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21/01/2024
Jai maa भवानी
06/09/2023

Jai maa भवानी

   Dosh  Dosh  & Work place visit #
21/07/2023

Dosh Dosh & Work place visit #

14/07/2023

विचित्र किन्तु सत्य
आपकी खुशियों पर लगा ग्रहण का
वजह आपका नया मकान भी हो सकता है\

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किसी मकान ,स्थान या दूकान का वास्तु दोष एक अलग मामला है और वहां किसी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव होना बिलकुल अलग |वास्तुदोष को अपेक्षाकृत जल्दी सुधारा जा सकता है किन्तु नकारात्मक शक्ति को हटाना या निष्क्रिय करना बेहद कठिन होता है |यहाँ तक की अच्छे तांत्रिक के लिए भी यह स्थिति कठिन हो जाती है ,चूंकि इनका अपना एक समूह बन जाता है और स्थानीय शक्तियाँ इनकी सहायता करती हैं |बेहद उच्च स्तर की शक्ति से ही इन्हें हटाया जा सकता है |यदि बहुत गहरे कोई बड़ी शक्ति हो तो उसे हटा पाना संभव नहीं होता अपितु फिर उसे मनाना पड़ता है की वह सम्बन्धित को परेशान न करे अथवा उसे फिर कहीं और स्थान देना पड़ता है |यह शक्तियाँ आस पास के क्षेत्र को भी प्रभावित करती हैं और अगल बगल के मकानों ,आवासों तक अपना प्रभाव दिखाती हैं |
वहां जाने पर कभी ऐसी भी परिस्थिति उत्पन्न हो सकती है की धीरे -धीरे आपकी आय कम हो जाए अथवा आय -व्यय में असंतुलन उत्पन्न हो जाए ,आपके घर परिवार में कलह का अनावश्यक वातावरण उत्पन्न हो ,तनाव /दबाव ,घुटन महसूस हो ,बच्चे बिगड़ने लगें और उनमे स्वछंदता /स्वेच्छाचारिता उत्पन्न हो अथवा बढ़ जाए ,रहने वालों अथवा बच्चों में व्यसन ,नशे की आदत उत्पन्न हो ,चारित्रिक दोष उत्पन्न हो ,नौकरी /व्यवसाय में उथल पुथल हो ,सहकर्मियों से अनबन हो अथवा अनावश्यक मित्र -सम्बन्धियों से विरोध उत्पन्न हो ,दूरी बन जाए ,जबकि प्रत्यक्ष कोई कारण न समझ आये और लगे की अपनी तो कोई कमी या गलती ही नहीं थी |
ऐसा इसलिए हैं की यहाँ की जमीनें या तो दूषित हैं या अशुद्ध हैं |हजारों वर्ष किसी नकारात्मक शक्ति की आयु हो सकती है जबकि मकान /घर बनाने वाला नहीं जानता की २० फीट जमीन के नीचे क्या दबा है पुराने कालखंडों के विप्लव के बाद |बिल्डर यह नहीं देखता की जमीन के नीचे क्या है ,उसे जमीन ले बिल्डिंग बना बेचने से मतलब है ,अक्सर मकान के लिए जमीन लेने वाले तक नहीं सोचते कल यहाँ क्या था ,आज मौके की जमीन है ले ली और मकान तैयार करा लिया या फ़्लैट ले लिया |अनुभव तो तब होता है जब वहां जो रहना शुरू करता है |रहने वाले में भी जिसका भाग्य बहुत अच्छा है उसकी गाडी भाग्यवश चलती रहती है और उसके समझ नहीं आता ,दूसरा इस भ्रम में रहता है की अमुक तो इसी मकान या आसपास ही बिलकुल ठीक है फिर यहाँ दोष कैसे हो सकता है |इस भ्रम में वह खुद कष्ट उठाता रहता है पर मानता कुछ नहीं जब तक की बहुत गंभीर समस्या न दिखे |
इनका प्रभाव समझ नहीं आता अधिकतर मामलों में ,कुछ ही मामलों में यह खुद को व्यक्त करते हैं |इनके प्रभाव इनकी प्रकृति के अनुसार भिन्न हो सकते हैं |यदि यहाँ की शक्ति चरित्रहीन हुई तो चरित्रहीनता रहने वालों में बढ़ेगी ,क्रोधी हुई तो झगड़े बढ़ेंगे ,व्यसन -नशा अपने आप बढ़ेगी ,बच्चे -महिलाएं जल्दी प्रभावित होंगे तो इनमे कमिय पहले उत्पन्न होंगी |बेवजह दुर्घटना ,बीमारी ,मानसिक समस्या होगी ,घर अस्त व्यस्त होने से कार्य और दिनचर्या अव्यवस्थित होगी अतः आय -व्यय का संतुलन बिगड़ेगा |सबकुछ धीरे धीरे होगा और ऐसा होगा की जब तक समझ आएगा विकल्प सिमित हो जायेंगे |

ओम शुकला....... हर हर महादेव
संपर्क सूत्र ; 98764 22482

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01/04/2022

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09/03/2022

होलाष्टक आरंभ मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक इस बार 17 या 18 कब होगा होलिका दहन

फाल्गुन माह के शुक्ल अष्टमी से फाल्गुन माह की पूर्णिमा तक होलाष्टक का समय माना जाता है, जिसमें शुभ कार्य वर्जित रहते हैं. होला अष्टक अर्थात होली से पहले के वो आठ दिन जिस समय पर सभी शुभ एवं मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं. होलाष्टक का लगना होली के आने की सूचना है. होलाष्टक में आने वाले आठ दिनों का विशेष महत्व होता है. इन आठ दिनों के दौरान पर सभी विवाह, गृहप्रवेश या नई दुकान खोलना इत्यादि जैसे शुभ कार्यों को नहीं किया जाता है. फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका पर्व मनाया जाता है. इसके साथ ही होलाष्टक की समाप्ति होती है.

होलाष्टक का आरंभ - 10 मार्च 2022 को बृहस्पतिवार के दिन से होगा.
होलष्टक समाप्त होगा - 17/18 मार्च 2022 को बृहस्पतिवार के दिन होगा.

होलिका दहन 17 और 18 को लेकर विभिन्न मत
होलिका दहन बृहस्पतिवार, मार्च 17, 2022 को
होलिका दहन मुहूर्त - 21:06 से 22:16 तक

भद्रा पुच्छ - 21:06 से 22:16
भद्रा मुख - 22:16 से 24:13, (मार्च 18)
प्रदोष के दौरान होलिका दहन भद्रा के साथ
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - मार्च 17, 2022 को 13:29 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - मार्च 18, 2022 को 12:47 तक

होलिका दहन मध्य रात्रि के बाद
वैकल्पिक मुहूर्त के रुप में इस वर्ष 2022 को मध्य रात्रि के बाद - 21:12 से 06:06, मार्च 18 तक का समय भी मान्य रहने वाला है अत: इस वर्ष 17 मार्च और 18 मार्च के समय को होलिका दहन के लिए उपयुक्त बताया गया है.

बनारस या उत्तर भारत में मान्यताओं के अनुसार 18 मार्च के दहन मुहूर्त का अनुसरण भी होगा जिसके अनुसार अगर मध्य रात्रि के बाद भी भद्रा प्रचलित हो तो भद्रा के समाप्त होने की प्रतीक्षा की जाती है और उसके पश्चात होलिका दहन किया जाता है. अत: विभिन्न विचारों के अनुसार होलिका दहन से संबंधित दिन में कुछ अंतर भी व्याप्त हो गया है.

होलाष्टक का समापन होलिका दहन पर होता है. रंग और गुलाल के साथ इस पर्व का समापन हो जाता है. होली के त्यौहार की शुरुआत ही होलाष्टक से प्रारम्भ होकर धुलैण्डी तक रहती है. इस समय पर प्रकृति में खुशी और उत्सव का माहौल रहता है. इस दिन से होली उत्सव के साथ-साथ होलिका दहन की तैयारियां भी शुरु हो जाती है.

होलाष्टक पर नहीं किए जाते हैं ये काम
होलाष्टक मुख्य रुप से पंजाब और उत्तरी भारत के क्षेत्रों में अधिक मनाया जाता है. होलाष्टक के दिन से एक ओर जहां कुछ मुख्य कामों का प्रारम्भ होता है. वहीं कुछ कार्य ऎसे भी काम हैं जो इन आठ दिनों में बिलकुल भी नहीं किए जाते हैं. यह निषेध अवधि होलाष्टक के दिन से लेकर होलिका दहन के दिन तक रहती है.

होलाष्टक के समय पर हिंदुओं में बताए गए शुभ कार्यों एवं सोलह संस्कारों में से किसी भी संस्कार को नहीं किया जाने का विधान रहा है. मान्यता है की इस दिन अगर अंतिम संस्कार भी करना हो तो उसके लिए पहले शान्ति कार्य किया जाता है. उसके उपरांत ही बाकी के काम होते हैं. संस्कारों पर रोक होने का कारण इस अवधि को शुभ नहीं माना गया है.

इस समय पर कुछ शुभ मागंगलिक कार्य जैसे कि विवाह, सगाई, गर्भाधान संस्कार, शिक्षा आरंभ संस्कार, कान छेदना, नामकरण, गृह निर्माण करना या नए अथवा पुराने घर में प्रवेश करने का विचार इस समय पर नहीं करना चाहिए. ज्योतिष अनुसार, इन आठ दिनों में शुभ मुहूर्त का अभाव होता है.

होलाष्टक की अवधि को साधना के कार्य अथवा भक्ति के लिए उपयुक्त माना गया है. इस समय पर केवल तप करना ही अच्छा कहा जाता है. ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए किया गया धर्म कर्म अत्यंत शुभ दायी होता है.

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27/12/2021

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