07/08/2026
आपके विचार का आध्यात्मिक रूप:
हम इस धरती पर क्यों आए हैं?
क्या केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए?
क्या दूसरों को छोटा सिद्ध कर स्वयं को बड़ा मानने के लिए?
यदि यही जीवन का उद्देश्य होता, तो ईश्वर हमें विवेक, करुणा और आत्मा का प्रकाश क्यों देते?
सत्य यह है कि हम यहाँ अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनाने, अपने अहंकार को त्यागने और प्रेम, सेवा तथा सद्भाव का विस्तार करने आए हैं।
जो व्यक्ति दूसरों को गिराकर आगे बढ़ता है, वह संसार की दृष्टि में भले सफल दिखाई दे, पर आत्मा की अदालत में वह स्वयं हार जाता है।
अंततः न धन साथ जाता है, न पद, न प्रतिष्ठा।
साथ जाते हैं केवल हमारे कर्म और उनसे अर्जित संस्कार।
इसलिए ऐसा जीवन जिएँ कि किसी का सम्मान छिने नहीं, बल्कि हमारे कारण किसी का आत्मसम्मान और विश्वास बढ़े। यही मानव जीवन की सार्थकता है, यही सच्चा धर्म है।
— वीरेंद्र अरोड़ा