Astro Shiv Shankar Chaturvedi

Astro Shiv Shankar Chaturvedi astrology ,vastu, numerology, vadic,महामृत्युंजय अनुष्ठान, चंडी अनुष्ठान एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम के लिए सम्पर्क करें watsapp,9464661008,9646351008

ॐ नमो भगते वासुदेवाय

● कुंडली विश्लेषण, महामृत्युंजय अनुष्ठान, चंडी अनुष्ठान एवं अन्य धार्मिक कार्यों हेतु मेरे व्हाट्सएप्प नंबर पर सम्पर्क करें।

. ((((( अहंकारी रावण का पतन )))))रामायण में एक प्रसंग है.. एक बार जब बाली संध्यावंदन के लिए जा रहा था तो आकाशमार्ग से ना...
06/05/2026

. ((((( अहंकारी रावण का पतन )))))

रामायण में एक प्रसंग है.. एक बार जब बाली संध्यावंदन के लिए जा रहा था तो आकाशमार्ग से नारद मुनि जा रहे थे।

बाली ने नारद मुनि का अभिवादन कर पूछा.. ‘मुनिवर कहां जा रहे हैं ?’

नारद मुनि ने बाली को बताया कि वह लंका जा रहे हैं। वहां लंकापति रावण ने देवराज इन्द्र को परास्त करने के उपलक्ष्य में भोज का आयोजन किया है।

सर्वज्ञाता नारद मुनि ने बाली से चुटकी लेते हुए कहा.. ‘अब तो पूरे ब्रह्माण्ड में केवल रावण का ही आधिपत्य है और सारे प्राणी, यहाँ तक कि देवतागण भी उसे ही शीश नवाते हैं।’

बाली ने नारद मुनि से कहा.. ‘रावण ने अपने वरदान और अपनी सेना का इस्तेमाल उन लोगों को दबाने में किया है जो निर्बल हैं; लेकिन मैं उनमें से नहीं हूँ और आप यह बात रावण को स्पष्ट बता दें।’

चंचल स्वभाव नारद मुनि ने यह बात रावण को जा कर बता दी, जिसे सुनकर रावण क्रोधित हो गया। अहंकारी व्यक्ति सदैव अपनी ही प्रशंसा करता है।

दूसरे लोग चाहे कितने ही बड़े क्यों न हों, उसे अपने से बौने ही लगा करते हैं। इस तरह अहंकार व्यक्ति के अज्ञान और मूर्खता का परिचायक है।

रावण ने अपनी सेना तैयार करने के आदेश दे डाले। नारद जी ने उससे भी चुटकी लेते हुये कहा.. ‘एक वानर के लिए यदि आप पूरी सेना लेकर जायेंगे तो आपके सम्मान के लिए यह उचित नहीं होगा।’

घमंड में चूर रावण तुरन्त मान गया और अपने पुष्पक विमान में बैठकर किष्किन्धा में वहां पहुंच गया,जहां बाली संध्यावंदन कर रहा था।

रावण के बार-बार ललकारने से बाली की पूजा में विघ्न उत्पन्न हो रहा था। बाली के पहरेदारों ने रावण को रोकने का बहुत प्रयास किया; लेकिन वह बाली के पूजा-कक्ष तक पहुंच गया।

वहां बाली की स्वर्णमयी कांति देखकर रावण घबड़ा गया। उसने बाली पर पीछे से वार करने की चेष्टा की।

शक्तिशाली बाली पूजा में तल्लीन था; लेकिन उसने राक्षसराज रावण को नन्हे से कीड़े की भांति अपनी पूँछ से पकड़ कर और उसका सिर अपने बगल में दबा दिया।

शक्तिशाली बाली ने रावण को अपनी बगल में छह महीने तक दबाए रखा। फिर बाली ने रावण को खिलौने की तरह खेलने के लिए अपने पुत्र अंगद को दे दिया।

अंगद ने रावण के गले में रस्सी बाँधकर उसे नगर में घुमाना शुरु कर दिया। बाली - पुत्र अंगद ने ऐसा इसलिए किया कि संपूर्ण विश्व के प्राणी रावण को इस असहाय अवस्था में देखें और उनके मन से उसका भय निकल जाए।

अधिक गर्व करने से देव,दानव,मनुष्य सभी का नाश होता है..

संसार को जीतने वाले रावण की यह दशा देखकर नगर के लोग उस पर हंसते हुए कटाक्ष करने लगे.. ‘जरा देखो तो सही,यह विश्व-विजेता रावण आज राजकुमार अंगद द्वारा सड़कों पर घुमाया जा रहा है।’

नगरवासियों की बातें सुनकर रावण शर्मिंदा होकर लम्बे-लम्बे सांस लेने लगा। बगल में दबे रहने से रावण का दम घुटने लगा। उसका घमण्ड चूर-चूर हो गया।

उसने अपने नाना पुलस्त्य मुनि को याद किया। अपने दौहित्र की दीन पुकार सुनकर पुलस्त्य मुनि को अचम्भा हुआ कि रावण की ऐसी दशा क्यों हुई ?

इसके पश्चात् पुलस्त्य ऋषि के कहने पर रावण ने अपनी पराजय स्वीकार की और बाली की ओर मैत्री का हाथ बढ़ाया जिसे बाली ने स्वीकार कर लिया।

बाली के अजेय होने का कारण..

बाली देवराज इंद्र के अंश से उत्पन्न अत्यंत पराक्रमी किष्किन्धा के राजा थे। वे ब्राह्मण और गौओं के भक्त थे। प्रतिदिन संध्या,पूजन और देवाराधन करने का उनका नियम था।

ऐसा कहा जाता है कि बाली को उनके पिता इन्द्र से एक स्वर्ण हार प्राप्त हुआ जिसको ब्रह्मा ने मंत्रयुक्त करके यह वरदान दिया था कि..

इसको पहनकर वह जब भी रणभूमि में अपने दुश्मन का सामना करेगा तो उसके दुश्मन की आधी शक्ति क्षीण हो जायेगी और बाली को प्राप्त हो जायेगी। इस कारण से बाली लगभग अजेय था।

रामायण के किष्किन्धाकाण्ड में यह भी उल्लेख आता है कि बाली प्रतिदिन सूर्य को जल चढ़ाने पूर्व तट से पश्चिम तट और उत्तर से दक्षिण तटों में जाते थे।

रास्ते में आई पहाड़ों की चोटियों को वह ऐसे ऊपर फेंकते थे और पुनः पकड़ लेता थे; मानो वह कोई गेंद हों।

प्रतिदिन पूजन के बाद बाली चारों महासमंदरों की परिक्रमा करके सूर्य को अर्घ्य अर्पित करता था।

उसने रावण को बगल में दबाकर ही समुंदरों की परिक्रमा पूरी की। इसके पश्चात् भी जब वह सूर्य वंदना करके लौटते थे तो उन्हें थकावट भी नहीं होती थी।

भक्ति में अहंकार भक्ति को तामसी कर देता है। जो लोग यह हठ करते हैं कि हम ही सही हैं, ईश्वर उनको छोड़ देता है; क्योंकि भगवान को गर्व-अहंकार बिल्कुल भी नहीं सुहाता है।

तब तक ही हरिवास है, जब तक दूर गरूर।

आवत पास गरुर के, प्रभु हो जावें दूर।।

~

*"मधुर स्वभाव"*〰️   *🌞चेहरे की सुंदरता नहीं अपितु स्वभाव की मधुरता ही सम्बन्धों में स्थायी प्रीति का आधार है। मधुर स्वभा...
03/05/2026

*"मधुर स्वभाव"*
〰️

*🌞चेहरे की सुंदरता नहीं अपितु स्वभाव की मधुरता ही सम्बन्धों में स्थायी प्रीति का आधार है। मधुर स्वभाव ही जीवन को मधुरता और सुंदरता प्रदान करता है। यदि किसी व्यक्ति में सुंदरता की कमी हो तो अच्छे स्वभाव से पूरी की जा सकती है, लेकिन अच्छे स्वभाव की कमी हो तो सुंदरता से उसकी पूर्ति कभी नहीं की जा सकती। चेहरे की सुंदरता तो प्रकृति पर निर्भर होती है, लेकिन स्वभाव की सुंदरता हमारी प्रवृत्ति पर निर्भर करती है।*

*🌞चेहरे की सुंदरता जहाँ केवल आँखों तक उतर पाती है, वहीं स्वभाव की सुंदरता सामने वाले के हृदय तक उतर जाती है। अच्छा स्वभाव व्यक्ति को किसी के दिल में उतार देता है तो बुरा स्वभाव व्यक्ति को किसी के दिल से भी उतार देता है। आज हम लोग इसलिए भी दुःखी रहते हैं क्योंकि हम मकान, शहर, देश, मित्र, सम्बंध सब कुछ बदलते हैं पर अपना स्वभाव नहीं बदल पाते। अपने स्वभाव को मृदु बनाओ ताकि हमारा पूरा जीवन मधुरता से भर सके-!!!*

प्रतिदिन 11 बार ‘ॐ लक्ष्मी नारायण नमः’ मंत्र का जाप करें। आचार्य दया शंकर चतुर्वेदी से अभी फ़ोन/चैट के माध्यम से करें बात

और अधिक जानकारी जन्मकुंडली से जुड़ा हुआ परामर्श सलाह उपाय विधि प्रयोग या किसी भी प्रकार की समस्याओं में फंसे हुए हैं तो संपर्क करें और जन्मकुंडली दिखा करके लाभ ले संपर्क करें कॉल करें .....

सम्पर्क सूत्र - 9464661008 9646351008
परामर्श आचार्य दया शंकर चतुर्वेदी

II कुंण्डली विशेषज्ञ II
II 9646351008

30/04/2026

आचार्य दया शंकर चतुर्वेदी और विशाल जी 🍂

28/04/2026
28/04/2026

श्री श्री १००८ महंत श्री रमेश दास शास्त्री जी महाराज के अध्यक्षता में श्री आचार्य दया शंकर चतुर्वेदी जी

Happy 🎂🎂   Raj   Chaube 🎂😍    🎂ANIRUDH  #🎂Vedantika #🎂 CONGRATULATIONS जन्मदिवसRaj Laxmi Chaube  😍🎂🎂💐🎂🎂 D.s D S. Mahima ...
27/04/2026

Happy 🎂🎂 Raj Chaube 🎂😍 🎂ANIRUDH #🎂Vedantika #🎂 CONGRATULATIONS जन्मदिवसRaj Laxmi Chaube 😍🎂🎂💐🎂🎂 D.s D S. Mahima Chaturvedi Prem Sheela Devi आचार्य दया शंकर चतुर्वेदी

जब माता  #पार्वती ने  #महादेव से उनके गले में मौजूद मुंडों का रहस्य जान लिया, तब उन्होंने अमर होने की इच्छा प्रकट की। इस...
25/04/2026

जब माता #पार्वती ने #महादेव से उनके गले में मौजूद मुंडों का रहस्य जान लिया, तब उन्होंने अमर होने की इच्छा प्रकट की। इसी के फलस्वरूप महादेव ने उन्हें ा सुनाई..

माता पार्वती के हठ करने पर भगवान शिव उन्हें #अमरत्व_का_ज्ञान देने के लिए तैयार हुए। उन्होंने एक ऐसे स्थान का चयन किया जहाँ कोई अन्य जीव उस गोपनीय कथा को न सुन सके। इसके लिए उन्होंने #अमरनाथ गुफा को चुना।

गुफा की ओर जाते समय महादेव ने अपने सभी आभूषणों और गणों का त्याग किया (जैसे नंदी को पहलगाम में, चंद्रमा को चंदनवाड़ी में और सर्पों को शेषनाग झील पर छोड़ा)।

गुफा में प्रवेश कर महादेव ने चारों ओर अग्नि प्रज्वलित कर दी ताकि कोई भी जीवित प्राणी अंदर न आ सके।

कथा शुरू होने से पहले, गुफा के भीतर एक सुख चुके पेड़ के खोखल में एक तोते का अंडा पड़ा था। महादेव की उपस्थिति और वहां की ऊर्जा से वह अंडा फूट गया और उसमें से एक छोटा सा शुक (तोता) निकला। अग्नि के घेरे के कारण वह बाहर नहीं जा सका और चुपचाप वहीं छिपा रहा।

महादेव ने माता पार्वती को अमर कथा (ब्रह्म ज्ञान) सुनाना शुरू किया। कथा बहुत लंबी थी। सुनते-सुनते माता पार्वती को थकान महसूस हुई और वे गहरी निद्रा में सो गईं।

महादेव को लगा कि माता कथा सुन रही हैं क्योंकि बीच-बीच में "हुंकारी" (हूँ-हूँ की आवाज) सुनाई दे रही थी।

वास्तव में, वह हुंकारी माता पार्वती नहीं, बल्कि वह छोटा तोता 🐦भर रहा था ताकि कथा रुक न जाए।

जब कथा समाप्त हुई, तब महादेव ने देखा कि पार्वती जी तो सो रही हैं। उन्होंने आश्चर्य से पूछा कि "फिर हुंकारी कौन भर रहा था?" तभी उनकी दृष्टि उस छोटे तोते पर पड़ी। महादेव क्रोधित हो गए कि एक पक्षी ने अमर कथा सुन ली है। वे उसे मारने के लिए दौड़े।

वह तोता अपनी जान बचाकर भागा और सीधे महर्षि #वेदव्यास जी के आश्रम पहुँचा।

वहां व्यास जी की पत्नी वाटिका जम्हाई ले रही थीं। वह छोटा तोता सूक्ष्म रूप धारण कर उनके मुख के रस्ते उनके गर्भ में प्रविष्ट हो गया।

वह बालक १२ वर्षों तक गर्भ से बाहर नहीं आया क्योंकि उसे डर था कि बाहर आते ही वह माया के जाल में फंस जाएगा।

स्वयं भगवान #कृष्ण के आश्वासन के बाद वह बालक बाहर आया, जो आगे चलकर महान ज्ञानी महर्षि #शुकदेव कहलाए।

चूंकि शुकदेव जी ने भगवान #शिव के मुख से स्वयं अमर कथा सुनी थी, इसलिए वे जन्म से ही आत्मज्ञानी और माया से मुक्त थे। उन्होंने ही बाद में राजा परीक्षित को #श्रीमद्भागवत_महापुराण की कथा सुनाई थी।

🌿ॐ नमो नारायणाय🙏हर हर महादेव🌿

 #अनिरुद्ध आपको आपके  #जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।।। सभी बड़ो का आशीर्वाद आपको प्राप्त होता रहे।।🎂🎂     ANIRUDH 🎂🥧😍🥰 ...
23/04/2026

#अनिरुद्ध आपको आपके #जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।।। सभी बड़ो का आशीर्वाद आपको प्राप्त होता रहे।।🎂🎂
ANIRUDH 🎂🥧😍🥰 😍🥰happyVEDANTIKA VEDANYA CHATURVEDI
Happy wala birthday...

*क्षमा करने वाला सुख की नींद सोता है* 〰️क्षमा उठाती है ऊँचा आप को: व्यक्ति बदला लेकर दूसरे को नीचा दिखाना चाहता है, पर इ...
23/04/2026

*क्षमा करने वाला सुख की नींद सोता है*
〰️
क्षमा उठाती है ऊँचा आप को: व्यक्ति बदला लेकर दूसरे को नीचा दिखाना चाहता है, पर इस प्रयास में वो खुद बहुत नीचे उतर जाता है।

एक बार एक धोबी नदी किनारे की सिला पर रोज की तरह कपडे धोने आया। उसी सिला पर कोई महाराज भी ध्यानस्थ थे। धोबी ने आवाज़ लगायी, उसने नहीं सुनी। धोबी को जल्दी थी, दूसरी आवाज़ लगायी वो भी नहीं सुनी तो धक्का मार दिया।

ध्यानस्थ की आँखें खुली, क्रोध की जवाला उठी दोनों के बीच में खूब मार -पिट और हाथा पायी हुयी। लूट पिट कर दोनों अलग अलग दिशा में बेठ गए। एक व्यक्ति दूर से ये सब बेठ कर देख रहा था। साधु के नजदीक आकर पूछा, महाराज आपको ज्यादा चोट तो नहीं लगी, उसने मारा बहुत आपको। महाराज ने कहा, उस समय आप छुडाने क्यों नहीं आए? व्यक्ति ने कहा, आप दोनों के बीच मे जब युद्ध हो रहा था उस समय में यह निर्णय नहीं कर पाया की धोबी कोन है और साधू कौन है?

प्रतिशोध और बदला साधू को भी धोबी के स्तर पर उतार लाता है। इसीलिए कहा जाता है की, बुरे के साथ बुरे मत बनो, नहीं तो साधू और शठ की क्या पहचान। दूसरी तरफ, क्षमा करके व्यक्ति अपने स्तर से काफी ऊँचा उठ जाता है। इस प्रकिर्या में वो सामने वाले को भी ऊँचा उठने और बदलने की गुप्त प्रेरणा या मार्गदर्शन देता है।

“प्रतिशोध और गुस्से से हम कभी कभार खुद को नुक्सान पहुचां बैठते हैं जिस से हमें बाद में खुद बहुत पछतावा होता है।आईये हम कुछ बातें बताते हैं इस से जुडी हुयी."

1. गुस्से में लिया गया फैसला अक्सर करके गलत ही साबित होता है, तो इसीलिए हमें खुद पर काबू रखना बहुत जरुरी है।

2.क्षमा करने से सामने वाले व्यक्ति के नजर में हमारी इज्जत, सम्मान और बढ़ जाती है।

3.गुस्सा करने वाला व्यक्ति हमेशा खुद का ही नुक्सान पंहुचाता है।

4.गुस्से में हमेशा अक्सर करके वो काम हो जाता है जिस से हम दूसरों को और खुद को भी नुक्सान पहुचाने के साथ साथ लोगों के दिलों में नफरत पैदा कर देते हैं।

5.आपको जब भी गुस्सा आये या किसी के ऊपर गुस्सा हो तो हमें चाहिए की उस समय हम अपने दिमाग और मन को शांत रखें (नियंत्रण करना सीखें) या फिर हम वहां से कहीं दूसरी जगह पर चले जाएँ।
〰️

Address

Sheetla Mata Mandir
Hajipur
144221

Telephone

+919464661008

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Astro Shiv Shankar Chaturvedi posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share