09/09/2026
❤हरितालिका तीज व्रत 14 सितम्बर। ❤
🌺व्रत का विधान🌺
जिस दिन तृतीया और चतुर्थी दोनों तिथि हो उस दिन व्रत ग्रहण करे।
🌸 भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का व्रत है। इसे विशेष रूप से सौभाग्य, दांपत्य सुख और मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
नोट इस से लाभ
🌸इस से पति की आयु बड़ती है। जिन पति पत्नी की आपस में कम बनती है उनके झगड़े खत्म हो जाते हैं।वेवाहिक जीवन अच्छा हो जाता है। शादी मे दिक्कत हो तो शादी हो जाती है
सामान्य रूप से इसका विधान इस प्रकार है:
🌺 व्रत-विधान
प्रातः स्नान और संकल्प
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा के स्थान को स्वच्छ करके भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प करें।
🌸निर्जला व्रत
परंपरा के अनुसार हरितालिका व्रत निर्जला और निराहार रखा जाता है।
स्वास्थ्य कारणों से ऐसा संभव न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार/जल ग्रहण किया जा सकता है।
🌸शिव-पार्वती की स्थापना।
इसके लिए व्रत से पूर्व एकादशी मे पटड़े की स्थापना होती। Or मिटी सेशिव परिवार बनाया जाता है। Or जिस दिन व्रत हो तब तक
बालू, मिट्टी या उपलब्ध सामग्री से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर स्थापित की जाती है। शिव बारात, पक्षी, चौका, बनाये जाते हैं।
🌸 व्रत बाले दिन
पूजा में कलश स्थापित करना भी शुभ माना जाता है।
षोडशोपचार पूजा भगवान शिव-पार्वती को स्नान, वस्त्र, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें।
विशेष रूप से:
माता पार्वती को 16 श्रृंगार की वस्तुएँ अर्पित करें।
भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक-पुष्प आदि अर्पित करें।
गणेश जी की भी पूजा करें।
हरितालिका व्रत कथा पूजा के बाद हरितालिका तीज की कथा सुनें या पढ़ें। कथा में माता पार्वती के कठोर तप और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने का प्रसंग आता है।
रात्रि जागरण परंपरा में रात को जागरण, शिव-पार्वती का भजन-कीर्तन और पूजा का विधान बताया जाता है।
🌸अगले दिन पारण 🌺अगले दिन स्नान करके शिव-पार्वती की पुनः पूजा करें और व्रत का पारण करें। प्रतिमा का विसर्जन भी परंपरा के अनुसार किया जाता है।
🙏 मुख्य मंत्र
पूजा के समय “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ पार्वत्यै नमः” का जाप किया जा सकता है
अधिक जानकारी के लिए आप आचार्य जी से पूछ सकते हैं।
आचार्य कोमल वत्स जी🚩
8351095547