17/08/2025
मनुस्मृति के सपोर्टर आ जाओ दम हो तो
काटो मेरी पोस्ट को..
===========
मनुस्मृति का श्लोक है:
“यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता:.
यत्रैतास्तु न पूज्यंते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:.”
-मनु 3/56
अर्थात जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवताओं का निवास होता है और
जहां इन की पूजा नहीं होती, वहां सब क्रियाएं निष्फल होती हैं.
------------------------------
बस इस श्लोक पर हाय तोब करने वाले====
----------------------------------------
ऋग्वेद में लिखा है:
इंद्र ने स्वयं कहा, “स्त्री के मन को शिक्षित नहीं किया
जा सकता. उस की बुद्धि तुच्छ होती है.” ( ऋ. 8/33/17 ).
इसी पुस्तक में अन्यत्र लिखा है:
“स्त्रियों के साथ मैत्री नहीं हो सकती. इन के दिल लक्कड़बम्घों के दिलों
से क्रूर होते हैं.” ( ऋ. 10/95/15 )
------------------------------------------------
अब हम 'मनुस्मृति ' के कुछ एलोक प्रस्तुत करते हैं जिन से मनु के नारी विषयक
विचार पूर्णतः स्पष्ट हो जाएंगे और सामान्य व्यक्ति को ज्ञात हो जाएगा कि जहां
नारियों की पूजा होती है....कह कर उस की प्रशंसा करने वाले मनु की, नारियों के
प्रति कैसी राय थी.
=
1=पुरुषों को खराब करना स्त्रियों का स्वभाव ही है, अतः बुद्धिमानों को इन
से बचना चाहिए. ( 2/213 )
2=पुरुष विद्वान हो, चाहे अविद्वान, स्त्रियां उसे बुरे रास्ते पर डाल देती हैं.
( 2/214 )
3=चाहे माता हो, चाहे बहन हो, चाहे अपनी लड़की हो, इन के पास एकांत
में नहीं बैठना चाहिए. इंद्रियां कई बार विद्वानों को भी खींच कर बुरे रास्ते
पर ले जाती हैं. ( 2/215 )
4=ललाई लिए भूरे रंग वाली, छः उंगलियों वाली, ज्यादा बालों वाली, बिना
बालों वाली, ज्यादा बोलने वाली स्त्री के साथ विवाह न करे. ( 3/8 )
( वे क्या करें? क्या मातापिता उन्हें सारी उमर घर में रख सकेंगे ? क्या वे आत्महत्या कर लें ? क्या वे पेशा करने वाली वेश्याएं बन जाएं? )
5=जिन का कोई भाई न हो, उस के साथ विवाह न करे. ( 3,11 )
( इस में उस बेचारी लड़की का क्या कसूर है कि उस का कोई भाई नहीं है?)
6=पुरुषों को दिनदात स्त्रियों की देखभाल करनी चाहिए. ( 9/2 )
7=कुमारावस्था में पिता उस की देखभाल करता है, युवावस्था में पति और
बुढ़ापे में पुत्र. नारी स्वतंत्र नहीं की जानी चाहिए. स्त्रियों को जराजरा सी
बातों से बचाना चाहिए, नहीं तो दोनों कुलों की बदनामी होती है.
( 9/3,5 )
8= स्त्रियों को घर के कामों और धर्म के कार्यों में व्यस्त रखना चाहिए ताकि
वे खाली समय प्राप्त न कर सकें. ( 9/11 )
9=स्त्रियों को बचा कर रखना चाहिए. वे सुंदर या कुरूप का भी ध्यान नहीं
करतीं. वे किसी भी पुरुष की हो जाती हैं. ( 9/14 )
10= स्त्रियों में क्रोध, कुटिलता, द्वेष और बुरे कामों में रुचि स्वभाव से ही होती
है. (9/17)
11= स्त्रियों के संस्कार वेदमंत्रों से नहीं करने चाहिए. वे मूर्ख होती हैं. वे अशुभ
होती हैं. (9/18 )
12= विधवा स्त्री का दोबारा विवाह नहीं करना चाहिए. यदि किया जाए तो धर्म
का नाश होगा. ( 9/64 )