Dr. Sweety Srivastava -Clinical psychologist

Dr. Sweety Srivastava -Clinical psychologist Dr. Sweety Srivastava, RCI LC. Clinical Psychologist
SAKSHAM:The Coping Center
Psyche Solution
Psychological Services
(HEAL WITHOUT MEDICINE)
Lucknow

“My first breakthrough case (2014) – Psychogenic Blindness (F44 Conversion Disorder), successfully treated through psych...
29/03/2026

“My first breakthrough case (2014) – Psychogenic Blindness (F44 Conversion Disorder), successfully treated through psychotherapy.
That’s when I truly understood the real meaning of healing.
Moments like these remind me why I chose this path. Truly blessed to witness healing.”

मेरा पहला महत्वपूर्ण केस (2014) – साइकोजेनिक ब्लाइंडनेस (F44 कन्वर्ज़न डिसऑर्डर), जिसे सफलतापूर्वक मनोचिकित्सा के माध्यम से ठीक किया गया।
उसी समय मैंने ‘हीलिंग’ का वास्तविक अर्थ समझा।
ऐसे पल मुझे याद दिलाते हैं कि मैंने यह मार्ग क्यों चुना। दूसरों को ठीक होते देखना सच में एक आशीर्वाद है।”

Mental health bhi physical health jitni hi important hai.Agar stress, anxiety, overthinking ya parenting concerns ho, to...
11/03/2026

Mental health bhi physical health jitni hi important hai.
Agar stress, anxiety, overthinking ya parenting concerns ho, to professional guidance lena helpful ho sakta hai.

Counselling Support Available
Dr. Sweety Srivastava
Clinical Psychologist
Saksham – The Coping Center
Lucknow
Appointment by prior booking.

एक माँ के तौर पर मैं यह वादा करती हूँ —मैं अपने बेटे को कभी इस बात पर मजबूर नहीं करूँगीकि वह मुझे और अपनी अर्द्धांगिनी क...
24/01/2026

एक माँ के तौर पर मैं यह वादा करती हूँ —
मैं अपने बेटे को कभी इस बात पर मजबूर नहीं करूँगी
कि वह मुझे और अपनी अर्द्धांगिनी के बीच किसी एक को चुने।
मैं उसे कभी emotional blackmail नहीं करूँगी यह कहकर कि—
“देखो मैंने तुम्हारे लिए क्या-क्या किया…
तुम्हें जन्म दिया, 9 महीने पेट में रखा, रात-रात भर जागी,
अब तुम मेरे कर्ज़दार हो।”
मैंने उसे जन्म दिया —
यह मेरा decision था।
इसमें कोई investment return scheme नहीं चल रही।
मैं उसकी पढ़ाई, परवरिश और उस पर होने वाला खर्च
इसलिए नहीं कर रही कि कल को वह
मेरी पूरी ज़िंदगी का financial बोझ उठाए।
मैं माँ हूँ, burden नहीं।
शादी के बाद मैं चाहूँगी कि वह
अपनी अर्द्धांगिनी के साथ
अपना घर, अपनी दुनिया खुद बनाए।
जैसे बेटियाँ शादी के बाद नया घर बसाती हैं,
वैसे ही बेटे भी अपनी नई family को
बिना guilt के priority दें।
क्यों सिर्फ बेटियों की विदाई हो?
और फिर मेरी बहु के parents
उसके घर आने में हिचकिचाएँ?
वो घर तो बेटा और बहु — दोनों का है।
जैसे मैं खुशी से वहाँ जाऊँगी,
वैसे ही बहु के parents भी
पूरे सम्मान और अपनापन के साथ आएँ।
मैं अपने घर की queen रहूँगी —
उस empire की, जिसे मैंने शादी से बाद बनाना शुरू किया
और अपने पति के साथ मिलकर बढ़ाया।
और मेरी बहू अपने घर की queen होगी —
जो वह मेरे बेटे के साथ मिलकर बनाएगी।
दो अलग empires।
दो अलग queens।
Respect, boundaries और प्यार के साथ।
माँ के पैरों में जन्नत होती है — बिल्कुल।
तो बहु की जन्नत भी
उसकी माँ के कदमों में ही है।
वह अपना मायका सिर्फ मेरी ख़िदमत के नाम पर क्यों छोड़े?
यह fair नहीं है।
यह balanced नहीं है।
मेरे पास आना
मेरे बेटे-बहु का फ़र्ज़ नहीं होगा।
वे आएँगे —
प्यार, सुकून और अपनापन महसूस करने के लिए।
और हाँ…
अगर कभी मेरा बेटा
खुद को अकेला महसूस करे,
हार जाए, job या relationship में फँस जाए,
या कोई गलती कर बैठे —
तो उसकी माँ की गोद
हमेशा उसकी safest place रहेगी। 🤍
बिना ताने।
बिना शर्त।
सिर्फ प्यार और support।
अगर हम माँ-बाप
अपने बच्चों को investment समझना बंद कर दें
और इंसान समझना शुरू कर दें,
तो आधी family toxicity
अपने-आप खत्म हो जाए।

ये एक psychological secure parenting हैं।

Dr. Sweety Srivastava
Clinical Psychologist

हर healing journey की शुरुआत विश्वास और सहारा लेने के साहस से होती है।Healing एक प्रक्रिया है — और हर छोटा कदम मायने रखत...
07/01/2026

हर healing journey की शुरुआत विश्वास और सहारा लेने के साहस से होती है।
Healing एक प्रक्रिया है — और हर छोटा कदम मायने रखता है।

एक Clinical Psychologist के रूप में मेरा उद्देश्य एक सुरक्षित, सम्मानजनक और बिना किसी जजमेंट का वातावरण देना है, जहाँ व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और आंतरिक शक्तियों को समझ सकें।
थेरेपी किसी को “ठीक करने” के लिए नहीं होती, बल्कि self-understanding, भावनात्मक संतुलन, आत्मबल और resilience को विकसित करने की प्रक्रिया होती है।
इस यात्रा में दिखाई गई हिम्मत, निरंतरता और विश्वास के लिए मैं हृदय से आभारी हूँ।

हर सत्र यह याद दिलाता है कि छोटे-छोटे कदम भी गहरा और स्थायी बदलाव ला सकते हैं।
यह पोस्ट उन सभी के लिए है जो अभी भी सोच रहे हैं —
मदद लेना कमजोरी नहीं, समझदारी है।

— Saksham: The Coping Centre
🔒 Client ki poori sahmati ke saath share kiya gaya. Confidentiality fully maintained.

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌿एक मनोवैज्ञानिक के रूप में मैंने यह सीखा है किविकास (growth) शोर में नहीं,बल्कि छोटे–छोटे ...
01/01/2026

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌿
एक मनोवैज्ञानिक के रूप में मैंने यह सीखा है कि
विकास (growth) शोर में नहीं,
बल्कि छोटे–छोटे सचेत प्रयासों में होता है।
आपका जुड़ाव, आपका भरोसा
और अपनी भावनाओं को समझने की आपकी इच्छा
इस मंच को अर्थ देती है।
नया साल आप सभी के जीवन में
आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन,
मानसिक सुकून और करुणा लेकर आए।
इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए धन्यवाद 🙏✨

01/11/2025
इस दीपावली पर अपने भीतर की रोशनी को पहचानिए।डर से ज़्यादा उजाला, और चिंता से ज़्यादा सुकून आपके जीवन में हो।आपका मन प्रस...
20/10/2025

इस दीपावली पर अपने भीतर की रोशनी को पहचानिए।
डर से ज़्यादा उजाला, और चिंता से ज़्यादा सुकून आपके जीवन में हो।
आपका मन प्रसन्न और हृदय शांत रहे।
शुभ दीपावली!

16/10/2025

> “अपनी कमाई का 10% शौक पूरे करने में लगाओ…
सात पीढ़ियों का बंदोबस्त करने नहीं आए…
थोड़े दिन बाद दाँत और आँत जवाब दे देंगे…”

ये विचार भावनात्मक रूप से बहुत सच्चा और संतुलन सिखाने वाला है।
आइए इसे दो दृष्टिकोणों से समझते हैं — (१) व्यावहारिक और (२) दार्शनिक/आध्यात्मिक।

🌱 (१) व्यावहारिक दृष्टिकोण से:

✔️ सही बात:

जीवन सिर्फ “कमाने और बचाने” के लिए नहीं है।

अपने शौक, रुचियाँ, यात्राएँ, और छोटी खुशियाँ ज़रूरी हैं — ये मानसिक स्वास्थ्य और संतोष का हिस्सा हैं।

10% खर्च सीमा बुद्धिमान है — न ज़्यादा, न कम। यह “balance between enjoyment and responsibility” सिखाती है।

⚖️ ध्यान रखने योग्य:

अगर कोई व्यक्ति परिश्रम से कमाता है और ज़रूरतों, भविष्य और बुजुर्गावस्था की योजना पहले से बनाता है, तो ही “शौक पर खर्च” का महत्व रहता है।

आर्थिक अनुशासन (बचत, बीमा, निवेश) के बिना सिर्फ “मस्ती” करने से भविष्य में तनाव बढ़ सकता है।

🧩 इसलिए यह विचार कहता है — “Enjoy wisely, not recklessly.”

🕉️ (२) दार्शनिक / आध्यात्मिक दृष्टिकोण से:

यह विचार गीता के उस भाव से मिलता-जुलता है —
“कर्म करते रहो, फल की चिंता मत करो।”
यानी, जीना वर्तमान में सीखो।

जीवन का उद्देश्य सिर्फ संचित करना नहीं, बल्कि अनुभव करना भी है।

“पूत सपूत तो काहे धन संचय, पूत कपूत तो काहे धन संचय” — यह संत कबीर की सूक्ति है, जो सिखाती है कि धन संचित करने का अंतहीन चक्र व्यर्थ है अगर बुद्धि नहीं है।

💡 निष्कर्ष:

👉 100% सही है — अगर इसे “संयमित आनंद” के रूप में अपनाया जाए।

अपने और परिवार के भविष्य की ज़रूरतें पहले पूरा करें,

फिर अपनी कमाई का एक हिस्सा खुशी और अनुभवों पर खर्च करें।

क्योंकि जीवन का अर्थ सिर्फ जीविका नहीं — जीवन-रस है।

Dr. Sweety Srivastava

मंजिल तक पहुंचना आसान नहीं होता। रास्ते में बाधाएं, रुकावटें आती हैं। समस्याएं आपकी परीक्षा लेती हैं। उनसे डरना नहीं है।...
11/09/2025

मंजिल तक पहुंचना आसान नहीं होता। रास्ते में बाधाएं, रुकावटें आती हैं। समस्याएं आपकी परीक्षा लेती हैं। उनसे डरना नहीं है। समाधान निकालना है। तभी मंजिल तक पहुँच पाएंगे।

10/09/2025

जैसे उबलते पानी में कभी परछाई नहीं दिखती.. ठीक उसी प्रकार परेशान मन से समाधान भी नहीं दिखते.. शांत होकर देखिए सभी समस्याओं का हल मिल जायेगा..

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