01/08/2026
विश्व स्तनपान सप्ताह (1 अगस्त -7 अगस्त) #बच्चोंकीसेहत
इस पूरे सप्ताह के 7 दिन में मै आपको मां के स्तनपान से जुड़े कुछ अनछुए पहलुओं से अवगत करूंगा ।
जब भी कोई बच्चा जन्म लेता है, तो उसके लिए दुनिया का सबसे अनमोल उपहार कोई महंगी दवा, टॉनिक या हेल्थ ड्रिंक नहीं, बल्कि उसकी माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) होता है। कई जगह आज भी इस दूध को फेंक दिया जाता है, जबकि यही दूध बच्चे की पहली प्राकृतिक वैक्सीन है। इसमें ऐसे एंटीबॉडी और प्रतिरक्षा कोशिकाएँ होती हैं जो नवजात को कई गंभीर संक्रमणों से बचाने में मदद करती हैं।
जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना बच्चे के जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत मानी जाती है। इससे बच्चे का शरीर गर्म रहता है, ब्लड शुगर सामान्य रहती है, माँ-बच्चे का भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है और माँ में प्रसव के बाद होने वाले अधिक रक्तस्राव का खतरा भी कम होता है।
जीवन के पहले छह महीने तक बच्चे को केवल माँ का दूध ही देना चाहिए। इस दौरान पानी, शहद, घुट्टी, गाय या भैंस का दूध, ग्लूकोज का पानी या कोई अन्य तरल पदार्थ देने की आवश्यकता नहीं होती। माँ के दूध में लगभग 88% पानी होता है, इसलिए गर्मी के मौसम में भी अलग से पानी की जरूरत नहीं पड़ती।
माँ का दूध हर दिन और हर फीड के साथ बच्चे की जरूरत के अनुसार बदलता रहता है। समय से पहले जन्मे बच्चों की माँ के दूध में प्रोटीन और रोग प्रतिरोधक तत्व अधिक होते हैं। यदि बच्चा बीमार हो जाए तो माँ के दूध में भी ऐसे तत्व बढ़ जाते हैं जो उसे जल्दी ठीक होने में मदद करते हैं। यह प्रकृति का ऐसा अद्भुत विज्ञान है जिसे आज तक कोई कंपनी किसी डिब्बे के दूध में नहीं बना सकी।
जो बच्चे केवल स्तनपान करते हैं, उनमें डायरिया, निमोनिया, कान के संक्रमण, एलर्जी, मोटापा और आगे चलकर मधुमेह जैसी कई बीमारियों का खतरा कम देखा गया है। इतना ही नहीं, कई अध्ययनों में स्तनपान का संबंध बेहतर मस्तिष्क विकास और सीखने की क्षमता से भी पाया गया है।
फायदा केवल बच्चे को ही नहीं, माँ को भी होता है। नियमित स्तनपान से गर्भाशय जल्दी सामान्य आकार में लौटता है, प्रसव के बाद रक्तस्राव कम होता है, स्तन और अंडाशय के कैंसर का खतरा घटता है तथा टाइप-2 डायबिटीज़ का जोखिम भी कम हो सकता है। कई माताओं में यह प्रसव के बाद वजन कम करने में भी सहायक होता है।
यदि किसी माँ को शुरू में दूध कम आता हुआ महसूस हो, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। अधिकतर मामलों में सही तरीके से बच्चे को बार-बार स्तनपान कराने, सही लैच और पर्याप्त माँ के पोषण से दूध की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए किसी भी अफवाह या घरेलू मिथक पर विश्वास करने के बजाय प्रशिक्षित डॉक्टर या स्तनपान परामर्शदाता से सलाह लें।
आइए, इस विश्व स्तनपान सप्ताह पर हम यह संकल्प लें कि हर नवजात को जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत मिले। क्योंकि स्वस्थ बचपन की नींव किसी दवा से नहीं, बल्कि माँ के दूध की पहली बूंद से पड़ती है।
- डॉ विनय कुमार शुक्ल
वरिष्ठ बाल एवं नवजात शिशु विशेषज्ञ रुधिर एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ लखनऊ
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