08/03/2026
FibroScan: रिपोर्ट की वैल्यू को आम भाषा में समझें
आजकल फैटी लिवर (Fatty Liver) एक बहुत सामान्य समस्या बनती जा रही है। पहले यह समस्या मुख्यतः शराब पीने वाले लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब मोटापा, डायबिटीज, जंक फूड, मीठे पेय पदार्थ और बैठी हुई जीवनशैली के कारण यह बिना शराब पीने वाले लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है। अक्सर जब किसी व्यक्ति की लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) रिपोर्ट में SGPT या SGOT बढ़े हुए आते हैं या अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर दिखाई देता है, तब डॉक्टर लिवर की स्थिति को और स्पष्ट रूप से समझने के लिए FibroScan नाम की जाँच कराने की सलाह देते हैं।
FibroScan एक आधुनिक और बिना दर्द वाली जाँच है, जिसमें लिवर की सख्ती और उसमें जमा फैट को मापा जाता है। यह जाँच अल्ट्रासाउंड की तरह ही की जाती है और इसमें किसी सुई या ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन जब मरीज अपनी रिपोर्ट देखता है तो उसमें CAP, LSM, kPa, dB/m, IQR जैसी कई वैल्यू लिखी होती हैं, जिन्हें समझना आम आदमी के लिए मुश्किल हो जाता है। इसलिए इन वैल्यू का मतलब समझना बहुत जरूरी है।
🍁 CAP Score क्या होता है?
FibroScan रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण वैल्यू CAP Score (Controlled Attenuation Parameter) होती है। यह वैल्यू यह बताती है कि लिवर में कितना फैट जमा हो गया है। दूसरे शब्दों में कहें तो CAP Score से यह पता चलता है कि फैटी लिवर किस स्तर तक पहुँच चुका है।
CAP Score की यूनिट dB/m (डेसिबल प्रति मीटर) होती है।
👉 यदि CAP Score लगभग 200 से 238 dB/m के बीच है तो इसे सामान्य माना जाता है और इसका मतलब है कि लिवर में फैट बहुत कम या नहीं के बराबर है।
👉 यदि यह वैल्यू 238 से 260 dB/m के बीच आती है तो यह फैटी लिवर ग्रेड-1 का संकेत देती है, जिसमें लिवर में हल्की मात्रा में फैट जमा होना शुरू हो जाता है।
👉 जब CAP Score 260 से 290 dB/m के बीच होता है तो इसे फैटी लिवर ग्रेड-2 माना जाता है, जिसमें लिवर में फैट की मात्रा मध्यम स्तर तक पहुँच चुकी होती है।
👉 यदि CAP Score 290 dB/m से अधिक हो जाता है तो यह फैटी लिवर ग्रेड-3 या गंभीर फैटी लिवर का संकेत देता है।
आम भाषा में समझें तो CAP Score जितना अधिक होगा, लिवर में फैट की मात्रा उतनी अधिक होगी।
🍁 LSM (Liver Stiffness Measurement) क्या होता है?
FibroScan रिपोर्ट की दूसरी महत्वपूर्ण वैल्यू LSM (Liver Stiffness Measurement) होती है। यह वैल्यू यह बताती है कि लिवर कितना कठोर या सख्त हो गया है। जब लिवर में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है तो धीरे-धीरे उसमें फाइब्रोसिस (Fibrosis) या दाग जैसे ऊतक बनने लगते हैं, जिससे लिवर की लचक कम हो जाती है और वह सख्त होने लगता है।
LSM की यूनिट kPa (किलोपास्कल) होती है।
👉 यदि LSM लगभग 2 से 6 kPa के बीच है तो लिवर सामान्य माना जाता है।
👉 यदि यह 6 से 7.5 kPa के बीच है तो लिवर में हल्का फाइब्रोसिस शुरू हो सकता है।
👉 जब यह 7.5 से 10 kPa के बीच होता है तो मध्यम स्तर का फाइब्रोसिस माना जाता है।
👉 यदि LSM 10 से 14 kPa के बीच है तो लिवर में गंभीर फाइब्रोसिस हो सकता है और स्थिति पर गंभीर ध्यान देने की जरूरत होती है।
👉 जबकि 14 kPa से अधिक होने पर लिवर सिरोसिस की संभावना मानी जाती है।
सरल शब्दों में कहें तो LSM यह बताता है कि लिवर में कितनी क्षति हो चुकी है और वह कितना सख्त हो गया है।
🍁 IQR / Median क्या होता है?
FibroScan रिपोर्ट में अक्सर IQR / Median नाम की एक और वैल्यू दिखाई देती है। यह वैल्यू वास्तव में यह बताती है कि जाँच के दौरान जो माप लिए गए हैं वे कितने विश्वसनीय हैं।
👉 यदि यह अनुपात 0.30 से कम है तो रिपोर्ट को विश्वसनीय माना जाता है। लेकिन यदि यह 0.30 से अधिक हो जाता है तो रिपोर्ट की सटीकता थोड़ी कम हो सकती है। इसलिए डॉक्टर इस वैल्यू को देखकर यह तय करते हैं कि रिपोर्ट कितनी भरोसेमंद है।
🍁 Success Rate का क्या मतलब है?
FibroScan करते समय मशीन लिवर की कई बार माप लेती है और उनमें से सबसे उपयुक्त माप को रिपोर्ट में शामिल करती है। Success Rate यह बताता है कि कुल प्रयासों में से कितने प्रयास सफल रहे।
👉 सामान्यतः यदि Success Rate 60 प्रतिशत से अधिक होता है तो रिपोर्ट को स्वीकार्य और सही माना जाता है।
🍁 FibroScan रिपोर्ट को आम भाषा में कैसे समझें?
मान लीजिए किसी व्यक्ति की FibroScan रिपोर्ट में CAP Score 280 dB/m और LSM 6.5 kPa आता है। इसका मतलब होगा कि उस व्यक्ति के लिवर में मध्यम स्तर तक फैट जमा हो चुका है, यानी उसे फैटी लिवर ग्रेड-2 है। लेकिन साथ ही LSM 6.5 kPa होने का अर्थ यह है कि लिवर में अभी ज्यादा सख्ती या फाइब्रोसिस नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में यदि व्यक्ति समय रहते अपने खान-पान और जीवनशैली में सुधार कर ले तो लिवर को काफी हद तक सामान्य किया जा सकता है।
🍁 FibroScan कब कराया जाता है?
डॉक्टर आमतौर पर FibroScan की सलाह तब देते हैं जब अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर दिखाई देता है, लिवर एंजाइम जैसे SGPT या SGOT बढ़े हुए होते हैं, मरीज को लंबे समय से शराब सेवन की आदत होती है, डायबिटीज या मोटापा होता है, या फिर हेपेटाइटिस-B और हेपेटाइटिस-C जैसी बीमारियों में लिवर की स्थिति का आकलन करना होता है। इसके अलावा सिरोसिस के जोखिम का पता लगाने के लिए भी यह जाँच उपयोगी होती है।
FibroScan लिवर की स्थिति को समझने के लिए एक आधुनिक, सुरक्षित और बिना दर्द वाली जाँच है। इसकी रिपोर्ट में मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण वैल्यू होती हैं—CAP Score, जो लिवर में जमा फैट की मात्रा बताती है, और LSM Score, जो लिवर की सख्ती या फाइब्रोसिस को दर्शाती है। यदि इन वैल्यू को सही तरीके से समझ लिया जाए तो मरीज आसानी से यह जान सकता है कि उसका लिवर किस स्थिति में है और उसे अपने स्वास्थ्य के लिए क्या कदम उठाने चाहिए।
समय पर जाँच, सही आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर फैटी लिवर जैसी समस्या को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है और लिवर को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है।
Dr K K Verma
Gastro Laparoscopy & bariatric Surgeon
MS DNB FACS(USA) FNB(MAS)
FIAGES FALS FACRSI
SENIOR CONSULTANT
Yashvik Laparoscopy Centre
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