Ayurveda&Acupressure

Ayurveda&Acupressure Treatment of acute to chronic disease by natural plant essence and electro homeopathic medicine and totally pain management by acupuncture, acupressure.

26/11/2022
24/07/2022

12. गंजापन :

सरसों के तेल में अपामार्ग के पत्तों को जलाकर मसल लें और मलहम बना लें। इसे गंजे स्थानों पर नियमित रूप से लेप करते रहने से पुन: बाल उगने की संभावना होगी।

13. दांतों का दर्द और गुहा या खाँच (cavity) :

इसके 2-3 पत्तों के रस में रूई का फोया बनाकर दांतों में लगाने से दांतों के दर्द में लाभ पहुंचता है तथा पुरानी से पुरानी गुहा या खाँच को भरने में मदद करता है।

14. खुजली :

अपामार्ग के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल और फल) को पानी में उबालकर काढ़ा तैयार करें और इससे स्नान करें। नियमित रूप से स्नान करते रहने से कुछ ही दिनों cavity में खुजली दूर जाएगी।

15. आधाशीशी या आधे सिर में दर्द :

इसके बीजों के चूर्ण को सूंघने मात्र से ही आधाशीशी, मस्तक की जड़ता में आराम मिलता है। इस चूर्ण को सुंघाने से मस्तक के अंदर जमा हुआ कफ पतला होकर नाक के द्वारा निकल जाता है और वहां पर पैदा हुए कीड़े भी झड़ जाते हैं।

16. ब्रोंकाइटिस :

जीर्ण कफ विकारों और वायु प्रणाली दोषों में अपामार्ग (चिरचिटा) की क्षार, पिप्पली, अतीस, कुपील, घी और शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से वायु प्रणाली शोथ (ब्रोंकाइटिस) में पूर्ण लाभ मिलता है।

17. खांसी :

खांसी बार-बार परेशान करती हो, कफ निकलने में कष्ट हो, कफ गाढ़ा व लेसदार हो गया हो, इस अवस्था में या न्यूमोनिया की अवस्था में आधा ग्राम अपामार्ग क्षार व आधा ग्राम शर्करा दोनों को 30 मिलीलीटर गर्म पानी में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से 7 दिन में बहुत ही लाभ होता है।

18. गुर्दे का दर्द :

अपामार्ग (चिरचिटा) की 5-10 ग्राम ताजी जड़ को पानी में घोलकर पिलाने से बड़ा लाभ होता है। यह औषधि मूत्राशय की पथरी को टुकड़े-टुकड़े करके निकाल देती है। गुर्दे के दर्द के लिए यह प्रधान औषधि है।

19. गुर्दे के रोग :

5 ग्राम से 10 ग्राम चिरचिटा की जड़ का काढ़ा 1 से 50 ग्राम सुबह-शाम मुलेठी, गोखरू और पाठा के साथ खाने से गुर्दे की पथरी खत्म हो जाती है । या 2 ग्राम अपामार्ग (चिरचिटा) की जड़ को पानी के साथ पीस लें। इसे प्रतिदिन पानी के साथ सुबह-शाम पीने से पथरी रोग ठीक होता है।

20. दमा या अस्थमा :

चिरचिटा की जड़ को किसी लकड़ी की सहायता से खोद लेना चाहिए। ध्यान रहे कि जड़ में लोहा नहीं छूना चाहिए। इसे सुखाकर पीस लेते हैं। यह चूर्ण लगभग एक ग्राम की मात्रा में लेकर शहद के साथ खाएं इससे श्वास रोग दूर हो जाता है।
अपामार्ग (चिरचिटा) का क्षार 0.24 ग्राम की मात्रा में पान में रखकर खाने अथवा 1 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से छाती पर जमा कफ छूटकर श्वास रोग नष्ट हो जाता है।

24/07/2022

यह पौधा पेट की लटकती चर्बी, सड़े हुए दाँत, गठिया, आस्थमा, बवासीर, मोटापा, गंजापन, किडनी आदि 20 रोगों के लिए किसी वरदान से कम नही

आज हम आपको ऐसे पौधे के बारे में बताएँगे जिसका तना, पत्ती, बीज, फूल, और जड़ पौधे का हर हिस्सा औषधि है, इस पौधे को अपामार्ग या चिरचिटा (Chaff Tree), लटजीरा कहते है। अपामार्ग या चिरचिटा (Chaff Tree) का पौधा भारत के सभी सूखे क्षेत्रों में उत्पन्न होता है यह गांवों में अधिक मिलता है खेतों के आसपास घास के साथ आमतौर पाया जाता है इसे बोलचाल की भाषा में आंधीझाड़ा या चिरचिटा (Chaff Tree) भी कहते हैं-अपामार्ग की ऊंचाई लगभग 60 से 120 सेमी होती है आमतौर पर लाल और सफेद दो प्रकार के अपामार्ग देखने को मिलते हैं-सफेद अपामार्ग के डंठल व पत्ते हरे रंग के, भूरे और सफेद रंग के दाग युक्त होते हैं इसके अलावा फल चपटे होते हैं जबकि लाल अपामार्ग (RedChaff Tree) का डंठल लाल रंग का और पत्तों पर लाल-लाल रंग के दाग होते हैं।

इस पर बीज नुकीले कांटे के समान लगते है इसके फल चपटे और कुछ गोल होते हैं दोनों प्रकार के अपामार्ग के गुणों में समानता होती है फिर भी सफेद अपामार्ग(White chaff tree) श्रेष्ठ माना जाता है इनके पत्ते गोलाई लिए हुए 1 से 5 इंच लंबे होते हैं चौड़ाई आधे इंच से ढाई इंच तक होती है- पुष्प मंजरी की लंबाई लगभग एक फुट होती है, जिस पर फूल लगते हैं, फल शीतकाल में लगते हैं और गर्मी में पककर सूख जाते हैं इनमें से चावल के दानों के समान बीज निकलते हैं इसका पौधा वर्षा ऋतु में पैदा होकर गर्मी में सूख जाता है।

अपामार्ग तीखा, कडुवा तथा प्रकृति में गर्म होता है। यह पाचनशक्तिवर्द्धक, दस्तावर (दस्त लाने वाला), रुचिकारक, दर्द-निवारक, विष, कृमि व पथरी नाशक, रक्तशोधक (खून को साफ करने वाला), बुखारनाशक, श्वास रोग नाशक, भूख को नियंत्रित करने वाला होता है तथा सुखपूर्वक प्रसव हेतु एवं गर्भधारण में उपयोगी है।
चिरचिटा या अपामार्ग (Chaff Tree) के 20 अद्भुत फ़ायदे :
1. गठिया रोग :

अपामार्ग (चिचड़ा) के पत्ते को पीसकर, गर्म करके गठिया में बांधने से दर्द व सूजन दूर होती है।

2. पित्त की पथरी :

पित्त की पथरी में चिरचिटा की जड़ आधा से 10 ग्राम कालीमिर्च के साथ या जड़ का काढ़ा कालीमिर्च के साथ 15 ग्राम से 50 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से पूरा लाभ होता है। काढ़ा अगर गर्म-गर्म ही खायें तो लाभ होगा।

3. यकृत का बढ़ना :

अपामार्ग का क्षार मठ्ठे के साथ एक चुटकी की मात्रा से बच्चे को देने से बच्चे की यकृत रोग के मिट जाते हैं।

4. लकवा :

एक ग्राम कालीमिर्च के साथ चिरचिटा की जड़ को दूध में पीसकर नाक में टपकाने से लकवा या पक्षाघात ठीक हो जाता है।

5. पेट का बढ़ा होना या लटकना :

चिरचिटा (अपामार्ग) की जड़ 5 ग्राम से लेकर 10 ग्राम या जड़ का काढ़ा 15 ग्राम से 50 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम कालीमिर्च के साथ खाना खाने से पहले पीने से आमाशय का ढीलापन में कमी आकर पेट का आकार कम हो जाता है।

6. बवासीर :

अपामार्ग की 6 पत्तियां, कालीमिर्च 5 पीस को जल के साथ पीस छानकर सुबह-शाम सेवन करने से बवासीर में लाभ हो जाता है और उसमें बहने वाला रक्त रुक जाता है।
खूनी बवासीर पर अपामार्ग की 10 से 20 ग्राम जड़ को चावल के पानी के साथ पीस-छानकर 2 चम्मच शहद मिलाकर पिलाना गुणकारी हैं।

7. मोटापा :

अधिक भोजन करने के कारण जिनका वजन बढ़ रहा हो, उन्हें भूख कम करने के लिए अपामार्ग के बीजों को चावलों के समान भात या खीर बनाकर नियमित सेवन करना चाहिए। इसके प्रयोग से शरीर की चर्बी धीरे-धीरे घटने भी लगेगी।

8. कमजोरी :

अपामार्ग के बीजों को भूनकर इसमें बराबर की मात्रा में मिश्री मिलाकर पीस लें। 1 कप दूध के साथ 2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करने से शरीर में पुष्टता आती है।

9. सिर में दर्द :

अपामार्ग की जड़ को पानी में घिसकर बनाए लेप को मस्तक पर लगाने से सिर दर्द दूर होता है।

10. संतान प्राप्ति :

अपामार्ग की जड़ के चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ मासिक-स्राव के बाद नियमित रूप से 21 दिन तक सेवन करने से गर्मधारण होता है। दूसरे प्रयोग के रूप में ताजे पत्तों के 2 चम्मच रस को 1 कप दूध के साथ मासिक-स्राव के बाद नियमित सेवन से भी गर्भ स्थिति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

11. मलेरिया :

अपामार्ग के पत्ते और कालीमिर्च बराबर की मात्रा में लेकर पीस लें, फिर इसमें थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर मटर के दानों के बराबर की गोलियां तैयार कर लें। जब मलेरिया फैल रहा हो, उन दिनों एक-एक गोली सुबह-शाम भोजन के बाद नियमित रूप से सेवन करने से इस ज्वर का शरीर पर आक्रमण नहीं होगा। इन गोलियों का दो-चार दिन सेवन पर्याप्त होता है।

11/04/2022


बीमारियों का किलर, स्ट्रांग इम्युनिटी:-

💚रोजाना एक सेब डॉक्टर से दूर यानी रोगों से दूर रखता है। यह बात सौ फीसदी सच है, लेकिन इसके अलावा भी कुछ खास पौष्टिक तत्व हैं, जो आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। अगर आप चाहती हैं, कि आपका इम्यून सिस्टम दुरुस्त रहे तो रोज आपकी प्लेट रंगीन फलों और सब्जियों से भरी होनी चाहिए।

💛दही
अगर आप अभी तक दही सि़र्फ लस्सी से जोड़कर देखती हैं और इसे केवल स्वाद के लिए खाती हैं तो अब नियमित रूप से खाना शुरू कर दें।
दही में चमत्कारी गुण होते हैं जो न केवल आपको फिट रखते हैं, कई गंभीर रोगों से भी बचाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें प्रोबायोटिक्स या लाइव ऐक्टिव कल्चर्स पाया जाता है, जो आंतों की समस्या और इन्फेक्शन को दूर रखने में मदद करता है।
शोध से यह साबित हो चुका है कि देशी गाय के दूध से बना दही रोजाना 80-100 ग्राम दही खाने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

💛ओट्स और बार्ली
इनमें बीटा ग्लुकैन होता है, जो एक प्रकार का फाइबर होता है। इसके अलावा इसमें एंटीमाइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
मात्रा: एक बाउल रोजाना।

💛लहसुन
इसमें एलिसिन पाया जाता है, जो इन्फेक्शन और बैक्टीरिया का मुकाबला करता है।
एक शोध में पाया गया कि लहसुन का सेवन नियमित करने वालों को जुकाम जल्दी नहीं होता।
शोध से यह भी पता चला है कि हफ्ते में 6 कली से अधिक लहसुन खाने वालों में कोलोरेक्टल कैंसर की आशंका 30 प्रतिशत और स्टमक कैंसर की 50 प्रतिशत कम होती है।
मात्रा: दिन में 2 कली लहसुन

💛शकरकंद
आपकी त्वचा को स्वस्थ और मजबूत बनाने के लिए विटमिन ए की जरूरत होती है।
शकरकंद में विटमिन ए पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
शरीर में विटमिन ए पाने का सबसे बेहतरीन उपाय यह है कि अपने आहार में बीटा कैरोटिन युक्त चीजें शामिल करें जैसे कि शकरकंद।
बीटा कैरोटिन हमारे शरीर में विटमिन ए में बदल जाता है।
मात्रा: आधा कप सर्विग

💛मशरूम
इम्यून सिस्टम को मजबूत के लिए मशरूम कुदरत का वरदान है। मशरूम व्हाइट ब्लड सेल्स को बढ़ाता और सक्रिय कर देता है। इस तरह संक्रमण बहुत जल्द ही दूर हो जाता है।
मशरूम में ग्लुकैन और बीटा दोनों पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
शिटाके और रेइशी मशरूम में सबसे अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले तत्व व एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं।
मात्रा.-हफ्ते में दो-तीन बार 100 ग्राम मशरूम थोड़े से तेल में भून कर खाने से अधिक लाभ देगा।

💛काली मिर्च
रोजाना 2 काली मिर्च को पीसकर एक गिलास पानी मे आधा रह जाने तक उबाले, छानकर पिये
सर्दी के मौसम में सबसे अच्छा है

इलाज से बेहतर बचाव है
स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े
धन्यवाद
🙏

11/04/2022

🌹पित्त पथरी का घरेलू इलाज

🌹1) सुबह और शाम पथरी चट
पौधे के तीन पत्तों को धो के रोज सुबह और शाम को खाली पेट मे चबा चबा कर खा ले ऊपर से थोड़ा पानी पी ले ( 3 सुबह और 3 शाम) ऐसा लगातार 20-25 दिनों तक करें, यकीन मानिए आपके शरीर में बन रही पथरी टूटकर बाहर आ जाएगी।

🌹2) प्याज को कतरकर जल से धोकर उसका 20 ग्राम रस निकाल कर उसमें 50 ग्राम मिश्री मिलाकर पिलाने से पथरी टूट कर पेशाब के द्वारा बाहर निकल जाती है।

🌹3) मूली का रस 25 ग्राम व यवक्षार 1 ग्राम दोनों को मिलाकर रोगी को पिलायें। पथरी गलकर निकल जायेगी।

🌹4) नीबू का रस 6 ग्राम, कलमी शोरा 4 रत्ती, पिसे तिल 1 ग्राम (यह खुराक की मात्रा है) शीतल जल के साथ दिन में 1 या 2 बार 21 दिन तक सेवन कराने से पथरी गल जाती है।

🌹5)नारियल का पानी और एक नीम्बू ,भगवान का नाम जप करके पीयो कुछ दिन अपने आप पथरी निकाल जाती है

❤❤जीरा:-💛पित्त के सभी रोगों के लिए रामबाण औषधि है💛पेट मे गैस की समस्या हो,जीरा सेवन करें💛पेट मे जलन हो, तो जीरा ले💛खट्टी...
28/03/2022

❤❤
जीरा:-

💛पित्त के सभी रोगों के लिए रामबाण औषधि है

💛पेट मे गैस की समस्या हो,जीरा सेवन करें

💛पेट मे जलन हो, तो जीरा ले

💛खट्टी डकारें आती हो तो जीरा ले

💛उल्टी आती हो तो जीरा ले

💛एसिडिटी हो तो जीरा सेवन करे

💛खानां ठीक से ना पचता हो तो जीरा सेवन करे

💛कभी भी दाल के साथ दही का सेवन ना करें क्योंकि दोनो की तासीर अलग है, यदि करना है तो तासीर एक करे, दही में जीरा भूनकर या अजवाइन भून कर मिलाए

💙जीरा लेने की विधि:-
एक कप पानी ले, उसमे आधा चम्मच जीरा डालें और खूब खौलाएं, फिर उसे ठंडा कर ले और पानी पी ले और जीरा भी चबा कर खाये, 2-3 माह में सभी रोग समाप्त कर देगा

💜विशेष:-
गर्भवती महिलाएं जीरा सेवन ना करें

इलाज से बेहतर बचाव है
स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े
धन्यवाद
🙏

26/03/2022

❤❤
नमक:-

💚दो तरीक़े के होते है, एक समुद्री नमक जो समुद्र से बनता है और एक पहाड़ी नमक अर्थात सेंधा या काला नमक

💜तीन ही नमक खाने योग्य है, सेंधा, काला फिर खड़ा नमक।

💛आयोडीन नमक में 4 पोषक तत्व है और 3 जहर है

💛सेंधा नमक में 94 पोषक तत्व है

💛काले नमक में 80 पोषक तत्व है

💙समुद्री नमक में कम्पनियां अतिरिक्त आयोडीन डालती है, जो शरीर के लिए बेहद खतरनाक है

💙आयोडीन सभी नमक में जरूरत के अनुसार उपलब्ध है, फिर अतरिक्त आयोडीन की आवश्यकता क्यों

💙समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप एव शुगर जैसी खतरनाक बीमारियाँ , लकवा ,नपुंसकता ,बीपी, एसिड बनना, आंखों के रोग ,घुटनो का दर्द आदि गम्भीर रोग आते है

💙समुद्री नमक अम्लीय होता है,48 रोग आते है

💙समुद्री नमक से थाइराइड की बीमारी आती है, हार्ट अटैक की समस्या आती है

💙सेंधा नमक क्षारीय(ALKALINE)है

💙विदेशों में आयोडीन युक्त नमक पूर्णतय प्रतिबंधित है

💙दालों में भी आयोडीन होता है, आयोडीन की कमी दाल भी पूरा करती है

💙कभी भी कोई भी नमक सब्जी में ऊपर से या अलग से डालकर ना खायें,यह बहुत खतरनाक है

💙यदि ऊपर से कोई नमक खानां है तो सिर्फ काला नमक ही खाएं

💙जिन को शरीर मे शुक्राणु आदि कम बनते है, सेंधा नमक खाये,

💜निम्न रक्तचाप में आधा चमच्च नमक और नींबू का रस, गुड़, 1 गिलास पानी मे घोले और पिये, रक्तचाप सामान्य होना शुरू हो जाएगा

💜जिसे उच्च रक्तचाप की समस्या हो वह एक बाल्टी पानी मे 100 ग्राम नमक मिलाकर रोज स्नान करे, लेकिन नमक का पानी कभी सर पर ना डाले,साबुन ना लगाए, और स्नान के बाद नमक ना पोछे, हफ्ते में 3 बार करे एक महीने में समस्या खत्म हो जाएगी

💛सेंधा नमक बाजार से खड़ा हुआ लाये और घर मे पीसकर ही शुद्ध बनाये

💛किडनी फेलियर के मरीज को कोई भी नमक 3 माह के लिए बन्द करें, है सिर्फ कभी कभी सेंधा नमक के ही व्यंजन दे

इलाज से बेहतर बचाव है
स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े
धन्यवाद

23/03/2022

❤❤
वात पित्त कफ को सम रखने के एव ठीक करने के सरल उपाय:-

💚जीवन में वात पित्त और कफ के बिगड़ने पर ही रोग आते है
-वात शरीर मे सुबह को बढ़ता है
-पित्त शरीर मे दोपहर को बढ़ता है
-कफ शरीर मे रात को बढ़ता है

-नाभि से लेकर पैरों तक वात कर रोग है
-नाभि से लेकर छाती तक पित्त के रोग है
-छाती से लेकर सिर तक कफ के रोग है

💛इन तीनो दोषों को सम पर रखने के सरल उपाय, यदि कोई खानपान में थोड़ा सा बदलाव करे तो जीवनपर्यंत निरोगी रह सकता है

💜वात:-
-तेल शुद्ध खाये,सबसे अच्छा सरसों है
-दूध देशी गाय का शुद्ध खाये
-संतरा, मौसमी, गन्ने का जूस ,टमाटर, अंगूर आदि खाये

💜पित्त:-
-देशी गाय का घी शुद्ब खाहे
-छाछ का सेवन करे
-दोपहर को भोजन में अजवाइन जरूर डाले
-अजवाइन नही डालते हो तो भोजन के बाद एक चुटकी अजवाइन काले नमक के साथ खाएं
-काले जीरे का प्रयोग करे
हींग का प्रयोग करे
-धनिया का प्रयोग करें, हरा हो या सूखा

💜कफ:-
-गुड़ खाये
-शहद खाये
-सोंठ खाये
-सौंफ खाये
-पान का पत्त्ता खाए

💙आवंला इन तीनो दोषों को अकेला ही ठीक रखता है

💛देशी गाय का गौमूत्र वात और कफ के रोग एव कुछ आयुर्वेदिक उपाय के साथ पित्त के रोग ,इन तीनों दोषों से होने वाले 148 रोगों को अकेला ही ठीक कर देता है

इलाज से बेहतर बचाव है
स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े
धन्यवाद
🙏

21/03/2022

मधुमेह जनि योन समस्या का निदान लख कर सर्व साधारण के लिए चिकिसा ना लिखना भी ठीक नहीं होगा मुख्य विषय है नपुंसकता का चाहे वो मधुमेह जनित हो या किसी अन्य कारणों से .

आईये अन्य कारणों से आये नाप्न्सकता , शीघ्रपतन व ने कारणों पर भी एक नजर डालते है.

सेक्स की समस्याए व इलाज
* व्यर्थ के स्खलन से बचें
शीघ्रपतन और स्वप्नदोष का निदान

स्वप्न दोष या ‍शीघ्रपतन के कारण अधिकांश युवक इस रोग से परेशान हैं और अधिकांश को मालूम ही नहीं कि ये किस किस्म का रोग है। दोनों ही रोगों का मूल कारण संभोग की कल्पना और स्नायु दुर्बलता माना गया है। इसके अलावा भी कई कारण हैं। इसका निदान भी बहुत सरल है।

स्वप्नदोष : जैसा कि इसका नाम ही है स्वप्न दोष अर्थात जब व्यक्ति किसी भी प्रकार के संभोग की कल्पना करता है तो अकसर रात में उसे संभोग के सपने सताते हैं। ऐसा तब भी होता है जबकि व्यक्ति गर्म वस्तुएँ जैसे अंडा, माँस, मछली, तली-भुनी चीजें, अत्यधिक चाय या कॉफी, सिगरेट या अन्य तरह के व्यसन का सेवन करता है।
यदि इस रोग पर ध्यान न दिया ‍गया तो सिरदर्द, चक्कर और मानसिक तथा शारीरिक कमजोरियों के लक्षण उबरने लगते हैं। आगे चलकर स्नाविक दुर्बलता, धातु दुर्बलता और अंततः व्यक्ति नपुसंक रोग से ग्रस्त हो जाता है। पहले स्वप्न के ‍फिर बिना स्वप्न के ही वीर्य स्खलन होने लगता है।

शीघ्रपतन : शीघ्रपतन का अर्थ है स्त्री के यौन सुख प्राप्त करने के पहले ही पुरुष का शीघ्र ही स्खलित हो जाना। दरअसल पुरुष के तुरंत ही उत्तेजित हो जाने के कारण वह तुरंत ही स्खलित हो जाता है।
दूसरा कारण स्वप्नदोष, धातु दुर्बलता और स्नायु दुर्बलता है। उक्त रोग के कारण भी शीघ्रपतन की शिकायत बनी रहती है। दरअसल इस रोग में व्यक्ति के भीतर संयम की शक्ति पूरी तरह से क्षीण हो जाती है। स्त्री द्वारा यौन सुख के लिए तैयार होने तक वह स्वयं को संयमित करने के प्रयास अवश्य करता है किंतु असफल रहता है।

उपचार :
पहले तो उपरोक्त बताए गए कारणों को समझें और भोजन में परिवर्तन कर दें। अनियमित जीवनशैली को त्याग दें। तेज धूप, धूल और धुएँ से बचें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। इस दौरान नियमित योगासनों का अभ्यास और प्रतिदिन आधे घंटे के लिए योग-निद्रा करें, तब पाँच मिनट का ध्यान करें। खुली और ताजी हवा में प्राणायाम करें। गहरी श्वास लेने और छोड़ने से रक्त प्रवाह बढ़ेगा और वायुदोष मिटेगा।

विशेष आहार :
शहद तथा भीगे हुए बादाम या किशमिश को दूध में मिलाकर प्रतिदिन सुबह पीएँ। 8-10 बादाम, 25 दाने किशमिश तथा 7-8 मनुक्के भिगोकर नाश्ते में ले सकते हैं। हरी सब्जी और छिलकों वाली दाल का उपयोग पतली चपाती के साथ करें। चपाती मक्खन या मलाई के साथ लें। भोजन में सलाद का भरपूर उपयोग और प्याज, लहसुन तथा अदरक का संतुलित सेवन करें।

योग पैकेज :
नियमित योगासनों का अभ्यास और प्रतिदिन आधे घंटे योग-निद्रा करना इसकी मुख्य चिकित्सा है। योगासनों में प्रारंभ में कमर चक्रासन, जानुशिरासन, सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, हलासन, हस्तपादोत्तनासन, योगमुद्रा, पवनमुक्तासन तथा मकरासन करें। फिर धीरे-धीरे खुली और स्वच्छ हवा में नाड़ी शोधन प्राणायम का अभ्यास करें। तब कपालभाँति तथा भ्रामरी का अभ्यास करें। बंधों में उड्डियान बंध
लगाएँ। सप्ताह में एक बार तेल मालिश अवश्य कराएँ। यह सब करें किसी योग्य योग चिकित्सक की सलाह पर
नपुंसकता, शिश्न शिथिलता या यौन दौर्बल्यता
जो पुरुष जन्मजात नपुंसक होता है, उसे सहज क्लैब्य कहते हैं। आयुर्वेद ने मुख्य रूप से नपुंसकता के ये सात कारण बताए हैं। सहज और शिराच्छेदजन्य क्लैब्यता असाध्य यानी लाइलाज और बाकी पांचों प्रकार की नपुंसकता साध्य यानी इलाज द्वारा ठीक की जा सकने वाली है।

इस प्रकार की हास्यास्पद स्थिति से बचने व बीमारी का इलाज करने के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपचार यहां दिए जा रहे हैं-
(1) नपुंसकता नष्ट करने के लिए जायफल, लौंग, कपूर और काली मिर्च 40-40 ग्राम, मकरध्वज 5 ग्राम, केसर 1 ग्राम सबको बारीक कूट-पीसकर खरल करके पान के रस के साथ घुटाई करें और आधा-आध ग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। रात को सोते समय दो चम्मच या एक चम्मच मक्खन के साथ एक गोली खाकर ऊपर से एक गिलास मीठा कुनकुना गर्म दूध पिएं, जब शाम का भोजन किए हुए दो-ढाई घंटे हो चुके हों। यह बहुत ही
बलवीर्यवर्द्धक नुस्खा है।
(2) असगन्ध 100 ग्राम, गिलोय 50 ग्राम और गिलोयसत 10 ग्राम तीनों को कूट-पीसकर मिला लें। आधा चम्मच चूर्ण, आधा चम्मच शुद्ध घी और दो चम्मच शहद मिलाकर चाट लें और ऊपर से मिश्री मिला ठंडा किया हुआ दूध पिएं। शीतकाल के दिनों में कम से कम 60 दिन सुबह-शाम यह नुस्खा सेवन करना चाहिए।
(3) सफेद मुसली, गोखरू बड़ा, तालमखाना और तावरी 50-50 ग्राम सबको कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें और पिसी हुई मिश्री 100 ग्राम लेकर सबको मिला लें। सुबह-शाम इस चूर्ण को 1-1 चम्मच मात्रा में मीठे कुनकुने गर्म दूध के साथ सेवन करें। यह नुस्खा नपुंसकता, ध्वजभंग, शुक्रमेह, शुक्र की उष्णता व पतलापन, पेशाब की रुकावट और जलन आदि व्याधियां नष्ट कर शरीर को सशक्त बनाने और पौरुष बल की वृद्धि करने में
सफल सिद्ध हुआ है।
(4) बड़े गोखरू, तालमखाना, शतावरी, कौंच के छिलकेरहित बीज, नागबला और अतिबला सब 50-50 ग्राम और मिश्री 150 ग्राम, सभी को कूट-पीसकर अच्छा महीन चूर्ण कर लें। सुबह-शाम 1-1 चम्मच चूर्ण फांककर ऊपर से कुनकुना मीठा दूध पिएं। यह नुस्खा बिना कोई हानि किए नपुंसकता को नष्ट करने वाला और पर्याप्त यौन शक्ति प्रदान करने वाला आयुर्वेदिक टॉनिक है। नियमों का पालन कर कम से कम 60 दिन इस नुस्खे का नियमित रूप
से सेवन करें और स्वयं परिणाम देख लें। यह परीक्षित और सफल सिद्ध नुस्खा है।

21/03/2022

🚩🚩आयुर्वेद और आप🚩🚩:
मधुमेह जनित एवं अन्य नपुंसकता नासक चिकित्सा व्यवस्था पत्र.

भारत की सुप्रसिद्ध पत्रिका (निरोग धाम में प्रकाशित )

म्रेरी चिकित्सा में सब से ज्यादा रोगी मधुमेजनित योन दोरबल्य के रोगी देश विदेश से बहुतायत से आते है.
निचे स्वानुभूत चिकित्सा मधुमेह जनित योन दोरबल्य की लिख रहा हूँ जिससे अनेको ने लाभ उठाया है.
यह एक ऐसा उपद्रव है जो मधुमेह के अधिककांस रोगियों में देखने को मिलता है अधिकांस रोगियों को तो मधुमेह की जानकारी इस रोग के बाद डाक्टरी जांच करवाने के बाद पता चलता है की उन्हें मधुमेह है .
कुछ दिन पहले तक सफल सहवास करने वाले व्यक्ति की अचानक सहवास की इच्छा खतम हो जाती है या सफल सहवास कर ही नहीं पाता तब वो शर्म से नीम हाकिमो के चक्कर लगाकर पैसा और स्वास्थ दोनों खो देता है.
मधु मेह जनित एवं अन्य सभी तरह की नपुंसकता सम्पूर्ण ठीक हो सकती है, आयुर्वेद की चिकित्सा द्वारा अनेक अनुभव प्राप्त है.

विषय सिर्फ मधुमेह जनित नपुंसकता का ही दिमाग में था पर जब लिखने बैठा तो अन्य योन रोगी भी सामने घूम गए .जो इनकी चिकित्सा साथ में न लिखू तो शायद ये लेख अधुरा रह जाए ऐसा मन में विचार उठता है .अतः सर्व साधारण के काम में आने वाली चिकित्सा का विस्तृत वर्णन निचे डे रहा हूँ.

मधुमेह जन्य नपुंसकता का पहला आधार तो ये ही है की रोगी के मधुमेह को नियंत्रित किया जाये .

मधुमेह का सही उपचार लेकर अथवा आहार-विहार, आचार-विचार पर नियंत्रण रख कर अपनी शर्करा का स्तर सामान्य रखते हैं तो आपकी परेशानी का आयुर्वेद में सटीक उपचार है.
आप जरा भी परेशान न हों। आपने लिंग का उत्थान न होना, उत्तेजना का पूरी तरह समाप्त होजाना जैसे
आपकी मधुमेह जन्य नपुंसकता की समस्या का हल प्रस्तुत है आप निम्न औषधियाँ चालीस दिन तक लीजिये। विश्वास करिये कि न सिर्फ़ आपकी लैंगिक समस्या हल हो जाएगी बल्कि आपकी मधुमेह (डायबिटीज़) के बाकी उपद्रव जैसे बार बार प्यास लगना, पेशाब लगना, भूख का बुरी तरह से प्रभावित करना, भयंकर कमजोरी आ जाना आदि अपने आप खत्म हो जाएंगे और शर्करा का स्तर भी नियंत्रित रहेगा।

मधुमेह जन्य नपुंसकता के रोगी को निम्न चिकित्सा व्यवस्था से विशेष लाभ पहुँचता है.

मधुमेह जन्य नपुंसकता की चिकित्सा नंबर -१
१. त्रिवंग भष्म ०५ ग्राम
सिद्ध मकरध्वज ०५ ग्राम
प्रवाल भष्म ०४ ग्राम
रससिंदुरमोती पिष्टी ०४ ग्राम
अबरख भष्म सतपुटी ०४ ग्राम
रोपी भष्म ०४ ग्राम
लोह भष्म ०३ ग्राम
नाग भष्म ०३ ग्राम
स्वर्ण भष्म ५०० मिली ग्राम
सबी ३१ ग्राम ओउसधियो को पत्थर की खल में दाल के अर्दुसे की पट्टी का रस , हल्दी का रस , कमल के फूलों का रस ,मालती के फूलों का रस , सतावरी का रस केले के कंद का रस चन्दन का क्वाथ .
सभी की ७-७ भावना देकर १२ घंटे की घुटाई करवाले .कपड छान चूर्ण बनाकर रखे .
मात्रा : १०० मिली ग्राम रोज सुबह एवं रात को मलाई के साथ चाटकर उपर से मलाई निकाला दूध पिए.
(दवा कुछ महगी जरुर बने गी पर पूर्णतया संतोष कारक है अनेको बार परीक्षित है)

२. धातु पोष्टिक चूर्ण .
सतावरी १२.५ ग्राम
गोखरू बिज बड़ा १२.५ ग्राम
बिजबंद १२.५ ग्राम
वंश लोचन असली १२.५ ग्राम
कबाब चीनी १२.५ ग्राम
चोप चीनी १२.५ ग्राम
कोच के बिज १२.५ ग्राम
सफ़ेद मुसली १२.५ ग्राम
काली मुसली १२.५ ग्राम
सुंठ १२.५ ग्राम
काली मिर्च १२.५ ग्राम
पीपल १२.५ ग्राम
सालम मिश्री गट्ठा १२.५ ग्राम
बिदारी कंद १२.५ ग्राम
अश्वगंधा १२.५ ग्राम
सभी को मिलाकर कूट पिस कर कपड छान चूर्ण बनालें .
७ ग्राम (१ छोटा चम्मच की मात्र में सुबह एवं रात को फीके दूध के साथ ४५ दिन तक कम से कम लें .

(नोट : यह बहुत गरिष्ठ होता है अतः कमजोर पाचन शक्ति वाले प्रयोग ना करें.)

३. शुद्ध शिलाजीत
१ चने भार सुबह नास्ते में फीके दूध के साथ ले .

४. स्वर्ण मकरध्वज (किसी भी अच्छी कम्पनी का )
१ गोली. सोमवार , ब्रहस्पतिवार एवं शनिवार सुबह नास्ते के समय लें रोज ना लें.

हर दवा के बिच १५ मिनट का फर्क रख सकते है.

चिकित्सा नंबर -२
उपरोक्त दवा अगर नहीं बनापाते है तो अभाव में निम्न दवाओं का भी असर देखागाया है परन्तु उपरोक्त दवाओं का सत प्रतिसत रिजल्ट मुझे मेरी चिकित्सा में मिला है .

प्रमदेभांकुश रस एक गोली
पुष्पधन्वा रस एक गोली
बसंतकुसुमाकर रस एक गोली
इन तीनों की एक खुराक बना कर दिन में दो बार नीचे लिखे मिश्रण के दो चम्मच के साथ भोजन के बाद लीजिये

2. अश्वगंधारिष्ट + दशमूलारिष्ट + अर्जुनारिष्ट + बलारिष्ट बराबर मात्रा (प्रत्येक १०० मिली.) में लेकर इसमें शुद्ध शिलाजीत १० ग्राम घोल दीजिये, शक्ति मिश्रण तैयार है।
दोनों समय भोजन के बाद ६ चम्मच दवा १/२ कप पानी मिलाकर लें.

** Detox Water: अपनी डेली लाइफ में शामिल करें डिटॉक्स वॉटर, मिलेंगे कई फायदे.........Detox Water Benefits : डिटॉक्‍स वॉट...
15/03/2022

** Detox Water: अपनी डेली लाइफ में शामिल करें डिटॉक्स वॉटर, मिलेंगे कई फायदे.........

Detox Water Benefits : डिटॉक्‍स वॉटर शरीर की कई परेशानियों को कम करने में काफी मददगार होता है. यह शरीर को हाइड्रेट तो करता ही है, शरीर में बढ़ते टॉक्सिन को भी कम करता है. जानते हैं इससे जुड़ी बातें.

Detox Water Benefits: आज की लाइफ स्‍टाइल में खुद के लिए समय निकालना हर किसी के लिए आसान काम नहीं होता. व्‍यस्‍त जिंदगी में उलझे लोगों को वेट कम करने और तमाम तरह के हेल्‍थ बेनिफिट्स के लिए घंटों मेहनत करनी पड़ती है. ऐसे में डिटॉक्‍स वॉटर कई परेशानियों को कम करने में आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है. डिटॉक्‍स वाटर हमारे शरीर को हाइड्रेट तो करता ही है, शरीर में बढ़ते टॉक्सिन (Toxin) को भी कम करने में हेल्‍प करता है. डिटॉक्‍स की प्रक्रिया जैसे ही शरीर के अंदर शुरू होती है इसका प्रभाव शरीर के कई अंगों पर नजर आने लगता है. उदाहरण के तौर पर स्किन हेल्‍दी दिखने लगती है, डायजेशन सिस्‍टम सही तरीके से काम करने लगता है और वजन भी तेजी से कम होता दिखाई पड़ता है.

क्या है डिटॉक्स वॉटर-

हेल्‍थलाइन के मु‍ताबिक, डिटॉक्‍स वॉटर दरअसल हमारे शरीर में मौजूद टॉक्सिन यानी विषाक्‍त पदार्थों को शरीर से बाहर करने के लिए फलों, हरी सब्जियों और कई तरह की जड़ी बूटियों से तैयार खास पेय पदार्थ है. इसे फ्रूट फ्लेवर वॉटर भी कहा जा सकता है. किसी जूस के मुकाबले इसमें कैलरी की मात्रा बहुत ही कम होती है. यह किडनी और लिवर को क्‍लीन करने और हेल्‍दी बनाए रखने में मददगार होता है.

घर पर इस तरह बनाएं डिटॉक्स वॉटर-

इसे आप आसानी से अपने घर पर बना सकते हैं. इसके लिए ताजा फल, सब्जियां और हर्ब के साथ केवल पीने के पानी की जरूरत पड़ती है. आइए जानते हैं कि हम अलग अलग फ्लेवर के डिटॉक्‍स वॉटर को कैसे बना सकते हैं.

1.खीरा डिटॉक्स वॉटर................

खीरे की कुछ स्लाइस काटें और इसे आधे लीटर ठंडे या नॉर्मल टेंपरेचर के पानी में डाल दें. अपने स्‍वादानुसार इसमें काला नमक, नींबू की स्लाइस या नींबू का रस डालकर इसे 4 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें. 4 घंटे बाद इसे बाहर निकाल दें. आप इसका सेवन रोजाना सुबह खाली पेट कर सकते हैं. यही नहीं आप इसे दिनभर भी पी सकते हैं. इसमें पुदीना की 6-7 पत्तियां डालकर आप इसके स्‍वाद को और अधिक बढ़ा सकते हैं.

2. एप्पल सिनेमन डिटॉक्स वॉटर............

कटे हुए सेब की कुछ स्लाइस और कुछ सिनेमन के टुकड़े आधे लीटर पानी में मिलाएं और स्‍वाद के लिए इसमें नींबू के रस की कुछ बूंदें डालकर 4 घंटे के लिए इसे फ्रिज में रख दें. इसे सुबह खाली पेट इस्तेमाल करें. इसके लगातार सेवन से कई बीमारियां दूर रहती हैं. एप्पल को डिटॉक्स वॉटर की तरह बनाकर पीने से किडनी की गंदगी भी साफ होती है और किडनी फंक्शन भी दुरुस्त रहता है. सिनेमन यानी दालचीनी मिल जाने से शरीर के टॉक्सिन को हटाने में भी यह सक्षम हो जाता है.

3.ऑरेंज जिंजर डिटॉक्स वॉटर.............

ऑरेंज स्लाइस को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें और एक छोटे अदरक के टुकड़े को कद्दूकश कर संतरे के टुकड़ों के साथ आधे लीटर पानी में डालकर रखें. स्वाद के लिए आप इसमें नींबू के रस की कुछ बूंदें मिला सकते हैं. 3 से 4 घंटे तक फ्रिज में रखें और रोजाना इसका सेवन करें. यह वेट कम करेगा और स्किन को अच्‍छा बनाएगा.

4.इन कॉम्बिनेशन के अनुसार भी बना सकते हैं डिटॉक्‍स वॉटर..................

इनके अलावा खीरा पुदीना, लेमन जिंजर, ब्‍लैक बेरी ऑरेंज, वॉटर मिलन मिंट, अंगूर रोजमेरी, ऑरेंज लेमन, लेमन लाइम, स्‍ट्रॉबेरी बेसिल के कंबिनेशन वाले डीटॉक्‍स वॉटर भी बनाकर आप पी सकते हैं. यह स्‍वाद और सेहत दोनों में आपके लिए अच्‍छा साबित होगा...............

घुटनों के दर्द + कमर का दर्द +कंधे का दर्द + एडि का दर्द  इलाज  त्रिफला 10 ग्राम सौंठ 10 ग्राम काली मिर्च 10 ग्राम पीपली...
09/03/2022

घुटनों के दर्द + कमर का दर्द +कंधे का दर्द + एडि का दर्द इलाज

त्रिफला 10 ग्राम
सौंठ 10 ग्राम
काली मिर्च 10 ग्राम
पीपली 10 ग्राम
देव दार 10 ग्राम
अजवाइन 10ग्राम
चित्रक की छाल 10 ग्राम

उपरोक्त सामग्री को अच्छे से कूट कूट कर चूर्ण बना ले । एक - एक च सुबह शाम खायें । एक चमच बढ़ा
लाल तेल बनाने की विधि

मालकंगनी
काला जी
अजवायन
मेंथी दान
काले
जै फल
तेज
सफेद तिल का तेल

Address

Gupta Electropathy Acupuncture Acupressure & Compound Herbal Clinic, Near Gupta Medical Store Gurdwara Chowk Assandh
Karnal
132039

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ayurveda&Acupressure posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Ayurveda&Acupressure:

Shortcuts

Share

Category