27/12/2025
माइग्रेन (आधे सिर का दर्द) – आयुर्वेद के अनुसार कारण व उपचार
आयुर्वेद में माइग्रेन को “अर्धावभेदक” कहा गया है। यह मुख्यतः वात दोष के साथ पित्त दोष के असंतुलन से उत्पन्न होता है। इसलिए इसका उपचार केवल दर्द दबाने से नहीं, बल्कि कारण को ठीक करने से होता है।
🔴 माइग्रेन के प्रमुख कारण (आयुर्वेद अनुसार)
1️⃣ वात दोष वृद्धि
अनियमित दिनचर्या
देर रात जागना
अधिक मोबाइल/स्क्रीन देखना
मानसिक तनाव
2️⃣ पित्त दोष वृद्धि
तीखा, खट्टा, तला-भुना भोजन
धूप, गर्मी
क्रोध, चिड़चिड़ापन
3️⃣ पाचन की गड़बड़ी (अग्निमांद्य)
गैस, कब्ज
समय पर भोजन न करना
4️⃣ हार्मोनल असंतुलन
महिलाओं में पीरियड्स से पहले/बाद दर्द
5️⃣ मानसिक कारण
चिंता, अवसाद, दबा हुआ तनाव
🧠 माइग्रेन के लक्षण
▪️ आधे सिर में तेज दर्द
▪️ उल्टी या मितली
▪️ रोशनी व आवाज से परेशानी
▪️ आंखों में जलन
▪️ चक्कर
🌿 आयुर्वेदिक उपचार (Root Cause Treatment)
✔️ 1. शोधन चिकित्सा (Detox)
नस्य कर्म – नाक के द्वारा औषधि
वमन / विरेचन – दोषों की शुद्धि
(रोगी की प्रकृति अनुसार)
✔️ 2. शमन चिकित्सा
वात-पित्त संतुलक औषधियाँ
मस्तिष्क को शांत करने वाली रसायन चिकित्सा
✔️ 3. आहार (Diet)
हल्का, सुपाच्य भोजन
गर्म, ताजा खाना
ज्यादा तेल, मसाले, फास्ट फूड से परहेज
✔️ 4. विहार (Lifestyle)
नियमित नींद
सुबह का समय पर उठना
योग, प्राणायाम, ध्यान
🧘♂️ माइग्रेन में लाभकारी योग
अनुलोम-विलोम
भ्रामरी
शवासन
⚠️ क्या न करें
❌ खाली पेट रहना
❌ बार-बार पेन किलर
❌ देर रात जागना
❌ अत्यधिक चाय-कॉफी
✅ निष्कर्ष (वैद्य की सलाह)
माइग्रेन लाइलाज नहीं है,
लेकिन धैर्य, अनुशासन और सही आयुर्वेदिक उपचार आवश्यक है।
दर्द को नहीं, कारण को ठीक करें — यही आयुर्वेद है।
DrAmit Gupta
Tanav clinic ayu. Neuro spine care centre 9519036026