27/03/2026
सावधान: कहीं 'मल्टीग्रेन' और 'मिलेट्स' के चक्कर में आप अपनी सेहत तो नहीं खो रहे?
आजकल हर जगह मिलेट्स (मोटे अनाज) और मल्टीग्रेन आटे का शोर है। लोग वजन घटाने या डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए वर्षों से खाए जा रहे गेहूं को छोड़ रहे हैं। लेकिन क्या आयुर्वेद भी यही कहता है? आइए जानते हैं शास्त्रोक्त सच।
1. गेहूँ: शरीर के लिए 'अमृत' और नित्य सेवनीय
आयुर्वेद में गेहूं को 'नित्य सेवनीय' (रोजाना खाने योग्य) बताया गया है। यह शरीर को केवल कैलोरी नहीं, बल्कि ओज और बल देता है।
"गोधूम: मधुर: शीतो विपाके स्वादु रेचन:।
वातपित्तहरो वृष्यो जीवनो बलकृद् गुरु:॥"
(सन्दर्भ: भावप्रकाश निघण्टु, धान्यवर्ग)
अर्थ: गेहूं स्वाद में मधुर, तासीर में शीतल और पचने के बाद भी मधुर रहता है। यह वात और पित्त दोष को शांत करता है, शरीर की धातुओं को पोषण देता है और जीवन शक्ति (Vitality) बढ़ाता है।
2. मिलेट्स (मोटे अनाज) का सच: क्या ये 'रोग उत्पादक' हैं?
मिलेट्स (बाजरा, रागी, कोदो आदि) को आयुर्वेद में 'कुधान्य' या 'क्षुद्र धान्य' कहा गया है। इनका स्वभाव रूखा होता है।
"कषायमधुरा रूक्षा विपाके कटुकास्तथा।
वातला: श्लेष्मपित्तघ्ना: बद्धाविण्मूत्रशोषणा:॥"
(सन्दर्भ: चरक संहिता, सूत्रस्थान 27)
अर्थ: ये अनाज रूखे (Dry) और पचने पर तीखे (कटु) होते हैं। इनका निरंतर सेवन शरीर में 'वात' बढ़ाता है। आज जो लोग गेहूं छोड़कर पूरी तरह मिलेट्स पर हैं, उन्हें भविष्य में जोड़ों का दर्द, नसों की कमजोरी और पुरानी कब्ज जैसी बीमारियां घेर सकती हैं।
3. मल्टीग्रेन आटा और डायबिटीज का भ्रम
डायबिटीज के मरीजों को अक्सर कई अनाजों को मिलाकर खाने की सलाह दी जाती है, जो आयुर्वेद के अनुसार पाचन के लिए घातक है।
"विरुद्धमपि चाहारं विद्याद्विषगरोपमम्।”
(सन्दर्भ: चरक संहिता)
मंदाग्नि का कारण: हर अनाज का पचने का समय (Cooking & Digestion time) अलग होता है। जब आप उन्हें मिलाते हैं, तो जठराग्नि भ्रमित हो जाती है।
अनेकद्रव्य मिश्रण: शास्त्रों के अनुसार बहुत सारे द्रव्यों को मिलाकर खाने से पाचन मंद हो जाता है, जिससे शरीर में 'आम' (Toxins) बनते हैं। यही 'आम' डायबिटीज की जटिलताओं (Complications) को और बढ़ाता है।
डॉ. नरेन्द्र आचार्य
एम. डी. आयुर्वेद मेडिसिन
094622 88124
जालोर (राजस्थान)