25/05/2026
रोग का निर्धारण षष्ठम भाव से भी होता है पर ग्रहों की कुदृष्टि एवं नीच राशि में स्थित रहने से व्यक्ति रोगों से पीड़ित हो जाता है
उदाहरण के लिए यदि कुंडली में केतु अशुभ है तो पित्त संबंधी विकार देता है जैसे देह का तापमान बढ़ा रहना ,नींद ना आना चक्कर आना इत्यादि
यदि किसी को रोग के विषय में अथवा कुंडली संबंधी परामर्श चाहिए तो inbox करें
जय पीतांबरा
#