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रोग का निर्धारण षष्ठम भाव से भी होता है पर ग्रहों की कुदृष्टि एवं नीच राशि में स्थित रहने से व्यक्ति रोगों से पीड़ित हो ...
25/05/2026

रोग का निर्धारण षष्ठम भाव से भी होता है पर ग्रहों की कुदृष्टि एवं नीच राशि में स्थित रहने से व्यक्ति रोगों से पीड़ित हो जाता है
उदाहरण के लिए यदि कुंडली में केतु अशुभ है तो पित्त संबंधी विकार देता है जैसे देह का तापमान बढ़ा रहना ,नींद ना आना चक्कर आना इत्यादि
यदि किसी को रोग के विषय में अथवा कुंडली संबंधी परामर्श चाहिए तो inbox करें
जय पीतांबरा
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आज से अधिक मास प्रारंभ है । साधारणतया सौर वर्ष तीन सौ पैंसठ दिवस का होता है पर  सूर्य और चंद्र कैलेंडर में अंतर आता है द...
17/05/2026

आज से अधिक मास प्रारंभ है । साधारणतया सौर वर्ष तीन सौ पैंसठ दिवस का होता है पर सूर्य और चंद्र कैलेंडर में अंतर आता है दस दिवस का तब तीन वर्ष पश्चात एक मास अधिक हो जाता है जो कि इस बार जेठ माह में है तभी जेठ का माह आठ सप्ताह का।होगा अथवा साठ दिन का ।
अधिक मास के स्वामी स्वयं विष्णु देव जी हैं तो इसको पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है ।
ये अटल सत्य है इस मास में पूजन जप तप विशेषकर दान का अत्यधिक महत्व है । गीता का पाठ दान पुण्य विष्णु नारायण की पूजा विशेष फल देती है ।
जय पीतांबरा माई

30/04/2026

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