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Health and Wealth India इस सिस्टम से कनेक्ट होके आप अपने साथ अपने लोगों के जीवन मे भी परिवर्तन ला सकते हैं।

*सप्लीमेंट्स क्या है गौर फरमाएं*
सप्लीमेंट्स दवाई नहीं होती, हां यह दिखती दवाई की तरह ही है।
सप्लीमेंट्स का मतलब पूरक आहार, सम्पूर्ण पोषण, जैसा कि आप सब जानते है हमारे शरीर को रोज 46 पोषक तत्त्वों की जरूरत होती है, जिसमें हमारे शरीर को स्वच्छ हवा, स्वच्छ पानी और स्वच्छ खाने की जरूरत होती है जिनमें हमारे शरीर को बैलेंस रखने के लिए कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, फैट, प्रोटीन, मिनरल्स, फाइबर जैसे सभी तत्त्

व रोज चाहिए होते हैं।
सप्लीमेंट्स हमारे खाने की कमी को दूर करती है, जिसको खाने के बाद शरीर को ताकत एवम् स्फुर्ति मिलती है सप्लीमेंट्स कहलाती है, इससे बीमारी का खतरा कम हो जाता है, यह बीमारी से पहले खाई जाती है कि हमारे शरीर में पोषण तत्त्वों की कमी के कारण कोई रोग न आए, इसलिए इसका प्रयोग हमारे शरीर के लिए अति आवश्यक है।
दवाई हमारे शरीर में बीमारी के प्रवेश करने के पश्चात प्रयोग में लाई जाती है फिर भी कई बार देखा गया है कि दवाई लेने के पश्चात भी हम पूर्णतया ठीक नहीं हो पाते, कारण रोग पुराना हो चुका होता है, अगर पहले से हम शरीर की जरूरत को समझते हुए सम्पूर्ण आहार का उपयोग करें तो बीमारी से बच सकते हैं और सुखद जीवन जी सकतें हैं।
दोस्तों जिस पेट को काट-काट कर हम पूरी जिंदगी दो वक्त की रोटी अर्थात दाल, चावल, सब्जी, रोटी के सहारे पूरा जीवन बिता देते हैं।
शरीर को सम्पूर्ण आहार न देकर हम पूरी जिंदगी धन इकट्ठा करते हैं, बाद में वही धन हमारा बीमारियों को ठीक करने में अर्थात डाक्टरों का पेट पालने में निकल जाता है, फिर डाक्टर साब भी बोलतें है अब तो सेवा कर लो जितनी कर सकते हैं।
मुझे समझ में यह नहीं आता कि जब आप अपनी गाड़ी की देखरेख इतने अच्छे कर लेते हैं, समय समय पर तेल पानी चैक करते हो, सर्विस करवाते हो, जबकि उसे हम कभी भी बेच सकते हैं, रिप्लेस कर सकते हैं, लेकिन हम अच्छी तरह से इस बात को जानते हैं कि शरीर की रिप्लेसमेंट नहीं होती, 84 लाख योनियों के बाद हमें यह अवसर मिला है कि हम अपना व अपने परिवार का पूरा पूरा ख्याल रखें और सपनों को पूरा कर सके याद रहे इसी योनी में यह अवसर मिलता है ।
दोस्तों आज के युग में जहां हर दूसरी चीज मिलावटी होती जा रही यहां तक की हवा, पानी, और खाना भी। जो हमारे शरीर की जरूरत है सब मिलावटी है तो यह शरीर कैसे चलेगा?
चलेगा चलेगा।
चलेगा ही नहीं दौड़ेगा अगर हमारी मानो तो सप्लीमेंट्स को अभी से लेना शुरू कर दो ।
आज हमारे शरीर को इसकी बहुत सख्त जरूरत है।
इसकी आदत डालनी बहुत जरूरी है जैसे पानी, खाना, सोना, मनोरंजन इत्यादि की हमारे शरीर को जरूरत है ठीक वैसे ही आज के युग में हमें इन सब चीजों की (सप्लीमेंट्स) की भी बहुत सख्त जरूरत है...
� Renatus Nova �
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07/01/2026

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इसे सेव कर सुरक्षित कर लें 🧵वात-पित्त-कफ के दोष तीनों को संतुलित करें।इस आयुर्वेदिक उपाय से...अंत तक जरुर पढ़ें।वात, पित...
03/01/2026

इसे सेव कर सुरक्षित कर लें 🧵

वात-पित्त-कफ के दोष तीनों को संतुलित करें।
इस आयुर्वेदिक उपाय से...अंत तक जरुर पढ़ें।

वात, पित्त और कफ के दोष:-

पोस्ट को ध्यान से 2 बार पढ़े 👇

शरीर 3 दोषों से भरा है..
वात(GAS) -लगभग 80 रोग
पित्त(ACIDITY)- लगभग 40 रोग
कफ(COUGH) -लगभग 28 रोग

यहां सिर्फ त्रिदोषों के मुख्य लक्षण बतायें जजायेंगे और वह रोग घरेलू चिकित्सा से आसानी से ठीक होते हैं।

सभी परहेज विधिवत रहेंगे जैसे बताता हूं..

जिस इंसान की बड़ी आंत में कचड़ा होता है बीमार भी केवल वही होता है।

एनीमा एक ऐसी पद्धति है जो बड़ी आंत को साफ करती है और किसी भी रोग को ठीक करती है।

संसार के सभी रोगों का कारण इन तीन दोष के बिगड़ने से होता है

🔸वात (GAS) अर्थात वायु:-

- शरीर में वायु जहां भी रुककर टकराती है, दर्द पैदा करती है, दर्द हो तो समझ लो वायु रुकी है।
- पेट दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, घुटनो का दर्द ,सीने का दर्द आदि।
- डकार आना भी वायु दोष है।
- चक्कर आना, घबराहट और हिचकी आना भी इसका लक्षण है।

कारण:-

- गैस उत्पन्न करने वाला भोजन जैसे कोई भी दाल आदि गैस और यूरिक एसिड बनाती ही है।
- यूरिक एसिड जहां भी रुकता है उन हड्डियों का तरल कम होता जाता है हड्डियां घिसना शुरू हो जाती है, उनमें आवाज आने लगती है, उसे डॉक्टर कहते है कि ग्रीस ख़त्म हो गई, या फिर स्लिप डिस्क या फिर स्पोंडलाइटिस, या फिर सर्वाइकल आदि।
- प्रोटीन की आवश्यकता सिर्फ सेल्स की मरम्मत के लिए है जो अंकुरित अनाज और सूखे मेवे कर देते हैं।
- मैदा औऱ बिना चोकर का आटा खाना।
- बेसन की वस्तुओं का सेवन करना।
- दूध और इससे बनी वस्तुओं का सेवन करना।
- आंतो की कमजोरी इसका कारण व्यायाम न करना।

निवारण:-

- अदरक का सेवन करें, यह वायु खत्म करता है, रक्त पतला करता है कफ भी बाहर निकालता है, सोंठ को लेकर रात में गुनगने पानी से आधा चम्मच खाएं।
- लहसुन किसी भी गैस को बाहर निकालता है,
यदि सीने में दर्द होने लगे तो तुरन्त 8-10 कली लहसुन खा लें, ब्लॉकेज में तुरंत आराम मिलता है।
- लहसुन कफ के रोग और टीबी के रोग भी मारता है।
- सर्दी में 2-2 कली सुबह शाम, और गर्मी में 1-1 कली सुबह शाम लें, और अकेला न खाएं।
- सब्जी या फिर जूस , चटनी आदि में कच्चा काटकर डालकर ही खाएं।
- मेथीदाना भी अदरक लहसुन की तरह ही कार्य करता है।

प्राकृतिक उपचार:-

गर्म ठंडे कपड़े से सिकाई करें, अब उस अंग को पहले छुएं यदि वो गर्म है तो ठंडे सिकाई करें और वह अंग अगर ठंडा है तो गर्म सिकाई करें औऱ अगर न गर्म है और न ठंडा तो गर्म ठंडी सिकाई करें एक मिनट गर्म एक मिनट ठंडा।

🔸कफ (COUGH):-

- मुंह नाक से आने वाला बलगम इसका मुख्य लक्षण है।
- सर्दी जुखाम खाँसी टीबी प्लूरिसी निमोनिया आदि इसके मुख्य लक्षण है।
- सांस लेने में तकलीफ अस्थमा आदि या सीढ़ी चढ़ने में हांफना।

कारण:-

- तेल एवं चिकनाई वाली वस्तुओं का अधिक सेवन।
- दूध और इससे बना कोई भी पदार्थ।
- ठंडा पानी औऱ फ्रिज की वस्तुये खाना।
- धूल ,धुंए आदि में अधिक समय रहना।
- धूप का सेवन न करना।

निवारण:-

- विटामिन C का सेवन करें यह कफ का दुश्मन है यह संडास के रास्ते कफ निकालता है, जैसे आवंला।
- लहसुन, यह पसीने के रूप में कफ को गलाकर निकालता है।
- Bp सामान्य होगा।
- ब्लड सर्कुलेशन ठीक होगा।
- नींद अच्छी आएगी।
- अदरक भी सर्वश्रेष्ठ कफ नाशक है।

प्राकृतिक उपचार:-

- एक गिलास गुनगने पानी में एक चम्मच नमक डालकर उससे गरारे करें।
- गुनगने पानी में पैर डालकर बैठे, 2 गिलास सादा पानी पीयें और सिर पर ठंडा कपड़ा रखें, रोज 10 मिनट करें।
- रोज 30-60 मिनट धूप लें।

🔸पित्त (ACIDITY):-पेट के रोग

- वात दोष और कफ दोष में जितने भी रोग है उनको हटाकर शेष सभी रोग पित्त के रोग है, BP, शुगर, मोटापा, अर्थराइटिस, आदि।
- शरीर में कही भी जलन हो जैसे पेट मे जलन, मूत्र त्याग करने के बाद जलन ,मल त्याग करने में जलन, शरीर की त्वचा में कही भी जलन,
- खट्टी डकारें आना।
- शरीर में भारीपन रहना।

कारण:-

- गर्म मसाले, लाल मिर्च, नमक, चीनी, अचार।
- चाय ,काफी,सिगरेट, तम्बाकू, शराब,
- मांस ,मछली ,अंडा
- दिनभर में सदैव पका भोजन करना
- क्रोध, चिंता, गुस्सा, तनाव
- दवाइयों का सेवन
- मल त्याग रोकना
- सभी 13 वेग को रोकना जैसे छींक, पाद, आदि।

निवारण:-

- फटे हुए दूध का पानी पिये, गर्म दूध में नीम्बू डालकर दूध को फाड़े, वह पानी छानकर पिए, पेट का सभी रोग में रामबाण है, सभी प्रकार का बुखार भी दूर करता है।
- फलो व सब्जियों का रस, जैसे अनार का रस, लौकी का रस, पत्ता गोभी का रस आदि।
- निम्बू पानी का सेवन।

प्राकृतिक उपचार:-

- पेट को गीले कपड़े से ठंडक दें।
- रीढ़ की हड्डी को ठंडक देना, लकवा इसी रीढ़ की हड्डी की गर्मी से होता है, गीले कपड़े से रीढ़ की हड्डी पर पट्टी रखें।
- व्यायाम ,योग करें।
- गहरी नींद लें।

आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें मस्त रहें 🙌




















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