Dr R.K Homoeopathy clinic and research centre

Dr R.K Homoeopathy clinic and research centre Allergy, Thyroid, Asthma,coeliac disease,PCOD, infertility& sterility ,obs& Gynecological disease, kidney &Gall bladder stones, Arthritis

14/02/2026

पुणे के महशूर MBBS,MD (पल्मोनोलॉजिस्ट ) डॉ जसवंत पाटिल ने बताया मेरी मदर के लास्ट स्टेज में होम्योपैथी चिकित्सा के चमत्कार को देखकर मैं एक होम्योपैथी डॉ बना। दोस्तो होम्योपैथी कई बार लाइलाज बीमारियो में भी चमत्कार करती है। इसलिए होम्योपैथी चिकित्सा से सभी प्रकार की असाध्य बीमारियो का उपचार जरूर करवाना चाहिए।

19/07/2025
"बच्चे को हर बार वही खांसी... वही दवा... और कुछ दिन बाद फिर से वही शिकायत। क्या यही इलाज है?"आजकल बच्चों में बार-बार खां...
17/04/2025

"बच्चे को हर बार वही खांसी... वही दवा... और कुछ दिन बाद फिर से वही शिकायत। क्या यही इलाज है?"
आजकल बच्चों में बार-बार खांसी-जुकाम, बंद नाक, हल्का बुखार और टॉन्सिल की सूजन जैसी समस्याएं सिर्फ सर्दियों तक सीमित नहीं रह गईं हैं। गर्मियों में भी ऐसी बीमारियां तेजी से देखने को मिल रही हैं, जिनके पीछे कारण है: तेज़ गर्मी और धूल के बीच AC और ठंडी चीजों का अत्यधिक उपयोग, बार-बार तापमान में बदलाव, और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर लगातार होता हल्का दबाव।
इस स्थिति में, अकसर डॉक्टर बार-बार एंटीबायोटिक, सिरप या नेब्युलाइज़र सजेस्ट करते हैं — जो कुछ समय तक राहत तो देते हैं, पर रोगी कुछ ही हफ्तों में फिर उसी चक्र में लौट आता है।
होम्योपैथी इस चक्र को तोड़ने का एक ऐसा तरीका प्रस्तुत करती है जो सिर्फ बीमारी को नहीं, बल्कि व्यक्ति विशेष में बीमारी की प्रकृति और प्रतिक्रिया को समझती है। यही कारण है कि एक जैसे लक्षणों वाले दो बच्चों को एक जैसी दवा नहीं दी जाती — क्योंकि “रोग का नाम एक हो सकता है, पर रोग की अभिव्यक्ति हर बच्चे में अलग होती है।”
होम्योपैथी में दी जाने वाली दवाएं शरीर के रिसेप्टर्स को सीधा दबाने की बजाय उन्हें नरम संकेत देती हैं कि कैसे अपने अंदर के संतुलन को पुनर्स्थापित किया जाए। यह प्रक्रिया न केवल इम्यूनिटी को मजबूत बनाती है, बल्कि इम्यून रेस्पॉन्स को मॉडुलेट करती है — जिससे शरीर ना तो जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया करता है (जैसे एलर्जी में होता है), और ना ही बहुत कम (जैसे बार-बार संक्रमण में)।
हाल की कई वैज्ञानिक समीक्षाओं और शोधों ने यह इंगित किया है कि होम्योपैथिक औषधियाँ, विशेषकर ultra high dilutions, शरीर के जैविक तंत्र पर nanostructure आधारित प्रभाव डालती हैं। इससे immune cells, cytokine रिलीज़ और gene expression के स्तर पर subtle signaling होती है जो biological self-regulation में सहायक होती है।
उदाहरण के लिए, एक बच्चा जिसे अचानक ठंडी हवा में आने के बाद खांसी हो जाती है, बेचैनी और डर के साथ — उसमें Aconite विचारणीय हो सकती है।
वहीं कोई बच्चा जिसकी सूखी खांसी हिलने-डुलने से बढ़ जाती है और जो बार-बार ठंडा पानी मांगता है — उसके लिए Bryonia उपयुक्त हो सकती है।
अगर लक्षणों में सूजन, लाल चेहरा, गरमी से बढ़ती पीड़ा और उत्तेजित मानसिक स्थिति हो — तो Belladonna को सोचा जा सकता है।
पलटकर देखें तो कोई बच्चा जो हल्के दर्द में भी चीख पड़ता है, हर छोटी चीज से परेशान होता है, उसे ठंडी हवा बर्दाश्त नहीं होती — वहां Hepar Sulph दर्शनीय है।
और वहीं एक बच्चा जो हर वक्त माँ से चिपका रहता है, रोता है, गर्म कमरे में बेचैन हो जाता है और खुली हवा से राहत पाता है — वहां Pulsatilla को ध्यान में लिया जा सकता है।
इस तरह की सूक्ष्म समझ ही होम्योपैथी को विशिष्ट बनाती है। यह न केवल रोग को समझती है, बल्कि व्यक्ति को, उसके व्यवहार को, उसके शरीर और मन की भाषा को भी समझती है। यही कारण है कि सही चयनित दवा धीरे-धीरे बच्चे के शरीर को ऐसे संतुलन में ले जाती है जहाँ बार-बार की बीमारियाँ कम होने लगती हैं, और दवाओं पर निर्भरता घटती है।
न कोई लत, न कोई साइड इफेक्ट, न बार-बार डॉक्टर के चक्कर — सिर्फ बेहतर इम्यून रिस्पॉन्स और स्वतंत्रता।
होम्योपैथी कोई जादू नहीं — यह शरीर से संवाद करने की एक वैज्ञानिक, संवेदनशील और व्यक्ति-केंद्रित विधा है।
हर बार की खांसी के पीछे एक जैसी दवा नहीं होती — ये जानना ही शायद बेहतर स्वास्थ्य की पहली सीढ़ी है।

03/02/2025

यदि आप अपनी चिकित्सा के द्वारा किसी रोगी को रोग मुक्त करते हैं या किसी रोगी के रोग को ठीक कर देते हैं तो आप निश्चित रूप से कुशल चिकित्सक हो सकते हैं ; और प्रशंसा के पात्र भी, लेकिन
किसी रोगी को रोग मुक्त करना
और रोगी के रोग को ठीक कर देना
यह दोनों अलग-अलग बातें हैं।
किसी रोगी का ठीक हुआ रोग पुनः दोबारा होता हुआ देखा गया है। मैंने कुछ ऐसे रोगियों की चिकित्सा की है जिनको 5 साल से साल में दो-तीन बार टाइफाइड हो रहा था। इसका अर्थ स्पष्ट है की एलोपैथिक दवावों से टाइफाइड ठीक नहीं होता। यही टाइफाइड तमाम अन्य रोगों के रूप में शरीर में अभिव्यक्त होता है। इसे औषधियों के द्वारा सप्रेशन कहा जा सकता है।
आप किसी रोगी के घुटने की बीमारी ठीक कर सकते हैं; इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपने रोगी को ठीक कर दिया।
होम्योपैथी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो रोगी की रोग लक्षणों के द्वारा संपूर्ण चिकित्सा करती है और किसी रोगी को रोग मुक्त करती है। यह रोग लक्षण शारीरिक, मनोशारीरिक और पैथोलॉजिकल तीनों स्तर पर रोजी में दिखाई पड़ते हैं।
रोग लक्षणों के द्वारा रोगी की चिकित्सा रोग को स्वत ही जड़ मूल से नष्ट नष्ट कर देती है, और दोबारा उसकी पुनरावृत्ति नहीं होती।
रोगी और रोग को गहराई से समझने की जरूरत है।
डॉ आर के यादव

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