25/04/2026
"हमें अनेक संकल्प पूरे करने हैं। उन्हें पूरा करते समय ध्यान रहे कि अहंकार या अधिकार की अभिलाषा हमारे मन में क्षणमात्र भी न उभरे।
दुर्भाग्य से इस अध्यात्ममयी भूमि में आज अनेक कार्यों का उद्देश्य स्वार्थपूर्ति होता है। किसी को पद की आकांक्षा है तो किसी को सम्मान की।
हमें ऐसे कार्यकर्ता चाहिए जो निःस्वार्थ भाव से सुसंगठित, शक्तिवान, चरित्रवान समाज का निर्माण कर सकें।"
- श्री गुरूजी