Dr Neelu Kumari

Dr Neelu Kumari Namaskar � this page is meant for health related informations .

20/06/2026

डिटॉक्स टी, ग्रीन टी, ब्लड प्यूरीफायर टॉनिक, डिटॉक्स जूस।
इन सब पर पैसे खर्च करने से पहले एक बात समझ लीजिए।
हमारा लिवर, किडनी, आंत, त्वचा और फेफड़े — ये सब मिलकर दिन-रात आपके शरीर को साफ रखते हैं। इन्हें किसी चाय, जूस या टॉनिक की मदद की ज़रूरत नहीं होती। हर सेकंड, मुफ्त डिटॉक्स होता है।
जो "डिटॉक्स" उत्पाद हम खरीदते हैं, उनमें से कुछ वास्तव में जुलाब (लैक्सेटिव) होते हैं। हल्का इसलिए लगता है क्योंकि शरीर से पानी और खनिज निकल जाते हैं, टॉक्सिन नहीं। और "खून साफ करने वाले" टॉनिक? खून कभी गंदा होता ही नहीं। खून में संक्रमण हो जाए तो उसे सेप्टीसीमिया कहते हैं। वह सफ़ी पीने से ठीक नहीं होता।
तो असली डिटॉक्स कहाँ मिलता है?
हमारी रसोई में। एक संतुलित थाली में — दाल, सब्ज़ी, पनीर, दही, सलाद और थोड़ी-सी रोटी। अच्छी नींद में। पानी पीने में। नियमित व्यायाम में। अपने शरीर को उसका काम करने देने में।
असली डिटॉक्स रसोई में है, फ़ार्मेसी में नहीं।
इसे अपने उन दोस्तों और परिवार वालों के साथ साझा कीजिए जो हर महीने डिटॉक्स उत्पादों पर पैसे खर्च करते हैं।

12/06/2026

मैं एक डॉक्टर हूँ और हाल ही में एक वायरल क्लिप में एक मेडिकल स्टूडेंट के द्वारा कैडेवर पर असम्माननीय शब्द सुनकर, आँखों के सामने सालों पहले के मेडिकल कॉलेज के अपने फर्स्ट ईयर के दृश्य तैर गए!

एनाटॉमी की तीन-चार घण्टे की क्लास जब डिसेक्शन हॉल में शुरू हुई थी, तब हर किसी का अनुभव अलग रहा होगा; जैसे मेरी एक बैचमेट कैडेवर देखते ही बेहोश हो कर गिर गई (आज वो बढ़िया सर्जन है)।

मेरा अनुभव पहली बार यहाँ लिख रही हूँ। जब मैंने पहली बार कैडेवर देखा तो मुझे बहुत अनकम्फर्टेबल लगा। सिर तो बहुत चकराया, लेकिन उल्टी नहीं आई और उसके बाद मेरे मन में जीवन और मृत्यु को लेकर अनेक विचार उठने लगे। मैं यह सोच रही थी कि यह व्यक्ति कौन रहा होगा, इसका जीवन कैसा रहा होगा, इसके अपने कौन रहे होंगे, क्या इसने भी अपने भविष्य के सपने देखे होंगे, क्या इसे पता रहा होगा कि एक दिन इसकी बॉडी मेडिकल छात्रों को पढ़ाएगी!

फर्स्ट ईयर में तो सेकंड ईयर के सामने सहमे रहते थे, जब सेकंड ईयर में आए तो इसे अपने प्रशिक्षण का हिस्सा मान ही चुके थे क्योंकि कोई ऑप्शन था ही नहीं!

मेरे ग्रुप में ऐसा मज़ाक़ कभी नहीं हुआ। कुछ लोग हँसते थे लेकिन क्यों हँसते थे, मुझे नहीं पता था। मैं जीवन की नश्वरता के बारे में अक़्सर ही सोचती थी और रात को कविताएँ भी लिखती थी। होस्टल में घर की याद आती रहती थी।

आज भी प्रकृति जो देती है, उसके प्रति कृतज्ञ रहती हूँ! जीवन के प्रति हर किसी का अलग दृष्टिकोण होता है l आज भी सोचती हूँ कि एक दिन हम सबको इसी सत्य का सामना करना है।

तो विषय था; कैडेवर!
मेरे विचारों में जो व्यक्ति मृत्यु के बाद भी मेरे सीखने का माध्यम बन रहा है, उसके प्रति कृतज्ञता होनी चाहिए।

ज़रा सोच कर देखें कि मृत्यु के बाद हम अपने प्रियजनों के शरीर का कितना सम्मान करते हैं। कोई दफनाता है तो कोई अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार दाह संस्कार करता है। ऐसा तो नहीं है कि मृत्यु के बाद शरीर को महत्त्वहीन मानकर कहीं फेंक दिया जाता है क्योंकि मृत्यु के बाद भी हम उस शरीर के साथ एक मनुष्य का सम्मान जोड़कर देखते हैं। कोई लावारिस बॉडी भी असम्मान का पात्र नहीं हो सकती।

फिर उस व्यक्ति के बारे में सोचिए, जो अपनी पूरी देह भविष्य के डॉक्टरों को सीखने के लिए दे देता है। वह व्यक्ति मृत्यु के बाद भी समाज की सेवा कर रहा होता है। उसकी वजह से मेडिकल छात्र सीखते हैं, बेहतर डॉक्टर बनते हैं और भविष्य में अनगिनत मरीजों को बेहतर उपचार मिल पाता है। हो सकता है आपका कोई क़रीबी अपनी बॉडी डोनेट करने का फॉर्म भर चुका हो !

डॉक्टर होने का अर्थ क्या है? क्या केवल शरीर को समझ लेना पर्याप्त है? नहीं न! यदि हम शरीर को समझ लें लेकिन मनुष्य को न समझें, यदि हम रोग को समझ लें लेकिन रोगी को न समझें, यदि हम विज्ञान सीख लें लेकिन संवेदनशीलता न सीखें, तो हमारी शिक्षा अधूरी रह जाएगी!

एमबीबीएस इत्यादि करने के बाद जब हम प्रैक्टिस करते हैं तो मरीज हमारे सामान्य परिस्थिति में नहीं आता; वह दर्द और डर में होता है, कई बार असहाय महसूस कर रहा होता है। ऐसे में डॉक्टर द्वारा कही गई एक साधारण-सी बात भी उसके मन पर बहुत बड़ा प्रभाव छोड़ सकती है। इसलिए प्रैक्टिस के दौरान भी हर डॉक्टर को समझना चाहिए कि सामने केवल एक शरीर नहीं बैठा है, एक इन्सान बैठा है।

आज के मेडिकल स्टूडेंट्स ही भविष्य के डॉक्टर बनेंगे न?

08/06/2026

"Seva ka hisaab fees se nahi hota, niyat se hota hai. Jab har patient mein Bhagwan ka roop dikhe, to OPD bhi mandir jaisi lagne lagti hai." 🥰

19/05/2026

"Unexpressed emotion is root cause of all disease. "

22/03/2026

*Chai ke Real Dost* ☕
Swad bhi. Samajhdari bhi.

Chai ke saath biscuits ya namkeen kha rahe hain?

Thoda sa change kijiye. Snack choose karte time 3 simple rules yaad rakhiye:

*Protein ya Fiber ho* — Yeh aapka pet zyada der tak bhara rakhta hai.

*Kam Processed ho*— Maida, deep-fried aur bahut sugary cheezein jitni kam hon, utna behtar.

*Portion Sensible ho*— Healthy cheez bhi had se zyada ho jaaye toh woh snack nahi, "mini-meal" ban jaati hai.

Chai ke saath better options:

*Bhuna Chana* — Filling hai, easy hai, aur protein + fiber ka powerhouse hai.

*Roasted Makhana* — Halka aur crunchy hai; unhealthy namkeen ka perfect swap hai.

*Moong Sprouts Chaat* — Fresh lagta hai aur aapke chai-time ko "smarter" banata hai.

*Sada Khakhra*— Crispy option hai aur biscuit se kahin behtar choice hai.

*Moongphali (Limited)* — Satisfying hai aur healthy fats + protein deti hai.

*Bheege Badam/AkhAkhrot* — Small portion mein ye behtareen health add-on hain.

*Ghar ki Bhel (Oats/Murmura)* — Light rehti hai aur packaged namkeen se lakh guna behtar hai.

Roz chai peena problem nahi hai.
Chai ke saath roz kya kha rahe hain, wahi game badalta hai.

21/03/2026

Address

DVC Dispensary
Hazaribag
825301

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Monday 8am - 6pm
Tuesday 8am - 6pm
Wednesday 8am - 6pm
Thursday 8am - 6pm
Friday 8am - 6pm
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