Apollo Dental clinic

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Apollo Dental clinic अपोलो डेन्टल क्लिनिक

18/08/2026

छोटे बच्चों के दांतों और मसूड़ों की सही देखभाल उनके मुंह में बैक्टीरिया और कैविटी (सड़न) को रोकने के लिए शुरुआती महीनों से ही जरूरी होती है।

उम्र के अनुसार दांतों की सफाई
​दांत निकलने से पहले (0 से 6 महीने): हर बार दूध पिलाने के बाद एक साफ, हल्के गीले सूती कपड़े या गॉज पैड से बच्चे के मसूड़ों और जीभ को धीरे-धीरे पोंछें।
​पहला दांत आने पर (लगभग 6 महीने से 3 साल):
​बच्चों के लिए आने वाले बेहद सॉफ्ट ब्रिसल्स वाले ब्रश का इस्तेमाल करें।
​चावल के दाने (Grain size) के बराबर फ्लोराइड-युक्त टूथपेस्ट लगाएं।
​दिन में दो बार (सुबह और रात को सोने से पहले) हल्के हाथों से ब्रश कराएं।
​3 से 6 साल के बच्चे:
​मटर के दाने (Pea size) जितनी मात्रा में टूथपेस्ट का उपयोग करें।
​बच्चे को पेस्ट थूकने और कुल्ला करने की आदत डालें। जब तक बच्चा 7–8 साल का न हो जाए, ब्रश करते समय निगरानी रखें।
​कैविटी और सड़न से बचाव के जरूरी नियम
​बॉटल रॉट (Bottle Rot) से बचें: बच्चे को कभी भी दूध या मीठे पेय की बोतल मुंह में लगाकर न सुलाएं। मुंह में बचा दूध रातभर में दांतों को तेजी से सड़ाता है।
​मीठे खानपान पर नियंत्रण: चिपचिपी टॉफी, चॉकलेट, पैकेज्ड जूस और अधिक शर्करा वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करें।
​दांत निकलने (Teething) के दौरान आराम: जब बच्चे के दांत निकल रहे हों, तो साफ सिलिकॉन टीथर या ठंडा (फ्रोजन नहीं) साफ कपड़ा चबाने के लिए दें ताकि मसूड़ों की खुजली व दर्द कम हो सके।
​डेंटिस्ट विजिट: पहले जन्मदिन पर या पहला दांत दिखने के 6 महीने के भीतर एक बार पीडियाट्रिक डेंटिस्ट (बच्चों के दंत चिकित्सक) से जांच जरूर करवाएं।

16/08/2026

दांतों को स्वस्थ, मजबूत और सड़न से सुरक्षित रखने के लिए सही दैनिक देखभाल और खान-पान बेहद जरूरी है।
​दैनिक सफाई के नियम
​दिन में दो बार ब्रश करें: सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले कम से कम 2 मिनट तक ब्रश करें।
​सही तकनीक और ब्रश: हमेशा सॉफ्ट (नरम) ब्रिसल्स वाले टूथब्रश का इस्तेमाल करें। ब्रश को दांतों पर 45 डिग्री के कोण पर हल्के हाथों से गोल-गोल घुमाकर साफ करें, ज्यादा जोर से रगड़ें नहीं।
​फ्लॉसिंग (Flossing): दिन में एक बार फ्लॉस का इस्तेमाल जरूर करें ताकि दांतों के बीच फंसा खाना और प्लाक निकल सके, जहाँ ब्रश नहीं पहुँच पाता।
​जीभ की सफाई: जीभ पर बैक्टीरिया जमा होने से मुंह की बदबू और कैविटी की समस्या होती है, इसलिए टंग क्लीनर से जीभ रोजाना साफ करें।
​फ्लोराइड टूथपेस्ट: दांतों के इनेमल (सुरक्षात्मक परत) को मजबूत रखने के लिए फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का उपयोग करें।
​खान-पान की सावधानियां
​मीठी और चिपचिपी चीजें सीमित करें: चॉकलेट, टॉफी, सोडा और पैक्ड जूस जैसी चीजें दांतों में बैक्टीरिया और एसिड बनाकर कैविटी का कारण बनती हैं।
​कुल्ला करने की आदत: कुछ भी मीठा, खट्टा या चिपचिपा खाने के बाद तुरंत सादे पानी से अच्छी तरह कुल्ला करें।
​कैल्शियम और विटामिन D: दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां और बादाम को डाइट में शामिल करें, जिससे दांतों की जड़ें और हड्डियां मजबूत रहें।
​पानी भरपूर पिएं: पर्याप्त पानी पीने से मुंह में लार (saliva) बनती है, जो प्राकृतिक रूप से दांतों से हानिकारक एसिड और खाने के कणों को साफ करती है।
​नियमित जांच और सुरक्षा
​हर 6 महीने में एक बार डेंटिस्ट से दांतों की जांच और स्केलिंग (सफाई) करवाएं।
​तंबाकू, सिगरेट और गुटखे से पूरी तरह दूर रहें, क्योंकि ये मसूड़ों की गंभीर बीमारी और दांतों के झड़ने की मुख्य वजह हैं।
​बर्फ, पेन या बोतल के ढक्कन जैसी कठोर चीजें दांतों से न तोड़ें।
​क्या आप दांतों के दर्द, पीलेपन या सेंसिटिविटी जैसी किसी विशेष समस्या के बारे में जानना चाहते हैं?

12/08/2026

दांतों को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए कैल्शियम, विटामिन-डी और फाइबर से भरपूर आहार लें। अपने भोजन में दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां, और बादाम शामिल करें। ज्यादा मीठी चीजें, चिपचिपे खाद्य पदार्थ और कोल्ड ड्रिंक्स खाने से बचें, क्योंकि इनसे दांतों में कीड़े (कैविटी) लग सकते हैं।फायदेमंद आहार (Good Foods)कैल्शियम युक्त चीजें: दूध, पनीर और सादा दही दांतों के इनेमल को मजबूत बनाते हैं।हरी सब्जियां: पालक और अन्य पत्तेदार सब्जियों में मिनरल्स होते हैं।कुरकुरे फल और सब्जियां: गाजर और सेब चबाने से लार (saliva) बनती है जो मुंह को साफ रखती है।नट्स: बादाम और काजू दांतों के लिए बहुत अच्छे होते हैं।क्या छोड़ें या कम खाएं (Foods to Avoid)चीनी और टॉफी: यह दांतों में चिपक जाती है और बैक्टीरिया को बढ़ाती है।एसिडिक ड्रिंक्स: सोडा और पैकेज्ड जूस दांतों की ऊपरी परत को कमजोर करते हैं।बार-बार स्नैकिंग: बार-बार कुछ भी खाते रहने से दांतों पर एसिड का हमला होता है।

12/08/2026

मीठा और मैदा खाने से मुंह के बैक्टीरिया चीनी को एसिड में बदलते हैं, जो दांतों की ऊपरी मजबूत परत (इनेमल) को गला देता है। मैदा दांतों पर चिपक जाता है जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं। इससे दांतों में कीड़ा लगना (कैविटी), सड़न, सेंसिटिविटी (झंझट) और दर्द की समस्या होती है।नुकसान के कारणएसिड बनना: मीठा खाने से बैक्टीरिया एसिड बनाते हैं जो इनेमल को कमजोर करते हैं।दांतों से चिपकना: मैदा (रिफाइंड कार्ब्स) दांतों की सतह और बीच में फंस जाता है, जो जल्दी साफ नहीं होता।कैविटी (कीड़ा): लंबे समय तक ऐसा होने से दांतों में छेद या कैविटी हो जाती है।सेंसिटिविटी: इनेमल घिसने पर मीठा लगते ही दांतों में सिहरन या दर्द होता है।बचाव के उपायकुल्ला करें: मीठा या मैदा खाने के बाद तुरंत पानी से अच्छी तरह कुल्ला करें।ब्रश करें: दिन में दो बार नियमित रूप से ब्रश करें।सफाई रखें: दांतों के बीच फंसे कणों को साफ करने के लिए फ्लॉस का उपयोग करें।दिखाएं: समस्या बढ़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।

04/08/2026

दांतों के दर्द से राहत पाने और प्राकृतिक दांत को सुरक्षित रखने के लिए रूट केनाल ट्रीटमेंट (RCT) एक बेहतरीन और असरदार विकल्प है। अपोलो डेंटल क्लिनिक में आर सी टी (RCT) विशेषज्ञ डॉक्टर की देखरेख में इलाज कराने के लिए आप संपर्क कर सकते हैं।

01/08/2026

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