21/03/2022
मधुमेह जनि योन समस्या का निदान लख कर सर्व साधारण के लिए चिकिसा ना लिखना भी ठीक नहीं होगा मुख्य विषय है नपुंसकता का चाहे वो मधुमेह जनित हो या किसी अन्य कारणों से .
आईये अन्य कारणों से आये नाप्न्सकता , शीघ्रपतन व ने कारणों पर भी एक नजर डालते है.
सेक्स की समस्याए व इलाज
* व्यर्थ के स्खलन से बचें
शीघ्रपतन और स्वप्नदोष का निदान
स्वप्न दोष या शीघ्रपतन के कारण अधिकांश युवक इस रोग से परेशान हैं और अधिकांश को मालूम ही नहीं कि ये किस किस्म का रोग है। दोनों ही रोगों का मूल कारण संभोग की कल्पना और स्नायु दुर्बलता माना गया है। इसके अलावा भी कई कारण हैं। इसका निदान भी बहुत सरल है।
स्वप्नदोष : जैसा कि इसका नाम ही है स्वप्न दोष अर्थात जब व्यक्ति किसी भी प्रकार के संभोग की कल्पना करता है तो अकसर रात में उसे संभोग के सपने सताते हैं। ऐसा तब भी होता है जबकि व्यक्ति गर्म वस्तुएँ जैसे अंडा, माँस, मछली, तली-भुनी चीजें, अत्यधिक चाय या कॉफी, सिगरेट या अन्य तरह के व्यसन का सेवन करता है।
यदि इस रोग पर ध्यान न दिया गया तो सिरदर्द, चक्कर और मानसिक तथा शारीरिक कमजोरियों के लक्षण उबरने लगते हैं। आगे चलकर स्नाविक दुर्बलता, धातु दुर्बलता और अंततः व्यक्ति नपुसंक रोग से ग्रस्त हो जाता है। पहले स्वप्न के फिर बिना स्वप्न के ही वीर्य स्खलन होने लगता है।
शीघ्रपतन : शीघ्रपतन का अर्थ है स्त्री के यौन सुख प्राप्त करने के पहले ही पुरुष का शीघ्र ही स्खलित हो जाना। दरअसल पुरुष के तुरंत ही उत्तेजित हो जाने के कारण वह तुरंत ही स्खलित हो जाता है।
दूसरा कारण स्वप्नदोष, धातु दुर्बलता और स्नायु दुर्बलता है। उक्त रोग के कारण भी शीघ्रपतन की शिकायत बनी रहती है। दरअसल इस रोग में व्यक्ति के भीतर संयम की शक्ति पूरी तरह से क्षीण हो जाती है। स्त्री द्वारा यौन सुख के लिए तैयार होने तक वह स्वयं को संयमित करने के प्रयास अवश्य करता है किंतु असफल रहता है।
उपचार :
पहले तो उपरोक्त बताए गए कारणों को समझें और भोजन में परिवर्तन कर दें। अनियमित जीवनशैली को त्याग दें। तेज धूप, धूल और धुएँ से बचें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। इस दौरान नियमित योगासनों का अभ्यास और प्रतिदिन आधे घंटे के लिए योग-निद्रा करें, तब पाँच मिनट का ध्यान करें। खुली और ताजी हवा में प्राणायाम करें। गहरी श्वास लेने और छोड़ने से रक्त प्रवाह बढ़ेगा और वायुदोष मिटेगा।
विशेष आहार :
शहद तथा भीगे हुए बादाम या किशमिश को दूध में मिलाकर प्रतिदिन सुबह पीएँ। 8-10 बादाम, 25 दाने किशमिश तथा 7-8 मनुक्के भिगोकर नाश्ते में ले सकते हैं। हरी सब्जी और छिलकों वाली दाल का उपयोग पतली चपाती के साथ करें। चपाती मक्खन या मलाई के साथ लें। भोजन में सलाद का भरपूर उपयोग और प्याज, लहसुन तथा अदरक का संतुलित सेवन करें।
योग पैकेज :
नियमित योगासनों का अभ्यास और प्रतिदिन आधे घंटे योग-निद्रा करना इसकी मुख्य चिकित्सा है। योगासनों में प्रारंभ में कमर चक्रासन, जानुशिरासन, सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, हलासन, हस्तपादोत्तनासन, योगमुद्रा, पवनमुक्तासन तथा मकरासन करें। फिर धीरे-धीरे खुली और स्वच्छ हवा में नाड़ी शोधन प्राणायम का अभ्यास करें। तब कपालभाँति तथा भ्रामरी का अभ्यास करें। बंधों में उड्डियान बंध
लगाएँ। सप्ताह में एक बार तेल मालिश अवश्य कराएँ। यह सब करें किसी योग्य योग चिकित्सक की सलाह पर
नपुंसकता, शिश्न शिथिलता या यौन दौर्बल्यता
जो पुरुष जन्मजात नपुंसक होता है, उसे सहज क्लैब्य कहते हैं। आयुर्वेद ने मुख्य रूप से नपुंसकता के ये सात कारण बताए हैं। सहज और शिराच्छेदजन्य क्लैब्यता असाध्य यानी लाइलाज और बाकी पांचों प्रकार की नपुंसकता साध्य यानी इलाज द्वारा ठीक की जा सकने वाली है।
इस प्रकार की हास्यास्पद स्थिति से बचने व बीमारी का इलाज करने के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपचार यहां दिए जा रहे हैं-
(1) नपुंसकता नष्ट करने के लिए जायफल, लौंग, कपूर और काली मिर्च 40-40 ग्राम, मकरध्वज 5 ग्राम, केसर 1 ग्राम सबको बारीक कूट-पीसकर खरल करके पान के रस के साथ घुटाई करें और आधा-आध ग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। रात को सोते समय दो चम्मच या एक चम्मच मक्खन के साथ एक गोली खाकर ऊपर से एक गिलास मीठा कुनकुना गर्म दूध पिएं, जब शाम का भोजन किए हुए दो-ढाई घंटे हो चुके हों। यह बहुत ही
बलवीर्यवर्द्धक नुस्खा है।
(2) असगन्ध 100 ग्राम, गिलोय 50 ग्राम और गिलोयसत 10 ग्राम तीनों को कूट-पीसकर मिला लें। आधा चम्मच चूर्ण, आधा चम्मच शुद्ध घी और दो चम्मच शहद मिलाकर चाट लें और ऊपर से मिश्री मिला ठंडा किया हुआ दूध पिएं। शीतकाल के दिनों में कम से कम 60 दिन सुबह-शाम यह नुस्खा सेवन करना चाहिए।
(3) सफेद मुसली, गोखरू बड़ा, तालमखाना और तावरी 50-50 ग्राम सबको कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें और पिसी हुई मिश्री 100 ग्राम लेकर सबको मिला लें। सुबह-शाम इस चूर्ण को 1-1 चम्मच मात्रा में मीठे कुनकुने गर्म दूध के साथ सेवन करें। यह नुस्खा नपुंसकता, ध्वजभंग, शुक्रमेह, शुक्र की उष्णता व पतलापन, पेशाब की रुकावट और जलन आदि व्याधियां नष्ट कर शरीर को सशक्त बनाने और पौरुष बल की वृद्धि करने में
सफल सिद्ध हुआ है।
(4) बड़े गोखरू, तालमखाना, शतावरी, कौंच के छिलकेरहित बीज, नागबला और अतिबला सब 50-50 ग्राम और मिश्री 150 ग्राम, सभी को कूट-पीसकर अच्छा महीन चूर्ण कर लें। सुबह-शाम 1-1 चम्मच चूर्ण फांककर ऊपर से कुनकुना मीठा दूध पिएं। यह नुस्खा बिना कोई हानि किए नपुंसकता को नष्ट करने वाला और पर्याप्त यौन शक्ति प्रदान करने वाला आयुर्वेदिक टॉनिक है। नियमों का पालन कर कम से कम 60 दिन इस नुस्खे का नियमित रूप
से सेवन करें और स्वयं परिणाम देख लें। यह परीक्षित और सफल सिद्ध नुस्खा है।