12/05/2026
नर्स अंजली कुलथे ने आतंकियों की गोलियों के बीच 20 गर्भवती महिलाओं की जान बचाई!
26/11 की उस भयावह रात, सिस्टर अंजली के जिम्मे 20 गर्भवती महिलाएँ थीं। उनमें से कुछ को तो प्रसव पीड़ा भी शुरू हो चुकी थी।
तभी कामा एंड अल्बलेस अस्पताल में स्टाफ नर्स के तौर पर काम कर रहीं अंजली ने देखा कि दो गार्ड्स को गोली मार दी गई है। यह देखते ही उन्होंने तेजी से वार्ड के भारी दरवाज़े बंद कर दिए, ठीक उसी वक्त जब अजमल कसाब और अबू इस्माइल पहली मंजिल की तरफ बढ़ रहे थे।
रात 8 बजे से लेकर सुबह 8 बजे तक, अंजलि ने उन 20 महिलाओं और उनके परिवारवालों को वार्ड के एक छोटे से pantry room में शांत और सुरक्षित रखा।
करीब एक घंटे तक आतंकियों और पुलिस के बीच गोलीबारी होती रही। हर ग्रेनेड धमाके से पूरी इमारत कांप रही थी।
इसी दौरान वार्ड की एक महिला को लेबर पेन शुरू हो गया। थोड़ी भी देरी दो जिंदगियों पर भारी पड़ सकती थी। तब अंजली ने अपनी जान जोखिम में डालकर डॉक्टर को इन्फॉर्म किया।
उस हालात में भी नर्स अंजली ने अद्भुत साहस और सूझबूझ दिखाई।
उन्होंने वार्ड की लाइट्स बंद कर दीं, दरवाज़े लॉक कर दिए, मरीजों को वॉशरूम में छिपाया, चुपचाप medical supplies का इंतज़ाम किया, चादर फाड़कर पत्तियां बनाईं और डॉक्टर को डिलीवरी में assist किया। आखिरकार महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
उस रात अस्पताल के स्टाफ नर्सें मरीजों के लिए ढाल बन गईं।
इतने सालों बाद भी अंजली को एक बात का दुख है— उस रात नर्सों ने जो किया, उसके लिए उन्हें उतनी सराहना नहीं मिली, जितनी मिलनी चाहिए थी।
तो आइए, आज इन सफेद कोट वाले अनसुने नायकों को याद करें और उन्हें सलाम करें।
उनकी बहादुरी और त्याग को हमेशा याद रखें। :heart:
[International Nurse Day | Inspiring | Real Heroes | 26/11 | Terrorist Attack]