Dr Ramesh Kumar

Dr Ramesh Kumar Ayurvedic & naturopathy

ऐसा प्राइड एक डॉक्टर को है मिलता है।मै खुशनसीब हूं की मैं एक डॉक्टर हूँ। लोगो कि जिंदगियां बचाना मेरा पेशा ही नहीं धर्म ...
08/05/2026

ऐसा प्राइड एक डॉक्टर को है मिलता है।
मै खुशनसीब हूं की मैं एक डॉक्टर हूँ। लोगो कि जिंदगियां बचाना मेरा पेशा ही नहीं धर्म है।



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महाराष्ट्र के नालासोपारा से सामने आई इस दर्दनाक घटना में एक 9 साल की बच्ची ने कुत्ते के काटने के बाद इंजेक्शन के डर से इ...
25/03/2026

महाराष्ट्र के नालासोपारा से सामने आई इस दर्दनाक घटना में एक 9 साल की बच्ची ने कुत्ते के काटने के बाद इंजेक्शन के डर से इलाज अधूरा छोड़ दिया, जिसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। शुरुआती घाव ठीक होने के बाद परिवार ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन कुछ महीनों बाद अचानक तबीयत बिगड़ने पर रेबीज संक्रमण सामने आया।

रेबीज एक गंभीर और जानलेवा संक्रमण है, जिसमें समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने या खरोंच लगने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना और पूरा इलाज करवाना बेहद जरूरी है, भले ही घाव छोटा ही क्यों न लगे।

यह घटना हमें यह समझाती है कि डर या लापरवाही के कारण इलाज टालना खतरनाक हो सकता है। जागरूकता, समय पर चिकित्सा और सही जानकारी ही ऐसे जोखिमों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।








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डायबिटीज: “मीठा ज़हर” क्यों कहा जाता है? जानिए पूरी सच्चाईडायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से नुकसान ...
25/03/2026

डायबिटीज: “मीठा ज़हर” क्यों कहा जाता है? जानिए पूरी सच्चाई
डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाती है। इसे “मीठा ज़हर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि खून में शुगर बढ़ने से कई अंग प्रभावित होते हैं।

इंसुलिन क्या करता है?
इंसुलिन एक हार्मोन है जो शरीर में शुगर (ग्लूकोज़) को कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है, ताकि ऊर्जा मिल सके।
अग्न्याशय (Pancreas)
यही अंग इंसुलिन बनाता है। जब यह सही से काम नहीं करता, तो इंसुलिन कम बनने लगता है।
इंसुलिन की कमी
जब इंसुलिन कम हो जाता है, तो खून में शुगर बढ़ने लगती है।
रक्त में बढ़ी शर्करा (High Blood Sugar)
अधिक शुगर खून में जमा होकर नसों को नुकसान पहुंचाती है।
क्षतिग्रस्त नसें (Damaged Blood Vessels)
लंबे समय तक हाई शुगर रहने से नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे दिल, आंख, किडनी पर असर पड़ता है।

डायबिटीज के नुकसान:
दिल की बीमारी
किडनी खराब होने का खतरा
आंखों की रोशनी कम होना
नसों में कमजोरी और सुन्नपन
बचाव और कंट्रोल कैसे करें?
संतुलित आहार लें
मीठा और जंक फूड कम करें
रोज़ाना व्यायाम करें
नियमित शुगर चेक करवाएं
डॉक्टर की सलाह अनुसार दवा लें
**डॉ रमेश कुमार**

Note....
यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। डायबिटीज से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।








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14/02/2026

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04/02/2026

Easy ECG interpretation

20/01/2026

पीसीओडी (PCOD) क्या है? – आयुर्वेद के अनुसार
पीसीओडी (Polycystic Ovarian Disease) महिलाओं में होने वाला एक हार्मोनल विकार है, जिसमें अंडाशय (Ovaries) सामान्य रूप से काम नहीं कर पाते। इस स्थिति में अंडाशयों में छोटे-छोटे सिस्ट (गांठें) बनने लगते हैं, जिससे मासिक धर्म अनियमित हो जाता है और शरीर में हार्मोन असंतुलन उत्पन्न होता है।
आयुर्वेद के अनुसार पीसीओडी कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि यह कफ दोष की वृद्धि, वात दोष की असंतुलन अवस्था और पाचन अग्नि की कमजोरी (अग्निमांद्य) के कारण होने वाला आर्तव विकार है। जब शरीर में कफ अधिक बढ़ जाता है और अग्नि कमजोर हो जाती है, तब आम (विषैले तत्व) बनते हैं, जो स्त्री प्रजनन तंत्र को प्रभावित करते हैं।
📚 आयुर्वेदिक संदर्भ
चरक संहिता – आर्तव दोष, अग्निमांद्य
अष्टांग हृदय – स्त्री रोग एवं योनि व्याधि
🌼 पीसीओडी होने के मुख्य कारण -
आयुर्वेद के अनुसार पीसीओडी होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
अत्यधिक गुरु (भारी), स्निग्ध (चिकना) और तला-भुना भोजन
जंक फूड, मैदा और अधिक मीठे पदार्थों का सेवन
ठंडी चीज़ों का अधिक उपयोग (आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक)
शारीरिक श्रम और व्यायाम की कमी
देर रात तक जागना और अनियमित दिनचर्या
मानसिक तनाव, चिंता और नकारात्मक सोच
पाचन शक्ति का कमजोर होना (अग्नि मंद होना)
📚 संदर्भ
चरक संहिता – कफ दोष वृद्धि एवं अग्निमांद्य
🌸 पीसीओडी के लक्षण (Symptoms)
पीसीओडी के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं, जैसे:
मासिक धर्म का देर से आना या रुक जाना
पीरियड्स में अत्यधिक दर्द या कम/अधिक रक्तस्राव
वजन का तेजी से बढ़ना
चेहरे पर मुंहासे और तैलीय त्वचा
चेहरे, ठोड़ी या शरीर पर अनावश्यक बाल
सिर के बालों का झड़ना
थकान, आलस्य
मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन
⚠️ पीसीओडी के दुष्प्रभाव (नुकसान)
यदि पीसीओडी को समय पर नियंत्रित न किया जाए, तो इसके निम्न दुष्परिणाम हो सकते हैं:
* गर्भधारण में कठिनाई
* बांझपन की संभावना
* मधुमेह (डायबिटीज)
* मोटापा
* हार्मोनल असंतुलन
* मानसिक तनाव और अवसाद
* गर्भाशय संबंधी रोगों का खतरा
🥗 पीसीओडी में क्या खाना चाहिए? (पथ्य आहार)
आयुर्वेद के अनुसार पीसीओडी में हल्का, सुपाच्य और कफनाशक भोजन लेना चाहिए।
✅ लाभकारी आहार
लौकी, तोरी, करेला, तिंडा जैसी सब्ज़ियाँ
मूंग की दाल
मेथी दाना
जीरा, धनिया, हल्दी
जौ, बाजरा, ज्वार
पपीता, सेब जैसे मौसमी फल
गुनगुना पानी
❌ हानिकारक आहार (अपथ्य)
जंक फूड
मैदा और बेकरी उत्पाद
अधिक मीठा
ठंडे पेय
अत्यधिक तेल और मसालेदार भोजन
📚 संदर्भ
चरक संहिता – पथ्य-अपथ्य सिद्धांत
🧘‍♀️ पीसीओडी में दिनचर्या (Daily Routine)
* ब्रह्म मुहूर्त में जागना
* सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना
* नियमित हल्का व्यायाम
* सूर्य नमस्कार का अभ्यास
* अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका प्राणायाम
* समय पर भोजन करना
* रात को जल्दी सोना
* मानसिक तनाव से बचना
🌿 आयुर्वेद का दृष्टिकोण
आयुर्वेद के अनुसार पीसीओडी जीवनशैली से जुड़ा रोग है। केवल औषधि से नहीं, बल्कि आहार, विहार और दिनचर्या के संतुलन से ही इसका उपचार संभव है।
📚 आयुर्वेदिक ग्रंथ जिनमें स्त्री रोग एवं आर्तव विकार का वर्णन मिलता है
चरक संहिता
सुश्रुत संहिता
अष्टांग हृदय
काश्यप संहिता
✨ निष्कर्ष
पीसीओडी कोई लाइलाज रोग नहीं है। सही आहार, नियमित दिनचर्या और सकारात्मक जीवनशैली अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है।


























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