16/05/2026
शनि जयंती की शुभकामनाएं
मित्रोँ आj शनि जयँति, शनि अमावस्या का योग पड़ रहा है जो बहुत उत्तम है।
फेसबुक पर भी लोग इसे दुर्लभ सँयोग बता रहे है पर ये नहीँ कि क्योँ? शनि जयँति और अमावस का ही होना दुलर्भ नहीँ है क्योँकि शनि जयँति तो ज्येष्ठ मास की अमावस्या को ही होती है बल्कि इनका शनिवार और रोहिणी नक्षत्र मेँ होना इसे दुर्लभ बनाता है जो कि 2013में हुआ था।
आज का योग भी उन सभी लोगोँ के लिए शनि की शाँति का विशेष अवसर है जो शनि की महादशा, अँतर्दशा, साढेसाती , ढैय्या और जन्मकुण्डली मेँ शनि की खराब स्थिति के कारण दुख और कष्ट भोग रहे हैँ।
मित्रोँ, काफी समय से देख रहा हूँ कि टीवी पर आने वाले प्रायः सभी ज्योतिषी शनि के लिए एक ही मँत्र बता देते हैँ
"ॐ शं शनैश्चराय नमः",
ये मँत्र वाकई बहुत प्रभावशाली है किँतु सबके लिए नहीँ है जिनका शनि अच्छा है उन्हेँ ये मँत्र नहीँ जपना चाहिए ।
कुछ लोग तो शनि को ही ईश्वर बता कर ये मँत्र बता रहे हैँ जो पूर्णतः गलत है।
ॐ शनैश्वराय नमः॥ ❌
कल से टीवी पे कई ज्योतिषी लोगोँ को देखा जो शनि के नाम पर राशिनुसार मँत्र दे रहे है, किंतु उसका आधार क्या है?
✅ वास्तविक स्थिति मेँ आपको अपनी कुंडली मेँ शनि की स्थिति के अनुसार मँत्र जप करना चाहिए।
यदि आपको पता न हो कि आपका शनि कैसा है तो अपने पंडित जी या किसी योग्य ज्योतिषी से मिलकर पता करेँ और नीचे दिये गये मँत्रोँ को अपना कर आप लाभ उठा सकते हैँ।
यदि आपकी कुण्डली मेँ शनि उच्च का है और फायदेमँद है तो ये मँत्र जपेँ
• ॐ शं नो देवीरभिष्टयः आपो भवन्तु पीतये। शं योरभिःस्त्रवन्तु नः।।
यदि आपकी कुण्डली मेँ शनि सम है यानि न अधिक फायदा दे रहा है न नुकसान तो ये मँत्र जपेँ
• ॐ निलान्जनम समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम । छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥
यदि आपकी कुण्डली मेँ शनि नीच का है तो ये मँत्र जपेँ
• ॐ प्राँ प्रीँ प्रौँ सः शनैश्चराय नमः।।
यदि आपकी कुण्डली मेँ शनि उच्च या नीच का होकर कष्टकारी है तो ये मँत्र जपेँ
• ॐ शं शनैश्चराय नमः।।
यदि आप कुण्डली मेँ उच्च या नीच के शनि के कारण व्यापार मेँ नुकसान उठा रहे हैँ या रोग ग्रस्त हैँ तो ये मँत्र जपेँ
• सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्षःशिवप्रियः।मन्दचारः प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मेशनिः॥
यदि दुर्घटना या पारिवारिक कष्ट या अन्य कोई बाधा हो तो ये मँत्र जपेँ
• कोणस्थ पिंगलो ब्रभू कृष्णो रौद्रो दंतको यमः।
सौरिः शनैश्चरो मन्दः पिप्पालोद्तः संस्तुतः॥
एतानि दशनामानी प्रातः रुत्थाय य पठेतः।
शनैश्चर कृता पिडा न कदाचित भविष्यती॥
• दशरथ कृत शनि स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैँ जो अत्यँत प्रभावशाली है और सभी स्थिति में लाभ देता है।
शनि के प्रकोप से आपको सबसे पहले स्वयं आप ही बचा सकते हैं, अच्छे कर्म कर के।
अपने अधीनस्थ लोगों, कर्मचारियों, नौकर आदि से भी अच्छा व्यवहार करें, उनके पैसे न मारें।
जिन लोगों से काम लेते हैं करवाते हैं उनका उत्पीड़न न करें क्योंकि ये बाद में दुर्घटना या गंभीर रोग और दुर्भिक्ष के रूप में प्रकट होते हैं।
भगवान शिव और हनुमान जी की पूजा सेवा भी आपको शनि के कष्टों से बचाती है।
विशेष बात सिर्फ एक दिन की पूजा, एक शनिवार के दीपक जलाने या दान आदि से जीवन भर के पाप नहीं कटेंगे।
जो करें रोज करें या हर शनिवार करें।
शनि की कष्टकारी महादशा, अंतर्दशा, साढ़े साती या ढैया या कुंडली में उसकी स्थिति से जनित कष्ट के लिए शनि की पूजा जप का सबसे अच्छा समय है ब्रह्म मुहूर्त, और ये ऐसे करें कि सूर्योदय से आधा घंटा या 20 मिनट पहले पूर्ण हो जाए।
उसके बाद है संध्या काल में सूर्यास्त के बाद।
अन्य किसी जानकारी , समस्या समाधान एवं कुंडली विश्लेषण हेतु सम्पर्क कर सकते हैँ।
।।जय श्री राम।।
8909521616