24/01/2026
एक माँ के तौर पर मैं यह वादा करती हूँ —
मैं अपने बेटे को कभी इस बात पर मजबूर नहीं करूँगी
कि वह मुझे और अपनी अर्द्धांगिनी के बीच किसी एक को चुने।
मैं उसे कभी emotional blackmail नहीं करूँगी यह कहकर कि—
“देखो मैंने तुम्हारे लिए क्या-क्या किया…
तुम्हें जन्म दिया, 9 महीने पेट में रखा, रात-रात भर जागी,
अब तुम मेरे कर्ज़दार हो।”
मैंने उसे जन्म दिया —
यह मेरा decision था।
इसमें कोई investment return scheme नहीं चल रही।
मैं उसकी पढ़ाई, परवरिश और उस पर होने वाला खर्च
इसलिए नहीं कर रही कि कल को वह
मेरी पूरी ज़िंदगी का financial बोझ उठाए।
मैं माँ हूँ, burden नहीं।
शादी के बाद मैं चाहूँगी कि वह
अपनी अर्द्धांगिनी के साथ
अपना घर, अपनी दुनिया खुद बनाए।
जैसे बेटियाँ शादी के बाद नया घर बसाती हैं,
वैसे ही बेटे भी अपनी नई family को
बिना guilt के priority दें।
क्यों सिर्फ बेटियों की विदाई हो?
और फिर मेरी बहु के parents
उसके घर आने में हिचकिचाएँ?
वो घर तो बेटा और बहु — दोनों का है।
जैसे मैं खुशी से वहाँ जाऊँगी,
वैसे ही बहु के parents भी
पूरे सम्मान और अपनापन के साथ आएँ।
मैं अपने घर की queen रहूँगी —
उस empire की, जिसे मैंने शादी से बाद बनाना शुरू किया
और अपने पति के साथ मिलकर बढ़ाया।
और मेरी बहू अपने घर की queen होगी —
जो वह मेरे बेटे के साथ मिलकर बनाएगी।
दो अलग empires।
दो अलग queens।
Respect, boundaries और प्यार के साथ।
माँ के पैरों में जन्नत होती है — बिल्कुल।
तो बहु की जन्नत भी
उसकी माँ के कदमों में ही है।
वह अपना मायका सिर्फ मेरी ख़िदमत के नाम पर क्यों छोड़े?
यह fair नहीं है।
यह balanced नहीं है।
मेरे पास आना
मेरे बेटे-बहु का फ़र्ज़ नहीं होगा।
वे आएँगे —
प्यार, सुकून और अपनापन महसूस करने के लिए।
और हाँ…
अगर कभी मेरा बेटा
खुद को अकेला महसूस करे,
हार जाए, job या relationship में फँस जाए,
या कोई गलती कर बैठे —
तो उसकी माँ की गोद
हमेशा उसकी safest place रहेगी। 🤍
बिना ताने।
बिना शर्त।
सिर्फ प्यार और support।
अगर हम माँ-बाप
अपने बच्चों को investment समझना बंद कर दें
और इंसान समझना शुरू कर दें,
तो आधी family toxicity
अपने-आप खत्म हो जाए।
ये एक psychological secure parenting हैं।
Dr. Sweety Srivastava
Clinical Psychologist