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पंचम बड़े मंगल की शुभकामनाएं मारुतिकवचम् ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकालानलप्रभाप्रज्वलनाय ।प्रतापवज्रदेहाय । अञ्ज...
02/06/2026

पंचम बड़े मंगल की शुभकामनाएं

मारुतिकवचम्

ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकालानलप्रभाप्रज्वलनाय ।
प्रतापवज्रदेहाय । अञ्जनागर्भसम्भूताय ।
प्रकटविक्रमवीरदैत्यदानवयक्षरक्षोगणग्रहबन्धनाय ।
भूतग्रहबन्धनाय । प्रेतग्रहबन्धनाय । पिशाचग्रहबन्धनाय ।
शाकिनीडाकिनीग्रहबन्धनाय । काकिनीकामिनीग्रहबन्धनाय ।
ब्रह्मग्रहबन्धनाय । ब्रह्मराक्षसग्रहबन्धनाय । चोरग्रहबन्धनाय ।
मारीग्रहबन्धनाय । एहि एहि । आगच्छ आगच्छ । आवेशय आवेशय ।
मम हृदये प्रवेशय प्रवेशय । स्फुर स्फुर । प्रस्फुर प्रस्फुर ।
सत्यं कथय । व्याघ्रमुखबन्धन । सर्पमुखबन्धन ।
राजमुखबन्धन । नारीमुखबन्धन । सभामुखवन्धन ।
शत्रुमुखबन्धन । सर्वमुखबन्धन । लङ्काप्रासादभञ्जन ।
अमुकं मे वशमानय । क्लीं क्लीं क्लीं ह्रीं श्रीं श्रीं राजानं वशमानय ।
श्रीं ह्रीं क्लीं स्त्रिय आकर्षय आकर्षय शत्रून्मर्दय मर्दय मारय मारय
चूर्णय चूर्णय
खे खे श्रीरामचन्द्राज्ञया मम कार्यसिद्धिं कुरु कुरु ।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् स्वाहा ।
विचित्रवीर हनूमन् मम सर्वशत्रून् भस्मी कुरु कुरु ।
हन हन हुं फट्स्वाहा ।
(एकादशशतवारं जपित्वा सर्वशत्रून् वशमानयति नान्यथा इति ॥)

इस मारुति कवच के 11 पाठ करने से शत्रु भी वश में हो जाता है।

।।जय श्री राम।।

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।।जय श्री राम।।

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चौथे बड़े मंगल की शुभकामनाएंमनोकामना पूर्ति मन्त्र( रक्षाहेतु, रोग, ऋण, शत्रु, भय निवारण हेतु)महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्...
26/05/2026

चौथे बड़े मंगल की शुभकामनाएं

मनोकामना पूर्ति मन्त्र
( रक्षाहेतु, रोग, ऋण, शत्रु, भय निवारण हेतु)

महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते।
हारिणे वज्र देहायचोलंग्घितमहाव्यये।।
ऊँ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय
सर्वरोग हराय सर्ववशीकराय रामदूताय स्वाहा
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा।

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22/05/2026

आकस्मिक धन प्राप्ति प्रयोग

#सट्टा #जुआं #लॉटरी #शेयर_मार्केट

2017 से  #शोधित_गोरोचन लोगों को उपलब्ध करवा रहा हूं, मेरे पास हर 2 या 3 महीने में पश्चिम बांग्लादेश से फोन/वॉट्सएप पे मै...
21/05/2026

2017 से #शोधित_गोरोचन लोगों को उपलब्ध करवा रहा हूं,

मेरे पास हर 2 या 3 महीने में पश्चिम बांग्लादेश से फोन/वॉट्सएप पे मैसेज या फोटो आता है कि हमारे पास है #गोरोचन है लेलो,

कभी नहीं लिया, 2 बार झारखंड और 1 बार MP से भी आया, सभी विशेष गौ मांस प्रेमी ही थे।

इतनी गारंटी दे सकता हूं कि मेरे द्वारा उपलब्ध कराया गया #गोरोचन किसी जबरन काटी हुई गाय से नहीं निकला है और विशुद्ध आयुर्वेदिक पद्धति से शोधित किया गया है जिसे आप पूजन से लेकर किसी भी कार्य में सीधे प्रयोग कर सकते हैं।

गोरोचन के नाम पे अधिकतर लोग गोरोचन के स्थान पे ेजोअर देते हैं जो कि गोरोचन है ही नहीं।

इसके विषय में मैं वीडियो के माध्यम से भी बता चुका हूं।

लिखने का कारण पश्चिम बांग्लादेश में गौ हत्या/कुर्बानी पे लगाई रोक का 4 दिनों से भीषण विरोध है।

गोरोचन और बेजोअर के बारे में आप नीचे दिए वीडियो लिंक से जान सकते हैं।

असली शुद्ध एवं शोधित गोरोचन की पहचान :
https://youtu.be/1PNp7EVwIjk

सर से निकलने वाला नकली गोरोचन यानी बेजोअर:
https://youtu.be/GpvhuKRz8sw

।।जय श्री राम।।

Original and pure gorochan or golochan or gaulochan, purified with ...

अति दुर्लभ 1 मुखी गोल दाना रुद्राक्ष
20/05/2026

अति दुर्लभ 1 मुखी गोल दाना रुद्राक्ष

सभी मित्रों को तीसरे बड़े मंगल की शुभकामनाएं  विशेष:  #श्रीपञ्चमुख_हनुमत्_हृदयम्_स्तोत्रम   ॥  श्रीगणेशाय नमः ॥  ॥ श्रीस...
19/05/2026

सभी मित्रों को तीसरे बड़े मंगल की शुभकामनाएं
विशेष: #श्रीपञ्चमुख_हनुमत्_हृदयम्_स्तोत्रम
॥ श्रीगणेशाय नमः ॥

॥ श्रीसीतारामचन्द्राभ्यां नमः ॥

ॐ अस्य श्रीपञ्चवक्त्र हनुमत् हृदयस्तोत्रमन्त्रस्य
भगवान् श्रीरामचन्द्र ऋषिः ।
अनुष्टुप् छन्दः ।
श्रीपञ्चवक्त्र हनुमान् देवता । ॐ बीजम् ।
रुद्रमूर्तये इति शक्तिः । स्वाहा कीलकम् ।
श्रीपञ्चवक्त्र हनुमद्देवता प्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
इति ऋष्यादि न्यासः ॥

ॐ ह्रां अञ्जनासुताय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रीं रुद्रमूर्तये तर्जनीभ्यां नमः ।
ॐ ह्रूं वायुपुत्राय मध्यमाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रैं अग्निगर्भाय अनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रौं रामदूताय कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रः पञ्चवक्त्रहनुमते करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ।
इति करन्यासः ॥

ॐ ह्रां अञ्जनासुताय हृदयाय नमः ।
ॐ ह्रीं रुद्रमूर्तये शिरसे स्वाहा ।
ॐ ह्रूं वायुपुत्राय शिखायै वषट् ।
ॐ ह्रैं अग्निगर्भाय कवचाय हुम् ।
ॐ ह्रौं रामदूताय नेत्रत्रयाय वौषट् ।
ॐ ह्रः पञ्चवक्त्रहनुमते अस्त्राय फट् ।
इति हृदयादि षडङ्गन्यासः ।
ॐ भूर्भुवः स्वरोमिति दिग्बन्धः ॥

अथ ध्यानम् ।
ध्यायेद्बालदिवाकरद्युतिनिभं देवारिदर्पापहं
देवेन्द्रप्रमुखैः प्रशस्तयशसं देदीप्यमानं ऋचा ॥

सुग्रीवादिसमस्तवानरयुतं सुव्यक्ततत्त्वप्रियं
संरक्तारुणलोचनं पवनजं पीताम्बरालङ्कृतम् ॥

इति ध्यानम् ॥

ॐ नमो वायुपुत्राय पञ्चवक्त्राय ते नमः ।
नमोऽस्तु दीर्घबालाय राक्षसान्तकराय च ॥ १॥

वज्रदेह नमस्तुभ्यं शताननमदापह ।
सीतासन्तोषकरण नमो राघवकिङ्कर ॥ २॥

सृष्टिप्रवर्तक नमो महास्थित नमो नमः ।
कलाकाष्ठस्वरूपाय माससंवत्सरात्मक ॥ ३॥

नमस्ते ब्रह्मरूपाय शिवरूपाय ते नमः ।
नमो विष्णुस्वरूपाय सूर्यरूपाय ते नमः ॥ ४॥

नमो वह्निस्वरूपाय नमो गगनचारिणे ।
सर्वरम्भावनचर अशोकवननाशक ॥ ५॥

नमो कैलासनिलय मलयाचल संश्रय ।
नमो रावणनाशाय इन्द्रजिद्वधकारिणे ॥ ६॥

महादेवात्मक नमो नमो वायुतनूद्भव ।
नमः सुग्रीवसचिव सीतासन्तोषकारण ॥ ७॥

समुद्रोल्लङ्घन नमो सौमित्रेः प्राणदायक ।
महावीर नमस्तुभ्यं दीर्घबाहो नमोनमः ॥ ८॥

दीर्घबाल नमस्तुभ्यं वज्रदेह नमो नमः ।
छायाग्रहहर नमो वरसौम्यमुखेक्षण ॥ ९॥

सर्वदेवसुसंसेव्य मुनिसङ्घनमस्कृत ।
अर्जुनध्वजसंवास कृष्णार्जुनसुपूजित ॥ १०॥

धर्मार्थकाममोक्षाख्य पुरुषार्थप्रवर्तक ।
ब्रह्मास्त्रबन्द्य भगवन् आहतासुरनायक ॥ ११॥

भक्तकल्पमहाभुज भूतबेतालनाशक ।
दुष्टग्रहहरानन्त वासुदेव नमोऽस्तुते ॥ १२॥

श्रीरामकार्ये चतुर पार्वतीगर्भसम्भव ।
नमः पम्पावनचर ऋष्यमूककृतालय ॥ १३॥

धान्यमालीशापहर कालनेमिनिबर्हण ।
सुवर्चलाप्राणनाथ रामचन्द्रपरायण ॥ १४॥

नमो वर्गस्वरूपाय वर्णनीयगुणोदय ।
वरिष्ठाय नमस्तुभ्यं वेदरूप नमो नमः ।
नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥ १५॥

इति ते कथितं देवि हृदयं श्रीहनूमतः ।
सर्वसम्पत्करं पुण्यं सर्वसौख्यविवर्धनम् ॥ १६॥

दुष्टभूतग्रहहरं क्षयापस्मारनाशनम् ॥ १७॥

यस्त्वात्मनियमो भक्त्या वायुसूनोः सुमङ्गलम् ।
हृदयं पठते नित्यं स ब्रह्मसदृशो भवेत् ॥ १८॥

अजप्तं हृदयं य इमं मन्त्रं जपति मानवः ।
स दुःखं शीघ्रमाप्नोति मन्त्रसिद्धिर्न जायते ॥ १९॥

सत्यं सत्यं पुनः सत्यं मन्त्रसिद्धिकरं परम् ।
इत्थं च कथितं पूर्वं साम्बेन स्वप्रियां प्रति ॥ २०॥

महर्षेर्गौतमात्पूर्वं मया प्राप्तमिदं मुने ।
तन्मया प्रहितं सर्वं शिष्यवात्सल्यकारणात् ॥ २१॥

इति श्रीपराशरसंहितान्तर्गते श्रीपराशरमैत्रेयसंवादे
श्रीपञ्चमुखहनुमत् हृदयस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

अन्य किसी जानकारी, समस्या समाधान एवम कुंडली विश्लेषण हेतु सम्पर्क कर सकते हैं।

।।जय श्री राम।।

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शनि जयंती की शुभकामनाएं मित्रोँ आj शनि जयँति, शनि अमावस्या का योग पड़ रहा है जो बहुत  उत्तम है। फेसबुक पर भी लोग इसे दुर्...
16/05/2026

शनि जयंती की शुभकामनाएं

मित्रोँ आj शनि जयँति, शनि अमावस्या का योग पड़ रहा है जो बहुत उत्तम है।

फेसबुक पर भी लोग इसे दुर्लभ सँयोग बता रहे है पर ये नहीँ कि क्योँ? शनि जयँति और अमावस का ही होना दुलर्भ नहीँ है क्योँकि शनि जयँति तो ज्येष्ठ मास की अमावस्या को ही होती है बल्कि इनका शनिवार और रोहिणी नक्षत्र मेँ होना इसे दुर्लभ बनाता है जो कि 2013में हुआ था।

आज का योग भी उन सभी लोगोँ के लिए शनि की शाँति का विशेष अवसर है जो शनि की महादशा, अँतर्दशा, साढेसाती , ढैय्या और जन्मकुण्डली मेँ शनि की खराब स्थिति के कारण दुख और कष्ट भोग रहे हैँ।

मित्रोँ, काफी समय से देख रहा हूँ कि टीवी पर आने वाले प्रायः सभी ज्योतिषी शनि के लिए एक ही मँत्र बता देते हैँ

"ॐ शं शनैश्चराय नमः",

ये मँत्र वाकई बहुत प्रभावशाली है किँतु सबके लिए नहीँ है जिनका शनि अच्छा है उन्हेँ ये मँत्र नहीँ जपना चाहिए ।

कुछ लोग तो शनि को ही ईश्वर बता कर ये मँत्र बता रहे हैँ जो पूर्णतः गलत है।

ॐ शनैश्वराय नमः॥ ❌

कल से टीवी पे कई ज्योतिषी लोगोँ को देखा जो शनि के नाम पर राशिनुसार मँत्र दे रहे है, किंतु उसका आधार क्या है?

✅ वास्तविक स्थिति मेँ आपको अपनी कुंडली मेँ शनि की स्थिति के अनुसार मँत्र जप करना चाहिए।

यदि आपको पता न हो कि आपका शनि कैसा है तो अपने पंडित जी या किसी योग्य ज्योतिषी से मिलकर पता करेँ और नीचे दिये गये मँत्रोँ को अपना कर आप लाभ उठा सकते हैँ।

यदि आपकी कुण्डली मेँ शनि उच्च का है और फायदेमँद है तो ये मँत्र जपेँ

• ॐ शं नो देवीरभिष्टयः आपो भवन्तु पीतये। शं योरभिःस्त्रवन्तु नः।।

यदि आपकी कुण्डली मेँ शनि सम है यानि न अधिक फायदा दे रहा है न नुकसान तो ये मँत्र जपेँ

• ॐ निलान्जनम समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम । छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥

यदि आपकी कुण्डली मेँ शनि नीच का है तो ये मँत्र जपेँ

• ॐ प्राँ प्रीँ प्रौँ सः शनैश्चराय नमः।।

यदि आपकी कुण्डली मेँ शनि उच्च या नीच का होकर कष्टकारी है तो ये मँत्र जपेँ

• ॐ शं शनैश्चराय नमः।।

यदि आप कुण्डली मेँ उच्च या नीच के शनि के कारण व्यापार मेँ नुकसान उठा रहे हैँ या रोग ग्रस्त हैँ तो ये मँत्र जपेँ

• सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्षःशिवप्रियः।मन्दचारः प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मेशनिः॥

यदि दुर्घटना या पारिवारिक कष्ट या अन्य कोई बाधा हो तो ये मँत्र जपेँ

• कोणस्थ पिंगलो ब्रभू कृष्णो रौद्रो दंतको यमः।
सौरिः शनैश्चरो मन्दः पिप्पालोद्तः संस्तुतः॥
एतानि दशनामानी प्रातः रुत्थाय य पठेतः।
शनैश्चर कृता पिडा न कदाचित भविष्यती॥

• दशरथ कृत शनि स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैँ जो अत्यँत प्रभावशाली है और सभी स्थिति में लाभ देता है।

शनि के प्रकोप से आपको सबसे पहले स्वयं आप ही बचा सकते हैं, अच्छे कर्म कर के।

अपने अधीनस्थ लोगों, कर्मचारियों, नौकर आदि से भी अच्छा व्यवहार करें, उनके पैसे न मारें।

जिन लोगों से काम लेते हैं करवाते हैं उनका उत्पीड़न न करें क्योंकि ये बाद में दुर्घटना या गंभीर रोग और दुर्भिक्ष के रूप में प्रकट होते हैं।

भगवान शिव और हनुमान जी की पूजा सेवा भी आपको शनि के कष्टों से बचाती है।

विशेष बात सिर्फ एक दिन की पूजा, एक शनिवार के दीपक जलाने या दान आदि से जीवन भर के पाप नहीं कटेंगे।
जो करें रोज करें या हर शनिवार करें।

शनि की कष्टकारी महादशा, अंतर्दशा, साढ़े साती या ढैया या कुंडली में उसकी स्थिति से जनित कष्ट के लिए शनि की पूजा जप का सबसे अच्छा समय है ब्रह्म मुहूर्त, और ये ऐसे करें कि सूर्योदय से आधा घंटा या 20 मिनट पहले पूर्ण हो जाए।

उसके बाद है संध्या काल में सूर्यास्त के बाद।

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ज्येष्ठ मास दूसरे बड़े मंगल की शुभकामनाएं : श्री आञ्जनेय स्तोत्रम्इसके पाठ से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है और उसक...
12/05/2026

ज्येष्ठ मास दूसरे बड़े मंगल की शुभकामनाएं : श्री आञ्जनेय स्तोत्रम्

इसके पाठ से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है और उसके सभी कार्य / कामनाएं अतिशीघ्र सिद्ध होते हैं

(उमामहेश्वरसंवादात्मकम्)

शृणु देवि प्रवक्ष्यामि स्तोत्रं सर्वभयापहम् ।
सर्वकामप्रदं नॄणां हनूमत्स्तोत्रमुत्तमम्॥ १ ॥

तप्तकाञ्चनसंकाशं नानारत्नविभूषितम्।
उद्यत्बालार्कवदनं त्रिनेत्रं कुण्डलोज्ज्वलम् ॥ २ ॥

मौञ्जीकौपीनसंयुक्तं हेमयज्ञोपवीतिनम्।
पिङ्गलाक्षं महाकायं टङ्कशैलेन्द्रधारिणम्॥ ३ ॥

शिखानिक्षिप्तवालाग्रं मेरुशैलाग्रसंस्थितम्।
मूर्तित्रयात्मकं पीनं महावीरं महाहनुम् ॥ ४ ॥

हनुमन्तं वायुपुत्रं नमामि ब्रह्मचारिणम् ।
त्रिमूर्त्यात्मकमात्मस्थं जपाकुसुमसन्निभम् ॥ ५ ॥

नानाभूषणसंयुक्तं आञ्जनेयं नमाम्यहम् ।
पञ्चाक्षरस्थितं देवं नीलनीरद सन्निभम् ॥ ६ ॥

पूजितं सर्वदेवैश्च राक्षसान्तं नमाम्यहम् ।
अचलद्युतिसङ्काशं सर्वालङ्कारभूषितम्॥ ७ ॥

षडक्षरस्थितं देवं नमामि कपिनायकम्।
तप्तस्वर्णमयं देवं हरिद्राभं सुरार्चितम् ॥ ८ ॥

सुन्दरांसाब्जनयनं त्रिनेत्रं तं नमाम्यहम् ।
अष्टाक्षराधिपं देवं हीरवर्णसमुज्ज्वलम् ॥ ९ ॥

नमामि जनतावन्द्यं लङ्काप्रासादभञ्जनम्।
अतसीपुष्पसङ्काशं दशवर्णात्मकं विभुम् ॥ १० ॥

जटाधरं चतुर्बाहुं नमामि कपिनायकम्।
द्वादशाक्षरमन्त्रस्य नायकं कुन्तधारिणम् ॥ ११ ॥

अङ्कुशं च दधानं तं कपिवीरं नमाम्यहम् ।
त्रयोदशाक्षरयुतं सीतादुःखनिवारणम् ॥ १२ ॥

पीतवर्णं लसत्कायं भजे सुग्रीवमन्त्रिणम्।
मालामन्त्रात्मकं देवं चित्रवर्णं चतुर्भुजम् ॥ १३ ॥

पाशाङ्कुशाभयकरं धृतटङ्कं नमाम्यहम्।
सुरासुरगणैः सर्वैः संस्तुतं प्रणमाम्यहम् ॥ १४ ॥

एवं ध्यायन्नरो नित्यं सर्वपापैः प्रमुच्यते ।
प्राप्नोति चिन्तितं कार्यं शीघ्रमेव न संशयः ॥ १५ ॥

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सभी मित्रों को ज्येष्ठ मास प्रथम बड़े मंगल की शुभकामनाएंश्री हनुमत् ध्यानम्रामेष्टमित्रं जगदेकवीरंप्लवंगराजेन्द्रकृत प्र...
05/05/2026

सभी मित्रों को ज्येष्ठ मास प्रथम बड़े मंगल की शुभकामनाएं

श्री हनुमत् ध्यानम्

रामेष्टमित्रं जगदेकवीरं

प्लवंगराजेन्द्रकृत प्रणामम् ।

सुमेरूशृंगागमचिन्त्यामाद्यं

हृदि स्मेरहं हनुमंतमीड्यम् ॥

सर्वकार्य सिद्धि दायक हनुमान्माला मन्त्र -

श्री हनुमान जी के सम्मुख इस मन्त्र के ५१ पाठ करे और भोज पत्र पर इस मन्त्र को लिखकर पास में रखले तो सर्व कार्यों में सिद्धि मिलती है।

** ॐ वज्र काय वज्रतुण्ड कपिल पिंगल ऊर्ध्वकेश महाबल रक्तमुख तडिज्जह्व महारौद्र दंष्ट्रोत्कट कहहकरालिने महादृढ़प्रहारिन लंकेश्वरवधाय महासेतुबंध महाशैलप्रवाह गगनचर एह्येहिं भगवन्महाबल पराक्रम भैरवाज्ञापय ऐयेहि महारौद्र दीर्घपुच्छेन वेष्टय वैरिणं भंजय भंजय हुँ फट् ॥

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30/04/2026

श्री नृसिंह जयंती की शुभकामनाएं

श्रीनृसिंहमालामन्त्रः

श्रीगणेशाय नमः ।
अस्य श्रीनृसिंहमालामन्त्रस्य नारदभगवान् ऋषिः ।
अनुष्टुप्छन्दः । श्रीनृसिंहदेवता । आं बीजम् ।
लं शक्तिः । मेरुकीलकम् ।
श्रीनृसिंहप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ॥

ॐ नमो नृसिंहाय ज्वालामुखाग्निनेत्राय
शङ्खचक्रगदाप्रहस्ताय । योगरूपाय
हिरण्यकशिपुच्छेदनान्त्रमालाविभूषणाय
हन हन दह दह पच पच रक्ष वो
नृसिंहाय पूर्वदिशां बन्ध बन्ध
रौद्ररभसिंहाय दक्षिणदिशां बन्ध बन्ध (रौद्रनृसिंहाय)
पावननृसिंहाय पश्चिमदिशां बन्ध बन्ध
दारुणनृसिंहाय उत्तरदिशां बन्ध बन्ध
ज्वालानृसिंहाय आकाशदिशां बन्ध बन्ध
लक्ष्मीनृसिंहाय पातालदिशां बन्ध बन्ध
कः कः कम्पय कम्पय आवेशय आवेशय
अवतारय अवतारय शीघ्रं शीघ्रम् ॥

ॐ नमो नारसिंहाय नवकोटिदेवग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय अष्टकोटिगन्धर्वग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय सप्तकोटिकिन्नरग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय षट्कोटिशाकिनीग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय पञ्चकोटिपन्नगग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय चतुष्कोटिब्रह्मराक्षसग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय द्विकोटिदनुजग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय एककोटिग्रहोच्चाटनाय ।
ॐ नमो नारसिंहाय अरिमुरिचोरराक्षसजितिः वारं वारम् ।
श्रीभय चोरभय व्याधिभय
सकलभयकण्टकान् विध्वंसय विध्वंसय ।
शरणागत वज्रपञ्जराय विश्वहृदयाय
प्रह्लादवरदाय क्ष्रौं श्रीं नृसिंहाय स्वाहा ।
ॐ नमो नारसिंहाय मुद्गलशङ्खचक्रगदापद्महस्ताय
नीलप्रभाङ्गवर्णाय भीमाय भीषणाय
ज्वालाकरालभयभाषित
श्रीनृसिंहहिरण्यकशिपुवक्षस्थलविदारणाय
जय जय एहि एहि भगवन् भगवन् गरुडध्वज
गरुडध्वज मम सर्वोपद्रवं वज्रदेहेन चूर्णय
चूर्णय आपत्समुद्रं शोषय शोषय ।
असुरगन्धर्वयक्षब्रह्मराक्षसभूतप्रेतपिशाचादीन्
विध्वंसय विध्वंसय । पूर्वाखिलं मूलय मूलय ।
प्रतिच्छां स्तम्भय परमन्त्र परयन्त्र परतन्त्र
परकष्टं छिन्दि छिन्दि भिन्दि भिन्दि हुं फट् स्वाहा ।

इति श्रीअथर्वणवेदोक्त नृसिंहमालामन्त्रः समाप्तः ॥

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