14/11/2025
एक गरीब घर की ये बेटी…
नंगे पाँव थी, पैरों में चप्पल तक नहीं…
कपड़े साधारण, और पेट में ऐसी पथरी का दर्द कि इंसान तो बिस्तर से भी न उठ पाए।
लेकिन ये लड़की?
दर्द को बहाना नहीं बनाया… गरीबी को दीवार नहीं बनने दिया…
बस दौड़ती रही — जैसे हर कदम के साथ कह रही हो,
“दर्द तू अपनी जगह… मेरा सपना अपनी जगह।”
भीड़ खड़ी थी, पर किसी को समझ नहीं आया कि वो क्यों झुकी-झुकी चल रही है…
कोई नहीं देख पाया कि हर कदम उसके पेट में खंजर की तरह चुभता है।
पर एक चीज़ सबने ज़रूर देखी —
उसकी आँखों में जलती हुई आग।
वो आग, जो दर्द को भी मात देती है…
वो आग, जो हालातों की औकात बता देती है।
और फिर…
वही लड़की, जो दर्द से लड़ रही थी…
वही लड़की, जिसने नंगे पाँव मिट्टी में अपने सपनों की लकीरें खींचीं…
वही लड़की गोल्ड मेडल लेकर लौटी।
हाँ… गोल्ड।
क्योंकि हिम्मत जब अपनी चरम सीमा पर हो,
तो तकलीफ़ें भी सलाम ठोंकती हैं।
पर अफ़सोस इस देश का भी देख लो…
रील पर नाचने वाला मिनटों में वायरल….
पर ऐसी बेटियाँ, जो सच में "परफॉर्म" करती हैं —
उनके लिए लाइक, कमेंट, शेयर तक को लोग बचाकर रखते हैं।
शायद इसलिए कि वो ग्लैमर में नहीं आतीं…
क्योंकि वो गरीब घर से आती हैं।
पर याद रखना…
गरीब घर की बेटियाँ कमज़ोर नहीं होतीं,
बल्कि वही तो असली "फ़ायर गर्ल" बनती हैं।
उनके सपनों की कीमत नोटों में नहीं
उनके हौसले में लिखी होती है।
सलाम है इस बेटी को —
दर्द को हराने वाली,
गरीबी को ठोकर मारने वाली,
और जीत को अपनी आदत बनाने वाली।
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