Shri Krishna Neuro and Mental Health Clinic

Shri Krishna Neuro and Mental Health Clinic Complete treatment of all Neuropsychiatric problem
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समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की अनंत शुभकामनाएँ! 🇮🇳​आइए, इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर अपने देश को और अधिक शक्तिशाल...
15/08/2026

समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की अनंत शुभकामनाएँ! 🇮🇳
​आइए, इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर अपने देश को और अधिक शक्तिशाली, समृद्ध एवं स्वस्थ बनाने का संकल्प लें।
​श्री कृष्णा न्यूरो एवं मानसिक रोग चिकित्सालय, नईगंज, जौनपुर की ओर से आप सभी को 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ!
​ #स्वतंत्रतादिवस

29/07/2026

#आप सभी लोग श्री कृष्णा न्यूरो एवं मानसिक रोग चिकित्सालय की आठवीं वर्षगांठ पर सादर आमंत्रित है

29/07/2026

#सेवा_समर्पण_और_आपका_अटूट_विश्वास... 🙏
देशवासियों के अपार प्रेम और भरोसे के साथ, 'श्री कृष्णा न्यूरो एवं मानसिक रोग चिकित्सालय' निस्वार्थ मानव सेवा के 8 वर्ष पूरे कर रहा है। यह सफर आपके आशीर्वाद और मार्गदर्शन के बिना बिल्कुल अधूरा था।
मेरी हमेशा यही कोशिश रही है कि एक चिकित्सक के रूप में पूरी सत्यनिष्ठा और समर्पण के साथ समाज के हर वर्ग तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचा सकूं।
कल, 30 जुलाई (स्थापना दिवस) के शुभ अवसर पर आप सभी सपरिवार सादर आमंत्रित हैं। आइए, इस खास दिन पर प्रकृति को नमन करते हुए 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ें।
कृपा करके पधारें, नि:शुल्क पौधे लें और समाज को स्वस्थ व हरा-भरा बनाने के हमारे इस संकल्प में हमारा साथ दें। आपका स्नेह ही मेरी असली पूंजी है, इसे वर्षों-वर्षों तक ऐसे ही बनाए रखें।
📍 स्थान: नईगंज तिराहा (निकट पेट्रोल पम्प), जौनपुर
📞 संपर्क: 7991380815, 7991480816
EkPedMaaKeNaam MentalHealthMatters

01/07/2026

#डॉक्टर्स_डे_पर_खास_बातचीत:

* #विशेष_रिपोर्ट: मानसिक स्वास्थ्य—एक उभरता हुआ वैश्विक संकट और वैज्ञानिक समाधान की नई उम्मीद*

​जौनपुर: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ एक महामारी का रूप ले चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, आज दुनिया में हर आठ में से एक व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार के साथ जी रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का वैश्विक आर्थिक बोझ 6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है, जो कैंसर, मधुमेह और सांस की बीमारियों के संयुक्त आर्थिक बोझ से भी अधिक होगा।
​'श्री कृष्णा न्यूरो एवं मानसिक रोग चिकित्सालय' के डायरेक्टर, डॉ. हरिनाथ यादव (एम.बी.बी.एस., एम.डी. न्यूरोसाइकियाट्री) ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। डॉ. यादव के साथ हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि डिप्रेशन, एंग्जायटी, सिजोफ्रेनिया, मेनिया और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है।
​डिजिटल युग और युवाओं पर मानसिक प्रहार
आज की युवा पीढ़ी 'डिजिटल एडिक्शन' के मकड़जाल में फंसी है। डॉ. यादव ने बताया कि मोबाइल इंटरनेट, सोशल मीडिया, और ऑनलाइन गेमिंग की लत युवाओं में एकाग्रता की कमी, नींद के विकार और अवसाद को बढ़ावा दे रही है। शोध बताते हैं कि किशोर जो प्रतिदिन तीन घंटे से अधिक सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, उनमें अवसाद और एंग्जायटी का खतरा दोगुना हो जाता है। इसके अलावा, कार्यशील पीढ़ी (Working Population) में अत्यधिक तनाव और एंग्जायटी का प्रकोप बढ़ रहा है, जबकि बुजुर्ग आबादी में डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) जैसी समस्याएँ एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं।
​अत्याधुनिक उपचार: श्री कृष्णा न्यूरो में विज्ञान का समावेश
डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि मानसिक बीमारियों को कलंक या भूत-प्रेत का साया समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। 'श्री कृष्णा न्यूरो एवं मानसिक रोग चिकित्सालय' में इन गंभीर बीमारियों का उपचार अब अत्यंत आधुनिक वैज्ञानिक विधियों से संभव है। यहाँ बिना किसी चीर-फाड़ के इलाज के लिए निम्नलिखित अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं:
​rTMS (रिपिटिटिव ट्रांसक्रानियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन): मस्तिष्क के उन हिस्सों को सक्रिय करने के लिए प्रभावी, जो मूड और व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।
​बायोफीडबैक (Biofeedback): यह तकनीक मरीज को अपनी शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करना सिखाती है।
​मल्टी बिहेवियर थेरेपी (MBT): व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए एक विशेष उपचार विधि।
​सटीक जांच: रोग की सही पहचान के लिए संस्थान में EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफालोग्राम) और NCS (नर्व कंडक्शन स्टडी) जैसी आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं।
​डॉ. यादव ने अंत में यह संदेश दिया कि समय पर वैज्ञानिक उपचार ही एकमात्र रास्ता है जिससे हम इस मानसिक महामारी को मात देकर एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण कर सकते हैं।

31/05/2026

#विश्व_तंबाकू_निषेध_दिवस_2026 |
#तंबाकू_नशा_मुक्त_भारत
​"एक जीवन, एक अवसर, तंबाकू-मुक्त हो हर घर!"
​आज 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' है। एक न्यूरो एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ होने के नाते, मेरा यह कर्तव्य है कि मैं आपको तंबाकू के उस जाल के बारे में जागरूक करूँ, जो न सिर्फ आपके शरीर को बल्कि आपके मस्तिष्क और खुशहाल परिवार को भी धीरे-धीरे खत्म कर रहा है।
​आइए आज इस गंभीर मुद्दे को गहराई से समझें:
​📊 तंबाकू का ग्लोबल और नेशनल तांडव (क्रूर आंकड़े)
​वैश्विक यूज़र्स: पूरी दुनिया में 120 करोड़ (1.2 बिलियन) से अधिक लोग तंबाकू के जाल में फंसे हैं।
​दुनिया भर में मौतें: हर साल तंबाकू के कारण 80 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवाते हैं। इसमें 13 लाख वो बेकसूर हैं जो खुद नशा नहीं करते (पैसिव स्मोकिंग)।
​भारत की स्थिति: भारत में लगभग 27 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं, और यहाँ हर साल 13 लाख से अधिक मौतें सिर्फ तंबाकू की वजह से होती हैं।
​🧠 न्यूरो-साइकियाट्रिक सच: आप नशे में लिप्त क्यों होते हैं?
​टोबैको यूज़ डिसऑर्डर (To***co Use Disorder): मेडिकल साइंस (DSM-5) के अनुसार तंबाकू का नशा कोई शौक नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक बीमारी है।
​न्यूरोलॉजिकल हैकिंग: निकोटीन मात्र 7 सेकंड में दिमाग के 'रिवॉर्ड पाथवे' पर कब्जा कर लेता है और डोपामाइन (खुशी देने वाला न्यूरोकेमिकल) का नकली चक्र चलाता है।
​दिमाग की मजबूरी: धीरे-धीरे दिमाग के रिसेप्टर्स इस जहर के आदी हो जाते हैं। जब तंबाकू नहीं मिलता, तो दिमाग में तीव्र छटपटाहट, एंग्जायटी और चिड़चिड़ापन शुरू हो जाता है, जिसे निकोटीन विड्रॉल (Withdrawal) कहते हैं।
​⚠️ पूरा सिस्टम तबाह: मानसिक और शारीरिक बीमारियां
​1. मानसिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियां (Mental & Neuro Problems):
​ब्रेन स्ट्रोक: खून को गाढ़ा और नसों को सिकोड़कर यह दिमाग में थक्के जमाता है, जिससे पैरालिसिस (लकवा) या स्ट्रोक होता है।
​डिमेंशिया (भूलने की बीमारी): लंबे समय तक सेवन से सोचने-समझने की क्षमता खत्म होती है और अल्जाइमर का खतरा 40% तक बढ़ जाता है।
​गंभीर डिप्रेशन: यह दिमाग के नेचुरल सेरोटोनिन और डोपामाइन को सुखा देता है, जिससे इंसान क्लिनिकल डिप्रेशन का शिकार हो जाता है।
​2. शारीरिक बीमारियां (Physical Problems):
​मल्टी-ऑर्गन कैंसर: मुँह, जीभ, गले, भोजन नली और फेफड़ों का जानलेवा कैंसर।
​साइलेंट हार्ट अटैक: धमनियों को ब्लॉक कर बेहद कम उम्र में दिल का दौरा।
​नपुंसकता और बांझपन: पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होना और महिलाओं में इनफर्टिलिटी।
​🩺 डॉक्टर की सलाह: इलाज संभव है!
​चूंकि यह एक दिमागी बीमारी है, इसलिए इसे सिर्फ 'कसम खाने' से छोड़ना मुश्किल होता है। इसके लिए वैज्ञानिक इलाज उपलब्ध है:
​निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT): पैच या गम के जरिए वैज्ञानिक तरीके से लत छुड़ाना।
​एंटी-क्रैविंग दवाएं: न्यूरो-साइकियाट्री में ऐसी दवाएं हैं जो तंबाकू की तीव्र इच्छा (तलब) को दिमाग के स्तर पर ही ब्लॉक कर देती हैं।
​बिहेवियरल थेरेपी (CBT): काउंसिलिंग द्वारा मरीज को मानसिक रूप से मजबूत बनाना।
​"तंबाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन किसी विशेषज्ञ की देखरेख में यह पूरी तरह मुमकिन है। आज ही इस मानसिक गुलामी से खुद को आजाद करें।"
​सादर,
डॉ. हरिनाथ यादव
एम.बी.बी.एस., एम.डी. (न्यूरोसाइकियाट्री) बी.एच.यू.
पूर्व सीनियर रेजिडेंट, एस.एम.सी. उन्नाव
पूर्व रेजिडेंट इमरजेंसी मेडिसिन (एम्स नई दिल्ली), एफ.आई.पी.एस.
न्यूरो एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ
​🏥 श्री कृष्णा न्यूरो एवं मानसिक रोग चिकित्सालय
📍 नईगंज तिराहा, जौनपुर
📞 संपर्क: 7991380815, 7991480816
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Varanasi/Lucknow Road, Naiganj
Jaunpur
222002

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