effect on every aspect of life.

06/09/2021

आर्य समाज और बौद्ध धर्म में क्या अन्तर है?
आर्य समाज और बौद्ध धर्म में कुछ भी समानता नहीं है । जब बौद्ध मत का उदय हुआ उस समय हिन्दू धर्म में कर्मकाण्डीय जटीलता अत्यधिक बढ़ हुई थी । पूजा पाठ में बली के रूप में पशु हींसा का प्रचलन सामान्य हो गया था । उस समय की प्रचलित कुप्रथाओं के कारण बुद्ध और उनके अनुयायियों ने अपना नया मत बना लिया तथा हिन्दू धर्म और ईश्वर को छोड़ " बुद्धं शरणं गच्छामि " को ही अपना परम वाक्य बना लिया ।

दूसरी ओर आर्यसमाज के उदय के समय भी अज्ञान, अंधविश्वास, पाखण्ड ,जाति प्रथा , छूआछूत ,बाल विवाह, देवदासी प्रथा ,सती प्रथा और मूर्ति पूजा जैसी अनेक कुप्रथाएं प्रचलित थी । लेकिन आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने अपना अलग मत खड़ा नहीं किया अपितु इन बुराइयों का खण्डन करते हुए पुरातन वैदिक संस्कृति की ओर लौटने का आह्वान किया । महर्षि दयानंद सरस्वती ने स्पष्ट किया कि मेरा कोई नवीन मत मतान्तर चलाने का लेशमात्र भी उद्देश्य नहीं है अपितु ब्रह्मा से लेकर जैमिनी ऋषि पर्यन्त सभी ऋषियों के और वेदों की शिक्षाओं और मान्यताओं को मानना और मनवाना मुझ को अभीष्ट है । इसीलिए महर्षि दयानंद ने नहीं कहा कि दयानंद शरणं गच्छामि अपितु उन्होंने नारा दिया " वेदों की ओर लौट चलो ' ।

इन्हीं मूलभूत कारणों के चलते बौद्ध मत एक अलग से सम्प्रदाय बन गया जबकि आर्यसमाज हिन्दू धर्म का अभिन्न अंग होते हुए , उसमें आईं कुरीतियों को मिटाने के संकल्प के साथ बना एक ‌ जबरदस्त आन्दोलन ।

बौद्ध मत अनीश्वरवादी है । वह ईश्वर को नहीं अपितु सुगतदेव बुद्ध को ही पूजनीय मानता है ।

जबकि आर्यसमाज ईश्वर को उसके सही स्वरूप निराकार निर्विकार सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक सर्वज्ञ अनादि अनंत अजन्मा अजर अमर अभय नित्य पवित्र न्यायकारी सच्चिदानन्द स्वरूप सृष्टिकर्ता पालनकर्ता नियन्ता और संहर्ता के रूप में मानने वाला परम आस्तिक संगठन है ।

बौद्ध मत संसार को केवल दुःख रूप मानता है ।

और आर्यसमाज संसार को सुख और दुःख दोनों से युक्त मानता है ।

बौद्ध मत द्वादशायतन पूजा के अन्तर्गत पांच ज्ञानेन्द्रियो पांच कर्मेंद्रियां मन और बुद्धि का ही सत्कार अर्थात् इनको आनन्द में प्रवृत्त रखना मानता है। और इसी द्वादशायतन पूजा कोई मोक्षदायिनी मानता है ।

जबकि आर्यसमाज महर्षि पतंजलि के योग दर्शन के अनुसार सभी इन्द्रियों और मन को वश में करके अष्टांग योग को मुक्ति का साधन मानता है ।

बौद्ध मत सर्व शून्यता में विश्वास रखता है अर्थात् जितने पदार्थ हैं वे सब शून्य हैं । आदि में नहीं होते ,अन्त में भी नहीं रहते ,मध्य में जो प्रतीत होता है वह भी प्रतीत समय में है , पश्चात् शून्य हो जाता है ।

आर्यसमाज सभी दृश्य पदार्थों को वास्तविक मानता है और इन पदार्थों के मूल कारण को अनादि और सृष्टि का उपादान कारण मानता है ।

संक्षेप में कहें तो बौद्ध मत महात्मा बुद्ध और उनके तथागतों द्वारा प्रतिपादित शिक्षाओं में विश्वास करता है जबकि आर्यसमाज ईश्वरीय ज्ञान वेद की शिक्षाओं को सर्वोपरि मानता है । और वेदों को स्वत: प्रमाण मानता है ।

बौद्ध मत केवल शान्ति का पूजारी है । जबकि आर्यसमाज शान्ति के ‌‌‌‌‌साथ क्रांति का भी पोषक है । आर्यसमाज और महर्षि दयानंद की वैचारिक क्रांति का नमूना अन्यत्र दुर्लभ है ।

ये तथा इसी प्रकार की अनेक मान्यताएं आर्यसमाज और बौद्ध मत में अन्तर को स्पष्ट करती हैं ।

बुद्ध और उनके अनुयायियों ने हिन्दू धर्म में प्रचलित कुरीतियों के चलते हिन्दू धर्म छोड़न ठीक समझा जबकि आर्यसमाज ने उन कुरीतियों को दूर करके हिन्दू धर्म को पुनः वैदिक सनातन धर्म बनाने का बीड़ा उठाया ।

21/02/2021

मूल नक्षत्र फलादेश :-

मूल नक्षत्र गण्डमूल नक्षत्र के अन्तर्गत आता है। यह नक्षत्र बहुत ही अशुभ माना जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी केतु होता है। इस नक्षत्र के चारों चरण धनु राशि में होते हैं। इस नक्षत्र के विषय में यह धारणा है कि जो व्यक्ति इस नक्षत्र में जन्म लेते हैं उनके परिवार के सदस्यों को इसके दोष का सामना करना पड़ता है। दोष पर विशेष चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति में कई गुण होते हैं, हमें इन गुणों पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।

ज्योतिषशास्त्र कहता है जो व्यक्ति मूल नक्षत्र में जन्म लेते हैं वे ईमानदार होते हैं। इनमें ईश्वर के प्रति आस्था होती है। ये बुद्धिमान होते हैं। ये न्याय के प्रति विश्वास रखते हैं। लोगों के साथ मधुर सम्बन्ध रखते हैं और इनकी प्रकृति मिलनसार होती है। स्वास्थ्य के मामले में ये भाग्यशाली होते हैं, ये सेहतमंद होते हैं। ये मजबूत व दृढ़ विचारधारा के स्वामी होते हैं। ये सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर भाग लेते हैं। ये अपने गुणों एवं कार्यो से काफी प्रसिद्धि हासिल करते हैं।

मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के कई मित्र होते हैं क्योंकि इनमें वफादारी होती है। ये पढ़ने लिखने में अच्छे होते हैं तथा दर्शन शास्त्र में इनकी विशेष रूचि होती है। इन्हें विद्वानों की श्रेणी में गिना जाता है। ये आदर्शवादी और सिद्धान्तों पर चलने वाले व्यक्ति होते हैं अगर इनके सामने ऐसी स्थिति आ जाए जब धन और सम्मान मे से एक को चुनना हो तब ये धन की जगह सम्मान को चुनना पसंद करते हैं।

मूल नक्षत्र में जन्में व्यक्ति दार्शनिक तथा श्रेष्ठ विचारक होते हैं। इनकी तर्कशक्ति बहुत ही मज़बूत होती है। ये आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। लेकिन ये रूढ़िवादिता से दूर ही रहना पसंद करते हैं। ये परिवर्तनशील विचारधारा रखते हैं। ये स्वतंत्र विचार वाले होते है। ये जन्मजात जीनियस होते हैं, क्योंकि केतु इस नक्षत्र का स्वामी एक शोधकारक ग्रह है यदि इनका परिचय सिर्फ एक शब्द में देना हो तो कह सकते हैं कि ये " खोजी " होते हैं , क्योंकि ये सबसे जिज्ञासा प्रधान स्वभाव के हैं।

इनके मन में हमेशा कोई न कोई विचार चलता रहता है। ये बहुत ही महत्वाकांक्षी प्रवृत्ति के होते हैं। ये लोग अपने सपनो को सच करने की शमता रखते हैं। ये लक्ष्य से पीछे हटने की अपेक्षा चुनौतियों का सामना करना अधिक पसंद करते है। अपने लक्ष्य के प्रति हमेशा सचेत रहते हैं।

यह समाज या परिवार में स्पष्ट वक्ता के रूप में प्रतिष्ठित होते हैं। अपनी बौद्धिक एवं मानसिक प्रबलता से ये अपने लक्ष्यों को प्राप्त करते हैं। ऐसे लोग आध्यात्म, साहित्य , धर्म तथा शिक्षा के क्षेत्र से जुडे रहते हैं। ऐसे लोगों मे आध्यात्मिकता का भाव रहता है। इसी कारण ये हमेशा सकारात्मक सोचते हैं।

यह विवादों से दूर रहना पसंद करते हैं। ये लोग घूमने फिरने के भी बहुत शोकीन होते हैं। ये अपने जीवन का भरपूर आनंद लेना चाहते हैं। और सबकुछ अनुभव करना चाहते हैं। ये गुप्त विद्याऔ और दर्शन शास्त्र के भी ज्ञाता होते हैं। दूसरो को सही सलाह देना और मार्गदर्शन करना इनको अच्छा लगता है। ये सबके हितेषी और मित्र बने रहना इन्हें अच्छा लगता है।

दूसरो की मदद करते करते कभी कभी ये अपना नुकसान भी कर बैठते हैं। इन्हें अपनी योग्यता पर पूरा विश्वास होता है। अनेक कठिनाइया होने पर भी जीवन में उच्च स्थिति, धन संपदा आदि प्राप्त करने में सफल होते हैं। ये अच्छे शिक्षक और ज्ञान सम्बन्धी कार्यो मे भी ऊचे पदों पर पहुचते हैं। ये लोग अपने जीवन में बड़े बड़े लक्ष्य बनाते हैं।

एक बार जब ये अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं, तो उसके बाद किसी की नही सुनते। और सीधा अपने लक्ष्ये की और आगे बड़ते रहते हैं। और उसको हासिल करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। ये अपने अनुभव और ज्ञान को दूसरों के साथ अधिक से अधिक बांटना चाहते हैं। ये हमेशा आशावादी रहते हैं।

यह जीवन का अर्थ समझना चाहते हैं और हमेशा सत्य की खोज में लगे रहते हैं। ये अपनी बात दृढ़तापूर्वक रखते है। ये किसी से डरते नहीं है। इनमें दूसरों के मन की बात समझने की अच्छी क्षमता होती है। ये शीघ्र ही लोगों को समझ लेते है। इनका दिमाग बहुत तेज़ होता हैं। ये प्रत्येक स्थिति में अपने आप को खुश रखने का प्रयास करते हैं।

केतु से प्रभावित होने के कारण ये मोक्ष प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं। इनके अंदर अन्वेषणात्मक बुद्धि होती है। जिस कारण ये खोज अथवा रिसर्च से जुड़ा कार्य करके भी अच्छा नाम कमा सकते है। इनका झुकाव रहस्यो को जानने। एवं गुप्त विद्याओं को सीखने की ओर रहता है। इनकी इच्छा शक्ति भी काफी मज़बूत होती है। जिस कारण ये जो ठान लेते है। उसे पूरा करके ही दम लेते हैं।

यह पढने , लिखने और अज्ञात वषयों की खोज करने में आनंद लेते हैं। जब कैरियर की बात आती है। तो ये हर कार्य करने में एक विशेष प्रकार की तेजी दिखाते हैं। ये हमेशा सक्रिय रहना चाहते हैं , और इन्हें खाली बैठना पसंद नही होता। ये ज्ञान अर्जित करने के लिए कोई भी जोखिम ले सकते हैं।

यह आध्यात्मिक होने के साथ साथ बुद्धिमान भी होते हैं ये न्यायप्रिय और ईमानदार होते हैं। ये दान पुण्य आदि में भी काफी धन खर्च करते हैं। ये अच्छे परामर्शदाता साबित होते हैं। ये धार्मिक , ज्ञानी , सच्चे और विश्वास योग्य होते हैं। ये किसी भी विपरीत स्थिति का सामना करने में सक्षम होते हैं और मुश्किलों को भेद कर मंज़िल को प्राप्त करते हैं। इनको न तो आने वाले कल की चिंता होती है और ना ही ये कठिनाइयों की कोई परवाह करते हैं। ईश्वर पर इनकी पूरी आस्था होती है।

19/02/2021

जन्मकुंडली में खराब ग्रह के लक्षण

ग्रहो के कमजोर होने पर जीवन पर होने वाले प्रभाव*** : सूर्य सबसे पहले बात करते हैं सूर्य ग्रह की। सामाजिक अपयश, पिता के साथ कलह या वैचारिक मतभेद, आंख, हृदय या पेट का कोई रोग होना इस बात को दर्शाता है कि जातक की कुंडली में सूर्य अशुभ स्थिति में है। जीवन में असंतुष्ट रहना और मुंह में कमजोर चंद्रमा घर में पानी के नल्कों या कुंओं का सूख जाना, पालतू दुधारू पशु की मृत्यु हो जाना, माता को कष्ट होना, मन में बार-बार आत्महत्या करने के विचारों का जन्म लेना भी कमजोर चंद्रमा की ओर इशारा करता है। मंगल आए दिन कोई ना कोई दुर्घटना होना, घर के बिजली के समान जल्दी खराब हो जाना, विशेषकर जिस कमरे में व्यक्ति रहता है वहां मौजूद बिजली के उपकरणों का कम समय में ही खराब हो जाना, मंगल दोष की वजह से होता है। मंगल के दोषी होने पर रक्त समस्या, भाई से विवाद और अत्याधिक क्रोध जैसी स्थिति जन्म लेती है। बुध ज्योतिष विद्या में बुध को व्यापार और स्वास्थ्य का कारक बताया गया है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बुध अशुभ या कमजोर स्थिति में होता है उस व्यक्ति के दांत कमजोर रहते हैं। उसकी सूंघने की शक्ति कम हो जाती है और एक समय के बाद उसे गुप्त रोग होने की संभावना भी प्रबल हो जाती है। बृहस्पति अगर किसी विद्यार्थी को पढ़ाई में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, किसी के असमय बाल झड़ने शुरू हो गए हैं, अपमान का शिकार होना पड़ रहा है, व्यापार की स्थिति बदतर होती जा रही है, घर में कलह का माहौल बन गया है तो निश्चित तौर पर यह कमजोर बृहस्पति की ओर इशारा करता है। शुक्र ज्योतिष के अनुसार शुक्र ग्रह मौज-मस्ती, भोग-विलास और आलीशान जीवन व्यतीत करवाता है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र सही नहीं है तो उस व्यक्ति के मन में भटकाव अवश्य रहेगा। वह अपने हाथ से धन का नाश करता है, उसे चर्म रोग और स्वप्न दोष होने की संभावना रहती है। शनि शनि धीमी गति का ग्रह है, अगर किसी की कुंडली में शनि पीड़ित या कमजोर होता है तो उस व्यक्ति का हर कार्य बहुत आराम से होता है। अगर आपके मकान का कोई हिस्सा गिर गया है या टूट गया है तो यह कमजोर शनि की ओर इशारा करता है। वाहन से दुर्घटना या धड़ के निचले हिस्से, विषेकर जांघों के हिस्से में परेशानी कमजोर शनि की वजह से होती है। राहु शक, संदेह, मानसिक परेशानियां, आपसी तालमेल में रुकावट, बात-बात पर क्रोधित हो जाना, गुस्से एमं अपशब्द या गाली-गलौज करना, ये सब राहु के परिणाम हैं। कुंडली में राहु के अशुभ होने से हाथ के नाखून टूटने लगते हैं और पेट से संबंधित परेशानियां लग जाती हैं वाहन से दुर्घटना, मस्तिष्क की पीड़ा, दिमागी संतुलन बिगड़ जाना, भोजन या किसी खाद्य पदार्थ में अकसर बाल दिखना, सामाजिक मानहानि होना, ये सभी राहु ग्रह के दुष्प्रभाव हैं। केतु जब किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु अशुभ फलदायी होता है तो उसे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ चर्म रोग भी हो सकता है। वह व्यक्ति खुद अपने लिए ही गलत धारण बना लेता है जो उसे नुकसान पहुंचाती है।

अष्टम का राहू अष्टम स्थान मृत्यु स्थान है. अतः ये तो तय है की अष्टम का राहू अकस्मात मृत्यु देगा अब वो कैसे देगा वो आपकी ...
08/02/2021

अष्टम का राहू

अष्टम स्थान मृत्यु स्थान है. अतः ये तो तय है की अष्टम का राहू अकस्मात मृत्यु देगा अब वो कैसे देगा वो आपकी राशी, युति, द्रष्टि पे निर्भर होगा. राहू चूँकि बुध से भी दस कदम आगे है अतः ये भी तय है की अष्टम का राहू गुप्त ज्ञान इतनी तेज़ी से समझाएगा की जातक खुद आश्चर्य चकित हो जायेगा. अष्टम का राहू आपको तन्त्र की तरफ रूचि देगा ही देगा. राहू सबसे ज्यादा पापी गृह है तो ये भी तय है की यहाँ पीड़ित हुआ तो आपको छोड़ेगा नहीं बुरी तरह आपको परेशान करेगा ही करेगा. क्योंकि अष्टम भाव सबसे पापी भाव है और राहू भी. लेकिन यही राहू शुभ का हुआ तो आपको बहुत कुछ दिलाएगा भी. वृषभ, मिथुन, कन्या, कुम्भ का राहू कुछ हद तक आपको हेल्प करेगा. अतः अष्टम भाव के सामान ही राहू भी दोनो अकस्मात गुण रखते है इस लिए राम भजो और देखो मजो .

अष्टम का राहू बहुत परिश्रम करने से पेट मे वायु का गोला देता है. कुटुंब के लोग छोड़ जाते है. पैत्रक धन या पैत्रिक सम्पति नहीं मिलती है. मनुष्य राजाओ और पंडितो से आअद्रनिय और माननीय होता है. भगोडे एक बार तो होता है किन्तु बार बार हानि होती रहती है. अब देखो शुभ अशुभ दोनो फल बताये है. राहू शनि का जुड़वाँ है तो वायु दे दी वो भी परिश्रम के बाद क्यों क्योंकि शनि कर्म कारक है और राहू शनि का जुड़वाँ. चार, आठ और बारह तीनो पैतृक सम्पति है. राहू पीड़ित हुआ तो इन तीनो भावो को छोड़ेगा थोड़ी. दसम से एकादश मे है मतलब राज्य से लाभ हुआ ,शुभ का हुआ तो. गुप्त ज्ञान खूब मिलेगा शुभ का हुआ तो और फिर पंडित अपने आप आपकी प्रशंशा करेंगे.

जीवनाथ कहते है अष्टम का राहू सज्जन लोग अकारण ही उसे छोड़ देंगे. रजा से प्रचुर धन लाभ होगा. कभी धन का नाश भी होगा. वायु का गोला बनेगा. एकादश है तो राजा और द्वितीये पे द्रष्टि तो धन, अष्टम धन तो रजा से धन तो मिलेगा ही. धन का नाश करेगा क्योंकि द्वादश पे द्रष्टि है. वायु गोला हम उपर बता चुके है.

खान खाना कहते है अष्टम का रहू शारीर को पुष्ट, परदेश मे रहने वाला, क्रोधी, कुकृत्य और दरिद्र. यहाँ शुभ अशुभ दोनो फल बताये है. राहू खुद परदेश है. द्वादश पे द्रष्टि तो परदेश. चतुर्थ पे द्रष्टि तो परदेश. क्रोधी अपने आप होगा पीड़ित हुआ तो दिमाग को हिला देगा. फिर दरिद्री और कु करती अपने आप हुआ.

महेश कहते है अष्टम का राहू अनिष्ट का नाश करता है . गुप्त रोग, प्रमेह रोग, वृषण वृधि आदि देगा. शुभ हुआ तो मृत्यु जल्दी से होने नहीं देगा और राहू तो वैसे ही खतरनाक गृह है. पीड़ित हुआ तो गुप्त रोग देगा ही अष्टम भाव उसी का जो है. पेट ख़राब हुआ तो शुगर होगी ही. अनियंत्रित वृधि है तो वृषण बढ़ेगी ही.

बैद्यनाथ कहते है अष्टम का राहू कष्ट देता है. लोग इसकी निंदा करते है. दीर्घ सूत्री और रोगी होता है. पीड़ित हुआ तो ये सब देगा ही. अष्टम दीर्घकालीन रोग का जो है. चर जनता का है तो पीड़ित होक द्रष्टि डालेगा तो लोग निंदा करेंगे ही.

यवन जातका कहते है अष्टम का राहू राजाओ और पंडितो से प्रसंसित होता है. कभी भाग्योदय तो कभी हानि. पैत्रिक धन नहीं मिलता. अपने लोग अपने भाई बंधू इसे छोड़ देते है. परिश्रम से पेट मे गोला बनता है. ये सब तो हम चर्चा कर चुके है उपर.

मान सागर कहते है अष्टम का राहू रोगी, पापी, चोर, कृष, मायावी किन्तु धनाढय बनता है. धनदाय अपने आप बनाएगा अकस्मात धन दिलाता रहेगा अष्टम अकस्मात धन का है और राहू का तो काम ही अकस्मात है. बाकी पीड़ा की हम बाते कर चुके है.

यही सब मत dhundiraj , मन्त्रेश्वर आती ज्ञानियों के है.

मेष का रहू अष्टम मे अकस्मात अग्नि, हथियार आदि से मृत्यु देग या जातका खुद आत्महत्या की कोशिश करे.

वृषभ का राहू कम पीड़ा देगा. शुक्र अच्छी स्थति मे हुआ तो खूब धन दिलाएगा. ज्ञान वान बनाएगा. वाक सिद्धि देगा.

मिथुन का राहू तो यहाँ शुभ और बलवान होगा. बुध अच्छी स्थति मे हुआ तो सब कुछ दिलाएगा. शायद ज्ञान प्रचुर मात्र मे दिलवा दे.

कर्क का राहू भी यहाँ शुभ स्थति मे फल देगा.

What is the 12th house about in astrology?Twelfth house in astrology gives separation from individuals that the planets ...
08/02/2021

What is the 12th house about in astrology?

Twelfth house in astrology gives separation from individuals that the planets involving the house speak to, for example, guardians, kin, neighbors, companions and family members. This separation can be as partition or demise. twelfth house likewise identifies with bed comforts so your sexual capacity, wants, satisfaction and dozing propensities fall under this house as well. the twelfth house likewise speaks to separation from the local spot, as significant distance travel to distant spots, unfamiliar residency, travel abroad, exchange with unfamiliar societies and individuals, import, trade, worldwide the travel industry and business.

In astrology, the twelfth house is Naturally governed by the Sign of Pisces (Water Element) which speaks to the Circle of life. It Represents Flow Of :- wants, Emotions, Feelings, Latent example of reasoning, our Bondages, our Attachments, Subconscious, our Antar Mann(Inner Mind), our Basic internal identity, Cyclical Pattern in life.(both Positive and Negative) and Our Unfulfilled Desires.

twelfth house :- The house "Subliminal", "Costs" and "Delight"

Place of Expenditure, our inner mind, pattern of Life and its consummation, salvation, Emancipation, DREAMS, Desires, Sleep, Liberation, Dedication, Hard Work, Imprisonment, Our Phobias, Bankruptcy, Mental capacity, Mental Worries, Hospitals, facilities, Desires, Foreign voyages, Our Investments (Both Emotional and Monetary)

The Above Mentioned Key words quickly sketching out The twelfth House.

Presently we should comprehend in Detail What twelfth house is All About :-

Place of subliminal:- things we dream and the Phobias we face. It speaks to our mental limits and Our Internal opportunity. This house informs us regarding our otherworldly satisfaction. One is honored with instinctive and clairvoyant capacities when benefic planets (esp moon) are set in this house.

This house Represents the Karmas of the Native reflected by the methods for Subconscious.

Pisces (Lord Jupiter) is the common leader of this house and is gave with every one of it's characteristics. This is a place of subliminal, rest, inactive wellsprings of energy,dedication, preparing and is a significant house for directing, care focus and working there.

Unfamiliar voyages:- when this house joins with ninth house or fifth house prompts Travel or settlement in unfamiliar Lands Eg:- Moon put in twelfth house may make an individual keen on settling abroad.

Moksha house:- moksha implies freedom of soul likewise called salvation. Joining with the Divine. By and large, Ketu all around set In twelfth house gives Salvation to the Native.

Dozing designs:- upset or Sound rest can be legitimately seen from this house.

Place of subliminal and Dreams:- this house speaks to our inner mind and inside initiations. This house is simply the impression of our internal, our psyche.

Place of consumption ' Vyaya bhava' :- it tells about our use, our off-base or right ventures. It advises us on what sort of things we love spending

Satisfaction of Wishes and Desires :- this house speaks to the things which are generally preferred by us. The things we like spending on. All around put Planets in 12 houses will prompt satisfaction of wishes and want. For eg :- Venus when commended or very much positioned in twelfth house satisfies all the longings of an individual though when put Malefically may lead unfulfilled wishes and wants.

Place of speculation, things we purchase out of interest and so on

Wild Behavior designs like burning through cash on something pointless or passionate connections with wrong individuals.

One's dependence and wrong propensities can likewise be seen from this house. Situation of malefic planets uncommonly Rahu can make an individual dependent on intoxicants and One can grow bogus sensations of fleeting delight and Happiness.

Separations, liberation , disengagement. Moving far away from local spot

Our Phobias and mental issues are seen from this house. At the point when the moon or Rahu is malefic partner put it prompts such issues.

Wrong Investments for eg:- when Mercury is malefic partner set in this house one can make wrong speculation which lead to grave loss of abundance.

Insolvency and advance blends:- when the twelfth house is making a mix with the sixth house.

Hospitalization-delayed sicknesses and spending on clinic can be seen from this house.

Mental concerns, strain, unsteadiness of brain can be seen from this house.

Distinctive Yoga or Combinations in 12 house:-

Sanyas Yoga - when this house frames a blend with the seventh house and planets like Jupiter or Venus are commended in this house.

Liquidation:- when Lord of eleventh house or second house is Malefic Ally set in 12 houses in ominous Rashi or Nakshatras may prompt obligation or non reimbursement of Loan or Grave Losses . One may get Bankrupt.

Prison yoga-Prision blend. Such a blend is discovered when Rahu , Mars or Ketu are malefically positioned in this house.

Kalesh Yoga-this Yoga is framed in the diagram when neech Rahu-Moon blend is in this house . An individual remaining parts upset and faces loads of debates in everyday life.

Merchant's Combination:- when the Lord of the twelfth house is all around put in the eleventh house or second house one turns into a decent broker. For eg :- when Mercury is all around set in eleventh house having it's Rashi in twelfth house one can be into import and fare business.

To Study the mixes in this house one needs to painstakingly examine the planets in this house, degree, Rashi, situation of Rashi Lord, Nakshatras, above all the Mahadasha of subdasha it is running.

01/02/2021

What is the truth? Some astrologers say that Jupiter damages the house it seats, and Saturn benefits the house it seats.
Feb 1, 2021

Dear friends, Jupiter is ‘Guru’ and Guru needs respect so Jupiter is one wisdom giving egoistic planet that is said to be highly beneficial in certain houses/rashis. However, in my expereince, the Jupiter is not always beneficial but it also doesn't damage the house it sits. It may not give you the expected results of that house depending upon the house lordship e.g. I have noticed in many charts that Jupiter in Libra is never that fruitful irrespective of the Lagna.

Saturn, on the other hand, is a doctor and a judge. The purpose is to judge the house and operate thereafter to balance the same as per your karma. I have especially made a video to explain “Saturn”. You can watch it below to have a complete understanding of what Saturn is in real.

In the longer run, Saturn always benefits the house it seats, however, depends upon the person i.e. only if the person is willing to be a better individual and wants to learn from his/her mistakes!

31/01/2021

इस महीने फरवरी में 6 ग्रह अपना राशि परिवर्तन करने वाले हैं। बुध ग्रह 4 फरवरी को वक्री करने वाले हैं और 9 फरवरी को शनि मकर राशि में प्रवेश करेंगे। 12 फरवरी को सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे और 14 फरवरी को गुरु, मकर राशि में उदित होंगे। बुध 21 फरवरी को वापस मकर राशि में आ जाएंगे। अगले दिन 22 फरवरी को मंगल ग्रह वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे।

इस राशि परिवर्तन का आपके जीवन मे क्या क्या असर हो सकता है

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