16/09/2026
आँख खुलते ही जो सौ विचार एक साथ झपटते हैं, उन्हें शांत करने का नाम ही ध्यान है। 🔱🚩
बिस्तर छोड़ते ही दिमाग कल की अधूरी बातों और आज के लक्ष्यों की जंग छेड़ने लगता है। इस मानसिक शोर में कूदने से पहले, दो सांसें ठहरकर नीलांचल पर्वत की उस स्थिर चेतना को महसूस कीजिए जो हर हलचल के केंद्र में भी अडिग है। जब विचार भगवती के चरणों में टिकते हैं, तब दिन भर के निर्णय साफ और सटीक होने लगते हैं। कमेंट में 'जय माँ कामाख्या' लिखकर आज की शुरुआत शांत मन से करें।