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25/05/2026
*🌷"उत्तम मंगल है--आज्ञाकारिता"🌷*किसी के द्वारा कहे गए कल्याणकारी वचन को विनम्रतापूर्वक सुने, अच्छा उपदेश देने वाले का सम...
26/11/2025

*🌷"उत्तम मंगल है--आज्ञाकारिता"🌷*

किसी के द्वारा कहे गए कल्याणकारी वचन को विनम्रतापूर्वक सुने, अच्छा उपदेश देने वाले का सम्मान करे, सुनी हुई अच्छी बात का ततपरतापूर्वक पालन करे तो अपना ही मंगल सधता है।

🌷सदुपदेश जहाँ कहीं से भी मिलें, जिस किसी से भी मिलें, उसे आदरपूर्वक ग्रहण करें।

एक व्यक्ति गर्व घमंड से भरा होता है तो किसी से कल्याणकारी वाणी सुनना भी हीन समझता है।चाहे वह चर्चा कितनी भी अच्छी क्यों न हो।

ऐसा व्यक्ति उद्दण्डता से भरा होने के कारण कल्याणकारी वाणी को विनम्र भाव से स्वीकार करने के स्थान पर अहंकार प्रकट करता हुआ कहता है--तुम कौन आये मुझे उपदेश देने वाले?

अथवा कहता है-नही चाहिये मुझे तुम्हारे उपदेश।यह जो कुछ कह रहे हो यह मै पहले से ही जानता हूँ।

अथवा कहता है--तुम मुझे क्या सिखाते हो?तुम्हारे में तो यह दोष है, यह दोष है।

और अपनी प्रशंसा करते हुए कहता है--मुझमे यह गुण है, यह गुण है।

गर्व घमंड से ऐसा कुछ नही भी कहे तो मुँह फुलाकर गुमसुम बैठा रहता है और उपदेश देने वाले को घृणा की दृष्टि से देखता है।

🌻दूसरी और कोई समझदार आदमी हो और उसे कोई उसकी भूल बता दे, तो बताने वाले का उपकार मानता है।

आदमी स्वयं अपनी भूल नही देख पाता, और जब उसकी भूल कोई अन्य व्यक्ति उसे दिखाता है और उसे सुधारने का उपदेश देता है तो वह कृतज्ञता से भर उठता है।

अपनी भूल सुधारकर अपना कल्याण साध लेता है।भूल बताने वाले व्यक्ति को ऐसे ही समझता है जैसे किसी ने गड़ा हुआ खजाना बता दिया हो। खजाना तो अपने पास है ही पर अपनी नासमझी से उसे ढ़क रखा है।किसी ने कृपा करके बता दिया और हमने अपनी नासमझी दूर कर ली और समझदारी के साथ अपना छिपा हुआ खजाना प्राप्त कर लिया।

अतः भूल बताने वाले को वह धन्यवाद ही देगा।इसी में उसका मंगल समाया हुआ है।

🌸इसलिये हमारे यहाँ के एक संत ने कहा--
निंदक नियरे राखिये,
आँगन कुटी छवाय।
बिन साबुन पानी बिना,
निर्मल करत सुभाय।।

हमारे स्वभाव में जो खोट है, उसे कोई बताये तो हम उसे अपना उपकारी ही मानेंगे।उसका शुक्रिया ही अदा करेंगे।जो अपनी गल्ती तुरंत स्वीकार कर लेता है और उसे सुधार लेता है वह अपना मंगल साध लेता है।

🍁अतः अपनी भूल बताने वाले के प्रति विनम्रभाव रखना गृहस्थ के लिये उत्तम मंगल ही है।

http://www.vridhamma.org/

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प्रिय धम्म बंधू आणि भगिनींनो,नमस्ते,*धम्मालय विपश्यना ध्यान साधना केंद्र आळते, कोल्हापूर केंद्राचे रौप्य महोत्सवी वर्ष (...
21/11/2025

प्रिय धम्म बंधू आणि भगिनींनो,
नमस्ते,

*धम्मालय विपश्यना ध्यान साधना केंद्र आळते, कोल्हापूर केंद्राचे रौप्य महोत्सवी वर्ष ( Silver Jubilee Year)*
धम्मालय केंद्रात पहिले १० दिवसीय शिबीर ७ ते १८ डिसेंबर २००० मध्ये संपन्न झाले होते. त्या घटनेला ह्या डिसेंबर मध्ये २५ पूर्ण होत आहेत. त्या निमित्ताने *५ डिसेंबरला साधक मेळावा* आयोजित करण्यात येणार आहे. दोन सत्रामध्ये हा मेळावा संपन्न होणार आहे. साधक दोन्ही पैकी कोणत्याही एकाच सत्रामध्ये सहभागी होऊ शकतात.

✨ *मेळाव्याची रुपरेषा पुढीलप्रमाणे*
🔹 *सकाळ सत्र*🔹
🔸https://chat.whatsapp.com/JmESfEaFZ3O3pCmsCcNT5F0.15 : अल्प विश्रांती
🔸10.15 ते 10.45 : पु. गुरुजींचे प्रवचन
🔸10.45 ते 11.00 : धम्मालयाचा 25 वर्षांचा प्रवास चित्रफीत
🔸11.00 : परस्पर भेटी व अल्पोहर

*या सकाळ सत्रासाठी नाव नोंदणी साठी लिंक: https://schedule.vridhamma.org/form/one-day-application-form?centre=17&course=68624*

🔹 *दुपार सत्र* 🔹
🔸 3:https://alaya.vridhamma.org/धना
🔸4:00 ते 4.15. : अल्प विश्रांती
🔸4.15 ते 4.45 : पु. गुरुजींचे प्रवचन
🔸4.45 ते 500 : धम्मालयाचा 25 वर्षांचा प्रवास चित्रफीत
🔸5.00 : परस्पर भेटी व अल्पोहर

*या दुपारच्या सत्रासाठी नाव नोंदणी साठी लिंक: https://schedule.vridhamma.org/form/one-day-application-form?centre=17&course=68625*

(साधकांना नम्र विनंती आहे की *कोणत्याही एकाच सत्रामध्ये* आपली नोंदणी करावी)

वरील माहिती आपल्या संपरhttps://chat.whatsapp.com/JmESfEaFZ3O3pCmsCcNT5Fhatsapp.com/JmESfEaFZ3O3pCmsCcNT5F कृपया ह्या लिंकने WhatsApp ग्रुप join करायला सांगावे.
आपल्या पारमिता विकसित करत करत, ह्या कल्याणकारी धर्ममार्गावर सातत्याने आपली वाटचाल होत राहो हीच सदिच्छा.

मंगल हो.

मैत्री साहित
धम्मालय, दक्खिन विपश्यना संशोधन केंद्र आळते, कोल्हापूर. ४१६ १०९
दूरध्वनी: 9767413232
ईमेल: registration.dhhttps://alaya.vridhamma.org/साइट: https://alaya.vridhamma.org/

Online दान देण्यासाठी लिंक :- https://alaya.vridhamma.org/donation

🌷मार-बंधन से मुक्ति 🌷मुक्ति मार्ग के अवलंबी विपश्यना साधको को मार(विकार की अभिव्यक्ति) से सदैव सतर्क रहना चाहिए। इसे जीत...
21/11/2025

🌷मार-बंधन से मुक्ति 🌷

मुक्ति मार्ग के अवलंबी विपश्यना साधको को मार(विकार की अभिव्यक्ति) से सदैव सतर्क रहना चाहिए।

इसे जीतने का उपाय बड़ा सरल है, और वह यही है की प्रतिक्षण सचेत रहे।

जागरूक हो गए तो इतने में मार सेना विलीन हो गयी। इस चोर के पावं नहीं होते। घर वाला जागा की चोर भगा। बड़ा सरल उपाय है। कोई भी प्रयोग करके देख सकता है।

🌷 जब कभी मन में प्रबल काम वासना जागे, तो मात्र क्षण भर के लिए आदमी सचेत होकर केवल इस तथ्य को जान ले की ओह! मुझमे यह काम वासना उठ रही है, और बस इतना देखना- जानना मात्र हुआ की काम वासना छुइ-मूइ के पत्तों की भांति दुबक गयी, जैसे थी ही नहीं।

यही दशा क्रोध की है, अहंकार की है, ईर्ष्या की है। जैसे उठे वैसे देख लो। ये वही विलुप्त हो जाएंगे।

पर लोग देखते कब है? जैसे ही कोई विकार उठता है, वैसे ही उस विकार के अधीन हो जाते है, और उस समय तो जागरूकता का नामोनिशान भी नहीं होता। बस केवल वही विकार सिर पर सवार रहता है और सिर उस विकार रुपी पानी के नीचे डूबा रहता है। बहुत समय बीत जाने के बाद जब होश आता है तब आदमी उस विकार रूपी मार के अधीन की गयी मूर्खताओं का स्मरण करके पछताता है। परंतु तब क्या हो?

यह जागरूक रहने का हथियार तो तभी कारगर होता है जबकि दुश्मन धावा बोल कर सिर पर चढ़ रहा हो।

बाद में पश्चाताप करना बिलकुल निरर्थक है।

🌷 अत आओ इस मार-बंधन से मुक्त हों और धर्म साधना के मार्ग पर चलते हुवे अपना मंगल साध ले। इसी में सब का कल्याण समाया हुआ है।

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