समर्पण : एक सेवा भाव

समर्पण : एक सेवा भाव Kind nature &

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बरसात के मौसम में सांप काटने की घटना बढ़ रही , अतः आवश्यक जानकारी -- ।साँप के काटने पर क्या करें (Do's)रोगी को शांत रखें ...
05/09/2026

बरसात के मौसम में सांप काटने की घटना बढ़ रही , अतः आवश्यक जानकारी -- ।साँप के काटने पर क्या करें (Do's)
रोगी को शांत रखें – घबराने से ज़हर तेजी से फैल सकता है।
काटे हुए अंग को जितना संभव हो स्थिर रखें (स्प्लिंट लगाकर) और उसे हृदय के स्तर पर या थोड़ा नीचे रखें।
कसे हुए कपड़े, अंगूठी, चूड़ी, घड़ी आदि हटा दें, क्योंकि सूजन बढ़ सकती है।
रोगी को तुरंत निकटतम अस्पताल ले जाएँ जहाँ एंटी-स्नेक वेनम (ASV) और आपातकालीन उपचार उपलब्ध हो।
यदि सुरक्षित हो तो साँप की फोटो दूर से ले सकते हैं, लेकिन उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।
अस्पताल में पहुँचकर आवश्यक जाँच (जैसे 20 मिनट Whole Blood Clotting Test) और उपचार कराया जाता है।
क्या नहीं करें (Don'ts)
❌ घाव को काटें या चूसने की कोशिश न करें।
❌ टूर्निकेट (बहुत कसकर पट्टी) न बाँधें।
❌ बर्फ, मिट्टी, हल्दी, जड़ी-बूटी, केमिकल या कोई लेप न लगाएँ।
❌ शराब या अनावश्यक दवाएँ न दें।
❌ रोगी को दौड़ने या अधिक चलने न दें।
तुरंत अस्पताल जाने के संकेत
साँस लेने में कठिनाई
पलकों का गिरना, बोलने या निगलने में कठिनाई
अत्यधिक सूजन या तेजी से फैलती सूजन
खून बहना (मसूड़ों, पेशाब, उल्टी आदि से)
बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या चक्कर
महत्वपूर्ण बातें
हर साँप जहरीला नहीं होता, और हर जहरीले साँप के काटने में भी ज़हर नहीं जाता (dry bite हो सकता है)। इसलिए बिना लक्षण के केवल काटने पर ASV नहीं दिया जाता।
ASV केवल तभी दिया जाता है जब विषैले साँप के ज़हर के स्पष्ट लक्षण या रक्त जमने की गड़बड़ी (जैसे 20WBCT असामान्य) हों।
यदि शुरुआत में कोई लक्षण नहीं हैं, तब भी रोगी को कम से कम 24 घंटे तक अस्पताल में निगरानी में रखना उचित होता है, क्योंकि कुछ प्रकार के साँपों (विशेषकर करैत) के काटने में लक्षण देर से शुरू हो सकते हैं।@डॉ सुमन कुमार झा एमबीबीएस एनएमसीएच पटना डीएनबी... सिटीकार्ट के सामने... स्टेशन रोड जमुई

🌡️ यदि बच्चे को बुखार है तो क्या करें? ध्यान दें…बच्चों में बुखार अक्सर शरीर में संक्रमण के प्रति प्रतिक्रिया का संकेत ह...
01/09/2026

🌡️ यदि बच्चे को बुखार है तो क्या करें? ध्यान दें…

बच्चों में बुखार अक्सर शरीर में संक्रमण के प्रति प्रतिक्रिया का संकेत होता है। घबराने के बजाय बच्चे की उम्र, तापमान और सामान्य स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है।

👶 बुखार होने पर क्या करें?

* 🌡️ थर्मामीटर से तापमान मापें और समय के साथ रिकॉर्ड करें।
* 🥤 बच्चे को पर्याप्त स्तनपान/तरल पदार्थ देते रहें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
* 👕 बच्चे को बहुत अधिक कपड़े या कंबल न ओढ़ाएं।
* 🛌 बच्चे को पर्याप्त आराम दें।
* 💊 बुखार की दवा बच्चे के वजन के अनुसार और चिकित्सक की सलाह से दें। अपनी तरफ से एंटीबायोटिक शुरू न करें।
* 🧽 सामान्यतः ठंडे पानी या बर्फ से शरीर पोंछने की जरूरत नहीं होती; बच्चा असहज हो तो हल्के गुनगुने पानी से स्पंजिंग की जा सकती है।

🚨 तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि—

* बच्चा 3 महीने से छोटा है और तापमान 100.4°F (38°C) या अधिक है।
* सांस लेने में परेशानी, बहुत तेज सांस या होंठ नीले पड़ना।
* बच्चा बहुत सुस्त हो, जगाने में कठिनाई हो या लगातार असामान्य व्यवहार करे।
* बार-बार उल्टी, दौरा, गर्दन अकड़ना या शरीर पर असामान्य दाने हों।
* बच्चा दूध/तरल बिल्कुल न ले रहा हो या पेशाब बहुत कम हो रहा हो।
* बुखार लगातार बना रहे या बच्चे की हालत बिगड़ती दिखाई दे।

याद रखें: केवल तापमान का अंक ही महत्वपूर्ण नहीं है—बच्चा कैसा व्यवहार कर रहा है, कितना दूध/पानी ले रहा है और सांस कैसी चल रही है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है *डॉ. सुमन कुमार झा. एमबीबीएस डीएनबी. सिटीकार्ट के सामने. स्टेशन रोड। जमुई*

बच्चे को मोटा देखकर घर में अक्सर एक बात बड़े प्यार से कही जाती है—“बच्चा है, जितना खाएगा उतना बढ़ेगा… अभी तो बढ़ने की उम...
28/08/2026

बच्चे को मोटा देखकर घर में अक्सर एक बात बड़े प्यार से कही जाती है—“बच्चा है, जितना खाएगा उतना बढ़ेगा… अभी तो बढ़ने की उम्र है।” लेकिन क्या हर बार ज्यादा खिलाना सच में प्यार है? या कभी-कभी यही प्यार अनजाने में बच्चे के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है?
#बच्चोंकीसेहत

सबसे पहले एक बात साफ समझिए—हर गोल-मटोल बच्चा मोटापे का शिकार नहीं होता और हर दुबला दिखने वाला बच्चा स्वस्थ हो, यह भी जरूरी नहीं। बच्चों में वजन का आकलन केवल देखकर नहीं किया जाता। उम्र, लिंग, लंबाई और वजन के आधार पर growth chart/BMI-for-age जैसे मानकों से बच्चे की growth को देखा जाता है। भारत में Indian Academy of Pediatrics (IAP) भी बच्चों की उम्र के अनुसार growth charts और BMI-for-age का इस्तेमाल करने की सलाह देती है।

अब जरा उस प्यार की बात करते हैं जो खाने की प्लेट में दिखाई देता है—“एक रोटी और खा लो”, “दूध पूरा खत्म करो”, “सब्जी नहीं खाई तो मिठाई नहीं मिलेगी”, “बच्चा कमजोर लग रहा है, इसे कुछ भी खिलाओ”… और सबसे खतरनाक लाइन—“मना मत करो, बच्चा है, खाने दो।”

बच्चे की भूख को समझना भी parenting का हिस्सा है। बच्चा हर दिन एक जैसी मात्रा में नहीं खाएगा। कभी ज्यादा भूख लगेगी, कभी कम। लेकिन अगर हम हर बार बच्चे के भूख और पेट के संकेतों को नजरअंदाज करके उसे खाने के लिए मजबूर करते रहें, तो उसकी natural appetite regulation प्रभावित हो सकती है। इसलिए लक्ष्य यह होना चाहिए कि बच्चे को पौष्टिक भोजन मिले, न कि बस ज्यादा भोजन मिले।

और एक बहुत जरूरी तथ्य—बच्चों में मोटापा सिर्फ “ज्यादा खाना” या “कम खेलना” भर नहीं है। WHO इसे एक जटिल समस्या मानता है, जिसमें खान-पान, physical activity, नींद, environment, genetics और सामाजिक परिस्थितियां सभी भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए किसी मोटे बच्चे या उसके माता-पिता को दोष देना medically सही approach नहीं है।

लेकिन ज्यादा calorie वाले processed foods, sugary drinks, बार-बार snacks और physical activity की कमी निश्चित रूप से जोखिम बढ़ा सकते हैं। WHO बच्चों के भोजन में फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और अन्य nutrient-rich foods को प्राथमिकता देने तथा ज्यादा sugar और energy-dense foods को सीमित करने की सलाह देता है।

एक और चौंकाने वाली बात—बच्चे का मोटापा केवल आज की समस्या नहीं हो सकता। Childhood obesity आगे चलकर type 2 diabetes, high blood pressure, abnormal cholesterol, fatty liver disease, sleep apnea और हड्डियों-जोड़ों की समस्याओं जैसे स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा है। साथ ही बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य और quality of life पर भी असर पड़ सकता है।

लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि बच्चे को diet पर डाल दें, खाना बंद करा दें या बार-बार उसका वजन तौलकर उसे “मोटा” कहें। बच्चे को शर्मिंदा करना इलाज नहीं है। American Academy of Pediatrics स्वस्थ वजन के लिए पूरे परिवार को साथ लेकर lifestyle और behavior में बदलाव करने पर जोर देती है, सिर्फ वजन कम करने पर नहीं।

तो माता-पिता क्या करें?

बच्चे की प्लेट में variety रखें—दाल, सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दूध/दही और उम्र के अनुसार protein-rich foods। मीठे पेय और अत्यधिक processed snacks को रोजमर्रा की आदत न बनने दें। बच्चे को रोज सक्रिय खेल और physical activity का मौका दें। पर्याप्त नींद भी उतनी ही जरूरी है। WHO बच्चों और किशोरों में नियमित physical activity और healthy sleep habits को obesity prevention का हिस्सा मानता है।

और सबसे जरूरी—बच्चे को खिलाइए जरूर, लेकिन हर बार “ज्यादा” नहीं; सही भोजन, सही मात्रा और सही आदतें दीजिए।

क्योंकि असली प्यार यह नहीं कि बच्चा हर बार प्लेट साफ करे…
असली प्यार यह है कि हम उसे ऐसी खाने-पीने और जीवनशैली की आदतें दें, जिन्हें वह स्वस्थ रहते हुए पूरी जिंदगी अपने साथ लेकर चले। ❤️

अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे का वजन उम्र और लंबाई के हिसाब से ज्यादा बढ़ रहा है, तो केवल देखकर फैसला न करें। Pediatrician से growth chart/BMI-for-age का सही assessment करवाएं।

- डॉ सुमन कुमार झा एमबीबीएस डीएनबी 🩺
A complete family clinic.Citykart k samne..station road jamui.सोमवार से शनिवार शाम 4 बजे से 8 बजे तक

क्या Leukoplakia मुँह का कैंसर है ?ल्यूकोप्लाकिया (Leukoplakia) मुँह की अंदरूनी सतह पर बनने वाला सफेद चकत्ता/पैच है, जो ...
25/08/2026

क्या Leukoplakia मुँह का कैंसर है ?
ल्यूकोप्लाकिया (Leukoplakia) मुँह की अंदरूनी सतह पर बनने वाला सफेद चकत्ता/पैच है, जो सामान्यतः रगड़ने से आसानी से नहीं हटता। यह हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन कुछ मामलों में कैंसर में बदलने का जोखिम हो सकता है।
🚬 तंबाकू, गुटखा, खैनी और smoking इसके महत्वपूर्ण risk factors हैं।
यदि मुँह में कोई सफेद दाग लगातार बना रहे, तो doctors /specialist से जांच कराना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर biopsy की जाती है .डॉ. सुमन कुमार झा (एमबीबीएस, डीएनबी)

 #बच्चोंकीसेहतनवजात बच्चे को जन्म के बाद जब धीरे-धीरे पीला होते देखा जाता है तो माता-पिता के मन में सबसे पहला सवाल आता ह...
24/08/2026

#बच्चोंकीसेहत
नवजात बच्चे को जन्म के बाद जब धीरे-धीरे पीला होते देखा जाता है तो माता-पिता के मन में सबसे पहला सवाल आता है—“बच्चे को पीलिया हो गया है, अब क्या करें?”

नवजात शिशुओं में पीलिया बहुत आम है। इसका सबसे सामान्य कारण जन्म के बाद बच्चे के शरीर में बिलीरुबिन का बढ़ना है, क्योंकि जन्म के शुरुआती दिनों में बच्चे का लीवर इसे पूरी तरह तेजी से बाहर नहीं निकाल पाता। ज्यादातर बच्चों में यह पीलिया सामान्य होता है और कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है।

लेकिन हर पीलिया सामान्य नहीं होता।

अगर बच्चे को जन्म के पहले 24 घंटे में ही पीलापन दिखाई देने लगे, पीलिया तेजी से बढ़ रहा हो, हथेली और तलवों तक पीलापन पहुंच जाए, बच्चा बहुत ज्यादा सुस्त हो, दूध ठीक से न पी रहा हो, बार-बार उल्टी कर रहा हो या पेशाब-पाखाना सामान्य न हो रहा हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

एक और जरूरी बात—सिर्फ बच्चे की त्वचा देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि बिलीरुबिन कितना है। जरूरत पड़ने पर बिलीरुबिन की जांच और बच्चे की उम्र के अनुसार उसका आकलन किया जाता है। कुछ बच्चों में बढ़ा हुआ बिलीरुबिन गंभीर समस्या पैदा कर सकता है, इसलिए समय पर पहचान बहुत जरूरी है।

पीलिया वाले बच्चे को पर्याप्त दूध पिलाना बेहद जरूरी है। केवल धूप में रखने को पीलिया का इलाज मानना सही नहीं है। जब बिलीरुबिन एक निश्चित स्तर से अधिक हो जाए तो डॉक्टर की सलाह पर फोटोथेरेपी जैसे उपचार की जरूरत पड़ सकती है।

याद रखिए—नवजात में पीलिया आम है, लेकिन “आम” होने का मतलब हमेशा “नजरअंदाज करने लायक” नहीं होता।

नवजात के पीलिया में सबसे जरूरी है सही समय पर सही जांच और सही निर्णय। ❤️

- डॉ सुमन कुमार झा (एमबीबीएस डीएनबी )...

सामान्य वायरल बुख़ार और खांसी ज़ुकाम में एंटीबायोटिक के उपयोग से , इन दवाओं का असर धीरे धीरे कम होता जा रहा है , एंटीबाय...
26/11/2025

सामान्य वायरल बुख़ार और खांसी ज़ुकाम में एंटीबायोटिक के उपयोग से , इन दवाओं का असर धीरे धीरे कम होता जा रहा है , एंटीबायोटिक लोग ,OTC ड्रग ( बिना सलाह ) के खा रहे है , आजकल तो colistin/ ferropenem/lizomac का ट्रेंड चल रहा है , लोग वायरल डाइरिया/बुख़ार और खांसी जुकाम में इतनी बड़ी बड़ी एंटीबायोटिक खा रहे है , मैं ख़ुद डॉक्टर होके परेशान हो जाता हूँ जब मरीज मेरे पास ये दवायें लेके आता है और कहता है सर आराम नहीं लग रहा है , एंटीबायोटिक बदल ले !! बाहर हर आदमी डॉक्टर बन के बैठा है और दवाई , राशन की तरह बिक रही है तो ऐसे ही दवाओ का असर कम हो जाएगा ।।
मेडिकल कॉलेज के जितने हॉस्पिटल है वहाँ ही एंटीबायोटिक का प्रोटोकॉल सही से फ़ॉलो होता है ।। बिना डॉक्टर की सलाह बिना एंटीबायोटिक का इस्तेमाल ना करें. जनहित में जारी 😀

इस बच्चे के एक हाथ में यूरिन बैग है, दूसरे में बिस्किट का पैकेट। ये अपनी 'डायलेसिस' का इंतज़ार कर रहा है!!इसी जगह 7 साल ...
18/10/2025

इस बच्चे के एक हाथ में यूरिन बैग है, दूसरे में बिस्किट का पैकेट। ये अपनी 'डायलेसिस' का इंतज़ार कर रहा है!!
इसी जगह 7 साल के एक दूसरे बच्चे को "जुवेनाइल डायबिटीज़" है, जो दिन में 3 दफ़े इंसुलिन लेता है!!
यहीं एक 6 साल की बच्ची को तैयार करते हुए उसकी माँ ने कहा,
"जब पैदा हुई थी, 650 ग्राम की थी, छोटी-सी... डॉक्टर ने कहा था — बचेगी नहीं।
पहले दो दिन वो जितनी दफ़े सांस लेती, मैं उसकी छाती पर उतनी दफ़े हाथ रखती...
आज सुबह से जब से उसे तैयार कर रही हूँ, वो दिन याद कर रही हूँ, इसलिए भावुक हो रही हूँ।"

तीनों इसी दुनिया की बातें हैं... असल बातें...!!!

दुनिया में कितने ऐसे लोग हैं, जो खामोशी से अपने हिस्से की लड़ाई लड़ रहे हैं —
उन चीज़ों के लिए जिनकी नेमत हमको, आपको हासिल है,
फिर भी वे तल्ख नहीं हैं, नाराज़ नहीं हैं...
और हम ज़िंदगी में कितना समय बेफ़ज़ूल के गरूर और तल्ख़ी में जाया कर देते हैं...!!

मकसद बस इतना कि यह पोस्ट पढ़ी जानी चाहिए, समझी जानी चाहिए!!
कभी अस्पताल भी आकर देखा करें — असली लड़ाई लड़ते मरीज़॥

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