27/08/2026
सिध्हार्थ के रेमेडी पिटारे से आज का सरल उपाय
इस रक्षाबंधन भाई को राखी बाँधने से पहले 5 राखियाँ और बाँधिए।
हम अक्सर रक्षाबंधन की शुरुआत सीधे भाई की कलाई पर राखी बाँधकर करते हैं। लेकिन इस बार रक्षा की डोर को पहले उन शक्तियों से जोड़िए, जिनसे हम कुल, स्थान, ज्ञान, प्रेम और व्यक्तिगत आस्था के स्तर पर जुड़े हैं।
भाई की राखी से पहले 5 राखियाँ अलग रखें।
पहली राखी: कुलदेवी या कुलदेवता को
पहली राखी अपनी कुलदेवी या कुलदेवता को अर्पित करें।
यह राखी अपने कुल, परिवार और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा तथा मंगल के संकल्प के साथ बाँधें या अर्पित करें।
दूसरी राखी: ग्राम देवता को
दूसरी राखी अपने ग्राम देवता को अर्पित करें।
यदि आप अपने मूल गाँव या स्थान से दूर रहते हैं, तो अपने वर्तमान निवास स्थान के स्थानीय मंदिर में यह राखी अर्पित कर सकते हैं।
भाव रखें कि जिस भूमि और स्थान पर आप रह रहे हैं, उसकी शुभता और संरक्षण आपके परिवार के साथ बना रहे।
तीसरी राखी: गुरु को
तीसरी राखी अपने गुरु को समर्पित करें।
यदि व्यक्तिगत रूप से राखी बाँधना संभव न हो, तो उनकी तस्वीर या स्मरण के माध्यम से राखी अर्पित करें।
गुरु केवल ज्ञान नहीं देते, जीवन में सही दिशा और विवेक भी देते हैं।
चौथी राखी: राधा-कृष्ण को
चौथी राखी राधा और कृष्ण को एक युगल के रूप में अर्पित करें।
इस राखी के साथ अपने जीवन और परिवार के रिश्तों में प्रेम, विश्वास, मधुरता और सामंजस्य का संकल्प लें।
पाँचवीं राखी: अपने इष्ट को
पाँचवीं राखी अपने इष्ट देवी या इष्ट देव को अर्पित करें।
यह सबसे व्यक्तिगत राखी है।
इसे अर्पित करते समय अपने और अपने परिवार के लिए केवल एक प्रार्थना करें:
“हमारे जीवन में आपका मार्गदर्शन और संरक्षण सदैव बना रहे।”
इसके बाद अपने भाई को राखी बाँधें।
इस उपाय के लाभ:
परिवार के लिए रक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का संकल्प मजबूत होता है।
कुल और पारिवारिक परंपरा से जुड़ाव बढ़ता है।
जिस भूमि पर हम रहते हैं, उसके प्रति कृतज्ञता का भाव विकसित होता है।
गुरु के प्रति सम्मान और उनके मार्गदर्शन का स्मरण होता है।
परिवार और रिश्तों में प्रेम, विश्वास और सामंजस्य का भाव मजबूत होता है।
इष्ट के प्रति समर्पण और आध्यात्मिक संरक्षण की भावना बढ़ती है।
भाई को बाँधी जाने वाली राखी केवल एक पारिवारिक रस्म न रहकर रक्षा के व्यापक संकल्प का हिस्सा बन जाती है।
पाँचों राखियाँ अर्पित करते समय मन ही मन कहें:
“मेरे कुल, मेरी भूमि, मेरे गुरु, मेरे रिश्तों और मेरी आस्था की शुभ शक्तियाँ मेरे परिवार की रक्षा करें। हमारे जीवन में प्रेम, सद्बुद्धि, समृद्धि और सही मार्गदर्शन सदैव बना रहे।”
और उसके बाद भाई की कलाई पर राखी बाँधिए।
क्योंकि इस रक्षाबंधन रक्षा की शुरुआत भाई की कलाई से नहीं, अपनी जड़ों से कीजिए।
पहले पाँच रक्षा-सूत्र अपनी जड़ों को, छठा अपने भाई को।
सिध्हार्थ के रेमेडी पिटारे से
सरल उपाय, गहरा प्रभाव।