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सिध्हार्थ के रेमेडी पिटारे से आज का सरल उपायइस रक्षाबंधन भाई को राखी बाँधने से पहले 5 राखियाँ और बाँधिए।हम अक्सर रक्षाबं...
27/08/2026

सिध्हार्थ के रेमेडी पिटारे से आज का सरल उपाय

इस रक्षाबंधन भाई को राखी बाँधने से पहले 5 राखियाँ और बाँधिए।

हम अक्सर रक्षाबंधन की शुरुआत सीधे भाई की कलाई पर राखी बाँधकर करते हैं। लेकिन इस बार रक्षा की डोर को पहले उन शक्तियों से जोड़िए, जिनसे हम कुल, स्थान, ज्ञान, प्रेम और व्यक्तिगत आस्था के स्तर पर जुड़े हैं।

भाई की राखी से पहले 5 राखियाँ अलग रखें।

पहली राखी: कुलदेवी या कुलदेवता को

पहली राखी अपनी कुलदेवी या कुलदेवता को अर्पित करें।

यह राखी अपने कुल, परिवार और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा तथा मंगल के संकल्प के साथ बाँधें या अर्पित करें।

दूसरी राखी: ग्राम देवता को

दूसरी राखी अपने ग्राम देवता को अर्पित करें।

यदि आप अपने मूल गाँव या स्थान से दूर रहते हैं, तो अपने वर्तमान निवास स्थान के स्थानीय मंदिर में यह राखी अर्पित कर सकते हैं।

भाव रखें कि जिस भूमि और स्थान पर आप रह रहे हैं, उसकी शुभता और संरक्षण आपके परिवार के साथ बना रहे।

तीसरी राखी: गुरु को

तीसरी राखी अपने गुरु को समर्पित करें।

यदि व्यक्तिगत रूप से राखी बाँधना संभव न हो, तो उनकी तस्वीर या स्मरण के माध्यम से राखी अर्पित करें।

गुरु केवल ज्ञान नहीं देते, जीवन में सही दिशा और विवेक भी देते हैं।

चौथी राखी: राधा-कृष्ण को

चौथी राखी राधा और कृष्ण को एक युगल के रूप में अर्पित करें।

इस राखी के साथ अपने जीवन और परिवार के रिश्तों में प्रेम, विश्वास, मधुरता और सामंजस्य का संकल्प लें।

पाँचवीं राखी: अपने इष्ट को

पाँचवीं राखी अपने इष्ट देवी या इष्ट देव को अर्पित करें।

यह सबसे व्यक्तिगत राखी है।

इसे अर्पित करते समय अपने और अपने परिवार के लिए केवल एक प्रार्थना करें:

“हमारे जीवन में आपका मार्गदर्शन और संरक्षण सदैव बना रहे।”

इसके बाद अपने भाई को राखी बाँधें।

इस उपाय के लाभ:
परिवार के लिए रक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का संकल्प मजबूत होता है।
कुल और पारिवारिक परंपरा से जुड़ाव बढ़ता है।
जिस भूमि पर हम रहते हैं, उसके प्रति कृतज्ञता का भाव विकसित होता है।
गुरु के प्रति सम्मान और उनके मार्गदर्शन का स्मरण होता है।
परिवार और रिश्तों में प्रेम, विश्वास और सामंजस्य का भाव मजबूत होता है।
इष्ट के प्रति समर्पण और आध्यात्मिक संरक्षण की भावना बढ़ती है।
भाई को बाँधी जाने वाली राखी केवल एक पारिवारिक रस्म न रहकर रक्षा के व्यापक संकल्प का हिस्सा बन जाती है।

पाँचों राखियाँ अर्पित करते समय मन ही मन कहें:

“मेरे कुल, मेरी भूमि, मेरे गुरु, मेरे रिश्तों और मेरी आस्था की शुभ शक्तियाँ मेरे परिवार की रक्षा करें। हमारे जीवन में प्रेम, सद्बुद्धि, समृद्धि और सही मार्गदर्शन सदैव बना रहे।”

और उसके बाद भाई की कलाई पर राखी बाँधिए।

क्योंकि इस रक्षाबंधन रक्षा की शुरुआत भाई की कलाई से नहीं, अपनी जड़ों से कीजिए।

पहले पाँच रक्षा-सूत्र अपनी जड़ों को, छठा अपने भाई को।

सिध्हार्थ के रेमेडी पिटारे से
सरल उपाय, गहरा प्रभाव।

25/08/2026

रक्षाबंधन निर्णय 2026: केवल पारिवारिक पर्व नहीं, राजसत्ता का संकेत भी
सिध्हार्थ एस कुमार का शास्त्रीय एवं मुण्डेन आकलन

वर्ष 2026 में श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को प्रातः 9:08 बजे प्रारम्भ होकर 28 अगस्त को प्रातः 9:48 बजे समाप्त होगी। पूर्णिमा केवल 28 अगस्त के सूर्योदय पर उपलब्ध होगी। यह दो सूर्योदयों पर मिलने वाली वृद्धि पूर्णिमा नहीं है।

सिध्हार्थ एस कुमार के अनुसार, इस वर्ष रक्षाबंधन के लिए 27 या 28 अगस्त में से किसी एक तारीख का चयन करना सरल नहीं है। यह उदयव्यापिनी पूर्णिमा, तीन मुहूर्त की उपलब्धता, अपराह्ण, प्रदोष, भद्रा, प्रतिपदा-वेध, स्थानीय सूर्योदय और ग्रहण-दृश्यता सहित अनेक कारकों पर आधारित जटिल शास्त्रीय निर्णय है।

इस निर्णय के लिए हेमाद्रि अर्थात् चतुर्वर्गचिन्तामणि, भविष्यपुराण, निर्णयसिन्धु, धर्मसिन्धु, निर्णयामृत, मदनरत्न, पुरुषार्थचिन्तामणि, मुहूर्तचिन्तामणि और व्रतराज जैसी शास्त्रीय एवं निबन्ध-परम्पराओं का समन्वित विचार आवश्यक है।

वर्ष 2026 में न तो 27 अगस्त और न ही 28 अगस्त, कोई भी एक तारीख रक्षाबंधन से जुड़े सभी शास्त्रीय कारकों को एक साथ पूरा करती है। इसलिए सिध्हार्थ एस कुमार का मानना है कि यह सही और गलत तारीख के बीच चयन नहीं, बल्कि दो अपूर्ण विकल्पों में से अधिक उपयुक्त विकल्प चुनने का विषय है।

लेकिन रक्षाबंधन के मुहूर्त का महत्त्व केवल पारिवारिक स्तर तक सीमित नहीं है। शास्त्रीय दृष्टि से श्रावणी का गलत काल में किया जाना मुण्डेन ज्योतिष में राजसत्ता, शासन और सार्वजनिक व्यवस्था से भी जोड़ा गया है।

मुण्डेन ज्योतिष के संकेत

शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की प्रतिष्ठा, स्वास्थ्य या सुरक्षा पर दबाव
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या अन्य प्रमुख शासकों के विरुद्ध जन-असंतोष
सरकार के भीतर मतभेद, सत्ता-संघर्ष या नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा
प्रशासनिक निर्णयों का उलटा प्रभाव या नीतियों पर पुनर्विचार
कानून-व्यवस्था पर दबाव, प्रदर्शन और सार्वजनिक अशांति
पुलिस, सेना अथवा सुरक्षा-तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्न
संवेदनशील सरकारी निर्णयों के कारण सामाजिक तनाव
केन्द्र और राज्यों के बीच टकराव या समन्वय की कमी
सीमावर्ती क्षेत्रों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम
न्यायपालिका, प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व के बीच मतभेद
जनता के विश्वास में कमी तथा शासन के प्रति असुरक्षा की भावना
किसी बड़े अधिकारी, मंत्री या संवैधानिक पद से जुड़ा विवाद
सरकारी समारोह, राष्ट्रीय आयोजन या सार्वजनिक कार्यक्रम में अव्यवस्था
गलत सूचना, अफवाह और डिजिटल माध्यम से जनमत प्रभावित होना
सरकार को अचानक संकट-प्रबंधन की स्थिति का सामना करना

https://www.linkedin.com/pulse/india-had-entire-science-relationships-classical-texts-kumaar-t6mdfRelationships are amon...
25/08/2026

https://www.linkedin.com/pulse/india-had-entire-science-relationships-classical-texts-kumaar-t6mdf

Relationships are among the most crucial aspects of life, which is why they dominate as a primary category for astrologers. Nearly 80% of the queries received by astrologers are in this area only.

The NumroVani How India Thinks Study also shows that people now look at astrologers for guidance at every stage of their relationship journey, from dating and commitment to marriage, separation, and reconciliation.

Indic wisdom has a rich heritage of relationship manuals spread across centuries. Many have been lost, while most surviving texts remain largely unknown beyond the K**a Sutra.

I have mapped this forgotten knowledge system here; reading these help you in curating remedies that give you results

Whenever ancient Indian relationship wisdom is discussed, the conversation usually stops at two familiar ideas: horoscope matching before marriage and the Kāmasūtra after it. That is an extraordinarily narrow reading of the Indic intellectual tradition.

25/08/2026

ज्योतिषी कपड़े बदलने को कहे, तो लोग हँसते क्यों हैं?

जब कोई ज्योतिषी विशेष रंग के वस्त्र, अंगूठी, कंगन, घड़ी या कोई fashion accessory धारण करने की सलाह देता है, तो कुछ लोग तुरंत पूछते हैं:

“कपड़े पहनने से भी ग्रह बदलते हैं क्या?”

शायद प्रश्न ग्रहों से अधिक हमारी अपनी भूली हुई ज्ञान-परंपरा से जुड़ा है।

भारतीय परंपरा में वस्त्र और आभूषण कभी केवल सजावट नहीं रहे। उनके पीछे पहचान, मनोभाव, सामाजिक भूमिका, प्रतीक और व्यवहार का एक पूरा विज्ञान विकसित हुआ।

इस ज्ञानयात्रा को पाँच चरणों में समझा जा सकता है:

नाट्यवेद

परंपरा के अनुसार, प्रदर्शन कलाओं का मूल ज्ञान भगवान ब्रह्मा द्वारा रचित नाट्यवेद में समाहित था। लगभग 36,000 श्लोकों वाला यह विशाल ग्रंथ मनुष्य के भाव, व्यवहार, अभिव्यक्ति और अनुभव का व्यापक ज्ञानकोश माना गया।

आदिभरत

इतने विशाल ज्ञान को व्यवस्थित और अधिक सुलभ बनाने के लिए उसे लगभग 12,000 श्लोकों वाले आदिभरत में संक्षिप्त किया गया। यह दैवीय ज्ञान से मानवीय प्रयोग की ओर बढ़ता हुआ पहला महत्वपूर्ण सेतु बना।

नाट्यशास्त्र

भरतमुनि ने इसी परंपरा को लगभग 6,000 श्लोकों और 36 अध्यायों में व्यवस्थित किया। आज उपलब्ध नाट्यशास्त्र केवल नृत्य अथवा रंगमंच का ग्रंथ नहीं है। यह मनुष्य के भाव, शरीर, आवाज, व्यवहार, व्यक्तित्व और सामाजिक प्रस्तुति का विस्तृत अध्ययन भी है।

आहार्य अभिनय

नाट्यशास्त्र में आहार्य अभिनय के अंतर्गत वस्त्र, रंग, आभूषण, मेकअप, केश-सज्जा और बाहरी स्वरूप को सक्रिय अभिव्यक्ति का माध्यम माना गया।

ग्रंथ का संकेत बहुत स्पष्ट है:

व्यक्ति जिस प्रकार का रूप, रंग और वस्त्र धारण करता है, वह धीरे-धीरे उनसे जुड़े भाव और व्यवहार को भी ग्रहण करने लगता है।

यानी कपड़े केवल यह नहीं बताते कि आप कैसे दिखते हैं। वे यह भी प्रभावित कर सकते हैं कि आप स्वयं को कैसे देखते, महसूस करते और प्रस्तुत करते हैं।

आधुनिक Astro-Āhārya Upāya

यहीं से आधुनिक Astro-Āhārya Upāya की अवधारणा सामने आती है।

ज्योतिष व्यक्ति की जन्मकुंडली, दशा और वर्तमान जीवन-स्थिति के आधार पर आवश्यक ग्रह-गुण की पहचान करता है। आहार्य उस ग्रह-गुण को रंग, वस्त्र, धातु, आभूषण, घड़ी, चश्मे, जूते या किसी अन्य wearable accessory के माध्यम से दैनिक जीवन में धारण करने योग्य बनाता है।

इस पूरी ज्ञानयात्रा को एक पंक्ति में समझिए:

नाट्यवेद → आदिभरत → नाट्यशास्त्र → आहार्य अभिनय → आधुनिक Astro-Āhārya Upāya

जिस विचार को आज दुनिया Fashion Psychology, Power Dressing और Enclothed Cognition जैसे नामों से समझ रही है, भारतीय ज्ञान परंपरा उसे सदियों पहले आहार्य अभिनय के रूप में पहचान चुकी थी।

इसलिए ज्योतिषीय उपाय के रूप में वस्त्र या fashion accessory सुझाना कोई अचानक पैदा हुआ विचार नहीं है। यह एक प्राचीन सिद्धांत का आधुनिक, व्यक्तिगत और व्यावहारिक विस्तार है।

फैशन केवल आपकी बाहरी छवि नहीं बदलता।
सही उद्देश्य से चुना गया आहार्य आपके भीतर की भूमिका भी बदल सकता है।

सिर्फ 10 अंक... और पांच वर्ष बाद ऐसा परिणाम?मोबाइल अंकशास्त्र और जीवन की गुणवत्ता के संबंध पर किसी समकक्ष-समीक्षित शोध प...
22/08/2026

सिर्फ 10 अंक... और पांच वर्ष बाद ऐसा परिणाम?

मोबाइल अंकशास्त्र और जीवन की गुणवत्ता के संबंध पर किसी समकक्ष-समीक्षित शोध पत्रिका में प्रकाशित यह विश्व का पहला शोधपत्र है।

आज मेरे लिए यह केवल एक शोधपत्र का प्रकाशन नहीं, बल्कि मोबाइल अंकशास्त्र को विश्वास से विश्वसनीय आंकड़ों और अकादमिक प्रमाणों की ओर ले जाने वाला ऐतिहासिक क्षण है।

3,000 प्रतिभागियों पर पांच वर्षों तक चले अध्ययन में पहले 30 दिनों तक बदलाव मामूली था। लेकिन 90 दिनों के बाद कहानी बदलने लगी और पांचवें वर्ष तक जीवन-गुणवत्ता का औसत अंक प्रारंभिक स्तर से 50 प्रतिशत अधिक दर्ज हुआ।

आखिर ऐसा क्या बदला? मोबाइल नंबर, व्यक्ति का आत्मविश्वास, उसके निर्णय या जीवन के साथ उसका आंतरिक सामंजस्य?

यही प्रश्न इस शोध को और भी रोचक बनाता है।

यह तो आंकड़ों का केवल पहला अध्याय है। पूरी तस्वीर और कई बड़े निष्कर्ष अभी सामने आने बाकी हैं।

पूरा शोधपत्र पढ़ें:
https://www.jyotishajournal.com/archives/2026/11/8/A/11-8-4

[Mobile Numerology, Numerology, Numrovani]

Mobile numerology and quality of life: a five-year longitudinal study of personalized mobile number assignment based on date of birth and name

19/08/2026

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18/08/2026

Guru Gandanta 2026–27: अगले 12 महीनों में बदलेगा युद्ध का स्वरूप, बढ़ेगा Food Crisis और Internet Blackout का खतरा

अगले 12 महीने दुनिया केवल युद्ध नहीं देखेगी। वह युद्ध के बदलते हुए स्वरूप को देखेगी।

अब हर लड़ाई सीमा पर सैनिकों से नहीं लड़ी जाएगी। कुछ युद्ध डेटा से, कुछ अर्थव्यवस्था से, कुछ भोजन और इंटरनेट की आपूर्ति रोककर तथा कुछ लोगों की सोच को नियंत्रित करके लड़े जाएँगे।

19 अगस्त 2026 से 31 अगस्त 2027 तक गुरु बृहस्पति आश्लेषा और मघा नक्षत्रों के गण्डान्त क्षेत्र में भ्रमण करेंगे। वक्री गति के कारण गुरु कर्क और सिंह की इस संधि को तीन बार पार करेंगे। इसलिए कई वैश्विक घटनाएँ भी तीन चरणों में विकसित होंगी:

पहले रहस्य खुलेगा, फिर उसकी समीक्षा होगी और अंततः सत्ता या व्यवस्था बदलेगी।

इस पूरी अवधि का सर्वाधिक तीव्र प्रभाव 8 अक्टूबर 2026 से 19 फरवरी 2027 और फिर 4 जून से 14 जुलाई 2027 के बीच दिखाई देगा।

दुनिया में क्या बदल सकता है?

1. युद्ध के नए तरीके सामने आएँगे

आश्लेषा रणनीति, गोपनीयता और अदृश्य नियंत्रण का नक्षत्र है। साइबर युद्ध, आर्थिक प्रतिबन्ध, डेटा चोरी, डिजिटल जासूसी, डीपफेक, ड्रोन, सैटेलाइट तथा सप्लाई चेन को हथियार बनाने के नए तरीके सामने आएँगे।

युद्ध की आधिकारिक घोषणा नहीं होगी, लेकिन देशों की अर्थव्यवस्था, संचार व्यवस्था और जनता के मनोबल को लक्ष्य बनाया जाएगा।

धारणा नया Fighter Plane होगी, Narrative उसका गोला-बारूद और Internet नई युद्धभूमि बनेगा।

2. इंटरनेट का Weaponization बढ़ेगा

सरकारें, टेक कंपनियाँ और गुप्त संगठन इंटरनेट का उपयोग लोगों की भावनाओं, चुनावों, उपभोग और राजनीतिक विचारों को प्रभावित करने के लिए करेंगे।

सोशल मीडिया एल्गोरिदम, बॉट नेटवर्क, डीपफेक और चुनिंदा सूचनाओं के माध्यम से यह तय करने की कोशिश होगी कि जनता किसे नायक, किसे शत्रु और किस घटना को सत्य माने।

3. इंटरनेट ब्लैकआउट देखने को मिल सकता है

साइबर हमलों, सरकारी प्रतिबन्धों, सैटेलाइट व्यवधान या समुद्री इंटरनेट केबल से जुड़ी समस्याओं के कारण कुछ देशों अथवा बड़े क्षेत्रों में इंटरनेट ब्लैकआउट हो सकता है।

कुछ ब्लैकआउट सुरक्षा के नाम पर किए जाएँगे, जबकि कुछ का उद्देश्य विरोध, सूचना और जन-संचार को नियंत्रित करना होगा।

4. Food Crisis वैश्विक चिंता बनेगा

कर्क राशि भोजन, जल, कृषि और पोषण से जुड़ी है। गुरु समृद्धि तथा उपलब्धता के कारक हैं, जबकि आश्लेषा विष, मिलावट और छिपे जोखिमों को दर्शाता है।

इसलिए दुनिया को केवल भोजन की कमी नहीं, बल्कि Food Affordability और Food Distribution Crisis का सामना करना पड़ सकता है। अनाज की कीमतों में वृद्धि, निर्यात प्रतिबन्ध, जमाखोरी, खाद और बीज की कमी तथा युद्ध के कारण सप्लाई चेन बाधित हो सकती है।

खाद्य पदार्थों में मिलावट, दूषित जल, पेस्टीसाइड, केमिकल और बड़े स्तर पर उत्पाद वापस मँगाने जैसी घटनाएँ भी सामने आ सकती हैं। सरकारें भोजन के भंडारण और वितरण पर अधिक नियंत्रण स्थापित करेंगी।

अन्न केवल आवश्यकता नहीं रहेगा। वह कूटनीतिक दबाव और युद्ध का नया हथियार भी बन सकता है।

इस संकट के बीच स्थानीय कृषि, पारम्परिक अनाज, बीज-संरक्षण और भारत की प्राचीन आहार-पद्धतियों की ओर रुचि बढ़ेगी।

5. बड़े संस्थानों के छिपे सच बाहर आएँगे

राजनीति, धर्म, शिक्षा, न्याय, बैंकिंग, फार्मा और कॉर्पोरेट संस्थानों के गोपनीय दस्तावेज, समझौते तथा वित्तीय अनियमितताएँ सामने आ सकती हैं। प्रभावशाली लोगों की सार्वजनिक छवि और वास्तविक भूमिका के बीच का अंतर उजागर होगा।

6. जनता का क्रोध चरम सीमाओं तक पहुँच सकता है

महँगाई, बेरोजगारी, भोजन की बढ़ती कीमतों, भ्रष्टाचार, युद्ध और सेंसरशिप को लेकर बड़े जन-प्रदर्शन दिखाई दे सकते हैं।

समाज दो विपरीत ध्रुवों में बँट सकता है। एक वर्ग अत्यधिक विद्रोही होगा, जबकि दूसरा सत्ता या विचारधारा के प्रति अंध समर्थन दिखाएगा। धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान भी जनभावनाओं को चरम तक ले जा सकती है।

7. सत्ता और राजनीतिक विरासत की परीक्षा होगी

मघा राजसत्ता, वंश, पूर्वज और उत्तराधिकार का नक्षत्र है। राजनीतिक परिवारों, धार्मिक संस्थाओं और पुराने संगठनों में नेतृत्व को लेकर संघर्ष बढ़ेगा।

कुछ स्थापित नेता अचानक प्रभाव खो सकते हैं। दूसरी ओर, किसी पुराने परिवार, विचारधारा या सभ्यतागत पहचान से जुड़ा नया चेहरा तेजी से उभर सकता है।

8. भारतीय ज्ञान-परम्पराओं का Spiritual Reclaim शुरू होगा

दुनिया जब आधुनिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और केवल भौतिक विकास की सीमाओं को अनुभव करेगी, तब उसका ध्यान भारतीय ज्ञान-परम्पराओं की ओर जाएगा।

योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, उपनिषद, ध्यान, मंत्र, भारतीय मनोविज्ञान और पारम्परिक आहार-विज्ञान को केवल आस्था नहीं, बल्कि शोध और समकालीन उपयोगिता के दृष्टिकोण से देखा जाएगा।

भारत की नई पीढ़ी भी अपनी ज्ञान-परम्पराओं को केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य के समाधान के रूप में पुनः प्राप्त करेगी।

गुरु की यह गण्डान्त यात्रा दुनिया के छिपे हुए विष को बाहर लाएगी। लेकिन यही विष आने वाले समय की औषधि भी बनेगा।

[Astrology, Zodiac Signs, Jupiter, Jupiter in Ashlesha, Jupiter in Magha]

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