Dr Vinay Shukla Child Health Expert

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⚕️MBBS KGMU LUCKNOW
🧑🏻‍⚕️MD BRD MEDICAL COLLEGE GORAKHPUR
🩺FELLOWSHIP PEDIATRIC HEMATONCOLOGY KGMU LUCKNOW
👶🏻PEDIATRICIAN, NEONATOLOGIST,
🎗️HEMATOLOGIST, ONCOLOGIST,
🍱CHILD NUTRITION EXPERT

विश्व स्तनपान सप्ताह (1 अगस्त -7 अगस्त)  #बच्चोंकीसेहतइस पूरे सप्ताह के 7 दिन में मै आपको मां के स्तनपान से जुड़े कुछ अन...
01/08/2026

विश्व स्तनपान सप्ताह (1 अगस्त -7 अगस्त) #बच्चोंकीसेहत

इस पूरे सप्ताह के 7 दिन में मै आपको मां के स्तनपान से जुड़े कुछ अनछुए पहलुओं से अवगत करूंगा ।
जब भी कोई बच्चा जन्म लेता है, तो उसके लिए दुनिया का सबसे अनमोल उपहार कोई महंगी दवा, टॉनिक या हेल्थ ड्रिंक नहीं, बल्कि उसकी माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) होता है। कई जगह आज भी इस दूध को फेंक दिया जाता है, जबकि यही दूध बच्चे की पहली प्राकृतिक वैक्सीन है। इसमें ऐसे एंटीबॉडी और प्रतिरक्षा कोशिकाएँ होती हैं जो नवजात को कई गंभीर संक्रमणों से बचाने में मदद करती हैं।

जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना बच्चे के जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत मानी जाती है। इससे बच्चे का शरीर गर्म रहता है, ब्लड शुगर सामान्य रहती है, माँ-बच्चे का भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है और माँ में प्रसव के बाद होने वाले अधिक रक्तस्राव का खतरा भी कम होता है।

जीवन के पहले छह महीने तक बच्चे को केवल माँ का दूध ही देना चाहिए। इस दौरान पानी, शहद, घुट्टी, गाय या भैंस का दूध, ग्लूकोज का पानी या कोई अन्य तरल पदार्थ देने की आवश्यकता नहीं होती। माँ के दूध में लगभग 88% पानी होता है, इसलिए गर्मी के मौसम में भी अलग से पानी की जरूरत नहीं पड़ती।

माँ का दूध हर दिन और हर फीड के साथ बच्चे की जरूरत के अनुसार बदलता रहता है। समय से पहले जन्मे बच्चों की माँ के दूध में प्रोटीन और रोग प्रतिरोधक तत्व अधिक होते हैं। यदि बच्चा बीमार हो जाए तो माँ के दूध में भी ऐसे तत्व बढ़ जाते हैं जो उसे जल्दी ठीक होने में मदद करते हैं। यह प्रकृति का ऐसा अद्भुत विज्ञान है जिसे आज तक कोई कंपनी किसी डिब्बे के दूध में नहीं बना सकी।

जो बच्चे केवल स्तनपान करते हैं, उनमें डायरिया, निमोनिया, कान के संक्रमण, एलर्जी, मोटापा और आगे चलकर मधुमेह जैसी कई बीमारियों का खतरा कम देखा गया है। इतना ही नहीं, कई अध्ययनों में स्तनपान का संबंध बेहतर मस्तिष्क विकास और सीखने की क्षमता से भी पाया गया है।

फायदा केवल बच्चे को ही नहीं, माँ को भी होता है। नियमित स्तनपान से गर्भाशय जल्दी सामान्य आकार में लौटता है, प्रसव के बाद रक्तस्राव कम होता है, स्तन और अंडाशय के कैंसर का खतरा घटता है तथा टाइप-2 डायबिटीज़ का जोखिम भी कम हो सकता है। कई माताओं में यह प्रसव के बाद वजन कम करने में भी सहायक होता है।

यदि किसी माँ को शुरू में दूध कम आता हुआ महसूस हो, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। अधिकतर मामलों में सही तरीके से बच्चे को बार-बार स्तनपान कराने, सही लैच और पर्याप्त माँ के पोषण से दूध की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए किसी भी अफवाह या घरेलू मिथक पर विश्वास करने के बजाय प्रशिक्षित डॉक्टर या स्तनपान परामर्शदाता से सलाह लें।

आइए, इस विश्व स्तनपान सप्ताह पर हम यह संकल्प लें कि हर नवजात को जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत मिले। क्योंकि स्वस्थ बचपन की नींव किसी दवा से नहीं, बल्कि माँ के दूध की पहली बूंद से पड़ती है।

- डॉ विनय कुमार शुक्ल
वरिष्ठ बाल एवं नवजात शिशु विशेषज्ञ रुधिर एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ लखनऊ

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पहले एक छोटा-सा अनुभव आप सबसे साझा करना चाहता हूं। #बच्चोंकीसेहतकुछ दिन पहले ओपीडी में 7 साल का एक बच्चा अपने माता-पिता ...
30/07/2026

पहले एक छोटा-सा अनुभव आप सबसे साझा करना चाहता हूं। #बच्चोंकीसेहत

कुछ दिन पहले ओपीडी में 7 साल का एक बच्चा अपने माता-पिता के साथ आया। बच्चे को पिछले 5–6 महीनों से खून की कमी (एनीमिया) बताकर लगातार आयरन की सिरप दी जा रही थी, लेकिन इसके बावजूद उसका हीमोग्लोबिन बढ़ ही नहीं रहा था।रिपोर्ट में वो 8.5 g % और बढ़ नहीं रहा था जिस वजह से माता-पिता बहुत परेशान थे। किसी ने उन्हें खून चढ़वाने की सलाह दी, तो किसी ने आयरन के इंजेक्शन लगवाने की। वे भी यही सोच रहे थे कि शायद अब यही आखिरी रास्ता बचा है।
जब मैंने बच्चे की CBC रिपोर्ट देखी तो पहली नजर में ही लगा कि यह सिर्फ आयरन की कमी वाला एनीमिया नहीं है। आगे आयरन प्रोफाइल कराई गई तो Serum Iron सामान्य से भी ज्यादा था और Ferritin भी बढ़ा हुआ था। यानी बच्चे के शरीर में आयरन की कमी नहीं थी, बल्कि आयरन पहले से पर्याप्त मात्रा में मौजूद था। ऐसे में अगर बिना वजह और आयरन दिया जाता, तो उससे फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता था।
यहीं पर एक बात समझना बहुत जरूरी है कि बच्चों में हर खून की कमी सिर्फ आयरन या विटामिन B12 की कमी से नहीं होती। कुछ बच्चों में इसकी वजह थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारी भी हो सकती है। अगर सही समय पर इसका पता न चले और महीनों तक सिर्फ आयरन ही दिया जाता रहे, तो बच्चे का हीमोग्लोबिन भी नहीं सुधरता और शरीर में आयरन जरूरत से ज्यादा जमा होने लगता है, जो आगे चलकर लिवर, हृदय और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।बच्चे का HPLC करने पर पता चला कि बच्चे को थैलीसीमिया है जिसे iron दिया जा रहा था ।
थैलेसीमिया कोई छूने से फैलने वाली बीमारी नहीं है। यह माता-पिता से बच्चों में जीन के माध्यम से आने वाली बीमारी है। इसके भी अलग-अलग प्रकार होते हैं। सबसे सामान्य है थैलेसीमिया ट्रेट (Carrier)। ऐसे बच्चों या बड़ों में अक्सर कोई विशेष परेशानी नहीं होती। हल्की खून की कमी रह सकती है, लेकिन इन्हें बार-बार आयरन देने की जरूरत नहीं होती, जब तक जांच से आयरन की वास्तविक कमी साबित न हो जाए।

दूसरा प्रकार है थैलेसीमिया इंटरमीडिएट, जिसमें खून की कमी ट्रेट से ज्यादा होती है। कुछ बच्चों को समय-समय पर खून चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है और उनकी बढ़वार या तिल्ली (स्प्लीन) बढ़ने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

सबसे गंभीर रूप है थैलेसीमिया मेजर। ऐसे बच्चों में आमतौर पर 6 महीने की उम्र के बाद से ही गंभीर एनीमिया शुरू हो जाता है। उन्हें नियमित रूप से खून चढ़ाना पड़ता है। बार-बार खून चढ़ाने से शरीर में आयरन बढ़ जाता है, इसलिए आयरन निकालने की विशेष दवाएं (Iron Chelation Therapy) भी देनी पड़ती हैं। कुछ चुनिंदा बच्चों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट इस बीमारी का स्थायी इलाज हो सकता है।

अगर आपके बच्चे को कई महीनों तक आयरन देने के बाद भी हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ रहा है, CBC में MCV और MCH कम हैं, या परिवार में किसी को थैलेसीमिया है, तो केवल दवा बदलने या आयरन की मात्रा बढ़ाने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ या पीडियाट्रिक हीमैटोलॉजिस्ट (रुधिर रोग विशेषज्ञ )से सलाह ले।

एक और महत्वपूर्ण बात, यदि शादी से पहले या गर्भधारण की योजना बनाते समय पति-पत्नी दोनों की थैलेसीमिया स्क्रीनिंग कर ली जाए, तो भविष्य में थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चे के जन्म की संभावना का पहले से पता लगाया जा सकता है। इसलिए जागरूकता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।मेरी आप सबसे यही अपील है कि बच्चे में खून की कमी दिखते ही यह मत मान लीजिए कि उसे सिर्फ आयरन की जरूरत है। हर एनीमिया आयरन की कमी नहीं होता। सही जांच, सही कारण और सही इलाज ही बच्चे को अनावश्यक दवाओं और भविष्य की गंभीर परेशानियों से बचा सकता है।

– डॉ. विनय कुमार शुक्ल 🩺 👨‍⚕️
MD Pediatrics | Pediatric Hematology & Oncology
वरिष्ठ बाल एवं नवजात शिशु विशेषज्ञ रुधिर एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ लखनऊ मातृत्व चाइल्ड मल्टीस्पेशलिटी क्लीनिक लोनापुर मार्केट STP चौराहा गोमतीनगर विस्तार लखनऊ सोमवार से शनिवार शाम 4 बजे से रात 8 बजे
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हर बुखार सिर्फ Infection नहीं होता ⚠️ Don't ignore these signs

बच्चों में होने वाला हर बुखार सिर्फ एक साधारण infection नहीं होता। कई बार लंबे समय तक रहने वाला fever शरीर के किसी serious problem का संकेत भी हो सकता है।

इस reel का उद्देश्य parents में डर फैलाना नहीं, बल्कि awareness बढ़ाना है ताकि सही समय पर सही जांच हो सके। Early diagnosis कई गंभीर बीमारियों में life-saving साबित हो सकता है।
बिना सलाह के बार-बार antibiotics देना भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए prolonged fever में pediatric evaluation बहुत जरूरी है।
अपने बच्चे की सेहत को लेकर alert रहें, panic नहीं। ❤️”

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