10/06/2026
क्या भला है, क्या बुरा है — कौन जाने?
कभी-कभी जो बात हमें बुरी लगती है, वही किसी दूसरे के लिए अच्छी साबित होती है। जीवन की हर घटना किसी न किसी कारण से घटित होती है। जो हमारे मन के अनुसार होता है, उसे हम "अच्छा" कह देते हैं, और जो मन के विपरीत होता है, उसे "बुरा" मान लेते हैं।
जैसे किसी व्यक्ति का बदल जाना भी एक घटना है। हो सकता है कि उसकी परिस्थितियाँ, आवश्यकताएँ या जीवन की प्राथमिकताएँ बदल गई हों। संसार में अधिकांश लोग अपने वर्तमान और भविष्य के हितों को ध्यान में रखकर संबंध निभाते हैं और निर्णय लेते हैं। यह इस दुनिया का एक स्वाभाविक सत्य है।
जो इस सत्य को स्वीकार कर लेता है, वह अपेक्षाकृत शांत और प्रसन्न रहता है। लेकिन जो किसी के बदल जाने की पीड़ा, स्मृति और बोध को पकड़े बैठा रहता है, वह स्वयं को दुःख देता रहता है।
वास्तव में, सुख और दुःख बाहरी घटनाओं में नहीं, बल्कि हमारे **स्वीकार और अस्वीकार** में छिपे होते हैं। जिस क्षण हम जीवन को जैसा है वैसा स्वीकार करना सीख लेते हैं, उसी क्षण मन का संघर्ष कम होने लगता है और शांति का जन्म होता है।
हम अक्सर परिस्थितियों को बदलने में अपना जीवन लगा देते हैं, जबकि वास्तविक परिवर्तन दृष्टिकोण बदलने से आता है। स्वीकार का अर्थ हार मान लेना नहीं है, बल्कि जीवन की वास्तविकता को समझकर उसके साथ सामंजस्य स्थापित करना है।
"घटनाएँ केवल घटती हैं, उन्हें अच्छा या बुरा हमारा मन बनाता है।"
जो है, उसे स्वीकारने में ही शांति है।
जो चला गया, उसे जाने देने में ही मुक्ति है।
और जो आने वाला है, उस पर विश्वास रखने में ही जीवन की सुंदरता है।
🙏 आपके भीतर बैठे परमात्मा को नमस्कार। 🌺✨