06/02/2022
Topic -1
आयुर्वेद क्या है?
आयुर्वेद विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा प्रणालियों में से एक है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “जीवन का ज्ञान”। इसका जन्म लगभग 3 हजार वर्ष पहले भारत में ही हुआ था। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा भी एक पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्वीकार किया गया है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की तुलना कभी भी मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम से नहीं की जा सकती है, क्योंकि इनका शरीर पर काम करने का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग रहा है। जहां एलोपैथिक दवाएं रोग से लड़ने के लिए डिजाइन की जाती हैं, वहीं आयुर्वेदिक औषधियां रोग के विरुद्ध शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती हैं, ताकि आपका शरीर खुद उस रोग से लड़ सके। आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए शरीर, मन व आत्मा (स्वभाव) का एक सही संतुलन रखना जरूरी होता है और जब यह संतुलन बिगड़ जाता है तो हम बीमार पड़ जाते हैं। जैसा कि हम आपको ऊपर बता चुके हैं, आयुर्वेदिक चिकित्सा कई हजार साल पुरानी है। इसीलिए, आज भी इसमें किसी रोग का उपचार या उसकी रोकथाम करने के लिए हर्बल दवाओं के साथ-साथ विशेष प्रकार के योगासन, व्यायाम और आहार बदलाव आदि की भी मदद ली जाती है।
आयुर्वेद में इलाज
आयुर्वेदिक में इलाज के नियम एलोपैथिक ट्रीटमेंट से पूरी तरह से अलग हैं। आयुर्वेदिक नियमों के अनुसार हर व्यक्ति के शरीर में एक विशेष ऊर्जा होती है, जो शरीर को किसी भी बीमारी से ठीक करके उसे वापस स्वस्थ अवस्था में लाने में मदद करती है। जिसमें दवा, उचित आहार, शारीरिक गतिविधि और शरीर की कार्य प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की गतिविधियां शामिल हैं। इसमें रोग का इलाज करने के साथ-साथ उसे फिर से विकसित होने से रोकने का इलाज भी किया जाता है, अर्थात् आप यह भी कह सकते हैं कि आयुर्वेद रोग को जड़ से खत्म करता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में रोग से लड़ने की बजाए उसके विरुद्ध शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाया जाता है, ताकि रोग के कारण से लड़ने की बजाय शरीर के स्वस्थ होने पर जोर दिया जाए। शरीर द्वारा अपनी ही ऊर्जा से स्वस्थ होने की इस तकनीक को आयुर्वेद में “स्वभावोपरमवाद” कहा जाता है।
फ्रोम ,: डा. मानव
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