08/11/2021
बुखार है ? खांसी है ? तो मरण की टेंशन है ?
एक पर्सनल रिक्वेस्ट : 🙏
अभी जैसे जैसे कोरोना से मौतें गांव गलियों में हो रही हैं, लोग पैनिक में आ रहे हैं, अस्पताल और लैब में दौड़ रहे हैं, वैक्सीन वैक्सीन चिल्ला रहे हैं । बेड, ऑक्सीजन और बिना रजिस्ट्रेशन के ही वैक्सीनेशन के लिए जैक जुगाड़ कर रहे हैं । मामूली बीमारी में ही अस्पताल में जा रहे हैं, लैबों में जांच करवा रहे हैं । उनको ध्यान रहे की वैक्सीनेशन जरूरी है लेकिन उसका एक पहलू यह है कि इसका असर 15 दिन बाद मामूली सा होगा और डेढ़ महीने बाद दूसरी डोज लगने के बाद थोड़ा अधिक होगा । यानी डेढ़ दो महीने बाद कुछ इम्युनिटी मिलने की संभावना है वो भी 70% लोगों में ही मिलती है । यह कोई संजीवनी नहीं है । आप रजिस्ट्रेशन करावें, जब नम्बर आये तब सावधानी से टीकाकरण केंद्र जाकर वैक्सीन लगवा लें ।
अस्पताल के हालात : आज के दिन काफी लोग पॉजिटिव हैं एवं वे अस्पतालों में घूम रहे हैं, वे खांसी और सांस से वायरस वातावरण में छोड़ रहे हैं, चूंकि यह वायरस एयरबोर्न है, जो हवा में कई घण्टे रहता है । सो छोटी या अन्य बीमारियों के लिए अस्पताल जाना, फालतू में लेबोरेटरी जाना नुकसानदेह है, यानी अगर इंसान के अंदर वायरस नहीं है तो यहां से चांस हैं कि 80% लोगों में तो घुस ही जाएगा, चूंकि कोई भी व्यक्ति अस्पताल में दिखाने या लैबों में जांच करवाने पीपीई किट पहनकर तो जाने से रहा, N95 मास्क भी नहीं होता ।
ऐसे में मामूली बीमार होते ही या टीकाकरण के लिए अस्पतालों या लैब्स की तरफ भागना असल में कुएं में पड़ना है ।
कह रहे हैं जांच तो करवा ही लेते हैं, पता लग जाए, तो ? जांच करवाने से क्या हो जाएगा ? पॉजिटिव आ गए तो क्या हो जाएगा ? रहना तो घर में ही है । सीटी स्कोर पता लग गया तो क्या हो जाएगा ? रहना तो घर में ही है । 90 से ऊपर वालों को अस्पताल वैसे ही नहीं ले रहे, वैसे ही घर रहना है । भगदड़ ना मचाएं, थोड़ी दिक्कत होती है, सांस में तकलीफ होती है, ऐसा लगता है जैसे छाती पर बीस तीस किलो वजन रख दिया हो, यह कोरोना में सामान्य बात है, डर भी लगता है की ठीक नहीं हुए तो ? लेकिन ध्यान रहे लगभग सभी ठीक होते ही हैं । उल्टा लेटकर रहें, हर पांच मिनट में इधर उधर बदल बदलकर वापस से उल्टे लेटे रहें ।
आज के दिन हर बुखार खांसी को कोरोना मानते हुए बुखार की और खांसी की एंटीबायोटिक लेनी है ताकि न्यूमोनिया ना हो, मल्टीविटामिन लेनी हैं । इन दवाइयों की किट घर घर चिकित्सा विभाग द्वारा भिजवाई जा रही है । यही दवा दिल्ली में मिलेगी और यही आपके घर आ रही है । कुछ कह रहे हैं कि ऐसे ही दवा खा ली तो कोई नुकसान तो नहीं हो जाएगा ? सिगरेट बीड़ी गुटखा से कम ही है ।
इस समय में बहुत ज्यादा भागमभाग ना मचावें । तकलीफ ज्यादा लगे तो किसी नजदीकी चिकित्सक को ही दिखा लें, बड़े शहर की तरफ सीधे ना दौड़ें । डॉक्टरों को अत्यधिक फोन ना करें, वे पहले ही उलझे पड़े हैं कहीं, बेड ऑक्सीजन रेमडेसिविर सब प्रशासन के पास है, वे भी क्या करें दिक्कत तो है, बिना जरूरत वाले ही भाग रहे हैं, जुगाड़ देख रहे हैं, सैंकड़ों में किसी एक को वेंटिलेटर की जरूरत पडती है लेकिन सब प्लान कर रहे हैं की एक वेंटिलेटर उनके लिए खाली पड़ा रहे । भई आप और आप जैसे 99% को जरूरत है केवल बुखार खासी विटामिन की, वो खाओ और मस्त रहो ।
गरम पानी पीना है, ठंडा-ऑइल नहीं खाना है, बीमार को अलग रखना है । 🙏
बाहर ज्यादा खतरा है, ज्यादा चांस हैं दिक्कत होने के ।
टीकाकरण जब हो, आवेदन कर दें, नम्बर जिया दिन हो सुरक्षा से जाकर लगवा लें, अभी 15-20 दिन बीमारी का पीक है, यह फिर कम हो जाएगा, और अगर आज आपने वैक्सीन लगवाई कैसे भी करके तो भी सेकंड डोज तो पीक के बाद ही लगनी है, असली इम्युनिटी तो तभी आनी है, ऐसे में इस चक्कर में फालतू में अस्पताल जाकर कोरोना ना ले लें, पीक में ही ना शिकार हो जाएँ ।
मई माह में घरों में ताले लगा लें, या सुरक्षित रहें कैसे भी ।
बस यही उपाय है 🙏🏽
मास्क और दो गज वाला आपको पता ही है 🙏🏽
स्वाश, दमा, एलर्जी, हृदय रोग, क्षय रोग, स�