Shri Vishva Prangana Ayurveda Clinic and Panchakarma center

Shri Vishva Prangana Ayurveda Clinic and Panchakarma center This page belongs to an authentic Maharashtrian Ayurvedic clinic and Panchakarma center launching first time in Uttarakhand.

Nadi Vaidya Dr. Rahul Gupta has passed his BAMS from Uttranchal Ayurvedic College Dehradun and has done his MD (Ayurveda) from Government Ayurved College Nanded, Maharashtra. He got his traditional ayurveda knowledge from very famous guru shishya parampara “VISHVA PARAMPARA, Maharashtra”. He is a proficient Nadi Vaidya and got his diksha for the same from Vishva Pandhari Ashram Kolhapur. He is hav

ing more than 10 years of expertise. Many patients in India & abroad have been benefited from his pulse diagnosis, ayurveda and panchakarma treatment. He has participated and presented his papers in many international conferences. His articles on various subject are published in national – international journals, magazines and newspapers.

21/07/2026

क्या आधुनिक एवं पारंपरिक चिकित्सा का सही समन्वय नेत्र स्वास्थ्य की परिभाषा बदल सकता है? 👁️🌿

हाल ही में आकाशवाणी (All India Radio) पर प्रसारित विशेष परिचर्चा में, गंभीर एवं जटिल नेत्र रोगों के प्रबंधन में आयुर्वेदिक क्रियाकल्प, पंचकर्म एवं शास्त्रीय संप्राप्ति-विघटन की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

# # # 🔹 मुख्य चिकित्सकीय बिंदु (Clinical Highlights):
Diabetic & Hypertensive Retinopathy (Vitreous Hemorrhage):
रक्तस्राव (Hemorrhage) और मस्कुलर शोथ (Edema) की अवस्था में रक्तमोक्षण (Jalaukavacharana) एवं नेत्र तर्पण* का प्रयोग किस प्रकार संवहनी अवरोध (Vascular Obstruction) को दूर कर दृष्टि पथ को पुनर्जीवित करने में सहायक है? (European Journal of Molecular & Clinical Medicine में प्रकाशित केस-स्टडी आधारित दृष्टिकोण)

Chronic Uveitis & Autoimmune Dynamics:
बार-बार होने वाले नेत्र शोथ में केवल लक्षणों का शमन नहीं, बल्कि विरुद्ध आहार (जैसे अस्वास्थ्यकर खाद्य संयोजन) से उत्पन्न सूक्ष्म शोथकारी तत्वों (Inflammatory Substances) को पहचानकर इम्यूनो-मॉड्यूलेटर (रसायन) चिकित्सा का महत्व।

Optic Nerve Health & Glaucoma:
आँखों के बढ़े हुए दबाव (IOP) एवं ऑप्टिक नर्व की शिथिलता में पारंपरिक क्रियाकल्पों की भूमिका — जैसा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों (WHO Global Centre, Jamnagar) पर भी रेखांकित किया जा चुका है।

समग्र निदान (Holistic Pathophysiology):
आमाशय की अग्निमान्द्य (अपाचन) और आम (Toxins) का शरीर के अन्य अवयवों से होता हुआ नेत्रों तक प्रभाव — क्यों सुपर-स्पेशलाइजेशन के दौर में भी आयुर्वेद का 'संपूर्ण शरीर दृष्टिकोण' (Whole-Body Approach) प्रासंगिक है?

💡 शास्त्र वर्णित 5 नित्य नियम:
पाद अभ्यंग (तिल तेल), सौवीर-अंजन, एकाग्र त्राटक, एवं शोथ अवस्था में उपवास (लंघन) का वैज्ञानिक महत्व।

🏛️ श्री विश्व प्रांगण आयुर्वेद चिकित्सालय
(13 वर्षों का चिकित्सकीय अनुभव | भारत सरकार के अंतर्राष्ट्रीय कंसल्टेशन पैनल में सम्मिलित)
यदि आप या आपके परिचित किसी जटिल नेत्र समस्या अथवा अन्य क्रोनिक व्याधियों के संदर्भ में शास्त्रीय एवं साक्ष्य-आधारित आयुर्वेदिक परामर्श चाहते हैं, तो अपनी केस-हिस्ट्री एवं रिपोर्ट्स साझा कर सकते हैं।

👉 परामर्श एवं अपॉइंटमेंट हेतु संपर्क करें:
📞 दूरभाष / WhatsApp: +91 78953 72936
📍 स्थान: श्री विश्व प्रांगण आयुर्वेद चिकित्सालय, मुखानी चौराहा, हल्द्वानी (उत्तराखंड)

15/07/2026

"​गंगा के पावन तट पर जिसने नव इतिहास रचाया था,
मृत काया से जीवन का हर गूढ़ रहस्य जगाया था।
युगों-युगों की धुंध चीरकर जिसने दीप्ति जगाई थी,
आज उन्हीं सुश्रुत की पावन पावन बेला आई है।

​धार चुराई जिसने तृण से, जिसने तीक्ष्ण औजार गढ़े,
मानव के घावों को सीने के जिसने अद्भुत पाठ पढ़े।
त्वचा बदलकर रूप सँवारा, रूपायन की कला दी,
विकृत को अविकृत कर देने की पावन प्रतिभा दी।

​अग्नि, क्षार और जलौका से जिसने रोगों को था मोड़ा,
टूटी अस्थि, बिखरी काया को मन्त्रों-सा था जोड़ा।
यन्त्र, शस्त्र और पट्ट-बन्ध के जो आदि प्रणेता हैं,
वही हमारे आदि वैद्य हैं, वही जगत के नेता हैं।

​शत-शत नमन शल्य-नायक को, नमन ज्ञान के सागर को,
शत-शत नमन संहिता-शिल्पी, आयुर्वेद-उजागर को।
आज तुम्हारी पावन स्मृति में शीश झुकाता है संसार,
हे देव! तुम्हारी थाती से ही रक्षित है यह जीव-जगत का आधार।"

सभी को आचार्य सुश्रुत जयंती की बहुत सारी शुभकामनाएं।
वैद्य राहुल गुप्ता

चलिए कुछ दिल की बात हो जाए...
29/06/2026

चलिए कुछ दिल की बात हो जाए...

14/06/2026

🌿 Evidence-Based Ayurveda: के व्यवहारिक पक्ष पर चर्चा, तथ्यों की प्रस्तुति के साथ! 🌿(EP-3)

क्या आपने भी हमेशा यही सुना है कि आयुर्वेद बीमारियों को ठीक करने में बहुत लंबा समय लेता है? अगर हाँ, तो आज आपका यह भ्रम हमेशा के लिए टूटने वाला है!

आकाशवाणी देहरादून (100.5 MHz) के विशेष कार्यक्रम "नाड़ी से निदान" में हमारे साथ जुड़े हैं प्रसिद्ध नाड़ी वैद्य राहुल गुप्ता जी (श्री विश्व प्राणंग आयुर्वेद व पंचकर्म चिकित्सालय)। इस बेहद दिलचस्प इंटरव्यू में उन्होंने कुछ ऐसी बातें साझा की हैं जो आपको हैरान कर देंगी:

⚡ सेकंड के 18वें हिस्से में असर: क्या आप जानते हैं कि सही तरीके से तैयार की गई कुछ आयुर्वेदिक रस-औषधियाँ शरीर पर मात्र एक सेकंड के 18वें हिस्से में अपना असर दिखाना शुरू कर देती हैं?

👁️ खोई हुई आंखों की रोशनी वापस लौटी: वैद्य जी ने एक ऐसे अनोखे केस के बारे में बताया जहाँ महज़ 3 महीने के आयुर्वेदिक इलाज से एक मरीज़ की आँखों की पूरी रोशनी वापस आ गई, जिसका शोध पत्र (Research Paper) यूरोपियन जर्नल में भी पब्लिश हुआ है!

🔬 Evidence-Based Ayurveda: जानिए कैसे आज का आयुर्वेद केवल परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर पूरी तरह खरा उतर रहा है।

🌌 नक्षत्रों का खेल: क्या दवाओं के असर का पुष्य नक्षत्र से कोई संबंध है? जानिए दवाइयाँ बनाने का असली और प्राचीन वैज्ञानिक तरीका।

🤔 पूरी सच्चाई जानने के लिए उत्सुक हैं?

आयुर्वेद के इन अनसुने रहस्यों, नैनो-पार्टिकल्स (सूक्ष्मीकरण) की तकनीक और अपनी सेहत से जुड़े बड़े सवालों के जवाब जानने के लिए इस पूरे ऑडियो को अंत तक ज़रूर सुनें!

👇 वैद्य जी से संपर्क करने के लिए:

अगर आप भी किसी समस्या का जड़ से इलाज चाहते हैं, तो श्री विश्व प्राणंग आयुर्वेद व पंचकर्म चिकित्सालय के व्हाट्सएप नंबर 78953-72936 पर संपर्क कर सकते हैं।

नाड़ी वैद्य राहुल गुप्ता (BAMS, MD)
📍 श्री: विश्व प्रांगण आयुर्वेद चिकित्सालय एवं पंचकर्म केंद्र
हल्द्वानी, उत्तराखंड
📞 78953-72936

03/06/2026

📻 **आकाशवाणी देहरादून पर विशेष चर्चा: चिकित्सालय का व्यापक कार्यक्षेत्र (EP-2)**

क्या आयुर्वेद में बिना ऑपरेशन के घुटने के फ्रैक्चर और आँखों के फ्लोटर्स (Uveitis) को ठीक किया जा सकता है? भारत सरकार के अंतरराष्ट्रीय कंसल्टेशन पैनल के सदस्य नाड़ी वैद्य राहुल गुप्ता से जानिए इन सभी जटिल बीमारियों का समाधान।

**सोचने पर मजबूर करने वाले कुछ पॉइंट्स:**

* क्यों सीजन बदलने पर कपड़े बदलने की तरह खाना बदलना भी ज़रूरी है?

* क्या मोतियाबिंद (Cataract) को बिना ऑपरेशन रिवर्स किया जा सकता है?

* बच्चों की कम इम्युनिटी का असली कारण क्या है?

इन सभी रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए अभी इस वीडियो को देखें!

नाड़ी वैद्य राहुल गुप्ता (BAMS, MD)
📍 श्री: विश्व प्रांगण आयुर्वेद चिकित्सालय एवं पंचकर्म केंद्र
हल्द्वानी, उत्तराखंड
📞 78953-72936

20/05/2026

**नब्ज़ की ज़ुबानी: स्वास्थ्य की कहानी**

क्या आप जानते हैं कि आपकी कलाई की धड़कन में आपकी सेहत के कई गहरे राज़ छिपे हैं?
क्या आप यह समझना चाहते हैं कि कैसे प्राचीन आयुर्वेद में केवल तीन उंगलियों के स्पर्श से पूरी शारीरिक और मानसिक स्थिति का सटीक विश्लेषण कर लिया जाता है?

प्रसार भारती, देहरादून पर मेरा एक विशेष रेडियो कार्यक्रम रिकॉर्ड हुआ था, जिसकी रिकॉर्डिंग आज मैं आप सभी के साथ यहाँ शेयर कर रहा हूँ। इस कार्यक्रम में मैंने नाड़ी परीक्षा के उन अनछुए पहलुओं पर बात की है जो शायद ही आपने पहले कभी सुने होंगे।

इस वीडियो या ऑडियो में आपको जानने को मिलेगा:

कौन होते हैं 'नाड़ी वैद्य'? –– क्या नाड़ी देखना सिर्फ एक कला है या इसके पीछे कोई गहरा विज्ञान है?
कठिन साधना और ट्रेनिंग: – एक आम चिकित्सक और एक विशेषज्ञ नाड़ी वैद्य में क्या अंतर होता है? एक नाड़ी वैद्य को इस विद्या में महारत हासिल करने के लिए कितनी कठिन ट्रेनिंग, गुरु-शिष्य परंपरा और निरंतर अभ्यास से गुजरना पड़ता है?

आधुनिक डॉक्टरों से कैसे अलग हैं नाड़ी वैद्य? – जहाँ आज की आधुनिक चिकित्सा पद्धति बीमारियों को पकड़ने के लिए महंगे ब्लड टेस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई पर निर्भर करती है, वहीं एक कुशल नाड़ी वैद्य बिना किसी मशीन के, सिर्फ आपकी नब्ज छूकर रोग के मूल कारण, वात, पित्त, कफ के असंतुलन को कैसे पकड़ लेते हैं?

अगर आप भी बिना महँगी जाँचों के, अपने शरीर की प्रकृति और बीमारियों की जड़ को समझने की इस प्राचीन भारतीय विधा के बारे में जानना चाहते हैं, तो इस रिकॉर्डिंग को पूरा ज़रूर सुनें और इस ज्ञानवर्धक चर्चा का आनंद लें।

अपनी राय और सवाल नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर साझा करें!

सुना था की आयुर्वेद धीमा काम करता है, सुना था की आयुर्वेद केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक ही सीमित है ! आयुर्वेद की ये सफलता क...
13/05/2026

सुना था की आयुर्वेद धीमा काम करता है, सुना था की आयुर्वेद केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक ही सीमित है ! आयुर्वेद की ये सफलता की कहानी ज़रा उन लोगों के कानो तक पहुँचाइये जिनकी बुद्धि बनी ही अंग्रेज़ो की ग़ुलामी के लिए है।

साथ ही, मेरे विशिष्ठ चिकित्सीय कार्यों को कलमबद्ध कर समर्थन प्रदान करने के लिए, अमर उजाला पब्लिकेशन का हृदय से धन्यवाद !

06/05/2026

🏥 20 साल पुराने यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर से मिली मुक्ति: स्विस नागरिक ने चुनी भारतीय आयुर्वेद की राह! 🇮🇳✨

क्या आप जानते हैं कि जिस समस्या के लिए आधुनिक चिकित्सा में बार-बार सर्जरी ही एकमात्र रास्ता बताई जाती है, उसका समाधान आयुर्वेद में संभव है?

स्विट्जरलैंड के 53 वर्षीय नर्सिंग प्रोफेशनल, स्फाकियानाकिस इओनिस, पिछले 20 वर्षों से यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर (पेशाब की नली में रुकावट) की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। स्विट्जरलैंड और जर्मनी में दो बड़ी सर्जरियों (Internal Urethrotomy & Optilume Dilatation) के बाद भी उन्हें आराम नहीं मिला और उन्हें तीसरी सर्जरी की सलाह दी गई।

खोज और समाधान 🔍
निराशा के बीच उन्होंने वैकल्पिक चिकित्सा की तलाश की और उनका संपर्क मुझसे हुआ। 'हील इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन परामर्श लेकर उन्होंने अपना इलाज शुरू किया।

आयुर्वेद ने कैसे किया कमाल?
हमारी आयुर्वेद दवाएं पेशाब के रास्ते से गुजरते समय:
✅ यूरेथ्रा के प्रभावित हिस्से को प्राकृतिक रूप से अंदर से रिपेयर करती हैं।
✅ नली की इलास्टिसिटी (लचीलापन) वापस लाती हैं।
✅ बार-बार कैथेटर डालने के दर्द और ब्लीडिंग से छुटकारा दिलाती हैं।

परिणाम 📊
मात्र एक वर्ष के आयुर्वेदिक उपचार के बाद, रुग्ण अब पूरी तरह स्वस्थ हैं! न केवल स्ट्रिक्चर ठीक हुआ, बल्कि उनके प्रोस्टेट वॉल्यूम में भी जबरदस्त सुधार देखा गया। रुग्ण का वीडियो फीडबैक साझा कर रहे है।
"श्री विश्व प्रांगण आयुर्वेद चिकित्सालय" (हल्द्वानी) पिछले 20 वर्षों से दुनिया के 25 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है।

स्वस्थ भविष्य हेतु संकल्पित:
नाड़ी वैद्य राहुल गुप्ता (BAMS, MD)
📍 श्री: विश्व प्रांगण आयुर्वेद चिकित्सालय एवं पंचकर्म केंद्र
हल्द्वानी, उत्तराखंड
📞 78953-72936

India

स्वदेशी तेल: आयुर्वेद का सुरक्षा चक्र"क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में रखा कुकिंग ऑयल आपको लंबी उम्र दे सकता है या बीम...
29/04/2026

स्वदेशी तेल: आयुर्वेद का सुरक्षा चक्र

"क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में रखा कुकिंग ऑयल आपको लंबी उम्र दे सकता है या बीमारियों के जाल में फंसा सकता है? आज के चमकदार 'हार्ट फ्रेंडली' विज्ञापनों ने हमें अपनी जड़ों से काटकर नसों के सूखेपन की ओर धकेल दिया है। आइए, आयुर्वेद के प्राचीन विज्ञान और आधुनिक रिसर्च के माध्यम से जानते हैं कि आपके शरीर के लिए असली 'इंधन' कौन सा है।"
आयुर्वेद और विज्ञान समर्थित सर्वश्रेष्ठ विकल्प

1) गव्य घृत (A2 गाय का घी):
आयुर्वेद: "घृतं पित्तप्रशमनं पित्तप्रशमनं हि तत्।" (घी पित्त नाशक और ओज वर्धक है।)
विज्ञान: ICMR-NIN के अनुसार, इसका उच्च स्मोक पॉइंट (250 डिग्री) इसे भारतीय कुकिंग के लिए सबसे स्थिर (Stable) फैट बनाता है।

2) तिल का तेल (Sesame Oil):
आयुर्वेद: "तैलं तु तिलजं श्रेष्ठं बलार्थं स्नेहनेषु च।" (सभी तेलों में तिल का तेल बल के लिए श्रेष्ठ है।)
विज्ञान: American Journal of Clinical Nutrition के अनुसार, इसके एंटीऑक्सीडेंट धमनियों को सख्त होने से बचाते हैं।

3) सरसों का तेल (Mustard Oil):
आयुर्वेद: "कटूष्णं सार्षपं तैलं कफवातविनाशनम्।" (उत्तर भारत के लिए सर्वोत्तम कफ-वात नाशक।)
विज्ञान: ICMR के अनुसार, इसमें हृदय के लिए आदर्श ओमेगा-3 और 6 का अनुपात मौजूद है।

4) नारियल का तेल (Coconut Oil):
आयुर्वेद: यह शीतल और पित्त शामक है, जो दक्षिण भारत की जलवायु के लिए वरदान है।
विज्ञान: इसमें मौजूद 'लौरिक एसिड' इम्युनिटी और मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है।

5) मूंगफली का तेल (Groundnut Oil):
आयुर्वेद: महाराष्ट्र और मध्य भारत के लिए उत्तम वात शामक और ऊर्जादायक तेल।
विज्ञान: NIN के अनुसार, इसमें मौजूद प्रचुर MUFA धमनियों का लचीलापन बरकरार रखता है।

आधुनिक तेलों के वैज्ञानिक दुष्प्रभाव ⚠️

रिफाइंड तेल (Refined Oils): ICMR के अनुसार, रिफाइनिंग के केमिकल नसों में सूखापन (Dryness) पैदा करते हैं, जिससे नसें सख्त होकर Heart Attack (due to Arteriosclerosis) का मुख्य कारण बनती हैं।

1) सनफ्लावर ऑयल: शोध के अनुसार, उच्च तापमान पर इसमें कैंसरकारी 'Aldehydes' जैसे ज़हरीले तत्व पैदा होते हैं जो शरीर के लिए हानिकारक हैं, साथ ही ये शरीर में फ़्री रैडिकल्ज़ को बढ़ते है जो अंगो के सामन्य कामकाज को बाधित करता है। इसका सम्बन्ध Parkinsonism और Neuro-degenerative बीमारियों से पाया गया है।

2) राइस ब्रान ऑयल: World Journal of Cardiology के अनुसार, इसकी ओमेगा-6 की अधिकता हृदय में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ाती है। इसके अलावा चावल की खेती के दौरान यह ज़मीन से Arsenic सोख लेता है, जो ज़्यादातर उसकी बाहरी परत भूसी में जमा राहता है। Arsenic की यही सूक्ष्म मात्रा शरीर के लिए हानिकारक है।

3) ऑलिव ऑयल: इसमें ओमेगा -9प्रचुर मात्रा में रहता है किंतु इसके साथ में शरीर को ओमेगा-3 की भी सख़्त ज़रूरत रहती है जो इसमें बहुत ही कम है। विदेशों में भी इसे केवल ऊपर से गार्निश करने के लिए ही प्रयोग में लाया जाता है।

निष्कर्ष: जड़ों की ओर वापसी

"भोजन केवल स्वाद नहीं, बल्कि आपके शरीर की औषधि है। आयुर्वेद का सरल नियम है— 'स्थानीय खाएं, स्वस्थ रहें'। जो तेल आपके परिवेश की मिट्टी में उगता है, वही आपके डीएनए के लिए अनुकूल है। विज्ञापनों के 'रिफाइंड' छलावे से बाहर निकलें और अपनी परंपरा के शुद्ध, कच्ची घानी तेलों को अपनाएं। याद रखें, नसों में प्राकृतिक चिकनाई बनी रहेगी, तभी जीवन की गति निर्बाध चलेगी।”

वैद्य राहुल गुप्ता
BAMS, MD
श्री विश्व प्रांगण आयुर्वेद चिकित्सालय, मुखानी, हल्द्वानी
संपर्क: 78953-72936

🌞 भीषण ग्रीष्म: बच्चों की सुरक्षा के लिए 'आयुर्वेद' सुरक्षा कवच 🛡️अत्यधिक गर्मी बच्चों के 'ओज' (Immunity) को सोख लेती है...
24/04/2026

🌞 भीषण ग्रीष्म: बच्चों की सुरक्षा के लिए 'आयुर्वेद' सुरक्षा कवच 🛡️

अत्यधिक गर्मी बच्चों के 'ओज' (Immunity) को सोख लेती है। ग्रीष्म ऋतु में बच्चों का सुकुमार शरीर पित्त और वात के प्रकोप के प्रति अत्यंत संवेदनशील होता है। एक अभिभावक और चिकित्सक के रूप में, इन ६ प्रमुख खतरों और उनके शास्त्रीय समाधानों को समझना अत्यंत आवश्यक है:

१. नासागत रक्तपित्त (नक्सीर फूटना)
तेज गर्मी से बच्चों की नासिका की कोमल रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं।
समाधान: ताजे दूर्वा (दूब घास) का स्वरस नाक में २-२ बूंद डालें। सिर के बीचों-बीच चंदन का लेप लगाएं।
शास्त्र प्रमाण: "घ्राणप्रवृत्ते जलमाशु देयं सशर्करं नासिकया पयश्च।" (चरक संहिता)
अर्थात: नक्सीर फटने पर मिश्री मिला हुआ ठंडा जल या दूध का नस्य तुरंत लाभ देता है।

२. छर्दि एवं अतिसार (उल्टी-दस्त)
गर्मी में अत्यधिक/ दूषित जल के सेवन जठराग्नि मंद होने से इन्फेक्शन और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
समाधान: 'लाजा पेया' (खील का मांड) और दाड़िम (अनार) का रस। यह आंतों को बल देता है और शरीर में जलस्तर बनाए रखता है।

३. अंशुघात (Heat Stroke/लू लगना)
लू लगने पर बच्चा सुस्त और निस्तेज हो जाता है।
हटके समाधान: 'आम्र पनक' (कच्चे आम का पन्ना)। इसे केवल पिलाना ही नहीं, बल्कि उबले आम के गूदे को बच्चे के तलवों और हथेलियों पर मलना लू का सबसे प्रभावी उपचार है।
इसके अलावा खाने में नियमित रूप से प्याज़ का सेवन लू लगाने की सम्भावना को कम करता है।

४. अक्षि-दाह (आँखों की जलन एवं लालिमा)
बाहर की गर्म हवा 'आलोचक पित्त' को कुपित कर दृष्टि पर प्रभाव डालती है।
समाधान: शुद्ध गौ-घृत (गाय का घी) की पैरों के तलवों पर मालिश करें। रात में आंखों पर गुलाब जल के फाहे रखना अत्यंत सुखदायक है।

५. तर्षण एवं भ्रम (अत्यधिक प्यास और चक्कर)
सिर्फ पानी पीना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।
समाधान: 'मंथ' का प्रयोग। खजूर, मुनक्का, मिश्री और सत्तू को मथकर तैयार किया गया पेय।
शास्त्र प्रमाण: "सितोपलाढ्यं मन्थं वा भक्षयन् ग्रीष्मजं जयेत्।" (सुश्रुत संहिता)

अर्थात: मिश्री युक्त शीतल 'मंथ' के सेवन से गर्मी के विकारों पर विजय प्राप्त होती है।

६. त्वक-शोष एवं घमौरियां (Skin Issues)
पसीने से होने वाली खुजली और रैशेज बच्चों को बेचैन कर देते हैं।
समाधान: स्नान के जल में 'उशीर' (खस) या नीम के पत्ते डालें। सिंथेटिक पाउडर के बजाय चंदन पाउडर का प्रयोग करें।

💡 डॉ. राहुल की विशेष टिप:
गर्मी के इन दिनों में बच्चों को 'चंद्रिका सेवन' (रात में चांदनी में १०-१५ मिनट बिताना) जरूर करवाएं। यह उनके मानसिक और शारीरिक ताप को शांत करने की सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक चिकित्सा है।

⚠️ महत्वपूर्ण सूचना (Disclaimer):
यह जानकारी केवल जन-जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए साझा की गई है। यद्यपि इसमें वर्णित उपाय आयुर्वेदिक शास्त्रों पर आधारित हैं, फिर भी प्रत्येक बच्चे की शारीरिक प्रकृति और बीमारी की तीव्रता अलग-अलग हो सकती है। किसी भी औषधि या उपचार को अपनाने से पहले अपने नजदीकी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। आपातकालीन स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

स्वस्थ भविष्य हेतु संकल्पित:
नाड़ी वैद्य राहुल गुप्ता (BAMS, MD)
📍 श्री: विश्व प्रांगण आयुर्वेद चिकित्सालय एवं पंचकर्म केंद्र
हल्द्वानी, उत्तराखंड
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Near Old Shiv Mandir , Mukhani Chauraha
Haldwani
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