17/12/2021
त्रिदेवों का एकमात्र स्वरूप - दत्तात्रेय
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18 दिसंबर, 2021 (शनिवार)
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मार्गशीष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा की जाती है। जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों के स्वरूप है। इसे दत्त जयंती के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो दत्तात्रेय जयंती पूरे भारत में मनाई जाती है। लेकिन मुख्य रूप से कर्नाटक,महराष्ट्र,आंध्र प्रदेश और गुजरात में मनाई जाती है। इस दिन महाराष्ट्र में भव्य मेला भी लगता है। भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरूओं से शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद ही दत्त स श्री मंदिर के इस पर्व-त्योंहार से संबंधित लेख में हम जानेंगे कि कब है दत्तात्रेय जयंती और शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व के साथ जानेंगे इनकी पौराणिक कहानी।
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शुभ मुहूर्त
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पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – 18 दिसंबर, शनिवार सुबह 07:24 से
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 19 दिसंबर, रविवार सुबह 10:05 तक
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भगवान दत्तात्रेय की पूजा विधि
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♦️दत्तात्रेय जयंती के दिन साधक को सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।
♦️इसके बाद साधक चाहें तो मंदिर में जाकर भगवान दत्तात्रेय की पूजा कर सकता है या फिर अपने घर पर ही भगवान दत्तात्रेय की पूजा कर सकता है।
♦️साधक को दत्तात्रेय की पूजा करने से पहले एक चौकी पर गंगाजल छिड़कर उस पर साफ वस्त्र बिछाना चाहिए और भगवना दत्तात्रेय की तस्वीर स्थापित करनी चाहिए।
♦️इसके बाद भगवान दत्तात्रेय को फूल, माला आदि अर्पित करके उनकी धूप व दीप से विधिवत पूजा करनी चाहिए।
♦️साधक को इस दिन भगवान के प्रवचन वाली अवधूत गीता और जीवनमुक्ता गीता अवश्य पढ़नी चाहिए |
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