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गर्मियों में खुजली, रैशेज और Skin Infection से कैसे बचें?
08/06/2026

गर्मियों में खुजली, रैशेज और Skin Infection से कैसे बचें?














08/06/2026

नाभि में तेल लगाना: पारंपरिक मान्यताएँ और सावधानियाँ

नाभि में तेल लगाने की परंपरा भारत में लंबे समय से प्रचलित है और आयुर्वेदिक परंपराओं में इसका उल्लेख मिलता है। नाभि को शरीर का एक महत्वपूर्ण भाग माना जाता है, इसलिए कई लोग अपनी व्यक्तिगत देखभाल की दिनचर्या में इस अभ्यास को शामिल करते हैं।

कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नाभि में तेल लगाने से त्वचा को नमी बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। कई लोग इसे रूखी त्वचा और फटे होंठों जैसी समस्याओं में उपयोग करते हैं। हालांकि, इन लाभों के समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

इसी प्रकार, कुछ लोगों का मानना है कि नाभि में तेल लगाने से आराम और ताजगी का अनुभव हो सकता है। पाचन, मासिक धर्म संबंधी असुविधा, आंखों के स्वास्थ्य या बालों की गुणवत्ता पर इसके प्रभावों के बारे में विभिन्न पारंपरिक मान्यताएँ प्रचलित हैं, लेकिन इन दावों की पुष्टि के लिए और अधिक वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।

कौन सा तेल उपयोग किया जा सकता है?

• त्वचा की देखभाल के लिए: नारियल तेल, बादाम तेल या देसी घी का उपयोग कुछ लोग करते हैं।

• सामान्य मालिश या व्यक्तिगत देखभाल के लिए: सरसों का तेल या जैतून का तेल उपयोग किया जाता है।

• नीम का तेल कुछ लोग त्वचा की देखभाल के लिए चुनते हैं, लेकिन इसका उपयोग करने से पहले त्वचा की संवेदनशीलता की जांच करना उचित है।

सावधानियाँ

• किसी भी तेल का उपयोग करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपको उससे एलर्जी न हो।

• नाभि क्षेत्र को साफ और स्वच्छ रखें।

• यदि त्वचा पर जलन, खुजली या कोई अन्य परेशानी हो तो उपयोग बंद कर दें।

• शिशुओं और छोटे बच्चों पर किसी भी प्रकार का तेल उपयोग करने से पहले योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें।

• यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है या आप किसी चिकित्सीय उपचार के अंतर्गत हैं, तो किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और पारंपरिक मान्यताओं के संदर्भ में साझा की गई है। यह किसी बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है।

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मधुमेह (Diabetes) रोगी के लिए संतुलित आहार

मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर रक्त में मौजूद ग्लूकोज (शुगर) को सही तरीके से नियंत्रित नहीं कर पाता। मधुमेह के मुख्य प्रकार टाइप 1 और टाइप 2 होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए आहार और उपचार संबंधी निर्णय अपने चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह से ही लें।

मधुमेह में संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और चिकित्सकीय परामर्श महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आहार में फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना लाभदायक माना जाता है। वहीं अधिक चीनी, अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और अधिक वसा वाले भोजन का सेवन सीमित रखना चाहिए।

मधुमेह रोगी के लिए उपयुक्त फल

व्यक्ति की आवश्यकता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सीमित मात्रा में निम्न फलों का सेवन किया जा सकता है:

• सेब
• अमरूद
• जामुन
• नाशपाती
• स्ट्रॉबेरी
• पपीता
• अनार
• खरबूजा
• तरबूज
• चेरी

फलों का सेवन संतुलित मात्रा में करें और यदि आवश्यक हो तो अपने चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ से उचित मात्रा के बारे में सलाह लें।

मधुमेह रोगी के लिए उपयुक्त सब्जियाँ

हरी पत्तेदार और फाइबर युक्त सब्जियाँ सामान्यतः आहार का अच्छा हिस्सा मानी जाती हैं, जैसे:

• खीरा
• गाजर
• मूली
• गोभी
• शिमला मिर्च
• ब्रोकोली
• फ्रेंच बीन्स

उच्च स्टार्च वाली सब्जियों का सेवन मात्रा नियंत्रित करके किया जा सकता है, जैसा कि आपके आहार विशेषज्ञ द्वारा सलाह दी जाए।

डेयरी उत्पाद

कम वसा वाले डेयरी विकल्पों का चयन किया जा सकता है, जैसे:

• लो-फैट दूध
• छाछ
• लो-फैट दही
• सोया मिल्क (यदि उपयुक्त हो)

फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ

फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ रक्त शर्करा प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं:

• अंकुरित अनाज
• साबुत अनाज
• ताजी सब्जियाँ
• सलाद

उदाहरण के रूप में एक संतुलित दैनिक आहार योजना

सुबह खाली पेट:
5 भिगोए हुए बादाम और 1 अखरोट

नाश्ता:
• ओट्स या दलिया
• अंकुरित अनाज
• सब्जियों के साथ बना नाश्ता

मध्याह्न:
• एक उपयुक्त फल

दोपहर का भोजन:
• दाल
• रोटी
• सलाद
• मौसमी सब्जी

शाम का नाश्ता:
• भुना चना
• मूंगफली (सीमित मात्रा में)
• अंकुरित अनाज

रात्रि भोजन:
• रोटी
• दाल या अन्य प्रोटीन स्रोत
• सब्जी
• सलाद

महत्वपूर्ण सूचना

यह जानकारी केवल सामान्य शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। मधुमेह से संबंधित किसी भी आहार, दवा या जीवनशैली परिवर्तन से पहले अपने चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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आयुर्वेद के अनुसार जल पीने के 10 पारंपरिक नियम

आयुर्वेद में जल सेवन को दैनिक दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण भाग माना गया है। नीचे दिए गए बिंदु पारंपरिक आयुर्वेदिक दृष्टिकोण पर आधारित हैं:

1. प्यास लगने पर पानी पिएँ और अपनी आवश्यकता के अनुसार जल का सेवन करें।

2. आरामदायक एवं स्थिर अवस्था में बैठकर पानी पीना बेहतर माना जाता है।

3. पानी को धीरे-धीरे और छोटे-छोटे घूंटों में पीने की सलाह दी जाती है।

4. सामान्य तापमान या हल्का गुनगुना पानी कई लोगों के लिए अधिक सहज हो सकता है।

5. भोजन के दौरान आवश्यकता अनुसार सीमित मात्रा में पानी लें।

6. भोजन के तुरंत बाद अधिक मात्रा में पानी पीने के बजाय कुछ समय का अंतर रखना पारंपरिक रूप से उचित माना गया है।

7. पानी को स्वच्छ एवं सुरक्षित बर्तनों में संग्रहित करें।

8. मौसम, गतिविधि स्तर और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार पानी की मात्रा में बदलाव हो सकता है।

9. सुबह और शाम हल्का गुनगुना पानी पीना कुछ लोगों की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा होता है।

10. पानी पीते समय शांत मन और आरामदायक अवस्था बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

नोट: यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से साझा की जा रही है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या विशेष आवश्यकता के लिए योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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स्वस्थ होने की आयुर्वेदिक परिभाषा

"समदोषः समाग्निश्च समधातु मलक्रियः।
प्रसन्नात्मेन्द्रियमनः स्वस्थ इत्यभिधीयते॥"

यह आयुर्वेद का एक प्रसिद्ध सूत्र है, जिसका उल्लेख चरक संहिता में मिलता है। इस सूत्र के अनुसार, स्वास्थ्य को केवल रोग की अनुपस्थिति के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि शरीर और मन की संतुलित अवस्था के रूप में समझा जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति को स्वस्थ तब माना जाता है जब—

• वात, पित्त और कफ संतुलित हों।
• पाचन एवं चयापचय संबंधी क्रियाएँ संतुलित रूप से कार्य कर रही हों।
• शरीर की विभिन्न धातुएँ उचित स्थिति में हों।
• मल, मूत्र एवं स्वेद जैसी प्राकृतिक क्रियाएँ सामान्य रूप से हो रही हों।
• मन, इन्द्रियाँ और आत्मिक स्थिति प्रसन्न एवं संतुलित हों।

आयुर्वेद स्वास्थ्य को एक समग्र दृष्टिकोण से देखता है, जिसमें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन को महत्वपूर्ण माना गया है।

यह जानकारी आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित सिद्धांतों पर आधारित है और केवल शैक्षिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से साझा की जा रही है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

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Do you want a natural way to stay cool, energized, and healthy during the summer? In this video, Dr. (Vaid) Deepak Kumar from Adarsh Ayurvedic Pharmacy explains the amazing health benefits of Gond Katira (Tragacanth Gum) and why it is considered one of the best natural cooling foods for hot weather.

Learn how Gond Katira can be included in your daily diet and why it has been traditionally valued for its nourishing properties.

🔹 Topics Covered in This Video:
✅ Benefits of Gond Katira for overall wellness
✅ Rich source of calcium, magnesium, potassium, and natural nutrients
✅ Supports strong bones and an active lifestyle
✅ Helps maintain energy levels and reduce tiredness
✅ Supports natural immunity and general well-being
✅ Best summer drink to help keep the body cool and refreshed
✅ Easy ways to consume Gond Katira at home

🌿 Why Gond Katira is Popular in Summer
✔️ Naturally cooling and refreshing
✔️ Easy to add to drinks and desserts
✔️ Traditionally used as a nourishing food ingredient
✔️ Suitable for hot weather wellness routines

🎥 Watch the full video to discover how Gond Katira can become a healthy addition to your summer diet and daily wellness routine.

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